Tag: North Korea

  • किम जोंग-उन पर हमला हुआ तो तुरंत न्यूक्लियर पलटवार की चेतावनी, उत्तर कोरिया का सख्त रुख बढ़ा

    किम जोंग-उन पर हमला हुआ तो तुरंत न्यूक्लियर पलटवार की चेतावनी, उत्तर कोरिया का सख्त रुख बढ़ा



    नई दिल्ली। उत्तर कोरिया को लेकर हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि देश ने अपनी परमाणु नीति में एक बेहद सख्त और नया प्रावधान जोड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की हत्या होती है या किसी बाहरी हमले में देश की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उत्तर कोरिया को तत्काल परमाणु जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार दिया जा सकता है।

    इन दावों के अनुसार यह बदलाव उत्तर कोरिया की उस पुरानी रणनीति को और मजबूत करता है जिसमें नेतृत्व और शासन को सीधे देश की “राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व” से जोड़ा जाता है। कहा जा रहा है कि हाल के वर्षों में दुनिया में कुछ देशों के खिलाफ हुए तेज और लक्षित सैन्य अभियानों ने उत्तर कोरिया की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, खासकर ऐसे हमलों को लेकर जो किसी देश की टॉप लीडरशिप को निशाना बनाते हैं।

    विशेषज्ञों के हवाले से यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया लंबे समय से अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बेहद गुप्त और मजबूत बनाए हुए है, लेकिन आधुनिक निगरानी तकनीक और सैटेलाइट सिस्टम की बढ़ती क्षमता ने उसके रणनीतिक चिंता स्तर को और बढ़ा दिया है। इसी कारण वह अपनी परमाणु नीति को और अधिक आक्रामक और “तुरंत जवाबी कार्रवाई” की दिशा में ढाल रहा है।

    हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ये जानकारी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और विश्लेषणों पर आधारित है और किसी स्वतंत्र आधिकारिक दस्तावेज़ से इसकी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे एक रणनीतिक और राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, न कि पूरी तरह से घोषित और औपचारिक कानून के रूप में।

    कुल मिलाकर यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा और नेतृत्व को लेकर पहले से कहीं ज्यादा संवेदनशील और सख्त रुख अपना रहा है, और वह किसी भी संभावित खतरे को अपने अस्तित्व से जोड़कर देख रहा है।

  • उत्तर कोरिया का बड़ा दावा: किम जोंग उन पर हमला हुआ तो स्वतः परमाणु हमला, संविधान में जोड़ा गया नया प्रावधान

    उत्तर कोरिया का बड़ा दावा: किम जोंग उन पर हमला हुआ तो स्वतः परमाणु हमला, संविधान में जोड़ा गया नया प्रावधान


    नई दिल्ली। उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में एक बड़ा और विवादास्पद बदलाव करते हुए परमाणु नीति को और सख्त कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए प्रावधान में कहा गया है कि अगर देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन या परमाणु कमांड सिस्टम पर हमला होता है, तो उत्तर कोरिया तुरंत और स्वचालित रूप से परमाणु हमला करेगा। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है।

    सरकारी मीडिया के हवाले से सामने आई जानकारी में बताया गया है कि यह संशोधन 22 मार्च को किया गया था, लेकिन इसे हाल ही में सार्वजनिक किया गया है। संविधान के परमाणु नीति वाले आर्टिकल में स्पष्ट किया गया है कि अगर देश की परमाणु कमांड और नियंत्रण व्यवस्था को खतरा पहुंचता है, तो जवाबी कार्रवाई बिना किसी देरी के की जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तर कोरिया की “डिटरेंस स्ट्रैटेजी” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संभावित हमलों को रोकना है। हालांकि, इस बयान ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह परमाणु हमले की स्वचालित प्रतिक्रिया की बात करता है।

    रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि हाल ही में ईरान पर हुए हमलों और वैश्विक घटनाओं को देखते हुए उत्तर कोरिया ने अपनी सुरक्षा नीति को और कठोर बनाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    इसी बीच उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया सीमा के पास नई 155 मिमी स्वचालित तोपों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन हथियारों की रेंज लगभग 60 किलोमीटर तक है, जिससे दक्षिण कोरिया की राजधानी के आसपास का क्षेत्र भी खतरे की जद में आ सकता है। किम जोंग उन ने खुद इन हथियारों के परीक्षण का निरीक्षण किया और इसे सेना की क्षमता में बड़ा बदलाव बताया।

    उत्तर कोरिया लंबे समय से दक्षिण कोरिया और अमेरिका को अपना मुख्य सुरक्षा खतरा मानता रहा है। इसी वजह से वह लगातार अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है।

    आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास वर्तमान में दर्जनों परमाणु हथियार मौजूद हैं, जबकि उसके पास इतना रेडियोधर्मी पदार्थ है जिससे वह भविष्य में और भी हथियार बना सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ हथियार पहले से तैनात स्थिति में हैं।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार उत्तर कोरिया से तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते अपनाने की अपील करता रहा है, लेकिन किम जोंग उन की नीतियां लगातार सैन्य ताकत बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं।

  • परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अमेरिका को कड़ा संदेश, जाने क्‍या बोले किम जोंग उन ?

    परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अमेरिका को कड़ा संदेश, जाने क्‍या बोले किम जोंग उन ?


    प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने संसद सुप्रीम पीपुल्स असेंबली में अपने संबोधन के दौरान देश की सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया अब परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थायी और अपरिवर्तनीय स्थिति में है और इस दिशा में उसकी नीति और सख्त की जाएगी।

    किम ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि उनका देश अपने परमाणु बल को लगातार मजबूत करता रहेगा। उन्होंने दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए रक्षा खर्च को वर्ष 2026 के बजट में बढ़ाकर कुल व्यय का 15.8% कर दिया है। राज्य मीडिया केसीएनए के मुताबिक, सोमवार को संसद को संबोधित करते हुए किम ने कहा कि परमाणु शक्ति बनाए रखते हुए विकास करना ही देश की सबसे सही रणनीति है।

    परमाणु हथियारों पर कोई समझौता नहीं

    किम जोंग उन ने परमाणु निरस्त्रीकरण के बदले आर्थिक सहायता या सुरक्षा गारंटी के प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की मौजूदगी ने युद्ध को रोका है और इससे देश को आर्थिक विकास, निर्माण कार्य और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला है। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास सामरिक परमाणु संसाधन तैनात कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। हालांकि किम ने दावा किया कि अब उत्तर कोरिया खुद को सुरक्षित महसूस करता है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है।

    दक्षिण कोरिया को बताया मुख्य दुश्मन

    किम ने दशकों पुरानी शांतिपूर्ण पुनर्मिलन की नीति से हटते हुए दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा शत्रु घोषित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश की संप्रभुता से छेड़छाड़ की गई तो बिना किसी हिचकिचाहट के कड़ा जवाब दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुख अब उत्तर कोरिया के कानून का हिस्सा बन चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

    आर्थिक विकास के लिए नई योजना

    सुरक्षा के साथ-साथ किम ने नई पंचवर्षीय विकास योजना भी पेश की, जिसमें उद्योगों के आधुनिकीकरण, बिजली और कोयला उत्पादन बढ़ाने तथा देशभर में आवास निर्माण पर जोर दिया गया है। बजट में परमाणु युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसी दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की बात कही गई। केसीएनए के अनुसार, इस सत्र में संविधान संशोधन को मंजूरी दी गई और नई आर्थिक योजना को लागू करने के लिए कानून पारित किया गया।

    आर्थिक चुनौतियां बरकरार

    अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया अभी भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है। भारी प्रतिबंधों और संसाधनों की कमी के कारण वहां की बड़ी आबादी सरकारी राशन और अनौपचारिक बाजारों पर निर्भर है।

  • उत्तर कोरियाः ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ के चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी के सभी सदस्य जीते

    उत्तर कोरियाः ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ के चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी के सभी सदस्य जीते


    नई दिल्ली।
     उत्तर कोरिया के चुनाव में मौजूदा तानाशाह किम जोंग उन की जीत हो गई है। अब आप में से कुछ लोग इस सोच में पड़ गए होंगे कि क्या उत्तर कोरिया में कोई चुनाव भी होता है? और अगर चुनाव होता भी है, तो क्या लोगों के पास किम जोंग को चुनने के अलावा दूसरा विकल्प भी होता है? दूसरा विकल्प हो भी तो क्या किम जोंग के राज में कोई शख्स उनके अलावा किसी और को वोट देने की गुस्ताखी कर सकता है! इंटरनेट पर हाल ही में यह इलेक्शन और इसके नतीजे पर लोग मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    इससे पहले कोरिया की सरकारी मीडिया आउटलेट KCNA ने बताया कि किम जोंग उन ने एक और बड़ी चुनावी जीत हासिल की है। उनकी ‘वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया’ और उसके सहयोगियों ने 2026 के संसदीय चुनावों में 99.97% वोट और सभी सीटें जीत ली हैं। यह चुनाव 15 मार्च को 15वीं ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ (Supreme People’s Assembly) के सदस्यों को चुनने के लिए हुआ था।

  • आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक चुनाव में 99.99% रजिस्टर्ड वोटरों ने चुनाव में हिस्सा लिया। इनमें से सिर्फ 0.0037 फीसदी लोग विदेश में होने या समुद्र में काम करने की वजह से वोट नहीं डाल पाए। वहीं देश में मौजूद महज 0.00003 फीसदी लोग वोट डालने नहीं आए।

    चुनाव में जिन लोगों ने वोट डाला, उनमें से 99.93% ने किम जोंग की पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन किया। हालांकि 0.07 फीसदी ने उनके खिलाफ वोट दिया। चुनावों में इतनी बड़ी जीत के बाद भी यह एक असामान्य आंकड़ा माना जा रहा है। खास बात यह है कि सरकारी मीडिया ने 1957 के बाद पहली बार ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ के चुनाव में विरोध में पड़े वोटों की बात स्वीकार की है।

    सोशल मीडिया पर क्या कह रहे लोग
    सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस पर खूब मजे ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर किम जोंग के होते हुए 0.07 फीसदी लोगों ने उन्हें वोट ना देने की हिम्मत कैसे कर ली। एक यूजर ने इंटरनेट पर लिखा, “एक नई खबर: इस गर्मी में देश की आबादी 0.07% कम होने की उम्मीद है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “उन 0.07% लोगों के लिए थोड़ी देर का मौन।” एक दूसरे यूजर ने लिखा, “वो 0.07 फीसदी लोग अब देश के मोस्ट ‘वॉन्टेड’ लोग बन गए हैं।”

  • किम जोंग उन ने स्वीकारा, यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों ने निभाया सबसे खतरनाक रोल

    किम जोंग उन ने स्वीकारा, यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों ने निभाया सबसे खतरनाक रोल


    नई दिल्‍ली । रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine)के बीच जारी युद्ध में उत्तर कोरियाई (North Korean)सैनिकों की मौजूदगी ने एक वक्त पर जमकर सुर्खियां बटोरीं थीं। अब इन सैनिकों के बारे में उनके तानाशाह ने खुलासा किया है कि इन्होंने कैसे युद्ध क्षेत्र का सबसे मुश्किल काम किया। तानाशाह किम(Dictator Kim) के मुताबिक इस साल की शुरुआत में कुर्स्क क्षेत्र (Kursk region)में भेजे गए उत्तर कोरियाई सैनिकों ने यहां पर बारूदी सुरंगे हटाने का काम किया, जिसकी वजह से हजारों रूसी सैनिकों की जान बची।

    शनिवार को उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया पर प्रसारित एक कार्यक्रम में किम जोंग उन ने रूस से वापस लौटे अपने इन सैनिकों की सराहना की। तानाशाह ने कहा, “अगस्त से शुरू हुई 120 दिनों की तैनाती के दौरान हमारे सैनिकों ने अभूतपूर्व साहस दिखाया। चाहे अधिकारी हों या सैनिक सभी ने लगभग हर दिन अपनी कल्पना से परे मानसिक और शारीरिक दबावों पर काबू पाते हुए सामूहिक वीरता का परिचय दिया। बारूदी सुरंगे हटाने के काम के दौरान यह लोग अपने शहरों और गांवों को पत्र भी भेजते थे।”

    किम ने आगे कहा, “तीन महीने से भी कम समय में हमारे सैनिकों ने एक बड़े खतरनाक क्षेत्र को रूसी सेना के लिए पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया। इसमें हमारे जिन भी सैनिकों की जान गई है। उनकी बहादुरी को हमेशा के लिए अमर बनाने के उद्देश्य से राज्य उनको सम्मान प्रदान करेगा।”

    सरकारी मीडिया की तरफ से जारी की गई फोटोस में किम साफ तौर पर वापस आए सैनिकों को गले लगाते हुए देखे जा सकते हैं। इनमें से कुछ सैनिक घायल और व्हील चेयर पर भी दिखाई दिए।

    इससे पहले, उत्तर कोरिया शुरुआत से ही पुतिन की मदद के लिए कुर्स्क क्षेत्र में सैनिक भेज रहा है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक इस युद्ध में उत्तर कोरिया ने हजारों सैनिक भेजे हैं। इसके बदले में रूस उसकी वित्तीय सहायता, सैन्य तकनीक, खाद्य सामग्री और ऊर्जा आपूर्ति में मदद कर रहा है। इसकी वजह से अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण अलग-थलग पड़े इस देश को अपने अभियान चलाने में मदद मिल रही है।