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  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: आरोपी लवकुश मिश्रा के घर चल सकता है बुलडोजर, पत्नी को अवैध निर्माण पर नोटिस

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: आरोपी लवकुश मिश्रा के घर चल सकता है बुलडोजर, पत्नी को अवैध निर्माण पर नोटिस


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर बन रही एक इमारत को लेकर नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि प्रारंभिक जांच में निर्माण कार्य में नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसलिए एक सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई, जिसमें ध्वस्तीकरण भी शामिल हो सकता है, की जाएगी।

    प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि भवन निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा और अन्य आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। यदि अनुमति से जुड़े दस्तावेज समयसीमा के भीतर प्रस्तुत नहीं किए गए, तो अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि संबंधित जमीन लवकुश मिश्रा के राम मंदिर कार्यालय में कार्यरत रहने के दौरान उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, यह भूमि 16 अक्टूबर 2025 को सोहावल तहसील के मंगसी परगना क्षेत्र में कमल स्वरूप सिंह से खरीदी गई थी।

    रजिस्ट्री के समय इस जमीन का मूल्य 8.8 लाख रुपये दर्ज किया गया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसकी वर्तमान बाजार कीमत इससे कहीं अधिक, करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है। इसी भूमि पर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी वैधता की अब जांच की जा रही है।

    गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच पहले से जारी है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। इसी क्रम में अब आरोपी से जुड़े निर्माण और संपत्ति संबंधी मामलों की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि नोटिस के जवाब में संबंधित पक्ष क्या स्पष्टीकरण देता है। इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

  • सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी

    सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी


    लखनऊ। संदिग्ध आतंकी कनेक्शन की जांच में घिरे आकिब के खिलाफ अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना तेज कर दिया है। एटीएस की पड़ताल में सामने आया है कि वह चार बार सऊदी अरब जा चुका है और अगस्त 2025 में चौथी बार विदेश जाने के बाद से अब तक भारत नहीं लौटा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है, वहीं पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    जांच में सामने आई ट्रैवल हिस्ट्री के मुताबिक, आकिब का पासपोर्ट 9 अप्रैल 2018 को बना था। वह पहली बार 4 अगस्त 2019 को सऊदी अरब गया और 8 फरवरी 2022 को भारत लौटा। इसके बाद 8 अप्रैल 2022 को दोबारा सऊदी गया और 11 अप्रैल 2023 को वापस आया। तीसरी बार वह 20 जून 2023 को गया और 22 जुलाई 2025 को भारत लौटा। हालांकि, महज 10 दिन बाद ही 1 अगस्त 2025 को वह फिर सऊदी चला गया और तब से वहीं पर है।

    एटीएस ने उसकी पूरी यात्रा का ब्योरा खंगाल लिया है और अब उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आकिब के हिरासत में आने के बाद आतंकी मॉड्यूल और संभावित साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

    वीडियो जारी कर दी सफाई, कहा—अगर गलत हूं तो गोली मार देना

    इधर, मामले में तीन दिन पहले मॉड्यूल से जुड़े उवैद और जलाल हैदर की गिरफ्तारी के बाद यह प्रकरण और चर्चा में आया। इसी बीच आकिब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है।

    वीडियो में उसने पुलिस अधिकारियों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा करने वालों की इज्जत करता है। उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने साथी को पुलिस के सामने सरेंडर कर सच्चाई बताने की सलाह दी थी। आकिब ने अपने ऊपर लगे आतंकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की, केवल गुस्से में अपशब्द कहे थे।

    वीडियो के अंत में उसने भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं अपने ऊपर आतंकवादी का ठप्पा नहीं लगने दूंगा। अगर मैं गलत हूं, तो मेरे माथे पर गोली मार देना।”

    फिलहाल, एजेंसियां उसके ठिकाने और नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं।

  • मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    जयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाना उचित निर्णय है। मायावती ने यह भी सुझाव दिया कि अगर नए नियम लागू किए जाते समय सवर्ण समाज को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाता और सभी पक्षों की सहमति ली जाती, तो विवाद से बचा जा सकता था। UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नए नियम लागू किए थे। इन नियमों में विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को लक्षित किया गया, जबकि सामान्य वर्ग के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान नहीं था।

    इस पर कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि आजादी के 75 सालों में भारत ने जातिविहीन समाज की दिशा में प्रगति की है, क्या हम अब पीछे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया और 13 जनवरी को लागू हुए नए UGC रेगुलेशंस पर रोक लगा दी। मायावती ने कहा कि नए नियमों के कारण सामाजिक तनाव पैदा हुआ और अगर सभी पक्षों की राय ली जाती और अपरकास्ट/सवर्णों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिया जाता, तो विवाद से बचा जा सकता था। बीएसपी सुप्रीमो ने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा में समानता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे लागू करते समय सभी वर्गों के अधिकार और न्याय का ध्यान रखना जरूरी है।

    उन्होंने प्रशासन और विश्वविद्यालयों से अपील की कि सभी नियम पारदर्शी और निष्पक्ष हों ताकि समाज में सामाजिक असंतोष न बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिहाज से अहम है। वहीं, राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह मामला ध्यानाकर्षक है क्योंकि इसमें देश के सामाजिक संवेदनशील वर्गों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बहस छिड़ी हुई है। इस फैसले के बाद अब सरकार और UGC को नए नियमों को दोबारा ड्राफ्ट करना होगा, जिसमें सभी वर्गों की भागीदारी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल जाति या धर्म का नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक शांति से जुड़ा है।

  • गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: थाईलैंड भागे लूथरा भाइयों के पासपोर्ट रद्द, कार्रवाई की तैयारी

    गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: थाईलैंड भागे लूथरा भाइयों के पासपोर्ट रद्द, कार्रवाई की तैयारी

    नई दिल्‍ली । गोवा के नाइटक्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत के बाद थाईलैंड भागे लूथरा भाइयों पर सख्त ऐक्शन की तैयारी है। दोनों के पासपोर्ट रद्द करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विदेश मंत्रालय ने उन्हें नोटिस भेजे हैं, जिसमें उन्हें 7 दिनों के अंदर बताना होगा कि उनके पासपोर्ट जब्त क्यों नहीं किए जाने चाहिए। गोवा पुलिस की ओर से मंत्रालय को चिट्ठी लिखी गई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है। गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा उस समय दिल्ली में थे, जब गोवा के अर्पोरा में उनके नाइट क्लब बिर्च बाय रोमियो लेन में आग लगी। इसके कुछ ही घंटे बाद दोंनो इंडिगो फ्लाइट से थाईलैंड के फुकेत भाग गए।

    नाइट क्लब में आग लगने से 5 पर्यटक और 20 स्टाफ मेंबर्स मारे गए थे। गोवा पुलिस ने भाइयों समेत अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की है, जिसमें हत्या नहीं बल्कि दुर्घटना से मौत और साजिश शामिल हैं। इस बीच, दिल्ली स्थित रिजनल पासपोर्ट ऑफिस (RPO) ने दोनों भाइयों को एक पत्र भेजा है, जिसमें लिखा है कि उन्हें पासपोर्ट एक्ट 1967 के तहत 7 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। यह स्पष्ट करना होगा कि उनके पासपोर्ट नंबर Z7678521 (14/03/2024) को जब्त न करने का कारण क्या है।

    दोनों के पासपोर्ट जब्त करने के नोटिस जारी
    मंत्रालय ने गोवा पुलिस के पत्र के जवाब में बताया, ‘मामले की गंभीरता को देखते हुए RPO दिल्ली ने दोनों के पासपोर्ट जब्त करने के नोटिस जारी कर दिए हैं। पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3)(e) के तहत तभी कार्रवाई की जा सकती है जब अपराध संबंधित मामले की सुनवाई भारतीय अदालत में चल रही हो। इसलिए, मामले की जानकारी अदालत से प्राप्त कर RPO दिल्ली को भेजी जाए।’ गोवा पुलिस रविवार को दिल्ली में लूथरा भाइयों के घर भी गई, लेकिन वे पहले ही फरार हो चुके थे। सूत्रों की मानें तो दोनों फुकेत के एक रिसॉर्ट में ठहरे थे, लेकिन वहां से भी निकल गए जब तक अधिकारी पहुंच पाए।