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  • वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख

    वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख



    नई दिल्ली। 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, हालांकि युद्धविराम के प्रयासों और अमेरिका-ईरान बातचीत की कोशिशों ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान विवाद जल्द सुलझ सकता है।

    ट्रंप का दावा: जल्द खत्म होगा विवाद
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने समर्थकों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति जल्द खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसी वजह से कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

    ट्रंप ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और अधिकतर लोग इसे सही मानते हैं।

    क्षेत्र में लगातार हिंसा जारी
    हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं

    दक्षिणी तेहरान में अमेरिकी-इस्राइली हमलों में 12 लोगों की मौत

    लेबनान में पिछले 24 घंटों में 33 लोगों की मौत, जिनमें एक किशोर भी शामिल

    लेबनान से उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट हमले में 1 व्यक्ति की मौत और 2 घायल

    ईरानी हमले में बहरीन में मोरक्को के सैनिक की मौत और कई घायल

    ईरान का पलटवार और बयान
    ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उन्हें अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने के लिए दिए जा रहे हैं।उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियानों पर तंज कसते हुए इन्हें “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” और “ऑपरेशन फॉक्सियोस” कहा और कहा कि ये रणनीतियां विफल साबित हो रही हैं।


    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जर्मनी के राष्ट्रपति के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया था।

    वेस्ट एशिया में हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं। एक तरफ सैन्य टकराव और जवाबी हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें भी जिंदा हैं, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।

  • ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी

    ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी


    नई दिल्ली।/तेहरान।मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान इस समय अमेरिका, इजराइल और यूरोपीय देशों के साथ पूर्ण स्तर के टकराव की स्थिति में है। यह बयान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है, जिससे इसकी राजनीतिक और रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि मौजूदा हालात 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध से भी अधिक जटिल और खतरनाक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि आर्थिक राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चों पर भी ईरान को अभूतपूर्व दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    यह पारंपरिक युद्ध से अलग है

    अपने बयान में राष्ट्रपति ने कहा कि आज का संघर्ष केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, हम पर प्रतिबंध, राजनीतिक अलगाव, साइबर हमले और सैन्य धमकियां-सब एक साथ हैं। यह पारंपरिक युद्ध से कहीं अधिक कठिन स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन देश पहले से ज्यादा संगठित और मजबूत हुआ है।

    राष्ट्रीय एकता की अपील

    पेजेशकियन ने ईरानी जनता से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश के भीतर विभाजन पैदा करना चाहते हैं ताकि आंतरिक अस्थिरता के जरिए ईरान को कमजोर किया जा सके। राष्ट्रपति के अनुसार, राष्ट्रीय एकता ही इस चुनौतीपूर्ण दौर में सबसे बड़ा हथियार है।

    परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

    अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, ईरान लगातार इस आरोप को खारिज करता आया है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और ऊर्जा व शोध के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।जनवरी 2025 में अमेरिका में सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति को फिर से लागू किया। इसके तहत ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने और नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के कदम उठाए गए। वहीं, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने भी संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंधों को दोबारा लागू किया है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

    जून 2025 का ईरान-इजराइल युद्ध
    जून 2025 में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक सीधा सैन्य संघर्ष हुआ था। इस दौरान इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान में इस युद्ध में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि ईरानी मिसाइल हमलों में इजराइल में 28 लोग मारे गए।बाद में अमेरिका भी इस संघर्ष में शामिल हो गया और उसने नतांज, फोर्डो और इस्फहान स्थित ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद अमेरिकी मध्यस्थता से संघर्षविराम लागू हुआ और अप्रैल से चल रही परमाणु वार्ता ठप हो गई।

    सेना को लेकर राष्ट्रपति का दावा

    राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि हालिया हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना हथियारों और मानव संसाधनों—दोनों मामलों में पहले से अधिक मजबूत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फिर से हमला हुआ, तो ईरान कड़ा और निर्णायक जवाब देगा।

    संभावित युद्ध के असर

    विश्लेषकों के मुताबिक, यदि मौजूदा तनाव पूर्ण युद्ध में बदलता है तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक स्थिरता पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। हालांकि ईरान का नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि देश किसी भी हालात का सामना करने के लिए तैयार है।