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  • भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

    भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

    इस्‍लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले पर कंटेंट चलाने को लेकर पाकिस्तान में एक चैनल को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में नियामक की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि भारतीय कंटेंट का प्रसारण करना मना है। साथ ही चैनल से इस संबंध में जवाब भी तलब किया गया है। भोसले का रविवार को मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया था। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।

    पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियोन्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने भोसले की मौत की खबर के साथ भारतीय सामग्री क्यों प्रसारित की। पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर प्रतिबंध 2018 से लागू है।
    PEMRA ने कहा कि भोसले की मौत की खबर प्रसारित करते समय जियोन्यूज ने भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना, पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है। जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है।
    जियोन्यूज के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने एक पोस्ट में कहा, ‘प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनकी सराहना करना हमेशा से एक परंपरा रही है। वास्तव में, आशा भोसले जैसी कलाकार के लिए, हमें उनके कालजयी और यादगार गीतों को और भी अधिक साझा करना चाहिए था। फिर भी, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, PEMRA ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।’
    भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ बज रहा था।

    लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए।

    दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे।

  • खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया

    खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया


    खंडवा । जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर धरमपुरी की नंद मोहन समिति गौशाला में एक महीना से लगातार गायों की मौत का सिलसिला चल रहा है। बुधवार को गौशाला के पास लगभग छह गायों के शव और छह के कंकाल मिलने से मामला सार्वजनिक हुआ तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। सरकारी अनुदान से संचालित इस गौशाला में गायों की मौत की खबर फैलते ही कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान गौशाला की स्थिति बेहद खराब मिली। फर्श टूटा हुआ पानी की टंकी लीकेज में और चरनौई भूमि पर चारे की बजाय गेहूं की फसल उगती हुई दिखी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृत गायों के शवों को दफनाने की बजाय वन विभाग की जमीन पर खुले में छोड़ दिया गया था। इससे प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई और कलेक्टर ने संबंधित इंजीनियरों और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि धरमपुरी की गौशाला मुख्य मार्ग से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। वहां पहले भी कुछ गायों के मृत और बचे हुए कंकाल मिलने की शिकायत आई थी। उस समय निरीक्षण के बाद गौशाला के संचालकों और ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव को बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए गए थे। साथ ही हर महीने गौशाला का दौरा करने वाले डॉक्टर को भी नोटिस जारी किया गया है।

    गौशाला के संचालक जब कलेक्टर से पूछे गए तो नंद मोहन गौशाला के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य आशीष बरोले ने कहा कि आसपास के गांवों के लोग मृत गायों को यहां छोड़ जाते हैं हम क्या कर सकते हैं। इस बयान के बाद ग्रामीणों ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि गायों की मौत गौशाला के खराब प्रबंधन और खाने-पीने की कमी से हुई है।

    पशु चिकित्सा विभाग के उप-संचालक हेमंत शाह ने बताया कि गायों की मौत एक दिन में नहीं हुई बल्कि लगभग 15 दिनों के अंतराल में यह घटना सामने आई है। मौके पर सिर्फ एक गाय का शव मिला जबकि अन्य के कंकाल पाए गए जिन्हें सही तरीके से डिस्पोजल कराया गया। उन्होंने कहा कि पूरी जांच की रिपोर्ट कलेक्टर को दे दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।मामले की जांच जिला प्रशासन द्वारा जारी है और अब इस गौशाला के प्रबंधन पानी-चारे की व्यवस्था और विभागीय लापरवाही की जाँच की जा रही है।

  • भोपाल में 1.16 लाख वोटरों की अग्निपरीक्षा आज से मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान जारी

    भोपाल में 1.16 लाख वोटरों की अग्निपरीक्षा आज से मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान जारी


    भोपाल । भोपाल में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के तहत 116925 वोटर्स की पहचान की जा चुकी है जिनका डिजिटल नक्शे में कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसका मतलब है कि ये मतदाता निर्वाचन आयोग के मानचित्र पर लापता हैं। सोमवार से इन वोटरों की नागरिकता और मतदान अधिकारों की सुनवाई शुरू हो रही है जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी योग्य मतदाता वोट देने से वंचित न रहे।

    भोपाल के सभी 85 वार्ड कार्यालयों तहसील और नजूल दफ्तरों में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी सोमवार से इन नो-मैपिंग मतदाताओं की दलीलें सुनेंगे। अब तक जिला निर्वाचन कार्यालय 50000 से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस भेज चुका है और बीएलओ बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर भी नोटिस वितरित कर रहे हैं।

    इस प्रक्रिया के अंतर्गत 4.38 लाख फर्जी या अपात्र मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा चुके हैं और अब ये वोटर अपनी सुनवाई में भाग न लेने पर चुनाव के दिन पोलिंग बूथ पर अपना नाम नहीं पाएंगे। इस बीच दो लाख नए मतदाताओं को जोड़ने का अनुमान है और फार्म-6 का वितरण जारी है।

    सुनवाई में जाने के लिए जरूरी दस्तावेज

    यदि आपको नोटिस मिला है तो अपनी नागरिकता और उम्र प्रमाणित करने के लिए आपको कुछ दस्तावेज साथ लाने होंगे जैसे,आधार कार्ड या पासपोर्ट,निवास प्रमाण पत्र बिजली बिल या राशन कार्ड,आयु प्रमाण पत्र,जारी किया गया नोटिस ।

    नो-मैपिंग की समस्या का कारण

    वोटर आईडी अपडेट न कराने के कारण कई लोग नो-मैपिंग समस्या का सामना कर रहे हैं खासकर वे लोग जिनका घर बदल चुका है। उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने कहा “यह सुनवाई आपके डिजिटल रूप से सुरक्षित होने का एक मौका है और यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। अगर आप नोटिस मिलने के बाद भी सुनवाई में नहीं जाते तो आप मतदान से बाहर हो सकते हैं। मतदान के दिन अपनी पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है।

  • पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी

    पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक राज्य में अब कुल 7.1 करोड़ मतदाता रह गए हैं जबकि 29 अक्टूबर 2025 तक 7.6 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम मृत स्थानांतरित अनुपस्थित या डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए हैं। इसके अलावा 1.9 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा क्योंकि उनकी पंजीकरण जानकारी में तार्किक विसंगतियां पाई गईं हैं जिन्हें चुनाव अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

    इन विसंगतियों में मुख्य रूप से ‘पिता के नाम में गड़बड़ी’ एक ही अभिभावक से छह या उससे अधिक संतान का नामांकन और असामान्य उम्र के अंतर की प्रविष्टियां शामिल हैं। कुछ मामलों में ऐसे व्यक्ति भी पंजीकृत पाए गए हैं जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक थी लेकिन उनका पहले कभी मतदाता सूची में नामांकन नहीं हुआ था। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि SIR के दूसरे चरण में दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य नहीं था जिससे कई अधूरे या गलत विवरण सामने आए। इस दौरान 28 लाख गणना फॉर्म पिछली SIR सूची से मेल नहीं खा पाए जबकि 1.65 करोड़ फॉर्म में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। यदि वे अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाते हैं तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।

    जिला स्तर पर मतदाता सूची में कटौती की दर में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। कोलकाता उत्तर में 25.9 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 23.8 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए जबकि पूर्व मेदिनीपुर में यह दर सबसे कम रही केवल 3.3 प्रतिशत। पश्चिम बर्दवान में भी 13.1 प्रतिशत नाम सूची से हटाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में नाम कटने की दर राज्य औसत से कम रही। हालांकि इन जिलों में ‘पिता के नाम में असंगति’ की दर अधिक पाई गई। मालदा उत्तर दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में इस दर की 12 से 16 प्रतिशत के बीच वृद्धि हुई जो अन्य जिलों से कहीं अधिक है।

    सभी विसंगतियों और गलत नामांकन के बाद चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को मृत स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची सौंपी है। साथ ही ये जानकारी सार्वजनिक वेबसाइटों पर भी उपलब्ध कराई गई है। आयोग के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं जबकि सत्यापन प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों और अन्य चुनावों की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि केवल योग्य और वास्तविक मतदाता ही मतदान में हिस्सा लें।