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  • NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया

    NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया


    नई दिल्ली ।
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा की ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जिन ओएमआर शीट्स को अभ्यर्थियों की वास्तविक उत्तर-पत्रिका बताकर साझा किया जा रहा है, वे एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। प्रारंभिक जांच में इन्हें डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज पाया गया है और घोषित परीक्षा परिणामों में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं मिली है।

    एनटीए के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ अभ्यर्थियों की कथित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं की तस्वीरें साझा कर यह दावा किया गया कि उनके परीक्षा परिणाम गलत घोषित किए गए हैं। एजेंसी ने इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच की और रिकॉर्ड में सुरक्षित मूल दस्तावेजों का मिलान किया। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं घोषित परिणामों का पूरी तरह समर्थन करती हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई।

    एजेंसी ने बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी की वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका उसके सुरक्षित रिकॉर्ड में उपलब्ध है। इन उत्तर-पत्रिकाओं पर सही रोल नंबर, टेस्ट बुकलेट नंबर, बारकोड, क्रम संख्या, टेस्ट बुकलेट कोड, अभ्यर्थी और अभिभावकों का विवरण, अभ्यर्थी के हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान तथा परीक्षा कक्ष के निरीक्षकों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। यही प्रमाणित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं रिस्पॉन्स-की चैलेंज अवधि के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेजी गई थीं और पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई थीं।

    एनटीए ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पाया गया कि सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेजों में कई प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ की गई है। कुछ मामलों में अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ दिए गए, कहीं नाम बदल दिए गए, जबकि कुछ दस्तावेजों में निरीक्षकों के प्रमाणित हस्ताक्षरों और अन्य विवरणों में भी फेरबदल किया गया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेजों को आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता और इनका उद्देश्य अभ्यर्थियों तथा अभिभावकों को भ्रमित करना है।

    एजेंसी ने अवनीश श्रीवास्तव से जुड़े वायरल दावों पर भी विस्तार से स्पष्टीकरण दिया। एनटीए के अनुसार उसके रिकॉर्ड में सुरक्षित वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका पर अभ्यर्थी का सही नाम, अभिभावकों का विवरण, हस्ताक्षर और अन्य सभी आवश्यक विवरण दर्ज हैं। जबकि सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज में अलग नाम और अभिभावकों की जानकारी दिखाई गई है, जो नीट-यूजी 2026 के किसी भी पंजीकृत अभ्यर्थी से मेल नहीं खाती। इसी प्रकार प्रतिभा त्रिवेदी, अभय यादव और लक्ष्य सिंह से जुड़े मामलों की भी जांच की गई, जिनमें घोषित परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए।

    एनटीए ने चेतावनी दी है कि किसी फर्जी, जाली या डिजिटल रूप से परिवर्तित ओएमआर उत्तर-पत्रिका का निर्माण, प्रसार या उपयोग सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संज्ञेय अपराध है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत भी संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    एजेंसी ने सभी अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अप्रमाणित सामग्री पर भरोसा न करें। यदि किसी अभ्यर्थी को अपने परिणाम या ओएमआर उत्तर-पत्रिका को लेकर वास्तविक शिकायत है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करे। एनटीए ने दोहराया कि परीक्षा परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड, उत्तर-कुंजी और मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुरूप हैं तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।

  • री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    नई दिल्ली । री-नीट परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल चर्चा का केंद्र बन गए हैं। दोनों अभ्यर्थियों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद मेरिट सूची में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग रैंक मिलने से अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसी स्थिति में रैंक किस आधार पर तय की जाती है।

    दरअसल, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में केवल कुल अंक ही अंतिम रैंक का आधार नहीं होते। जब दो या अधिक अभ्यर्थियों के कुल अंक समान होते हैं, तब एनटीए की निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया लागू की जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य समान अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के बीच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मेरिट तय करना होता है। इसी नियम के कारण समान अंक होने के बावजूद दोनों अभ्यर्थियों की ऑल इंडिया रैंक अलग-अलग निर्धारित की गई।

    टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया के पहले चरण में अभ्यर्थियों के बायोलॉजी विषय के अंक देखे जाते हैं। इसमें बॉटनी और जूलॉजी दोनों के संयुक्त प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। जिस उम्मीदवार के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है। यदि इस स्तर पर भी दोनों के अंक समान हों, तो अगले चरण में केमिस्ट्री के अंकों की तुलना की जाती है। यदि केमिस्ट्री में भी बराबरी बनी रहती है, तब फिजिक्स के अंकों के आधार पर रैंक तय की जाती है।

    यदि तीनों प्रमुख विषयों में भी दोनों अभ्यर्थियों का प्रदर्शन समान हो, तो आगे उत्तर देने के पैटर्न का विश्लेषण किया जाता है। इसमें सही और गलत उत्तरों के अनुपात को देखा जाता है। जिस अभ्यर्थी ने अपेक्षाकृत कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात बेहतर होता है, उसे मेरिट सूची में प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था परीक्षा की गुणवत्ता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

    इसके बाद भी यदि बराबरी बनी रहती है, तो अंतिम निर्णय एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। यही कारण है कि समान अंक प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों की रैंक हमेशा एक जैसी नहीं होती।

    आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में भी यही प्रक्रिया लागू की गई। दोनों के कुल अंक 715 रहे, लेकिन विषयवार प्रदर्शन और टाई-ब्रेकिंग के शुरुआती चरणों में आर्यन गुप्ता का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। इसी आधार पर उन्हें ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। यह निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार लिया गया और मेरिट सूची उसी आधार पर तैयार की गई।

    गौरतलब है कि पहले समान अंक की स्थिति में अभ्यर्थियों की आयु को भी रैंक निर्धारण का आधार बनाया जाता था। अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि बाद में इस नियम को लेकर विवाद सामने आने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया। वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह विषयवार प्रदर्शन और निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया पर आधारित है, जिससे मेरिट सूची अधिक पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप तैयार की जा सके।

  • UGC NET पेपर लीक का बड़ा दावा NEET के बाद फिर घिरी परीक्षा व्यवस्था 90 सवाल मैच होने से मचा बवाल

    UGC NET पेपर लीक का बड़ा दावा NEET के बाद फिर घिरी परीक्षा व्यवस्था 90 सवाल मैच होने से मचा बवाल


    नई दिल्ली ।  देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नीट परीक्षा को लेकर उठे विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुए थे कि अब यूजीसी नेट परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोपों ने लाखों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पीडीएफ और उसमें शामिल सवालों के परीक्षा से मेल खाने के दावों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। हालांकि फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन छात्रों और विभिन्न संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।

    दावों के अनुसार 30 जून को आयोजित यूजीसी नेट समाजशास्त्र परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफॉर्म पर साझा की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि इस दस्तावेज में दिए गए लगभग 90 प्रश्न और उनके विकल्प वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते हैं। छात्रों का कहना है कि यह सामान्य अध्ययन सामग्री नहीं थी बल्कि प्रश्नपत्र से जुड़ा दस्तावेज प्रतीत होता था। इसी आधार पर पेपर लीक की आशंका जताई जा रही है।

    विवाद उस समय और गहरा गया जब कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि कथित प्रश्नपत्र कई राज्यों में लाखों रुपये लेकर उपलब्ध कराया गया। दावा किया गया कि बिहार उत्तर प्रदेश हरियाणा दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में यह कथित पेपर करीब 2.25 लाख रुपये में बेचा गया। इन दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है लेकिन आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और बड़ी आर्थिक लागत लगती है। ऐसे में यदि परीक्षा की गोपनीयता भंग होती है तो सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को उठाना पड़ता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।

    इस बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पूरे मामले को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों के बावजूद छात्रों को न्याय और जवाबदेही नहीं मिल रही है। दूसरी ओर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उस पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।

    फिलहाल यूजीसी नेट पेपर लीक को लेकर लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है। वहीं लाखों अभ्यर्थियों की नजर अब जांच के नतीजों और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • NEET-UG री-एग्जाम 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आज, भोपाल-इंदौर समेत प्रदेशभर में हाई अलर्ट

    NEET-UG री-एग्जाम 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आज, भोपाल-इंदौर समेत प्रदेशभर में हाई अलर्ट


    मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के री-एग्जाम को लेकर रविवार को मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित की जा रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सतना, खंडवा और अन्य जिलों में हजारों अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

    भोपाल में 32 परीक्षा केंद्रों पर करीब 13,774 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं, जबकि इंदौर में 14 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। ग्वालियर में लगभग 5 हजार, जबलपुर में 10 हजार, छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना जताई गई है।

    इस बार परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। परीक्षा सामग्री ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है तथा सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की निगरानी में सामग्री केंद्रों तक पहुंचाई गई। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। अभ्यर्थियों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा है और इसके लिए अतिरिक्त मशीनों तथा कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

    परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्रों पर सुबह 11 बजे से रिपोर्टिंग, बायोमेट्रिक जांच और फ्रिस्किंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से अतिरिक्त 65 मिनट का समय भी प्रदान किया जाएगा।

    परीक्षा को लेकर ड्रेस कोड का भी सख्ती से पालन कराया जा रहा है। छात्रों को हल्के रंग के साधारण कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर, ईयरफोन, बेल्ट, आभूषण, पर्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। धार्मिक या पारंपरिक पोशाक पहनकर आने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के कारण समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है।

    री-एग्जाम के लिए आने वाले छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोपाल, विदिशा, नर्मदापुरम, गुना और अशोकनगर रेलवे स्टेशनों पर विशेष हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं। यहां छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने, परिवहन सुविधाओं और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

    हालांकि कुछ अभ्यर्थियों को अंतिम समय में परीक्षा केंद्र बदलने जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। मुरैना के एक छात्र का केंद्र ग्वालियर से बदलकर भोपाल कर दिया गया, जिससे उसे अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ी। वहीं कई छात्रों ने पिछले डेढ़ महीने को तनाव और अनिश्चितता से भरा बताया। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों ने मानसिक दबाव बढ़ाया, लेकिन अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने पहुंचे हैं।

    प्रदेशभर में प्रशासन, पुलिस और परीक्षा एजेंसियों की निगरानी में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के प्रयास जारी हैं। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परीक्षा पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

  • NEET-UG री-एग्जाम के लिए NTA का सख्त एक्शन प्लान, बायोमेट्रिक जांच, ड्रेस कोड और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य

    NEET-UG री-एग्जाम के लिए NTA का सख्त एक्शन प्लान, बायोमेट्रिक जांच, ड्रेस कोड और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 की पुनर्परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा की पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस बार कई प्रक्रियाओं को और अधिक सख्त बनाया गया है। एजेंसी ने उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने, निर्धारित नियमों का पालन करने और सुरक्षा जांच में पूर्ण सहयोग करने की सलाह दी है।

    पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है और इसके लिए देशभर के परीक्षा केंद्रों पर विशेष प्रबंध किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार प्रत्येक अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले अनिवार्य सुरक्षा जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह व्यवस्था परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना को रोकने के उद्देश्य से लागू की गई है।

    एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया परीक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी, लेकिन यदि किसी तकनीकी समस्या, मशीन में खराबी, नेटवर्क संबंधी दिक्कत या शारीरिक कारणों से किसी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा नहीं हो पाता है तो उसे परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित उम्मीदवार को निर्धारित घोषणा पत्र भरना होगा और बाद में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

    परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान किसी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी न हो। एजेंसी का मानना है कि सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि योग्य उम्मीदवार किसी तकनीकी कारण से परीक्षा से वंचित न रह जाएं।

    ड्रेस कोड को लेकर भी विस्तृत सलाह जारी की गई है। अभ्यर्थियों को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है। गर्मी और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे वस्त्र पहनने को कहा गया है जिनकी जांच आसानी से की जा सके। यदि कोई उम्मीदवार पूर्ण बाजू वाले कपड़े या अतिरिक्त परिधान पहनता है, तो उसे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा ताकि सुरक्षा जांच प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।

    धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए कुछ विशेष वस्त्रों और प्रतीकों को अनुमति दी गई है। हालांकि ऐसे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ सकता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यवस्थाएं सुरक्षा मानकों के अनुरूप लागू की जाएंगी और किसी भी उम्मीदवार के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

    परीक्षा केंद्र में ले जाने वाली वस्तुओं को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उम्मीदवार केवल पारदर्शी पानी की बोतल और निर्धारित प्रारूप में रखे प्रवेश पत्र को ही अपने साथ ले जा सकेंगे। मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ी, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इसके अलावा धातु से बनी भारी वस्तुएं, बड़े आभूषण और अन्य संदिग्ध सामग्री भी केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

    फुटवियर को लेकर भी विशेष सलाह दी गई है। अभ्यर्थियों को साधारण चप्पल या कम ऊंचाई वाले फुटवियर पहनने की सलाह दी गई है। ऊंची एड़ी वाले जूते या जटिल डिजाइन वाले फुटवियर की अतिरिक्त जांच की जा सकती है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया में समय अधिक लग सकता है।

    परीक्षा निर्धारित समयानुसार दोपहर 2 बजे शुरू होकर शाम 5 बजकर 15 मिनट तक चलेगी। विशेष श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार अतिरिक्त समय भी उपलब्ध कराया जाएगा। एजेंसी ने सभी उम्मीदवारों से अपील की है कि वे अंतिम समय की जल्दबाजी से बचें और परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंचकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर लें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाक्रमों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता के बीच यह व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। सख्त सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के माध्यम से परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • नीट परीक्षा के लिए जबलपुर तैयार, 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा; राष्ट्रपति और CM के दौरे के बीच विशेष इंतजाम

    नीट परीक्षा के लिए जबलपुर तैयार, 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा; राष्ट्रपति और CM के दौरे के बीच विशेष इंतजाम


    मध्य प्रदेश । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को लेकर जबलपुर जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण परीक्षा में जिले के 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र शामिल होंगे। परीक्षा की निष्पक्षता, सुरक्षा और छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने कई विशेष इंतजाम किए हैं। खास बात यह है कि इसी दिन राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का भी प्रस्तावित दौरा है, जिसके चलते प्रशासन ने परीक्षा और वीवीआईपी मूवमेंट दोनों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।

    नीट परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हाल ही में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।

    जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में 23 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां कुल 10,426 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पहली बार प्रशासन की ओर से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। शहर के पेंटीनाका चौक से दोपहर 12 बजे तक विद्यार्थियों के लिए विशेष बस सेवा उपलब्ध रहेगी, जिससे दूर-दराज से आने वाले छात्रों को राहत मिलेगी।

    परीक्षा के दौरान गर्मी और मौसम की चुनौतियों को देखते हुए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा कक्षों में पंखों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है ताकि छात्र आरामदायक वातावरण में परीक्षा दे सकें। वहीं परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों के बैठने के लिए अस्थायी शेड तैयार किए जा रहे हैं, जहां कूलर, पंखे और पेयजल की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

    प्रशासन ने अभिभावकों के लिए अस्थायी कैंटीन की भी व्यवस्था की है। परीक्षा के दौरान कई घंटों तक बाहर इंतजार करने वाले परिजनों को भोजन और नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सुरक्षा के लिहाज से भी इस बार विशेष सतर्कता बरती जा रही है। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, बायोमैट्रिक मशीनें और जैमर लगाए जाएंगे। प्रशासन के अनुसार 19 जून तक सभी उपकरण स्थापित कर दिए जाएंगे, जबकि 20 जून को उनका अंतिम परीक्षण किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों की निगरानी लगातार की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित गतिविधि को रोका जा सके।

    इस बार एक और बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है। 21 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी जबलपुर दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों तक छात्रों की सुगम आवाजाही और वीवीआईपी मूवमेंट के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा योजना तैयार की गई है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    प्रशासन का दावा है कि इस बार नीट परीक्षा को पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं के साथ संपन्न कराया जाएगा। छात्रों और अभिभावकों की सुविधा को केंद्र में रखते हुए किए गए ये इंतजाम परीक्षा दिवस को सुचारु और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • NEET UG पुनर्परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ, CJI सूर्यकांत बोले- मामला पहले से दूसरी बेंच के समक्ष लंबित

    NEET UG पुनर्परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ, CJI सूर्यकांत बोले- मामला पहले से दूसरी बेंच के समक्ष लंबित

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्परीक्षा के खिलाफ दायर एक नई याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिका में कहा गया था कि कथित पेपर लीक की घटनाएं कुछ सीमित परीक्षा केंद्रों और व्यक्तियों तक सीमित थीं, इसलिए पूरे देश के लगभग 22 लाख अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है। हालांकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले पर अलग से सुनवाई करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि नीट से जुड़े सभी मामले पहले से एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित हैं और यही याचिका भी उसी पीठ के सामने रखी जा सकती है।

    इस वर्ष 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों के बाद परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बहस का रूप ले लिया, जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है।

    सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका में तर्क दिया गया कि कथित गड़बड़ियां सीमित दायरे में थीं और पूरे देश के छात्रों को पुनर्परीक्षा के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ता ने अदालत से पुनर्परीक्षा के फैसले की समीक्षा करने और प्रभावित छात्रों की स्थिति पर विचार करने की मांग की थी। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस विषय से संबंधित सभी मामलों पर न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ पहले से सुनवाई कर रही है। ऐसे में नई याचिका पर अलग से विचार करना उचित नहीं होगा।

    नीट परीक्षा विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में पहले से कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और एजेंसी के पुनर्गठन जैसी मांगें भी शामिल हैं। इन मामलों की सुनवाई आने वाले महीनों में जारी रहने की संभावना है और इनके परिणाम भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

    इस बीच परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर दायर एक अन्य याचिका पर भी अदालत पहले अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। 1 जून को दायर याचिका में पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की गई थी। अदालत ने उस याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि परीक्षा आयोजन में अब बहुत कम समय बचा है और अंतिम समय में इतनी बड़ी व्यवस्था परिवर्तन करना व्यावहारिक नहीं होगा।

    न्यायालय ने यह भी माना था कि परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा आयोजन अपने आप में एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। लाखों छात्रों के लिए नए सिरे से परीक्षा आयोजित करना, केंद्रों की व्यवस्था करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना पहले ही परीक्षा अधिकारियों के लिए कठिन कार्य है। ऐसे में अतिरिक्त निर्देश या नए बदलाव तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं।

    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली नीट यूजी के माध्यम से लाखों छात्र मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त करते हैं। इसलिए परीक्षा से जुड़े हर निर्णय का सीधा प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। फिलहाल 21 जून को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा की तैयारियां जारी हैं, जबकि परीक्षा रद्द करने, पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की भूमिका से जुड़े व्यापक मुद्दों पर संबंधित पीठ जुलाई में आगे सुनवाई करेगी। छात्रों, अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों की निगाहें अब उसी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित विवाद की आगे की दिशा तय हो सकती है।

  • नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक से मचा असर, 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स प्रभावित होने का दावा

    नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक से मचा असर, 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स प्रभावित होने का दावा

    नई दिल्ली । नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म नियमन और परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने दावा किया है कि इस प्रतिबंध के कारण भारत में 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों की कथित गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में सामान्य उपयोगकर्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ा।

    डुरोव ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि भारतीय अधिकारियों द्वारा परीक्षा से जुड़ी कथित लीक सामग्री को रोकने के उद्देश्य से प्लेटफॉर्म पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम ने पहले ही ऐसे सैकड़ों चैनलों और समूहों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन पर परीक्षा से संबंधित संदिग्ध सामग्री साझा करने और कथित धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। कंपनी का दावा है कि वह लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी और हटाने की प्रक्रिया को मजबूत बना रही है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर संवेदनशील माहौल बना हुआ है। नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। इससे पहले प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे। इसी पृष्ठभूमि में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

    सरकारी एजेंसियों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर परीक्षा से संबंधित गलत जानकारी, भ्रामक दावे और कथित लीक सामग्री तेजी से प्रसारित की जा सकती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का उद्देश्य पुनर्परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, अफवाह या अनुचित गतिविधि को रोकना बताया जा रहा है।

    मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर से भी जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ मामलों में संदेशों को बाद में संपादित कर पुराने समय का दिखाने या भ्रामक प्रमाण तैयार करने की कोशिश की गई थी। इसी कारण प्लेटफॉर्म को सीमित अवधि के लिए इस सुविधा को भी निष्क्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    डुरोव ने कहा है कि कंपनी इस चुनौती को गंभीरता से ले रही है और संदेशों पर दिखाई देने वाले एडिटेड लेबल को और अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनका मानना है कि इससे सामग्री में बदलाव को आसानी से पहचाना जा सकेगा और किसी भी प्रकार की डिजिटल हेरफेर की संभावना कम होगी। कंपनी तकनीकी स्तर पर ऐसे उपाय विकसित कर रही है जो पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक मैसेजिंग एप्लीकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, डेटा संचार की स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। एक ओर सरकारें संवेदनशील परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना चाहती हैं, वहीं दूसरी ओर करोड़ों उपयोगकर्ताओं की डिजिटल पहुंच और संचार सेवाओं की निरंतर उपलब्धता भी महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रतिबंध और तकनीकी नियंत्रणों को लेकर क्या निर्णय लिए जाते हैं। फिलहाल यह मामला देश में डिजिटल नियमन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका पर गंभीर चर्चा का केंद्र बन गया है।

  • AI निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और एयरफोर्स से पेपर डिलीवरी पर विवाद, NEET री-टेस्ट से पहले अन्नामलाई और बीजेपी आमने-सामने

    AI निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और एयरफोर्स से पेपर डिलीवरी पर विवाद, NEET री-टेस्ट से पहले अन्नामलाई और बीजेपी आमने-सामने

    नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET री-टेस्ट से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस तेज हो गई है। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अभूतपूर्व सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। हालांकि इन व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न पक्षों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

    हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी पृष्ठभूमि में इस बार NEET री-टेस्ट के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। परीक्षा प्रश्नपत्रों को देशभर के विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।

    इन सुरक्षा उपायों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर ऐसी व्यवस्थाएं नहीं होनी चाहिएं जो छात्रों के लिए अतिरिक्त तनाव का कारण बन जाएं। उन्होंने कहा कि लंबी जांच प्रक्रियाएं, बढ़ी हुई निगरानी और अतिरिक्त सत्यापन छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं, विशेष रूप से तब जब वे पहले से ही एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों।

    अन्नामलाई ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा संबंधी दबाव कम करना था। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था इस लक्ष्य के विपरीत दिखाई देती है। उन्होंने परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में आई तकनीकी समस्याओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे छात्रों की चिंता को और बढ़ा सकते हैं।

    वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि परीक्षा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल पहचान जैसी व्यवस्थाएं आज दुनिया की कई प्रमुख परीक्षाओं में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि इन उपायों का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं बल्कि योग्य और मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा करना है।

    परीक्षा एजेंसियों का भी कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक नेटवर्क और संगठित नकल गिरोहों को देखते हुए सुरक्षा मानकों को मजबूत करना आवश्यक हो गया था। इसी क्रम में डिजिटल संचार माध्यमों की निगरानी और कुछ प्लेटफॉर्म्स की पहुंच पर अस्थायी नियंत्रण जैसे कदम भी उठाए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। जहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाती है, वहीं यह भी आवश्यक है कि छात्रों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक दबाव का सामना न करना पड़े। ऐसे में NEET री-टेस्ट केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि परीक्षा प्रबंधन और सुरक्षा मॉडल की भी महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है, जिसके परिणाम भविष्य की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा तय कर सकते हैं।

  • NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा कवच, पेपर लीक रोकने को विशेषज्ञों का लॉकडाउन और डिजिटल निगरानी सख्त

    NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा कवच, पेपर लीक रोकने को विशेषज्ञों का लॉकडाउन और डिजिटल निगरानी सख्त


    नई दिल्ली ।
    NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और शिक्षा मंत्रालय इस बार किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर रहे हैं। पिछले वर्ष सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्रों तक उसकी सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है।

    21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी समीक्षा करने और विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाले विशेषज्ञों को विशेष सुरक्षित परिसरों में रखा गया है। इन परिसरों में उनकी गतिविधियों और संचार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क की ही अनुमति होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से गोपनीय सूचनाओं के बाहर जाने की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

    परीक्षा सुरक्षा के तहत इस बार डिजिटल नियंत्रण को भी विशेष महत्व दिया गया है। सुरक्षित परिसरों में मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों के लिए मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्टवॉच तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इंटरनेट पहुंच भी नियंत्रित रखी गई है ताकि किसी भी स्तर पर प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी साझा न हो सके। परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जांच की जा रही है और उसकी गतिविधियों का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है।

    सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन, छपाई, पैकेजिंग, भंडारण और वितरण जैसी जिम्मेदारियों को स्वतंत्र इकाइयों में बांटा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध न हो। इससे गोपनीय सूचनाओं के दुरुपयोग की आशंका कम होने की उम्मीद है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत वायुसेना के विमानों की सहायता लेने की संभावना पर चर्चा की जा रही है। यदि यह योजना लागू होती है तो प्रश्नपत्रों को निर्धारित स्थानों तक अधिक सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। इससे परिवहन के दौरान संभावित सुरक्षा जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

    परीक्षा से पहले और परीक्षा के दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप्स और विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इनका उद्देश्य फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक दावों और अफवाहों की पहचान कर उन्हें समय रहते रोकना है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को भ्रमित करने या परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

    शिक्षा मंत्रालय ने सभी संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पिछली बार सामने आई कमियों को दोहराने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इसी कारण हर स्तर पर अतिरिक्त निगरानी और जवाबदेही तय की गई है। अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रक्रिया से अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा और देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की साख भी बरकरार रहेगी।

    21 जून को आयोजित होने वाली यह परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक ऑफलाइन मोड में होगी। इसके लिए भारत के सैकड़ों शहरों के साथ विदेशों में भी परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। लाखों अभ्यर्थियों की नजर इस परीक्षा पर टिकी हुई है और ऐसे में प्रशासन का पूरा फोकस निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा आयोजन सुनिश्चित करने पर है।