Tag: Nuclear Threat

  • पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?

    पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?


    नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध अब एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने खुफिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया है कि रूस बड़े पैमाने पर नए लड़ाकों को जुटाने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में करीब पांच लाख लोगों को सैन्य अभियान में शामिल करने की योजना बनाई जा सकती है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो युद्ध की दिशा और उसकी तीव्रता दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    जेलेंस्की के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध रोकने की तैयारी में नहीं हैं बल्कि संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर मोबिलाइजेशन की योजना बना रहे हैं। यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रक्रिया सितंबर में होने वाले रूसी संसदीय चुनावों के बाद शुरू की जा सकती है। जेलेंस्की का दावा है कि रूस इस बार खुले तौर पर बड़ी संख्या में लोगों की भर्ती करने से बच सकता है क्योंकि इससे रूसी समाज में असंतोष बढ़ने का खतरा है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को कम समय में पर्याप्त सैन्य प्रशिक्षण देना मुश्किल होगा। ऐसे में बड़ी संख्या में कम प्रशिक्षित सैनिकों को युद्ध के मैदान में भेजे जाने की आशंका है। इससे संघर्ष और ज्यादा खूनी हो सकता है और दोनों पक्षों में जनहानि बढ़ सकती है। जेलेंस्की के अनुसार रूस की ऐसी तैयारी इस बात का संकेत है कि मॉस्को फिलहाल युद्ध को समाप्त करने के बजाय सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भी यूक्रेन युद्ध को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर यूक्रेन रूसी क्षेत्र के भीतर लंबी दूरी के हमलों को और प्रभावी बनाता है और युद्ध की पारंपरिक सीमाएं लगातार टूटती जाती हैं तो रूस अपने सबसे खतरनाक विकल्पों पर विचार कर सकता है। फिदान ने परमाणु हथियारों की आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।

    रूस और यूक्रेन के बीच हाल के दिनों में लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमलों में भी तेजी देखी गई है। रूस के तातारस्तान क्षेत्र में हुए एक यूक्रेनी ड्रोन हमले में कई लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। इसे रूस के भीतर हुए गंभीर हमलों में से एक माना जा रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र में रूसी हमले में भी लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

    रूस और यूक्रेन दोनों ही एक दूसरे के इलाकों में लगातार ड्रोन हमले कर रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है जबकि यूक्रेन ने भी रूस की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन दागे जाने की बात कही है। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच जमीन से लेकर आसमान तक संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है।

    अगर रूस वास्तव में पांच लाख नए लड़ाकों को जुटाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और पश्चिमी देशों की सैन्य रणनीति में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि युद्ध और ज्यादा गहरा हुआ तो परमाणु हथियारों की आशंका भी अंतरराष्ट्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकती है। फिलहाल पांच लाख सैनिकों की संभावित लामबंदी का दावा यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है लेकिन इस खबर ने रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर पूरी दुनिया की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • ट्रंप के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव: रूस ने दी सख्त चेतावनी, परमाणु ठिकानों पर हमले को बताया बेहद खतरनाक

    ट्रंप के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव: रूस ने दी सख्त चेतावनी, परमाणु ठिकानों पर हमले को बताया बेहद खतरनाक


    नई दिल्ली:मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम ने वैश्विक चिंता को और गहरा कर दिया है। इस अल्टीमेटम के बाद जहां ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी, वहीं अब रूस ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। रूस का कहना है कि मौजूदा हालात को युद्ध के बजाय राजनीतिक और रणनीतिक तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए।

    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ शब्दों में कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने का एकमात्र प्रभावी तरीका संवाद और कूटनीति है। उनका मानना है कि सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं, जिसका असर केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

    रूस ने खास तौर पर ईरान के बुशहर परमाणु पावर प्लांट पर संभावित हमले की आशंका को बेहद गंभीर बताया है। पेसकोव ने चेतावनी दी कि किसी भी परमाणु सुविधा पर हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा बल्कि इससे मानवीय आपदा भी पैदा हो सकती है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि रूस इस मुद्दे पर अमेरिका तक अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से पहुंचा चुका है।

    इसी बीच, ईरान के नतांज परमाणु परिसर पर हाल ही में हुए हमलों ने भी स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। यह परिसर ईरान के परमाणु कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां यूरेनियम संवर्धन का कार्य होता है। इस पर हुए हमले को रूस ने अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बताते हुए कड़ी निंदा की थी।

    इस मामले में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने भी चिंता व्यक्त की है। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार का रेडियोएक्टिव रिसाव नहीं हुआ, लेकिन उसने एहतियात बरतने और स्थिति पर करीबी नजर रखने की जरूरत पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

    मौजूदा हालात ऐसे समय में सामने आए हैं जब पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, और इजरायल भी इस समीकरण का अहम हिस्सा है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकती है।

    रूस का यह बयान वैश्विक स्तर पर शांति की अपील के रूप में देखा जा रहा है। यह साफ संकेत देता है कि बड़ी शक्तियां अब इस संकट को युद्ध के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने के पक्ष में हैं। हालांकि, आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या संबंधित देश इस सलाह को मानते हैं या फिर यह तनाव एक बड़े संघर्ष का रूप लेता है।

  • ट्रंप का दावा: ईरान पर हमले में बड़ी सफलता, सैन्य क्षमताएं गंभीर रूप से प्रभावित

    ट्रंप का दावा: ईरान पर हमले में बड़ी सफलता, सैन्य क्षमताएं गंभीर रूप से प्रभावित


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान की बड़ी सफलता का दावा किया। जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए और बहुत बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं। उनका कहना था कि इस अभियान से ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

    ट्रंप ने कहा ईरान की स्थिति अब बहुत कमजोर है। उनकी नौसेना वायुसेना और ज्यादातर सेना को हमने भारी क्षति पहुंचाई है। उनके बड़े खतरे हर तरह से खत्म हो गए हैं। उनके रडार और एंटी एयरक्राफ्ट हथियार बड़े पैमाने पर निष्क्रिय कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी बल इस संघर्ष में अब पहले कभी न देखी गई प्रभुत्व वाली स्थिति में हैं।

    राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि यह अभियान ईरान से उत्पन्न परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए चलाया जा रहा है। हमें मध्य पूर्व और पूरी दुनिया में मौजूद परमाणु खतरे को समाप्त करना था और हम इसे समाप्त कर रहे हैं उन्होंने कहा। हालांकि उन्होंने अभियान की समयसीमा नहीं बताई लेकिन जोर देकर कहा कि यह उम्मीद से कहीं तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है।

    ट्रंप ने इस संघर्ष के संभावित वैश्विक प्रभाव पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई का असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है लेकिन हालात सामान्य होने पर पेट्रोल और ऊर्जा से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में तेजी से कमी आएगी।

    साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और इजरायल के नेतृत्व से भी बातचीत हुई है। हालांकि उन्होंने इजरायल के दृष्टिकोण और अमेरिकी रणनीतिक लक्ष्यों में कुछ अंतर होने का संकेत दिया। उन्होंने कहा वह एक अलग देश हैं उनका नजरिया थोड़ा अलग हो सकता है।

    ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य बल की प्रशंसा करते हुए कहा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी ताकत दुनिया में कभी नहीं रही। उनके बयान ऐसे समय आए हैं जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इस मार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है जिससे किसी भी अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर तुरंत दिखाई देगा। ट्रंप के दावों और चेतावनियों ने पश्चिम एशिया की भू राजनीति को फिर से अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बना दिया है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।