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  • मल्टीप्लेक्सों में लागू हुआ एयरलाइंस और होटलों वाला 'डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल'; अब मांग बढ़ने के साथ ही महंगे होंगे मूवी टिकट

    मल्टीप्लेक्सों में लागू हुआ एयरलाइंस और होटलों वाला 'डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल'; अब मांग बढ़ने के साथ ही महंगे होंगे मूवी टिकट

    नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों में फिल्म देखने के शौकीन दर्शकों को पिछले कुछ समय से एक अजीब और खर्चीले अनुभव से गुजरना पड़ रहा है। कई लोग ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स के अतिरिक्त चार्ज से बचने के लिए सीधे मल्टीप्लेक्स के काउंटर पर जाकर टिकट खरीदते हैं, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। इसके बावजूद, अब काउंटर पर भी अचानक टिकटों के दाम काफी बढ़े हुए मिल रहे हैं। यह कोई इत्तेफाक या तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे सिनेमाघर मालिकों की एक सोची-समझी और नई व्यावसायिक रणनीति काम कर रही है, जिसने दर्शकों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।

    मल्टीप्लेक्स उद्योग में तेजी से पैर पसार रही इस नई तरकीब को ‘डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल’ कहा जाता है। यह एक ऐसा डिजिटल और रणनीतिक रेवेन्यू मॉडल है, जिसका उपयोग लंबे समय से विमानन कंपनियां और होटल उद्योग अपनी बुकिंग के लिए करते आ रहे हैं। अब इसी तकनीक को पीवीआर आयनॉक्स जैसी बड़ी सिनेमाई शृंखलाओं ने भी अपने थिएटरों में पूरी तरह लागू कर दिया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जैसे-जैसे किसी विशेष शो या ऑडिटोरियम की सीटें भरती जाती हैं, वैसे-वैसे बची हुई सीटों की मांग के आधार पर उनके दामों में स्वचालित रूप से बढ़ोतरी कर दी जाती है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के सिनेमा प्रेमियों को अब इस नई व्यवस्था के तहत पसंदीदा शो देखने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

    इस नई मूल्य निर्धारण नीति के संबंध में पीवीआर आयनॉक्स के बिजनेस प्लानिंग और स्ट्रैटजी चीफ कमल ज्ञानचंदानी ने एक आधिकारिक बातचीत में स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि डायनैमिक प्राइसिंग वैश्विक स्तर पर स्वीकार की जा चुकी एक बेहद प्रभावी रेवेन्यू मैनेजमेंट प्रक्रिया है। इसे फ्लाइटों, होटलों, खेल आयोजनों और लाइव एंटरटेनमेंट जैसे विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में सफलता के साथ अपनाया जा रहा है। इसी तर्ज पर मल्टीप्लेक्सों में भी कुछ समय पहले इस मॉडल को अपनी आंतरिक राजस्व रणनीति के तहत लागू किया गया था, ताकि दर्शकों को कीमतों के विभिन्न विकल्प देते हुए सिनेमाघरों में सीटों की कुल ऑक्यूपेंसी को बेहतर और संतुलित किया जा सके।

    प्रबंधन के अनुसार, इस तरकीब का मुख्य उद्देश्य पूरे थिएटर नेटवर्क में दर्शकों की मांग को संतुलित करना और ग्राहकों को टिकट बुकिंग में अधिक लचीलापन प्रदान करना है। इस मॉडल के लागू होने से जहां एक तरफ भारी मांग में चल रही फिल्मों के शोज को पूरी तरह हाउसफुल होने से रोकने में मदद मिलती है, वहीं उन दर्शकों को पसंदीदा सीट मिल जाती है जो उसके लिए अधिक प्रीमियम मूल्य चुकाने के लिए तैयार होते हैं। इसके विपरीत, इस रणनीति का एक दूसरा पहलू यह भी है कि जिन शोज की टिकटें सामान्यतः नहीं बिक पाती हैं या जिनकी मांग बेहद कम होती है, उन्हें बहुत कम और सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाता है ताकि सिनेमाघर पूरी तरह खाली न रहें।

    इस पूरी व्यवस्था में मल्टीप्लेक्स मालिकों को होने वाला वित्तीय लाभ बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है, क्योंकि वे कम शोज चलाकर भी लोकप्रिय फिल्मों से अधिकतम राजस्व वसूलने में सफल हो रहे हैं। दर्शकों के लिए यह मॉडल तब तक ही फायदेमंद है जब तक वे कार्यदिवसों में या कम लोकप्रिय समय पर फिल्में देखने की योजना बनाते हैं। वीकेंड और प्राइम टाइम के शोज के लिए अब दर्शकों को काउंटर पर जाकर भी बढ़ी हुई कीमतें ही चुकानी होंगी। भविष्य में जब भी आप किसी थिएटर काउंटर पर जाएं और आपको टिकट अप्रत्याशित रूप से महंगा मिले, तो समझ जाइए कि आप मल्टीप्लेक्सों की इसी नई एल्गोरिदम आधारित तकनीक का सामना कर रहे हैं।

  • महंगी उड़ानों और बढ़ती ईंधन लागत के बावजूद नहीं थमा घूमने का जुनून, घरेलू पर्यटन मांग में जोरदार उछाल

    महंगी उड़ानों और बढ़ती ईंधन लागत के बावजूद नहीं थमा घूमने का जुनून, घरेलू पर्यटन मांग में जोरदार उछाल

    नई दिल्ली । बढ़ती ईंधन कीमतों, महंगे हवाई किरायों और वैश्विक स्तर पर परिचालन चुनौतियों के बावजूद भारतीयों का घूमने-फिरने का उत्साह बरकरार है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान देशभर में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक दबावों के बावजूद घरेलू पर्यटन बाजार मजबूत स्थिति में बना हुआ है और लोगों की यात्रा संबंधी प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इस वर्ष गर्मी के मौसम में कई प्रमुख हवाई मार्गों पर टिकट कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विमान ईंधन की बढ़ती लागत और कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर एयरस्पेस संबंधी बाधाओं के कारण एयरलाइंस का परिचालन खर्च बढ़ा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं। हालांकि यात्रियों का एक वर्ग अब अपने बजट के अनुसार गंतव्य और यात्रा के साधनों में बदलाव कर रहा है।

    ट्रैवल उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि लोग अब दूरस्थ और महंगे पर्यटन स्थलों के बजाय अपने शहरों के आसपास स्थित आकर्षक स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। परिवार और मित्रों के साथ समूह में यात्रा करने का चलन भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे निजी वाहनों, टैक्सियों और बस सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय उछाल देखा गया है।

    कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ दर्ज की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों और ठंडे मौसम वाले स्थानों में लंबी वाहन कतारें और यातायात दबाव भी देखने को मिला है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संकेत है कि महंगाई के बावजूद लोगों की प्राथमिकताओं में यात्रा और मनोरंजन अभी भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

    महंगे हवाई सफर का सबसे बड़ा लाभ रेल और सड़क परिवहन क्षेत्र को मिला है। घरेलू यात्राओं के लिए बड़ी संख्या में लोग अब ट्रेन और बस सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से हिल स्टेशनों और वीकेंड डेस्टिनेशन के लिए बस बुकिंग में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे परिवहन क्षेत्र को अतिरिक्त कारोबार मिला है।

    अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबी दूरी वाले गंतव्यों की मांग में कुछ नरमी आई है। अमेरिका और पश्चिमी यूरोप जैसे देशों की यात्रा अपेक्षाकृत महंगी हो गई है, जिसका असर बुकिंग पर पड़ा है। रुपये की कमजोरी, बढ़ती यात्रा लागत और लंबी उड़ानों के बढ़ते खर्च ने भी यात्रियों के फैसलों को प्रभावित किया है।

    हालांकि विदेश यात्रा करने वाले भारतीय अब अपेक्षाकृत कम दूरी और बजट अनुकूल देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वियतनाम, श्रीलंका, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे गंतव्य तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये देश कम लागत, आसान कनेक्टिविटी और बेहतर पर्यटन सुविधाओं के कारण भारतीय पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

    होटल उद्योग के लिए भी यह सीजन उत्साहजनक रहा है। कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल ऑक्यूपेंसी 70 से 75 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जयपुर, गोवा, आगरा और विभिन्न हिल स्टेशनों में होटल बुकिंग मजबूत बनी हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू पर्यटन की यह मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च और सेवा क्षेत्र की सकारात्मक स्थिति को भी दर्शाती है।

    कुल मिलाकर, बढ़ती लागत और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय यात्रियों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि यात्रा और अवकाश अब उनकी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। यही कारण है कि बदलते हालात के अनुसार योजनाएं और बजट समायोजित करने के बावजूद पर्यटन क्षेत्र में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।