Tag: NSA

  • एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    नई दिल्ली । करीब 26 दिनों तक चले आमरण अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त कर दिया। देर रात अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अनशन तोड़ा। वांगचुक ने बताया कि यह फैसला लंबी बातचीत, विभिन्न पक्षों से मिले आग्रह और देश में किसी भी प्रकार की संभावित हिंसा से बचने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े आगे के निर्णय और बातचीत की शर्तों की जानकारी जल्द साझा की जाएगी तथा समर्थकों से पूरी तरह शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की।

    सोनम वांगचुक पिछले कई सप्ताह से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से भी उनका अनशन जारी रहा। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, सामाजिक संगठन और कई सार्वजनिक हस्तियां उनके समर्थन में सामने आईं। आंदोलन के बढ़ते प्रभाव ने इसे राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बना दिया और सरकार तथा आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद की संभावनाएं भी तेज हुईं।

    वांगचुक की हालिया भूमिका इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि कुछ महीने पहले तक वे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में थे। लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें एहतियाती कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई महीनों तक जेल में रखा गया। बाद में सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया और मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने फिर से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होकर शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।

    सोनम वांगचुक का नाम देश में शिक्षा सुधार और वैकल्पिक शिक्षण मॉडल के लिए लंबे समय से जाना जाता है। उन्होंने लद्दाख में विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से एसईसीएमओएल संस्थान की स्थापना की। उनके प्रयासों से स्थानीय शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव आए और स्कूलों के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली तथा उन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

    शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए भी वांगचुक लगातार काम करते रहे हैं। पानी की कमी से निपटने के लिए विकसित किए गए उनके ‘आइस स्तूप’ मॉडल को वैश्विक पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने सौर ऊर्जा, टिकाऊ विकास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े कई नवाचारों पर भी काम किया है। यही वजह है कि वे केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि नवाचार और सामुदायिक विकास के प्रतीक के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

    वांगचुक स्वयं को गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित बताते हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए अहिंसक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। लंबे उपवास, शांतिपूर्ण मार्च और संवाद आधारित आंदोलन उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं। हालिया अनशन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों और मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आंदोलन का रास्ता शांतिपूर्ण ही रहेगा। उनके इस कदम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण विरोध आज भी सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • CJP प्रदर्शन के बीच वायरल दावे पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण, NSA डिटेंशन शक्तियों की खबर को बताया भ्रामक

    CJP प्रदर्शन के बीच वायरल दावे पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण, NSA डिटेंशन शक्तियों की खबर को बताया भ्रामक

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में जारी CJP प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत विशेष डिटेंशन की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इस दावे के व्यापक प्रसार के बाद दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए इसे भ्रामक बताया और लोगों से केवल प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

    दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जिस आदेश का हवाला देकर सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं, वह किसी विशेष प्रदर्शन या मौजूदा घटनाक्रम से संबंधित नहीं है। पुलिस के अनुसार यह आदेश नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे निर्धारित अंतराल पर जारी किया जाता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित आदेश 7 जुलाई को जारी किया गया था और इसकी प्रभावी अवधि 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक निर्धारित है।

    पुलिस का कहना है कि यह आदेश CJP के विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही जारी किया जा चुका था। इसलिए इसे वर्तमान प्रदर्शन या किसी विशेष कार्रवाई से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई नया या विशेष आदेश जारी नहीं किया गया है और वायरल दावों का वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं है।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी सूचना को बिना सत्यापन के साझा न करें। अधिकारियों ने कहा कि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए लोगों को केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। पुलिस ने यह भी कहा कि किसी भी संवेदनशील विषय पर गलत जानकारी का प्रसार कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

    इधर राजधानी में CJP का विरोध प्रदर्शन जारी है और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती जारी है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस बीच केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच अब तक कई दौर की चर्चा हो चुकी है, हालांकि अभी किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। सरकार का कहना है कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी, जबकि CJP ने अपने रुख को लेकर अलग बयान दिया है।

    राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और वीडियो के बीच प्रशासन बार-बार लोगों से संयम बरतने और अपुष्ट सूचनाओं से बचने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में केवल आधिकारिक और सत्यापित जानकारी पर भरोसा करना ही अफवाहों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    दिल्ली पुलिस ने दोहराया है कि वायरल दावे और वास्तविक प्रशासनिक आदेश अलग-अलग विषय हैं। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक स्पष्टीकरण को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि गलत सूचना के प्रसार को रोका जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो।

  • भारत–सऊदी सुरक्षा सहयोग को नई धार: NSA डोभाल और सऊदी समकक्ष के बीच हुई अहम चर्चा

    भारत–सऊदी सुरक्षा सहयोग को नई धार: NSA डोभाल और सऊदी समकक्ष के बीच हुई अहम चर्चा


    नई दिल्‍ली । भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बुधवार को रियाद में अपने सऊदी समकक्ष मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबन से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षाआतंकवाद से निपटने और आपसी हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि अजीत डोभाल और सऊदी अरब के विदेश राज्य मंत्री, कैबिनेट सदस्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबन के बीच हुई यह बैठक बेहद सकारात्मक और उपयोगी” रही। पोस्ट के अनुसार, बातचीत में भारत सऊदी संबंधों के विभिन्न आयामों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

    आधिकारिक दौरे पर रियाद पहुंचे डोभाल

    अजीत डोभाल मंगलवार को एक आधिकारिक दौरे पर सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे थे। किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका स्वागत सऊदी अरब में भारत के राजदूत सुहेल एजाज खान और सऊदी विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-साती ने किया। डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा और काउंटर टेररिज्म सहयोग लगातार गहराता जा रहा है।

    रणनीतिक साझेदारी के तहत सुरक्षा सहयोग पर जोर

    गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही भारत और सऊदी अरब ने रियाद में स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल के तहत पॉलिटिकल, काउंसलर और सिक्योरिटी कोऑपरेशन कमेटी के अंतर्गत सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा की गई थी और भविष्य की दिशा तय करने पर सहमति बनी थी।

    आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा रणनीति

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने से जुड़ी मौजूदा और उभरती चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया। इसमें उग्रवाद और कट्टरपंथ से निपटना, आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को नियंत्रित करना और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध व आतंकवाद के बीच बढ़ते संबंधों जैसे मुद्दे शामिल रहे।

    ने बताया कि भारत और सऊदी अरब के अधिकारियों ने द्विपक्षीय कानूनी और न्यायिक सहयोग को और मजबूत करने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    आतंकवाद की कड़ी निंदा, हालिया हमलों का उल्लेख

    विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा दोहराई। इसमें सीमा पार आतंकवाद के साथ-साथ भारत में हुए हालिया आतंकवादी हमलों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया। बयान में 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले और 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के पास हुई आतंकवादी घटना को गंभीर चिंता का विषय बताया गया।

    उच्चस्तरीय अधिकारियों की भागीदारी

    सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की इस अहम बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव काउंटर टेररिज्म विनोद बहादे और सऊदी अरब की ओर से गृह मंत्रालय में लीगल अफेयर्स एवं इंटरनेशनल कोऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल अहमद अल-ईसा ने की। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सुरक्षा और कूटनीतिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

    अगली बैठक भारत में होगी

    MEA के अनुसार, सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की अगली बैठक आपसी सहमति से तय की गई तारीख पर भारत में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भारत–सऊदी अरब के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    नई दिल्‍ली। आज के दौर में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन की अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं, वहीं भारत के सबसे ताकतवर सुरक्षा विशेषज्ञों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी एक अनूठी आदत से सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं।

    डोभाल ने कहा, “फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए।

    उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा के माध्यम से।
    कौन हैं अजीत डोभाल?
    अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनके नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। वे भारत के इतिहास में ‘कीर्ति चक्र’ पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को खत्म करने में उन्होंने कड़ा रुख अपनाया।
    पाकिस्तान में 7 साल ‘अंडरकवर’

    अजीत डोभाल का करियर हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के रूप में 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे। मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने भावुक होकर कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। कई पीढ़ियों ने इसके लिए नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।