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  • 17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी

    17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 17 सितंबर को कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। इससे पहले 16 सितंबर को बाजार ने लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद राहत की सांस ली। बुधवार को Sensex 332.63 अंक की बढ़त के साथ 74336.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Nifty 99 अंक चढ़कर 23217.60 पर पहुंच गया। बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी तथा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट से भी सेंटीमेंट को सहारा मिला।

    अब 17 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगा। 16 सितंबर को भारतीय बाजार बंद होने के बाद फेड का फैसला सामने आना था इसलिए इसका असर अगले कारोबारी सत्र में दिखाई दे सकता है। वैश्विक बाजारों में निवेशक फेड के फैसले के साथ उसकी आगे की मौद्रिक नीति को लेकर टिप्पणी पर भी नजर रखेंगे। ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख रहने पर उभरते बाजारों से विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है जबकि नरम संकेत मिलने पर बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।

    कच्चा तेल भी 17 सितंबर के कारोबार के लिए बड़ा संकेत रहेगा। 16 सितंबर को Brent crude करीब 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर था। हाल के दिनों में तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई और व्यापार घाटे से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में तेल की कीमतों में आगे की चाल का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। 15 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 2978 करोड़ रुपए की निकासी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक 2686 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे। लगातार विदेशी बिकवाली की स्थिति बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकती है।

    तकनीकी स्तर पर भी Nifty के लिए 23200 का स्तर चर्चा में रहेगा। 16 सितंबर को Nifty इसी स्तर के ऊपर बंद हुआ है। कारोबार के दौरान यह 23116.10 के निचले स्तर तक गया था लेकिन बाद में खरीदारी लौटने से 23284.75 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा। ऐसे में 17 सितंबर को बाजार में शुरुआती चाल के बाद निवेशकों की नजर यह देखने पर होगी कि Nifty अपनी बढ़त को बनाए रखता है या फिर ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलती है।

    सेक्टोरल स्तर पर बैंक और FMCG शेयरों में बुधवार को मजबूती देखने को मिली जबकि IT और फार्मा शेयर दबाव में रहे। SBI HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों ने Nifty को सहारा दिया। 17 सितंबर को भी इन प्रमुख सेक्टरों की गतिविधियां बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    इसके अलावा 17 सितंबर से NSE का बहुप्रतीक्षित IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। NSE IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपए प्रति शेयर रखा गया है और यह इश्यू 21 सितंबर तक खुला रहेगा। इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है। प्राथमिक बाजार में इस बड़े इश्यू को लेकर निवेशकों की सक्रियता का असर सेकेंडरी मार्केट की liquidity पर भी नजर आने वाला विषय रहेगा।

    कुल मिलाकर 17 सितंबर को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान अमेरिकी फेड का फैसला कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की खरीदारी और Nifty के प्रमुख तकनीकी स्तर सबसे अहम संकेत रहेंगे। बाजार में तेजी के बाद भी उतार चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए निवेशकों के लिए किसी भी दिशा में कदम उठाने से पहले बाजार की चाल और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    नई दिल्ली| नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का आईपीओ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से जल्द ही नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मिलने के करीब है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नियामक एनएसई को अप्रूवल देने की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक पूरी कर सकता है। एनओसी मिलने के बाद एनएसई अपने पब्लिक इश्यू को बाजार में उतारने के लिए तैयार हो जाएगा, और लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय एक्सचेंज के हाथ में होगा।

    डार्क फाइबर विवाद ने रोके एनएसई के रास्ते

    एनएसई का आईपीओ कई सालों से अटका हुआ था, जिसका मुख्य कारण 2010-2014 के बीच हुए तथाकथित डार्क फाइबर केस हैं। आरोप था कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एनएसई के को-लोकेशन सर्वर तक खास एक्सेस दिया गया था, जिससे वे अन्य बाजार भागीदारों की तुलना में तेजी से ट्रेडिंग कर पाते थे। अप्रैल 2019 में, सेबी ने एनएसई को कथित गैर-कानूनी मुनाफे के रूप में 62.58 करोड़ रुपये लौटाने और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को मार्केट से जुड़े पदों पर कार्य करने से रोकने का निर्देश दिया था। 2022 में एक्सचेंज पर 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया।

    रिटेल निवेशकों की बड़ी भागीदारी

    एनएसई ने पिछले साल जुलाई में जानकारी दी थी कि लगभग 1.46 लाख रिटेल निवेशक उसके शेयरों में निवेश कर चुके हैं। ये शेयर ग्रे (अनलिस्टेड) मार्केट में हैं और हर निवेशक के पास की कीमत 2 लाख रुपये से कम है। इसके बावजूद रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीओ के बाद इस हिस्सेदारी और बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशकों को लंबे समय से एक्सचेंज के शेयर में संभावित मुनाफा नजर आ रहा है।

    एनएसई के लिए रास्ता अब साफ

    सेबी से एनओसी मिलने के बाद एनएसई को अपने पब्लिक इश्यू को समयबद्ध तरीके से लॉन्च करने का अधिकार मिलेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आईपीओ के लिए निवेशक पहले से उत्साहित हैं और बाजार में इसकी मांग अच्छी रहने की संभावना है। लंबे समय से रुका यह आईपीओ न केवल एनएसई के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी नया उत्साह और रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा।