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  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड का धमाका: नॉर्वे को हराकर सेमीफाइनल में मारी एंट्री, जूड बेलिंगहैम ने दागे दो ऐतिहासिक गोल

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड का धमाका: नॉर्वे को हराकर सेमीफाइनल में मारी एंट्री, जूड बेलिंगहैम ने दागे दो ऐतिहासिक गोल

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में फुटबॉल जगत का एक बड़ा उलटफेर और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला है। स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगहैम के असाधारण और दमदार प्रदर्शन के दम पर इंग्लैंड की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने नॉर्वे को शिकस्त देकर फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में शान से प्रवेश कर लिया है। इस खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े नायक जूड बेलिंगहैम रहे, जिन्होंने मैच के बेहद दबाव वाले क्षणों में दो बेहतरीन गोल दागकर अपनी टीम की जीत सुनिश्चित की। इस हार के साथ ही नॉर्वे का विश्व कप का सफर क्वार्टर फाइनल में ही समाप्त हो गया है।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। नॉर्वे की टीम ने अपने मजबूत डिफेंस और आक्रामक विंगर्स के दम पर शुरुआती हाफ में इंग्लैंड के फॉरवर्ड लाइन को काफी परेशान किया। हालांकि, खेल के आगे बढ़ने के साथ ही इंग्लिश टीम ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर दी। मध्यक्रम में खेलते हुए जूड बेलिंगहैम ने न केवल नॉर्वे के आक्रमण को विफल किया, बल्कि इंग्लैंड के लिए लगातार गोल करने के बेहतरीन मौके भी बनाए। उनके इस आक्रामक खेल का नॉर्वे के पास कोई जवाब नहीं था।

    हाफ टाइम के बाद मैच का रोमांच चरम पर पहुंच गया, जब बेलिंगहैम ने विपक्षी टीम के डिफेंस को छकाते हुए पहला शानदार मैदानी गोल दागा और इंग्लैंड को बढ़त दिला दी। इसके कुछ ही समय बाद नॉर्वे ने भी पलटवार करने की कोशिश की, लेकिन बेलिंगहैम के रणनीतिक खेल और दूसरे निर्णायक गोल ने नॉर्वे की वापसी की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। इस पूरे मुकाबले में बेलिंगहैम का फुटवर्क और मैदान पर उनकी सूझबूझ अद्भुत रही, जिसके लिए उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया।

    इंग्लैंड के फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह एक बेहद ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला क्षण है, क्योंकि टीम लंबे समय बाद विश्व कप के इतने करीब पहुंची है। टीम के मुख्य कोच ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जूड बेलिंगहैम की जमकर तारीफ की और कहा कि बेलिंगहैम ने न केवल अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि एक सच्चे लीडर की तरह पूरी टीम को एकजुट रखकर सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। कतर विश्व कप की कड़वी यादों को पीछे छोड़ते हुए अब इंग्लिश टीम इस बार खिताब अपने नाम करने के लिए प्रबल दावेदार मानी जा रही है।

    दूसरी ओर, इस हार से नॉर्वे के खेमे में मायूसी छा गई है, लेकिन टूर्नामेंट में उनके जुझारू प्रदर्शन की हर तरफ सराहना हो रही है। अब सभी फुटबॉल प्रेमियों की नजरें आगामी सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां इंग्लैंड का सामना दुनिया की अन्य दिग्गज टीमों से होगा। खेल समीक्षकों का मानना है कि यदि जूड बेलिंगहैम का यह शानदार फॉर्म आगे भी जारी रहता है, तो इंग्लैंड को इस साल विश्व चैंपियन बनने से रोकना किसी भी टीम के लिए बेहद मुश्किल चुनौती साबित होने वाला है।

  • नॉर्वे से महामुकाबले से पहले इंग्लैंड मुश्किल में, रीस जेम्स की चोट बनी चिंता, टीम चयन पर बड़ा सवाल

    नॉर्वे से महामुकाबले से पहले इंग्लैंड मुश्किल में, रीस जेम्स की चोट बनी चिंता, टीम चयन पर बड़ा सवाल


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के नॉकआउट चरण में पहुंच चुकी इंग्लैंड फुटबॉल टीम को क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार डिफेंडर रीस जेम्स की फिटनेस अब भी चिंता का विषय बनी हुई है और नॉर्वे के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में उनके खेलने पर संशय बरकरार है। हैमस्ट्रिंग चोट से जूझ रहे जेम्स बुधवार को भी टीम के साथ अभ्यास नहीं कर सके जिससे इंग्लैंड के कोचिंग स्टाफ की चिंता और बढ़ गई है।

    रीस जेम्स को घाना के खिलाफ ग्रुप चरण के दूसरे मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। वह मुकाबला गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ था और उसी के बाद से जेम्स टीम से बाहर चल रहे हैं। चोट के कारण वह मेक्सिको के खिलाफ खेले गए प्री क्वार्टर फाइनल मुकाबले में भी मैदान पर नहीं उतर सके थे। इंग्लैंड ने उस रोमांचक मुकाबले में मेक्सिको को 3-2 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई थी लेकिन अब टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रमुख डिफेंडर की उपलब्धता को लेकर है।

    इंग्लैंड के लिए मुश्किलें केवल रीस जेम्स तक सीमित नहीं हैं। मेक्सिको के खिलाफ मुकाबले में युवा डिफेंडर जेरेल क्वांसाह को रेड कार्ड मिला था जिसके कारण वह नॉर्वे के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में नहीं खेल पाएंगे। ऐसे में राइट बैक और डिफेंस की अन्य पोजीशन पर टीम के विकल्प काफी सीमित हो गए हैं। यही वजह है कि कोच थॉमस ट्यूशेल के लिए अंतिम एकादश का चयन आसान नहीं रहने वाला।

    मेक्सिको पर शानदार जीत के बाद खिलाड़ियों को रिकवरी का समय दिया गया था। इसके बाद अधिकांश खिलाड़ी स्वोप सॉकर विलेज में अभ्यास के लिए लौटे लेकिन रीस जेम्स के अलावा मार्क गुएही और डेक्लान राइस ने भी टीम के साथ नियमित ट्रेनिंग में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि टीम प्रबंधन का कहना है कि इन खिलाड़ियों के लिए अलग फिटनेस कार्यक्रम तैयार किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    मिडफील्डर डेक्लान राइस ने संकेत दिया है कि मामूली परेशानी के बावजूद वह क्वार्टर फाइनल मुकाबले के लिए उपलब्ध रहेंगे। वहीं मार्क गुएही की अनुपस्थिति को केवल मांसपेशियों की थकान से जोड़ा गया है और उनके समय पर फिट होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इसी बीच अनुभवी मिडफील्डर जॉर्डन हेंडरसन को लेकर राहत की खबर सामने आई है। मेक्सिको के खिलाफ जीत का जश्न मनाने के दौरान उनकी कलाई में गंभीर चोट लग गई थी जिसके बाद उनकी सर्जरी करानी पड़ी। सफल ऑपरेशन के बाद वह फिर से टीम के साथ जुड़ गए हैं और फिलहाल होटल में आराम कर रहे हैं। टीम प्रबंधन के अनुसार उनकी हालत स्थिर है और वह खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए कैंप में मौजूद हैं।

    इंग्लैंड के पास क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले केवल दो दिन का अभ्यास समय बचा है। इस दौरान टीम प्रबंधन की सबसे बड़ी कोशिश रीस जेम्स को पूरी तरह फिट करने की होगी। यदि वह उपलब्ध नहीं होते हैं तो इंग्लैंड को अपनी रक्षात्मक रणनीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। नॉर्वे के खिलाफ मुकाबला जीतने वाली टीम सेमीफाइनल में अर्जेंटीना और स्विट्जरलैंड के बीच होने वाले विजेता से भिड़ेगी। ऐसे में इंग्लैंड किसी भी कीमत पर अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता।

  • ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना

    ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना



    नई दिल्ली। ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

    नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे की संयुक्त प्रेस इंटरैक्शन के दौरान पत्रकार हेले लिंग ने पीएम मोदी से सवाल पूछते हुए प्रेस से दूरी बनाने पर तीखी टिप्पणी की। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनका सवाल नहीं लिया और उन्होंने प्रेस स्वतंत्रता के संदर्भ में नॉर्वे और भारत की रैंकिंग का भी जिक्र किया।

    विवाद बढ़ने पर हेले लिंग ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया और कहा कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं। उनका कहना था कि पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना है और पहले से तैयार जवाबों को मान लेना नहीं।

    इसी बीच भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भी इसी मुद्दे पर सवाल उठे। भारतीय राजनयिक सिबी जॉर्ज ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया परिदृश्य का बचाव करते हुए कहा कि भारत दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा है, लेकिन उसके बारे में बाहरी समझ अक्सर सीमित होती है; उन्होंने यह भी कहा कि अकेले दिल्ली में ही करीब 200 टीवी चैनल चल रहे हैं।

    अब इस पूरे मामले में राजनीति भी जुड़ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा और लिखा कि “nothing to hide, nothing to fear” यानी छिपाने को कुछ नहीं हो तो डरने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया एक “compromised PM” को कुछ सवालों से घबराकर पीछे हटते देखती है, तो भारत की छवि पर असर पड़ता है।

    यह पूरा विवाद अब प्रेस स्वतंत्रता, विदेश नीति और भारत की सार्वजनिक छवि को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ नॉर्वेजियन पत्रकार अपने सवाल को पत्रकारिता का हिस्सा बता रही हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय पक्ष इसे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के गलत आकलन से जोड़ रहा है।

  • पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं

    पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं



    नई दिल्ली। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे गए एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग सोशल मीडिया पर आलोचना और आरोपों के घेरे में आ गईं, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सफाई दी है।

    हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं और उनका काम केवल पत्रकारिता करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व सत्ता में बैठे लोगों से सीधे सवाल पूछना होता है, चाहे वह सवाल टकराव पैदा करने वाले ही क्यों न हों। उनके अनुसार, पत्रकारों को पहले से तैयार जवाबों को बिना सवाल किए स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए कठिन सवाल पूछना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ओस्लो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेले लिंग ने पीएम मोदी से कुछ सवाल पूछे। सवालों की प्रकृति और पूछने के तरीके को लेकर वहां मौजूद कुछ लोगों और बाद में सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट की गई और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, मीडिया की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया गया।

    विवाद बढ़ने के बाद हेले लिंग ने एक पोस्ट में लिखा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि वह किसी विदेशी सरकार की एजेंट या जासूस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से नॉर्वे में पत्रकारिता करती हैं और उनका उद्देश्य केवल मानवाधिकार, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना है।

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जुड़े वीडियो पर कुछ समय बाद कमेंट्स बंद कर दिए गए, लेकिन इससे पहले ही उनके सवालों को लेकर ऑनलाइन बहस तेज हो चुकी थी। पत्रकार का कहना है कि अगर सार्वजनिक मंच पर नेताओं से सवाल पूछने का अवसर मिलता है तो पत्रकारों को अपनी भूमिका निभाने से रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस पूरे मामले पर भारतीय पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मजबूत व्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विविध भाषाओं और क्षेत्रों में सैकड़ों मीडिया संस्थान सक्रिय हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाते हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और राजनयिक संवाद की मर्यादाओं पर बहस छेड़ दी है।

  • भारत-नॉर्डिक समिट 2026: ओस्लो में PM मोदी की मौजूदगी से रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 5 देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग

    भारत-नॉर्डिक समिट 2026: ओस्लो में PM मोदी की मौजूदगी से रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 5 देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग


    नई दिल्ली। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का तीसरा संस्करण मंगलवार 19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग ले रहे हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत के साथ पांच नॉर्डिक देश नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा हुआ है। इससे पहले 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नॉर्वे का दौरा किया था। यह समिट पहले 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हो चुकी बैठकों की अगली कड़ी है, जिसमें लगातार भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

    यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार में बदलावों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति पर भी असर डाला है। ऐसे हालात में नॉर्डिक देशों के साथ भारत की साझेदारी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक में मुख्य रूप से ग्रीन एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक्नोलॉजी और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही व्यापार बढ़ाने, निवेश को आसान बनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वर्तमान में लगभग 19 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जो भविष्य में और बढ़ने की संभावना है।

    नॉर्डिक क्षेत्र की कंपनियों की भारत में मजबूत उपस्थिति है, जिनमें नोकिया, वॉल्वो और IKEA जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं। वहीं भारत की ओर से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सेवाएं और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नॉर्डिक देश अपने तकनीकी नवाचार, ग्रीन ट्रांजिशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल के लिए दुनिया में अग्रणी हैं, जो भारत की विकास नीतियों के साथ मेल खाता है।

    कुल मिलाकर यह समिट भारत और नॉर्डिक देशों के बीच न केवल आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के बीच एक स्थिर और टिकाऊ सहयोग मॉडल को भी मजबूत करेगा।

  • ऊर्जा संकट के बीच PM मोदी का बड़ा कूटनीतिक मिशन: 5 देशों का दौरा, UAE से होगी शुरुआत

    ऊर्जा संकट के बीच PM मोदी का बड़ा कूटनीतिक मिशन: 5 देशों का दौरा, UAE से होगी शुरुआत



    नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से 20 मई तक एक महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर जा रहे हैं, जिसमें वे कुल 5 देशों UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर असर डाल रहा है, ऐसे में इस यात्रा को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    दौरे की शुरुआत 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होगी, जहां प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। UAE भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और वहां लगभग 45 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बनाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक हालात में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में स्थिरता उसके लिए रणनीतिक प्राथमिकता है।

    इसके बाद प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री रॉब जेटन, किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

    17 और 18 मई को प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन का दौरा करेंगे, जहां तकनीक, नवाचार और ग्रीन एनर्जी पर बातचीत होने की संभावना है। इसके बाद 18 से 19 मई को वे नॉर्वे जाएंगे। नॉर्वे के ओस्लो में 19 मई को तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें ग्रीन ट्रांजिशन, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, अंतरिक्ष और नई तकनीक जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।

    दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19 से 20 मई तक इटली में रहेंगे। यहां वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से मुलाकात करेंगे। इस दौरान भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, रक्षा सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    कुल मिलाकर यह 5 देशों का दौरा भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है।

  • नॉर्वे का 4 महीने का अंधेरा: इंसानों से ज्यादा भालू और ‘कोसेलिग’ में बसा जीवन

    नॉर्वे का 4 महीने का अंधेरा: इंसानों से ज्यादा भालू और ‘कोसेलिग’ में बसा जीवन


    नई दिल्ली। सोचिए सुबह 8 बजे दफ्तर निकलें और बाहर घना अंधेरा हो। लंच ब्रेक में भी तारे चमक रहे हों और शाम को लौटते समय भी वही सन्नाटा। नॉर्वे के लॉन्गइयरबायेन में करीब 2500 लोग हर साल नवंबर से फरवरी तक लगातार चार महीने इसी घने अंधेरे में बिताते हैं। विज्ञान की भाषा में इसे पोलर नाइट कहते हैं जब सूरज पर्दे के पीछे ही रहता है और दुनिया पूरी तरह कृत्रिम रोशनी पर निर्भर हो जाती है।

    यहां की डेली रूटीन सूरज पर नहीं बल्कि नंबरों और कृत्रिम लाइट पर निर्भर होती है। लोग विटामिन-डी की गोलियां और विशेष लैंप्स का सहारा लेते हैं ताकि शरीर को लगे कि दिन हो गया।अंधेरे में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए लोग कोसेलिग नाम की फिलॉसफी अपनाते हैं। यह उनके लिए सुकून की भावना है। घरों को मोमबत्तियों ऊनी कंबलों और गर्म कॉफी से सजाया जाता है। संगीत बोर्ड गेम्स और कहानियों की महफिल घर-घर में सजती रहती है।

    सामूहिक जीवन और नॉर्दर्न लाइट्स:
    अकेलेपन को दूर करने के लिए सामूहिक भोज यानी कम्युनिटी डिनर आयोजित होते हैं। द्वीप पर करीब 50 देशों के लोग रहते हैं जो मुख्य रूप से रिसर्च और माइनिंग के लिए आए हैं। अंधेरे के महीनों में यहां की सोशल लाइफ बेहद एक्टिव रहती है। लोग स्नोमोबाइल में सवार होकर नीली बर्फ की वादियों में नॉर्दर्न लाइट्स देखने निकलते हैं। पोलर जैज जैसे संगीत फेस्टिवल्स सन्नाटे को संगीत से भर देते हैं।

    अंधेरे में सुरक्षा और भालू का खतरा:
    यहां इंसानों से ज्यादा भालू हैं और अंधेरे में वे और भी खतरनाक हो जाते हैं। लोग हमेशा हेडलाइट्स और रिफ्लेक्टिव जैकेट्स पहनकर चलते हैं। सड़कों पर अजनबियों का हेलो कहना आम है क्योंकि हर इंसान एक-दूसरे का सहारा है।

    सूरज की वापसी का उत्सव:
    फरवरी के अंत में जब पहली बार सूरज की किरण गिरती है तो पूरा शहर सोलफेस्टुका मनाता है। लोग हफ्तों से उस एक किरण का इंतजार करते हैं जो उन्हें याद दिलाती है कि अंधेरा कितना लंबा भी हो उजाला लौटकर जरूर आता है।स्वालबार्ड का यह द्वीप सिखाता है कि खुशियां बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होतीं। चार महीने का अंधेरा भी लोग प्यार उत्सव और समुदाय के साथ जीत सकते हैं।