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  • बार-बार चिड़चिड़ापन और गुस्सा आता है तो सिर्फ मूड खराब होना नहीं, थायरॉइड और ब्लड शुगर भी हो सकते हैं कारण

    बार-बार चिड़चिड़ापन और गुस्सा आता है तो सिर्फ मूड खराब होना नहीं, थायरॉइड और ब्लड शुगर भी हो सकते हैं कारण

    नई दिल्ली: किसी बात पर नाराजगी या परिस्थितियां उम्मीद के मुताबिक न होने पर गुस्सा और चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। आम तौर पर ऐसी भावनाएं कुछ समय बाद खुद शांत हो जाती हैं और व्यक्ति सामान्य महसूस करने लगता है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के छोटी-छोटी बातों पर बार-बार गुस्सा आता है या चिड़चिड़ापन लगातार बना रहता है, तो इसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी हो जाता है। हर बार इसका संबंध केवल खराब मूड या मानसिक तनाव से नहीं होता, शरीर में होने वाली कुछ गड़बड़ियां भी मूड और व्यवहार में बदलाव ला सकती हैं।

    तनाव और चिंता के अलावा नींद की कमी, ब्लड शुगर का ठीक से नियंत्रित न रहना, थायरॉइड की समस्या और पोषक तत्वों की कमी भी लगातार चिड़चिड़ापन पैदा कर सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने से केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि ध्यान, याददाश्त और भावनाओं पर नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। लगातार कम या खराब नींद व्यक्ति को अधिक चिड़चिड़ा और तनावग्रस्त महसूस करा सकती है। देर रात तक मोबाइल देखना, सोने का समय लगातार बदलना और अधिक कैफीन वाली चीजों का सेवन नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकता है, जिससे तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ सकता है।

    थायरॉइड की समस्या भी लगातार चिड़चिड़ापन बने रहने का एक कारण हो सकती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन का स्तर अधिक हो जाता है और हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति बनती है, तो कई लोगों में बेचैनी, घबराहट, नींद की परेशानी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। इसके साथ धड़कनों का तेज होना, वजन कम होना और ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और इलाज जरूरी हो जाता है।

    ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव भी मूड और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। ब्लड शुगर कम होने पर कमजोरी, कंपकंपी, पसीना आने के साथ घबराहट और चिड़चिड़ापन हो सकता है। डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेने वाले लोगों में ऐसी समस्या अधिक देखी जा सकती है। यदि चिड़चिड़ापन खास समय पर बार-बार होता है और उसके साथ इस तरह के लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी हो सकता है। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी भी भावनात्मक समस्याओं को बढ़ा सकती है।

    आयरन, विटामिन बी12 और फोलेट की कमी से थकान, कमजोरी और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है, जिसका असर मूड पर भी पड़ सकता है। लगातार चिड़चिड़ापन व्यक्ति के सामाजिक संबंधों और रोजमर्रा के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यदि यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो केवल इसे स्वभाव या खराब मूड मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद, तनाव, ब्लड शुगर, थायरॉइड और पोषण से जुड़े संभावित कारणों को समझना जरूरी है, ताकि आवश्यकता होने पर सही जांच और उपचार कराया जा सके।

  • तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    नई दिल्ली: बाल झड़ने की समस्या आम होती जा रही है और कम उम्र में भी कई लोग बालों के पतले होने या गंजेपन की परेशानी का सामना कर रहे हैं। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के अलावा बढ़ते प्रदूषण को भी बालों की सेहत प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल किया जाता है। बाल झड़ने की शुरुआत होते ही लोग अक्सर अलग-अलग शैंपू, तेल और हेयर केयर उत्पादों का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, लेकिन बार-बार उत्पाद बदलना भी समस्या बढ़ा सकता है। कई बार बालों की दिक्कत के पीछे शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ियां भी जिम्मेदार होती हैं।

    बालों के झड़ने की वजह हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। पोषक तत्वों की कमी, लगातार तनाव, नींद की कमी, थायरॉइड की समस्या और आनुवंशिक कारण बालों की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं। आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन की कमी भी बालों के झड़ने को बढ़ावा दे सकती है। ऐसे में कम उम्र में अचानक या लगातार बाल झड़ने लगें तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय इसकी असली वजह समझना जरूरी है। बिना जांच किसी पोषक तत्व की कमी मानकर सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं माना जाता।

    कैल्शियम को आम तौर पर हड्डियों की सेहत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी कमी बालों की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली कैल्शियम की कमी यानी हाइपोकैल्सीमिया के कारण बालों में बदलाव अधिक देखे जा सकते हैं। कैल्शियम की कमी से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और केराटिन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे बाल रूखे और कमजोर होने के साथ पतले या टूटने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा कैल्शियम की कमी के साथ नाखून भी कमजोर होने लग सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम की कमी से बाल झड़ने की समस्या होना बहुत आम नहीं माना जाता।

    पोषक तत्वों की कमी के मामले में विशेषज्ञों के अनुसार आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन जैसे तत्वों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को इनके सप्लीमेंट लेने की जरूरत है। जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए यदि शरीर में किसी विटामिन या पोषक तत्व की कमी की आशंका हो तो डॉक्टर की सलाह पर ही दवा या सप्लीमेंट लेना चाहिए। बालों की समस्या का कारण पता किए बिना केवल किसी एक पोषक तत्व को जिम्मेदार मानकर उपचार शुरू करना उचित नहीं है।

    रोज कुछ बाल गिरना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और आम तौर पर रोज 30 से 50 बाल गिर सकते हैं। चिंता तब होती है जब बाल लगातार अधिक मात्रा में गिरने लगें, हेयरलाइन पीछे जाने लगे या बालों की घनत्व कम होने लगे। किसी बीमारी या तनाव के बाद होने वाला अत्यधिक हेयर शेडिंग कई बार कुछ महीनों बाद शुरू हो सकता है और कारण खत्म होने के बाद धीरे-धीरे सुधार भी हो सकता है। यदि बाल अचानक गुच्छों में गिर रहे हों, गोल-गोल पैच बन रहे हों या सिर की त्वचा पर लालिमा और सूजन दिखाई दे रही हो, तो सही कारण का पता लगाने के लिए समय रहते जांच और इलाज जरूरी है।

  • गर्मियों में भी ठंडे हाथ-पैर? शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत..

    गर्मियों में भी ठंडे हाथ-पैर? शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत..

    नई दिल्ली। अक्सर कुछ लोगों को यह समस्या महसूस होती है कि उनके हाथ और पैर सामान्य मौसम में भी ठंडे बने रहते हैं या कभी-कभी उनमें सुन्नपन जैसा अनुभव होता है। कई लोग इसे मामूली स्थिति मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर के अंदर चल रही कुछ गहरी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।
    जब शरीर में रक्त का प्रवाह सही तरीके से नहीं होता, तो हाथ और पैरों तक पर्याप्त गर्माहट और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। इसी कारण ये अंग ठंडे महसूस होने लगते हैं। सामान्य परिस्थितियों में रक्त संचार शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखता है, लेकिन इसमें गड़बड़ी होने पर शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है।
    पाचन तंत्र की कमजोरी भी इस समस्या का एक महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है। जब शरीर को भोजन से पर्याप्त ऊर्जा और पोषण नहीं मिल पाता, तो इसका असर पूरे शरीर पर दिखाई देता है। ऊर्जा की कमी के कारण हाथ और पैरों में ठंडापन महसूस होना आम लक्षण बन सकता है।
    इसके साथ ही तनाव और मानसिक दबाव भी इस स्थिति को बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर की नसों पर असर पड़ता है और रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है। इससे हाथ और पैरों में ठंडक के साथ-साथ झुनझुनी या सुन्नपन की समस्या भी महसूस हो सकती है।
    अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह कुछ गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों की ओर भी इशारा कर सकती है। कई मामलों में नसों के सिकुड़ने की समस्या देखी जाती है, जिसमें रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है। ऐसी स्थिति में हाथ और पैरों में दर्द, कमजोरी और असहजता बढ़ सकती है।
    इसके अलावा शरीर में आयरन और विटामिन की कमी भी इस समस्या का बड़ा कारण हो सकती है। पोषण की कमी से शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और रक्त निर्माण तथा संचार प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
    इस समस्या से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी माना जाता है। नियमित रूप से हल्का व्यायाम या पैदल चलना रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे शरीर में गर्माहट बनी रहती है और हाथ-पैर सामान्य महसूस होते हैं।
    संतुलित और पोषक आहार लेना भी इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयरन, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर भोजन शरीर को मजबूत बनाता है और ऊर्जा स्तर को बनाए रखता है।
    इसके अलावा हल्की मालिश और शरीर को गर्म रखने वाले उपाय भी अस्थायी राहत दे सकते हैं। लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे सामान्य समझकर अनदेखा करना उचित नहीं है और समय पर विशेषज्ञ सलाह लेना आवश्यक होता है।