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  • अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं

    अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं


    देहरादून। उत्तर प्रदेश में ‘घुसपैठिया’ शब्द को लेकर दिए गए बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आलोचना हो रही है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई है। रावत ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहना किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचने की नसीहत भी दी।

    हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट में अखिलेश यादव की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बयान देते समय अखिलेश यादव के मन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि रही होगी। हालांकि, रावत ने याद दिलाया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पहले एक ही राज्य का हिस्सा थे और विभाजन के समय दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल था।

    बंटवारे के बाद जहां रहे, वहां के नागरिक हैं लोग

    हरीश रावत ने कहा कि जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश एक राज्य थे, तब लोगों ने अलग-अलग क्षेत्रों को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। किसी ने नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी में काम किया, तो किसी ने इलाहाबाद, गोरखपुर, बनारस और लखनऊ को अपना कार्यक्षेत्र चुना।

    उन्होंने कहा कि राज्य के बंटवारे के समय जो लोग जहां रह गए, वे वहीं के निवासी हैं और उन्हें वहां रहने का पूरा अधिकार है। उत्तराखंड में रह गए लोगों को वहां सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। इसी तरह उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोगों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। रावत के मुताबिक, ऐसे नागरिकों के लिए ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं है।

    दूसरे राज्यों में काम करने वालों का देश के निर्माण में योगदान

    रावत ने कहा कि भारत में लोग रोजगार और कामकाज के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। दूसरे राज्यों में जाकर काम करने वाले लोगों और प्रवासियों का देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए उनके योगदान को सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करती है और विपक्षी दलों को उसके उकसावे में आने से बचना चाहिए।

    अखिलेश यादव के बयान से शुरू हुआ विवाद

    दरअसल, शुक्रवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था, “यूपी में सबसे बड़े घुसपैठिया कौन हैं? उत्तराखंड के…” इसके बाद उन्होंने कहा कि पहले ‘घुसपैठिया’ की परिभाषा तय करनी होगी।

    अखिलेश के इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया। समाजवादी पार्टी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि अखिलेश यादव का इशारा एक व्यक्ति की ओर था। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बयान को उत्तराखंड के लोगों का अपमान बताया था। इसके बाद हरीश रावत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

  • ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध

    ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर दिखाए गए कथित गलत नक्शे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह मामला उस समय सामने आया जब एक प्रस्तुति के दौरान भारतीय मानचित्र में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दर्शाया गया।

    यह सेमिनार बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का विषय था ‘सार्क को फिर से मजबूत बनाने के रास्ते’। सेमिनार में भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके अहमद तारिक करीम प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शित किए गए नक्शे पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई।

    ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रस्तुत किया गया नक्शा गलत है और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस तरह के चित्रण का विरोध करता है।

    करीम ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि यह नक्शा केवल सांकेतिक (प्रतीकात्मक) उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था और इसमें वास्तविक सीमाओं को प्रदर्शित नहीं किया गया है। हालांकि, भारतीय अधिकारी ने इस स्पष्टीकरण से असहमति जताते हुए दोबारा भारत का आधिकारिक रुख दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।

    बाद में करीम ने पूछा कि क्या पूजा झा भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इस पर उन्होंने स्वयं को भारतीय उच्चायोग की अधिकारी बताया। इसके बाद करीम ने कहा कि उनकी आपत्ति को नोट कर लिया गया है और फिर अपनी प्रस्तुति जारी रखी।

    सेमिनार में बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और सार्क को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संगठन की कार्यक्षमता, वित्तीय मजबूती और बेहतर फॉलो-अप व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही।

    ओबैद ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश आने वाले महीनों में सार्क सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ नई पहल पर विचार कर रहा है। इनमें ढाका में मौजूद सार्क देशों के राजदूतों के साथ बैठकें और काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय के साथ समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने पूजा कुमारी झा की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मौके पर ही भारत का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट रूप से सामने रखा।