Tag: nuclear energy

  • परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड

    परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड


    नई दिल्ली। अमेरिका ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई और महत्वाकांक्षी शुरुआत का ऐलान किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि निजी निवेश से विकसित चार एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर सरकार के सहयोग से संचालित कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। ट्रंप ने इसे केवल वैज्ञानिक सफलता नहीं बल्कि अमेरिकी परमाणु उद्योग के पुनर्जागरण की शुरुआत बताया और दावा किया कि देश अब अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में पूरी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित विशेष कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ट्रंप ने कहा कि कई दशकों की धीमी प्रगति के बाद अमेरिका अब फिर से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल अपने उद्योग का पुनर्निर्माण नहीं कर रहा बल्कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था की दिशा भी तय कर रहा है। उनके अनुसार देश में इनोवेशन और तकनीकी विकास की नई लहर शुरू हो चुकी है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि पिछले वर्ष जारी किए गए चार कार्यकारी आदेशों का उद्देश्य नागरिक परमाणु क्षेत्र को नई गति देना था और सरकार ने तय लक्ष्य से भी आगे बढ़कर उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने ऊर्जा सचिव क्रिस राइट को एडवांस्ड रिएक्टरों के लिए विशेष पायलट कार्यक्रम शुरू करने और आधुनिक तकनीक वाले रिएक्टरों को सुरक्षित रूप से संचालित करने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने कहा कि इतनी कम अवधि में जो परिणाम मिले हैं उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता।

    उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में चार दशक से अधिक समय बाद पहली बार निजी निवेश से विकसित एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर इस स्तर तक पहुंचे हैं। ट्रंप ने पुरानी नियामक प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि पहले किसी रिएक्टर डिजाइन को मंजूरी मिलने में कई वर्ष लग जाते थे जिससे परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती थीं। उनका कहना था कि नई नीति के कारण यह प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है।

    ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस ने कहा कि अमेरिका ने केवल पुराना रिकॉर्ड नहीं तोड़ा बल्कि एक साथ चार परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने बताया कि निजी निवेश से विकसित किसी नए रिएक्टर डिजाइन ने अंतिम बार 1974 में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया हासिल की थी और अब 50 वर्ष से अधिक समय बाद अमेरिका ने इस उपलब्धि को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। उनके अनुसार यह संकेत है कि अमेरिका एक बार फिर पारंपरिक और अत्याधुनिक दोनों तरह की परमाणु तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर लौट रहा है।

    कार्यक्रम में मौजूद न्यूक्लियर कंपनियों के अधिकारियों ने भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों की सराहना की। एंटारेस न्यूक्लियर के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी के रिएक्टर भविष्य में अमेरिकी सैन्य ठिकानों अंतरिक्ष अभियानों और उन्नत रक्षा प्रणालियों को विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। कंपनी ने 2028 से पहले सैन्य ठिकानों पर अपने रिएक्टर तैनात करने की योजना भी साझा की।

    एक अन्य कंपनी के अधिकारी ने कहा कि अमेरिका अब केवल योजनाओं और प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है बल्कि वास्तविक निर्माण और उत्पादन पर तेजी से काम कर रहा है। एक तीसरे अधिकारी ने इसे परमाणु ऊर्जा के इतिहास का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यही समय नई ऊर्जा क्रांति की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का रिएक्टर 4 जुलाई की रात पहली बार नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया तक पहुंचा और अब कंपनी डेटा सेंटरों के लिए अत्याधुनिक न्यूक्लियर ऊर्जा समाधान विकसित करने पर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष एक बिलियन डॉलर का निवेश जुटाने और विशाल विनिर्माण इकाई स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

    ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि सरकार की नई ऊर्जा रणनीति के कारण अमेरिका आज सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं आंतरिक मामलों के सचिव डग बर्गम ने कहा कि सरकारी सब्सिडी के बजाय निजी निवेश और नवाचार पर आधारित मॉडल ही भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। उनका कहना था कि नियमों को सरल बनाकर और उद्यमियों को अवसर देकर अमेरिका एक बार फिर दुनिया की अग्रणी ऊर्जा शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

  • भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा

    भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा


    नई दिल्ली । भारत और कनाडा के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को हैदराबाद हाउस दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात हुई । इस बैठक में भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति रक्षा ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर मुहर लगी।

    यूरेनियम सप्लाई समझौता

    पीएम कार्नी के दौरे का मुख्य उद्देश्य 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 अरब डॉलर है। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है और भारत अपनी तेजी से बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। 2013 में लागू भारत-कनाडा न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के बाद यह कदम दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

    व्यापार और निवेश में बढ़ावा

    बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत-कनाडा के बीच 50 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य है। कृषि कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देने के साथ ही भारत में पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग

    दोनो देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योगों समुद्री डोमेन जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    नवाचार और तकनीकी सहयोग

    पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों की नवाचार साझेदारी वैश्विक समाधानों को जन्म देगी। AI क्वांटम सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स पर हस्ताक्षरित समझौता आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन मजबूत करेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स और उद्योगों को जोड़ने के प्रयास भी तेज होंगे।

    ऊर्जा और पर्यावरण

    ऊर्जा क्षेत्र में अगली पीढ़ी की साझेदारी स्थापित की जाएगी जिसमें हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण पर विशेष जोर रहेगा। पीएम मोदी ने कहा “भारत-कनाडा की साझेदारी दुनिया को नए वैश्विक समाधान देने में सक्षम होगी। यह सहयोग केवल ऊर्जा या रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि नवाचार तकनीकी और वैश्विक विकास के कई क्षेत्रों को छूएगा।