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  • बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री, भाजपा के मजबूत गढ़ में मुकाबले ने बढ़ाया बिहार की राजनीति का तापमान

    बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री, भाजपा के मजबूत गढ़ में मुकाबले ने बढ़ाया बिहार की राजनीति का तापमान

    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से होने वाले उपचुनाव में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में उपचुनाव को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है और सभी प्रमुख दलों की रणनीतियों पर नजरें टिक गई हैं।

    बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। यह सीट पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। राजधानी पटना के प्रमुख शहरी क्षेत्र में स्थित इस सीट पर वर्षों से भाजपा का मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प माना जा रहा है।

    जन सुराज की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों की राय और संगठन की सहमति के आधार पर प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि वह इस चुनाव को केवल एक सीट का मुकाबला नहीं बल्कि बेहतर राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने के अवसर के रूप में देख रही है।

    उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनती है तो वह विधानसभा में लोगों की आवाज को मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन अब यह पहला अवसर है जब उन्होंने स्वयं चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। इससे पहले भी उनके चुनाव लड़ने को लेकर कई बार चर्चाएं हुई थीं, लेकिन उन्होंने प्रत्यक्ष राजनीति में कदम नहीं रखा था। इस बार उन्होंने औपचारिक रूप से चुनावी मुकाबले में उतरकर अपनी राजनीतिक भूमिका को नया आयाम दिया है।

    राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि उपचुनाव में विपक्षी दल किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे। कुछ राजनीतिक संकेत ऐसे भी मिल रहे हैं कि कुछ विपक्षी दल अपने उम्मीदवार उतारने के बजाय साझा रणनीति पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतदान 30 जुलाई को प्रस्तावित है। भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, जिसके कारण राजनीतिक उत्सुकता और बढ़ गई है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, चुनाव प्रचार और स्थानीय मुद्दों के साथ यह उपचुनाव बिहार की राजनीति का प्रमुख केंद्र बनने की संभावना रखता है। सभी दलों की नजरें अब इस प्रतिष्ठित सीट पर होने वाले मुकाबले और उसके संभावित राजनीतिक संदेश पर टिकी हुई हैं।

  • बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई के बाद भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार हारे थे सलमान खान, साल 1995 के 40वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में नाना पाटेकर और माधुरी दीक्षित ने मारी थी बाजी

    बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई के बाद भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार हारे थे सलमान खान, साल 1995 के 40वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में नाना पाटेकर और माधुरी दीक्षित ने मारी थी बाजी


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1994 एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया था। इसी वर्ष रिलीज हुई पारिवारिक ड्रामा फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के तमाम पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए थे। सूरज बडजात्या के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने उस दौर में लगभग 128 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व कलेक्शन कर भारतीय फिल्म उद्योग को एक नई दिशा दिखाई थी। व्यावसायिक रूप से इस दशक की सबसे सफल फिल्म होने के बावजूद, जब सम्मान और पुरस्कारों की बात आई, तो साल 1995 में आयोजित 40वें फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह में इस फिल्म को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था। कुल 14 श्रेणियों में नामांकित होने के बाद भी यह फिल्म केवल 5 श्रेणियों में ही जीत दर्ज करने में सफल हो सकी थी।

    इस पुरस्कार समारोह का सबसे बड़ा उलटफेर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में देखने को मिला था। फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में प्रेम के किरदार से दर्शकों का दिल जीतने वाले सलमान खान को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाने वाला नामांकन मिला था। सलमान खान के साथ इस श्रेणी में ‘अंदाज अपना अपना’ के लिए आमिर खान, ‘ये दिल्लगी’ के लिए अक्षय कुमार और ‘1942: ए लव स्टोरी’ के लिए अनिल कपूर जैसे दिग्गज कलाकार भी शामिल थे। इन सभी स्थापित सितारों और मुख्यधारा के चहेते अभिनेताओं को पछाड़ते हुए नाना पाटेकर ने फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में अपने दमदार और संजीदा अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ब्लैक लेडी पुरस्कार अपने नाम किया था। नाना पाटेकर के संवादों और अभिनय की तीव्रता उस वर्ष अन्य सभी रोमांटिक और कल्ट किरदारों पर भारी पड़ी थी।

    सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में भी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा था। इस श्रेणी में उस दौर की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों के बीच सीधी टक्कर थी। नामांकन सूची में ‘लाडला’ फिल्म के लिए श्रीदेवी, ‘ये दिल्लगी’ के लिए काजोल, ‘अंजाम’ के लिए माधुरी दीक्षित और ‘1942: ए लव स्टोरी’ के लिए मनीषा कोइराला जैसी शीर्ष अभिनेत्रियां शामिल थीं। उस समय की सबसे बड़ी स्टार श्रीदेवी को कड़ी टक्कर देते हुए माधुरी दीक्षित ने बाजी मारी थी। फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में निशा के चुलबुले और भावुक किरदार को जीवंत करने वाली माधुरी दीक्षित को इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया था, जिसने उनके स्टारडम को एक पायदान और ऊपर पहुंचा दिया था।

    भले ही सलमान खान इस समारोह में व्यक्तिगत पुरस्कार से चूक गए हों, लेकिन फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के लिए सूरज बडजात्या ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किया था। इसके साथ ही इस फिल्म को साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी दिया गया था। दूसरी ओर, इस पुरस्कार समारोह में सबसे अधिक श्रेणियों में परचम लहराने वाली फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ रही थी। इस फिल्म ने अलग-अलग तकनीकी और मुख्य श्रेणियों में रिकॉर्ड 13 नामांकनों में से 9 पुरस्कारों पर अपना कब्जा जमाया था। अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इसी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार जीता था, जबकि महान संगीतकार आर. डी. बर्मन को उनके निधन के बाद इस फिल्म के मधुर संगीत के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

    इसके अतिरिक्त, फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के लिए डिंपल कपाड़िया को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हास्य भूमिकाओं की श्रेणी में फिल्म ‘राजा बाबू’ के लिए शक्ति कपूर को सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का पुरस्कार मिला, जबकि शाहरुख़ खान को फिल्म ‘अंजाम’ में उनके नकारात्मक किरदार के लिए सर्वश्रेष्ठ विलेन का पुरस्कार दिया गया था। मशहूर गीतकार जावेद अख्तर को सर्वश्रेष्ठ गीतकार के सम्मान से नवाजा गया था। कुल मिलाकर, साल 1995 का यह फिल्मफेयर समारोह स्टारडम और विशुद्ध अभिनय प्रतिभा के बीच संतुलन का एक ऐसा गवाह बना, जिसकी चर्चा आज तीन दशकों के बाद भी सिनेमाई गलियारों में बेहद दिलचस्पी के साथ की जाती है।

  • नौकरी बदलने से पहले पीएफ ट्रांसफर को लेकर रखें विशेष सावधानी, EPFO 3.0 के बावजूद रिकॉर्ड त्रुटि बनी रहेगी बड़ी चुनौती

    नौकरी बदलने से पहले पीएफ ट्रांसफर को लेकर रखें विशेष सावधानी, EPFO 3.0 के बावजूद रिकॉर्ड त्रुटि बनी रहेगी बड़ी चुनौती

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ द्वारा प्रस्तावित EPFO 3.0 सिस्टम के तहत प्रोविडेंट फंड ट्रांसफर प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नई तकनीक के माध्यम से कर्मचारियों को नौकरी बदलने के बाद पीएफ ट्रांसफर में कम कागजी कार्रवाई और तेज प्रोसेसिंग का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिस्टम कितना भी आधुनिक क्यों न हो, यदि कर्मचारी अपने रिकॉर्ड को समय पर अपडेट नहीं करते हैं तो ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी की संभावना बनी रहेगी।

    नौकरी बदलने के दौरान पीएफ ट्रांसफर को लेकर सबसे बड़ी चुनौती डेटा में असमानता की होती है। नाम, जन्मतिथि, आधार, पैन और बैंक डिटेल्स में छोटे-छोटे अंतर भी सिस्टम को ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन से रोक सकते हैं। इसी वजह से कई मामलों में आवेदन लंबे समय तक लंबित रह जाते हैं और कर्मचारियों को अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि EPFO 3.0 में भले ही ऑटोमेशन बढ़ेगा, लेकिन आधारभूत डेटा की शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

    एक अन्य प्रमुख समस्या कई यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन का बन जाना है। अक्सर नई नौकरी के दौरान गलत तरीके से नया UAN जारी हो जाता है, जिससे पुराने और नए खाते को जोड़ने में समय लगता है। यह स्थिति पीएफ ट्रांसफर को जटिल बना देती है और कर्मचारियों को ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि नई नौकरी में हमेशा पुराना UAN ही साझा किया जाए और नया UAN बनाने से बचा जाए।

    पीएफ ट्रांसफर प्रक्रिया में समय पर कार्रवाई न करना भी देरी का कारण बनता है। कई कर्मचारी यह मान लेते हैं कि नई कंपनी द्वारा ट्रांसफर अपने आप पूरा हो जाएगा, जबकि वास्तविकता में आवेदन की प्रक्रिया को सक्रिय रूप से शुरू करना आवश्यक होता है। शुरुआती चरण में आवेदन करने से किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सकता है और प्रक्रिया सुचारू रहती है।

    KYC दस्तावेजों की अद्यतन स्थिति भी ट्रांसफर प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आधार, पैन और बैंक खाते का UAN से लिंक और सत्यापित होना आवश्यक है। यदि इनमें से कोई भी दस्तावेज असत्यापित रहता है तो आवेदन आगे नहीं बढ़ पाता और प्रक्रिया लंबित हो जाती है। इसलिए नौकरी बदलने से पहले सभी दस्तावेजों की स्थिति की जांच करना आवश्यक माना जा रहा है।

    इसके अलावा पुराने नियोक्ता की ओर से रोजगार संबंधी रिकॉर्ड का अपडेट न होना भी एक बड़ी बाधा बन सकता है। नौकरी छोड़ने की तारीख, वेतन विवरण और अन्य सेवा रिकॉर्ड यदि सही तरीके से अपडेट नहीं किए गए हैं तो ट्रांसफर प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में नियोक्ता और ईपीएफओ के बीच अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि EPFO 3.0 के आने के बाद सिस्टम भले ही तेज और डिजिटल हो जाएगा, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह सही डेटा और समय पर की गई कार्रवाई पर निर्भर करेगी। कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि नौकरी बदलने से पहले सभी विवरणों की जांच कर लें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के फैसले से बदले सियासी समीकरण, 93 वर्षीय एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य पर गहराए सवाल

    राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के फैसले से बदले सियासी समीकरण, 93 वर्षीय एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य पर गहराए सवाल

    नई दिल्ली । कर्नाटक से होने वाले राज्यसभा चुनावों ने देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। 93 वर्षीय देवेगौड़ा वर्तमान में संसद के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और उनका कार्यकाल इसी महीने समाप्त होने जा रहा है।

    भाजपा ने कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रो. डॉ. एम. नागराजा को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस निर्णय के बाद यह लगभग स्पष्ट माना जा रहा है कि जनता दल (सेकुलर) के संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को इस बार पुनः राज्यसभा भेजे जाने की संभावना बेहद सीमित रह गई है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर सहयोगी दल होने के नाते जेडीएस को एक सीट मिल सकती है, लेकिन भाजपा के ताजा कदम ने इन संभावनाओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।

    कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक स्थिति भी इस समीकरण को प्रभावित कर रही है। राज्य विधानसभा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके कारण राज्यसभा की चार सीटों में से तीन सीटों पर उसकी जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। विपक्षी दलों के लिए केवल एक सीट पर सफलता की संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में भाजपा ने अपने संगठनात्मक और राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपना उम्मीदवार मैदान में उतारने का फैसला किया है।

    एचडी देवेगौड़ा भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने कई दशकों तक सक्रिय भूमिका निभाई है। वह देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं और कर्नाटक की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा। संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को लेकर अक्सर राजनीतिक दलों के बीच सम्मानजनक सहमति दिखाई देती रही है। हालांकि बदलते राजनीतिक समीकरण और संख्या बल की वास्तविकताएं इस बार उनके पक्ष में नहीं दिखाई दे रही हैं।

    राज्यसभा चुनावों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में विधान परिषद और अन्य राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी दलों के बीच रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने कर्नाटक से अपने वरिष्ठ नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी राज्यसभा में अपनी ताकत और बढ़ाने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। विधानसभा में मौजूद संख्यात्मक बढ़त उसके लिए सबसे बड़ा राजनीतिक आधार बन रही है।

    उधर मध्य प्रदेश में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुछ सीटों पर क्रॉस वोटिंग और दलगत रणनीतियां चुनावी परिणामों को रोचक बना सकती हैं। हालांकि कुल संख्या बल को देखते हुए प्रमुख दलों की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट मानी जा रही है।

    कर्नाटक के राज्यसभा चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह केवल सीटों की लड़ाई नहीं बल्कि गठबंधन राजनीति और भविष्य की रणनीतियों का भी संकेत माना जा रहा है। एचडी देवेगौड़ा का संसदीय कार्यकाल समाप्त होने की संभावना के साथ भारतीय राजनीति का एक लंबा अध्याय नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अनुभवी नेता राष्ट्रीय राजनीति में किस भूमिका में सक्रिय बने रहते हैं, लेकिन फिलहाल राज्यसभा में उनके अगले कार्यकाल की राह बेहद कठिन नजर आ रही है।

  • मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों ने भरा नामांकन

    मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों ने भरा नामांकन

    भोपाल। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की रिक्त होने वाली तीन सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक निर्वाचन के तहत भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने शनिवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

    भाजपा प्रत्याशी रजनीश अग्रवाल और तरुण चुग ने निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के समक्ष अपने-अपने नामांकन पत्र प्रस्तुत किए।

    नामांकन दाखिल करने के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खांडेलवाल, वरिष्ठ नेता एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह तथा गोविंद सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भाजपा नेताओं ने उम्मीदवारों की जीत का विश्वास भी व्यक्त किया।

  • झारखंड BJP अध्यक्ष का ऐलान 14 जनवरी को, 13 जनवरी को होगा चुनाव और नामांकन प्रक्रिया

    झारखंड BJP अध्यक्ष का ऐलान 14 जनवरी को, 13 जनवरी को होगा चुनाव और नामांकन प्रक्रिया


    झारखंड । झारखंड भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा 14 जनवरी को की जाएगी। 13 जनवरी को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य के लिए नामांकन प्रक्रिया होगी, और उसके बाद दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। फिर दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। अगर कोई चुनाव की आवश्यकता पड़ी तो 14 जनवरी को दोपहर 2 बजे के बाद प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इस दौरान यदि मतदान की प्रक्रिया होती है, तो उसे भी पूरा किया जाएगा। फिलहाल, बाबूलाल मरांडी झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष हैं, और वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। हालांकि, पार्टी में कई बदलावों की संभावनाएं हैं, और इस बार आदित्य साहू का नाम सबसे आगे चल रहा है। आदित्य साहू अभी झारखंड बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और राज्यसभा के सांसद भी हैं, जिससे उनकी अध्यक्ष बनने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।

    झारखंड में बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव

    9 जनवरी को झारखंड बीजेपी के 23 सांगठनिक जिलों के निर्वाचित जिलाध्यक्षों के नाम घोषित कर दिए गए हैं। प्रदेश चुनाव अधिकारी, बीजेपी के महामंत्री और सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा के अनुसार, इन चुनावों की प्रक्रिया प्रदेश स्तर से नियुक्त चुनाव अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की निगरानी में संपन्न कराई गई। खास बात यह है कि इन जिलाध्यक्षों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं, और सामाजिक दृष्टि से चार जिलाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति वर्ग से, एक अनुसूचित जाति वर्ग से, और बाकी पिछड़ा और सामान्य वर्ग के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा आठ जिलाध्यक्ष ऐसे भी हैं जिन्हें दोबारा निर्वाचित किया गया है।

    बीजेपी संगठन चुनाव का महत्व

    झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी के संगठन चुनाव लंबे समय से लटके हुए थे। इनमें से यूपी और गुजरात को नए अध्यक्ष मिल चुके हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर भी नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। अब, झारखंड, कर्नाटका, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बनने का इंतजार है, और 13-14 जनवरी को होने वाली चुनाव प्रक्रिया के बाद इन राज्यों में भी संगठनात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

  • UP बीजेपी अध्यक्ष के लिए पंकज चौधरी का नाम तय… आज नामांकन और कल लगगी मुहर

    UP बीजेपी अध्यक्ष के लिए पंकज चौधरी का नाम तय… आज नामांकन और कल लगगी मुहर


    लखनऊ।
    यूपी भाजपा (UP BJP) का 18वां अध्यक्ष चुनने के लिए प्रदेश भाजपा कार्यालय (State BJP office) में शनिवार को नामांकन होगा। रविवार को एक बड़े आयोजन में प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Union Minister Piyush Goyal) करेंगे। इस पद के दावेदार तो कई माने जा रहे हैं, लेकिन केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) के नाम लगभग तय हो गया है। पंकज शनिवार को दिल्ली से लखनऊ आ रहे हैं। वह चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे से प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचेंगे। सूत्रों के मुताबिक नामांकन के पूर्वनियोजित समय भी तब्दीली करके उसे आगे बढ़ाया गया है। पहले दोपहर दो से तीन बजे के बीच नामांकन की प्रक्रिया पूरी होनी थी।

    इससे पहले शुक्रवार दोपहर को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष राजधानी लखनऊ पहुंचे और उन्होंने सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। उसके बाद वह प्रदेश भाजपा कार्यालय में चुनाव संबंधी बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद वह दिल्ली वापस लौट गए हैं। पार्टी के प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय के मुताबिक शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के लिए नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं, रविवार को अगर जरूरी हुआ तो मतदान होगा अन्यथा दोपहर में नए प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों की घोषणा कर दी जाएगी।


    ओबीसी चेहरे पर कयास

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए गुरुवार को कार्यक्रम जारी होने के बाद से ही इस कुर्सी के दावेदारों को लेकर कयासों का दौर जारी है। विपक्ष के पीडीए की काट के लिए ओबीसी चेहरे पर दांव लगाना लगभग तय है। गुरुवार से ही तमाम नाम चर्चा में हैं, जिनमें केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, राज्यसभा सांसद बाबू राम निषाद आदि के नाम हैं। शुक्रवार को भी इन नामों पर पार्टी के भीतर ही लोग अपनी-अपनी राय जाहिर करते सुने गए। हालांकि, शुक्रवार देर रात पंकज चौधरी के नाम की चर्चा बाकियों से कहीं ज्यादा थी।

    बीएल संतोष ने दोनों डिप्टी सीएम संग की बैठक
    शुक्रवार शाम को बीएल संतोष की अगुआई में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक संग बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय संगठन से आए निर्देश और चुनाव की प्रक्रिया को लेकर चर्चा की गई। गुरुवार देर रात चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के बाद शुक्रवार सुबह से ही भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर तेज चहलकदमी देखी जा रही थी। पार्टी के तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की आवाजाही का सिलसिला बना रहा। हर पदाधिकारी के आने-जाने के दरम्यान प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए एक नाम सुर्खियों में तैरता और फिर धीरे-धीरे उसका असर फीका पड़ता और दूसरे नाम पर कयासबाजी शुरू हो जा रही थी। इन्हीं चर्चाओं में रेखा वर्मा और साध्वी निरंजन ज्योति के नाम के भी दावे किए जाते रहे।


    464 मतदाताओं के नाम तय

    प्रदेश भाजपा कार्यालय में दिन भर अलग-अलग बैठकों के बाद 464 मतदाताओं के नाम तय किए गए हैं। तय मतदाताओं में प्रदेश परिषद सदस्यों के अलावा पांच सांसदों और 34 विधायक शामिल हैं। भाजपा की चुनाव प्रक्रिया के मुताबिक, भाजपा विधानमंडल के सदस्यों की कुल संख्या का 10 प्रतिशत और यूपी कोटे के लोकसभा व राज्यसभा सांसदों में से दस को मतदाता सूची में जगह मिलती है। प्रदेश में भाजपा के विधायकों की संख्या 258 और विधान परिषद सदस्यों की संख्या 79 है। पार्टी के 33 लोकसभा और 24 राज्यसभा सांसद हैं। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक केंद्रीय चुनाव अधिकारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा करेंगे।


    दस साल में चार अध्यक्ष, तीन ओबीसी

    मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भाजपा के 17वें प्रदेश अध्यक्ष हैं। हालांकि, व्यक्तियों की संख्या के मुताबिक गिना जाए तो वह पार्टी के प्रदेश मुखिया का 15वां चेहरा हैं। वर्ष 1980 में बनी पार्टी के पहले प्रदेश अध्यक्ष माधो प्रसाद त्रिपाठी थे। इसके बाद 2017 तक कल्याण सिंह और विनय कटियार को छोड़ दिया जाए तो पार्टी के प्रदेश प्रमुख के पद पर ज्यादातर ब्राह्मणों और क्षत्रियों का ही कब्जा रहा। हालांकि, बीते लगभग एक दशक में पार्टी की पॉलिटिक्स ओबीसी केंद्रित हुई है। वर्ष 2016 के बाद से अब तक चार प्रदेश अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जिनमें तीन ओबीसी हैं। इनमें 2016-17 में केशव प्रसाद मौर्य, 2019-22 तक स्वतंत्र देव सिंह और 2022 से अब तक चौधरी भूपेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष बने। इस बीच 2017-19 में डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे।


    आज-कल के कार्यक्रम की जिम्मेदारी तय

    दोनों दिनों के कार्यक्रमों के लिए दिनभर सिलसिलेवार बैठकें हुईं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश महामंत्री संजय राय को शनिवार को होने वाले नामांकन कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, रविवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की घोषणा का कार्यक्रम डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में होगा। इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला को दी गई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कहा कि ‘भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है और हमारे यहां एक चुनाव की पद्धति है और उसके आधार पर चुनाव की प्रक्रिया होती है।

    पार्षद से केंद्रीय मंत्री का सफर
    केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी सात बार के सांसद हैं। वह कुर्मी समाज से आते हैं। वर्ष 1989 में उन्होंने गोरखपुर नगर निगम के लिए पार्षद का चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा था। उसके बाद से उन्होंने पार्टी और संगठन दोनों में कई जिम्मेदारियां निभाईं। वह फिलहाल केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं।