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  • वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए बिछाता था जाल, महिलाओं का भरोसा जीतकर करोड़ों ऐंठने वाला आरोपी नोएडा से गिरफ्तार

    वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए बिछाता था जाल, महिलाओं का भरोसा जीतकर करोड़ों ऐंठने वाला आरोपी नोएडा से गिरफ्तार

    नई दिल्ली । वैवाहिक वेबसाइटों और अखबारों में प्रकाशित विवाह संबंधी विज्ञापनों का दुरुपयोग कर महिलाओं को ठगी का शिकार बनाने वाले एक कथित महाठग को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने वर्षों तक अलग-अलग फर्जी पहचान अपनाकर 25 से अधिक महिलाओं को अपने जाल में फंसाया और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी की। पुलिस के अनुसार आरोपी विशेष रूप से ऐसी महिलाओं को निशाना बनाता था जो भावनात्मक, सामाजिक या पारिवारिक रूप से संवेदनशील परिस्थितियों में थीं।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। महाराष्ट्र की अपराध शाखा ने लंबे समय तक तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच करने के बाद उसे गिरफ्तार किया। पुलिस का मानना है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से अपनी पहचान छिपाकर कई राज्यों में महिलाओं से संपर्क स्थापित किया और विवाह का भरोसा देकर आर्थिक लाभ उठाया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न नामों और पहचान पत्रों का इस्तेमाल करता था। वह खुद को कभी व्यवसायी, कभी सरकारी कर्मचारी तो कभी संपन्न परिवार का सदस्य बताकर महिलाओं और उनके परिजनों का विश्वास जीतता था। इसके बाद विवाह या विवाह की तैयारी के नाम पर बड़ी रकम, आभूषण और अन्य कीमती सामान हासिल कर लेता था।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी की कार्यप्रणाली बेहद योजनाबद्ध थी। वह पहले वैवाहिक विज्ञापनों और अन्य माध्यमों से महिलाओं से संपर्क करता, फिर विश्वास का रिश्ता बनाता और कुछ मामलों में विवाह तक कर लेता था। इसके बाद वह संपत्ति, नकदी या निवेश के नाम पर धन प्राप्त करता और अवसर मिलते ही फरार हो जाता था।

    मामले की जांच के दौरान एक महिला परिवार की शिकायत विशेष रूप से सामने आई, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी ने विवाह के बाद परिवार को संपत्ति बेचने के लिए प्रेरित किया और नया घर बनवाने का आश्वासन देकर बड़ी धनराशि हासिल कर ली। इसके अलावा कीमती सोने के आभूषण लेकर भी वह गायब हो गया। इस घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और विस्तृत जांच शुरू हुई।

    अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने जिन महिलाओं को निशाना बनाया उनमें तलाकशुदा, दिव्यांग, अकेली रहने वाली और अन्य सामाजिक रूप से कमजोर परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाएं भी शामिल थीं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी ऐसे लोगों को चुनता था जिनके साथ भावनात्मक विश्वास बनाना अपेक्षाकृत आसान हो।

    पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी से प्राप्त धनराशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे या आरोपी अकेले ही इस गतिविधि को संचालित कर रहा था।

    जांच एजेंसियों को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। इसलिए उन महिलाओं से भी संपर्क करने की कोशिश की जा रही है जो आरोपी के संपर्क में रही हों लेकिन अब तक सामने नहीं आई हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विवाह संबंधी प्रस्तावों को स्वीकार करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान, पारिवारिक पृष्ठभूमि और आर्थिक जानकारी का सावधानीपूर्वक सत्यापन अवश्य करें।

    यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल और पारंपरिक वैवाहिक माध्यमों का दुरुपयोग कर अपराधी किस तरह लोगों की भावनाओं और विश्वास का फायदा उठा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे और खुलासे होने की संभावना है।

  • नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। नोएडा के सेक्टर-22 स्थित चौड़ा गांव में एक पिज्जा शॉप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दुकान पर काम करने वाले शख्स मुजम्मिल पर पिज्जा तैयार करने के दौरान कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में गुस्सा भड़क गया और लोगों ने मौके पर पहुंचकर हंगामा किया।

    जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो में मुजम्मिल नाम का व्यक्ति पिज्जा तैयार करते समय संदिग्ध हरकत करता दिखाई दे रहा है। हालांकि आरोपी का दावा है कि वह आटे से धूल हटाने के लिए फूंक मार रहा था, लेकिन वीडियो के आधार पर स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

    मामला बढ़ने पर पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष है और वे खाद्य सुरक्षा व स्वच्छता नियमों के सख्त पालन की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी।

  • नोएडा: निजी कंपनी में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार..

    नोएडा: निजी कंपनी में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार..


    नोएडा।
    यूपी (UP) के नोएडा (Noida) में प्राइवेट कंपनियों (Private Companies) के कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में पुलिस का एक्शन जारी है. नोएडा पुलिस (Noida Police) ने हिंसा में शामिल दो और आरोपियों (Two more accused) को गिरफ्तार किया है।

    दोनों आरोपी हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा बिगुल मजदूर दस्ता के एक्टिव सदस्य हैं. हिमांशु लगातार हिंसा के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद के संपर्क में था. हिंसा के दिन वह नोएडा में ही मौजूद था. हिमांशु और सत्यम के खिलाफ पुलिस को भड़काऊ गतिविधियों को अंजाम देने के सबूत मिले हैं।

    इससे पहले पुलिस ने नोएडा हिंसा के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी आदित्य आनंद उर्फ रस्ती को तमिलनाडु के तिरुचापल्ली रेलवे स्टेशन से अरेस्ट किया था. पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसे रिमांड पर लेकर पूरे नेटवर्क और साजिश के अन्य पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।


    पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है आदित्य आनंद

    पुलिस जांच में सामने आया है कि पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद ने श्रमिक प्रदर्शन को हिंसा में बदलने की साजिश रची. उसने पूरे घटनाक्रम को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया. थाना फेज-2 में उसके खिलाफ पहले ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

    जांच में सामने आया कि बिहार के हाजीपुर का रहने वाला 28 वर्षीय आदित्य आनंद पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है. वह इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड है. आरोपी के खिलाफ 16 अप्रैल को कोर्ट से वारंट जारी हुआ था, जिसके बाद वह फरार होकर चेन्नई और फिर तिरुचिरापल्ली भाग गया था।

    पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय हिंसा तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है. एसटीएफ अब इस बात की जांच कर रही है कि इस साजिश के लिए फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट कहां से मिल रहा था. आने वाले दिनों में इस केस में कई और बड़े संगठनों के नाम सामने आ सकते हैं।

  • नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा

    नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा


    नोएडा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida and Greater Noida) में हाल के श्रमिक प्रदर्शनों, श्रम कानूनों के उल्लंघन और कंपनियों में बढ़ते असंतोष के बीच प्रशासन ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ श्रम विभाग (Labor Department) ने 24 कंपनियों को मैनपावर सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों को राहत देते हुए 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि का ऐलान किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जांच में प्रदर्शन के पीछे साजिश और बाहरी कनेक्शन के संकेत भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।


    203 मैनपावर एजेंसियों पर गाज

    श्रम विभाग ने गौतमबुद्ध नगर में श्रम कानूनों का पालन न करने वाली 203 मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ये एजेंसियां 24 कंपनियों में श्रमिक उपलब्ध कराती थीं, लेकिन जांच में सामने आया कि इन्होंने कर्मचारियों को मिलने वाले कई वैधानिक लाभ नहीं दिए।

    इन एजेंसियों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और इनके लाइसेंस निरस्त करने के साथ-साथ ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। श्रमिकों के बकाया भुगतान के लिए 1,16,05,067 रुपये का नोटिस भी जारी किया गया है, जबकि अन्य एजेंसियों की पहचान का काम जारी है।
    राकेश द्विवेदी, अपर श्रमायुक्त


    1 मई से लागू होगी 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि

    श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की है। इसके तहत गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी और मई में 7 से 10 तारीख के बीच भुगतान किया जाएगा। यह बढ़ोतरी संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की कटौती ही मान्य होगी, इसके अलावा किसी भी अन्य कटौती पर सख्त कार्रवाई होगी।


    सड़कों पर उतरे कर्मचारी

    नोएडा के सेक्टर-8 स्थित एक कंपनी के बाहर शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महिला और पुरुष कर्मचारी कंपनी गेट पर इकट्ठा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया।

    इसी तरह यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित एक बड़ी मोबाइल निर्माण कंपनी में भी कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज उठाई। शिफ्ट बदलने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र हुए और नारेबाजी की, जिसके बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।


    उच्चस्तरीय समिति का दौरा और निरीक्षण

    श्रमिकों के आंदोलन को देखते हुए शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की। समिति के सदस्य डॉ. एमकेएस सुन्दरम ने इकोटेक-3 स्थित एक फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां कर्मचारियों को दी जा रही सुविधाओं और स्किल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का जायजा लिया गया। इस दौरान यह भी देखा गया कि किस प्रकार कर्मचारी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।


    प्रदर्शन के पीछे साजिश के संकेत, जांच तेज

    श्रमिक प्रदर्शनों को लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ा गया था, जिन्हें तमिलनाडु और कर्नाटक से संचालित किया जा रहा था।

    इन ग्रुपों के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर श्रमिकों को उकसाया गया। सीसीटीवी फुटेज में 8 से 9 संदिग्ध लोगों को हुलिया बदलकर भीड़ में घुसते हुए देखा गया है। जांच में कुछ मोबाइल नंबर नेपाल से जुड़े पाए गए हैं, जबकि अन्य संदिग्ध कनेक्शनों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि कई आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।

  • दिल्ली का सबसे महंगा रिटेल बाजार: खान मार्केट ने कायम रखा शीर्ष स्थान

    दिल्ली का सबसे महंगा रिटेल बाजार: खान मार्केट ने कायम रखा शीर्ष स्थान


    नई दिल्‍ली । दिल्ली में रिटेल मार्केट के मामले में खान मार्केट की रौनक बरकरार है। यदि आप सोच रहे हैं कि कनॉट प्लेस में दुकान खोलना सबसे महंगा है, तो आप गलत हैं। राजधानी के लुटियंस जोन में स्थित खान मार्केट आज भी देश का सबसे महंगा शॉपिंग हब बना हुआ है। सीमित जगह और बड़े बड़े ब्रांड्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने यहां किराए को लगातार ऊंचाई पर बनाए रखा है। अंतरराष्ट्रीय और प्रीमियम ब्रांड्स की मौजूदगी इसे हाई-एंड ग्राहकों के लिए खास बनाती है।

    कुशमैन एंड वेकफील्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, खान मार्केट में अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में दुकानों का मासिक किराया 1,700 से 1,800 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां की मांग अब स्टेटस सिंबल बन चुकी है। सीमित रिटेल स्पेस और बड़े ब्रांड्स की भारी भीड़ के कारण नई जगह पाना लगभग असंभव हो गया है। यही वजह है कि खान मार्केट लगातार देश के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित शॉपिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

    कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में भी किराए में करीब 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब दुकानदारों को 1,150 से 1,250 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह किराया देना पड़ रहा है। वहीं, गुरुग्राम का गैलेरिया मार्केट सबसे अधिक 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब कनॉट प्लेस के बराबर किराया दर्ज कर रहा है।

    उत्तर दिल्ली के छात्र और युवा केंद्रित बाजार कमला नगर में किराए में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब यहां किराया 480 से 510 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया है। नोएडा के सेक्टर-18 में भी किराया 8 प्रतिशत बढ़कर 200 से 220 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गया है। दक्षिणी दिल्ली के प्रमुख बाजार साउथ एक्सटेंशन और लाजपत नगर  में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करोल बाग  में दुकानों का मासिक किराया बढ़कर 395 से 415 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच पहुंच गया है।

    कुशमैन एंड वेकफील्ड के कार्यकारी प्रबंध निदेशक गौतम सराफ का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर के रिटेल बाजारों में यह उछाल प्राइम लोकेशंस पर जगह की कमी और लगातार बढ़ती मांग का संकेत है। 2025 में दिल्ली-एनसीआर में करीब 22.5 लाख वर्ग फुट रिटेल स्पेस किराए पर लिया गया, जो 2019 के बाद का सबसे उच्च स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम लोकेशंस पर बढ़ती मांग के कारण आने वाले समय में भी किराए में बढ़ोतरी का रुझान जारी रह सकता है।

  • मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…

    मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…


    नोएडा।
    यूपी सरकार (UP Government) के बजट में कहा कि देश के 65 प्रतिशत मोबाइल का उत्पादन (Mobile Production) उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में हो रहा है। मोबाइल उत्पादन (Mobile Production) में गौतमबुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) पूरे देश में पहले नंबर पर है। देश के 55 फीसदी से अधिक मोबाइल फोन यहीं बनते हैं।


    इन कंपनियों के फोन नोएडा में बन रहे

    सैमसंग का यहां सबसे बड़ा मोबाइल प्लांट है, जो सालाना 12 करोड़ यूनिट तक उत्पादन क्षमता रखता है। ओप्पो, वीवो, और डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसी अन्य कंपनियां भी यहां पर बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने को जीएसटी से भरने में गौतमबुद्ध नगर जिले का योगदान सबसे अधिक है।


    मेक इन इंडिया का सपना हो रहा साकार

    जानकारी के मुताबिक, सैमसंग के गौतमबुद्ध नगर स्थित संयंत्र में दुनिया के लगभग 25 फीसदी फोन का निर्माण होता है। मोबाइल फोन के निर्माण के साथ ही यहां पर बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। उत्तर प्रदेश में मोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र होने के कारण यह क्षेत्र मेक इन इंडिया पहल का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।


    रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    यमुना सिटी के सेक्टर-24ए में वीवो कंपनी मोबाइल बना रही है। कंपनी को 169 एकड़ भूमि का आंवटन वर्ष 2018 में हुआ था। इसमें 156.32 एकड़ भूमि के लिए चेकलिस्ट जारी की गई थी। प्रथम चरण में कंपनी प्रति वर्ष छह करोड़ स्मार्ट मोबाइल तैयार कर रही है। दो चरणों में कंपनी का निर्माण पूरा होगा। दूसरा चरण पूरा होने के बाद शहर में हर साल करीब 14.40 करोड़ मोबाइल का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में यहां पर 800 लोग काम कर रहे हैं।

    दूसरा चरण पूरा होने के बाद एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यहां की मोबाइल कंपनियों ने निर्यात का ग्राफ बढ़ाने के साथ जीएसटी चुकाने में भी टॉप रैंक हासिल की है। जीएसटी महकमे ने राज्य जीएसटी देने वाली जिन टॉप 100 कंपनियों की सूची जारी की थी, उसमें सबसे ऊपर ग्रेटर नोएडा की ओप्पो मोबाइल कंपनी का नाम है। वर्ष 2023-24 में ओप्पो मोबाइल इंडिया ने 1945. 87करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था। वर्ष 2024-25 में 1141.47 करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था।