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  • फ्लोरिडा का विमान बीच समुद्र में हुआ क्रैश…. पायलट की सूझबूझ से बची 11 लोगों क जान

    फ्लोरिडा का विमान बीच समुद्र में हुआ क्रैश…. पायलट की सूझबूझ से बची 11 लोगों क जान


    वाशिंगटन।
    अगर प्लेन क्रैश के हादसे (Plane Crash Incidents) में किसी इंसान की जान बच जाए तो आप इसे चमत्कार का ही नाम देंगे। ऐसा ही कुछ यहां फ्लोरिडा (Florida) की एक प्लेन में सवार में 9 लोगों के साथ हुआ। अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) के बीचो-बीच एक कुछ ऐसा हुआ जिसे देखकर रेस्क्यू टीम भी दंग रह गई। यहां बहामास से उड़ान भरने वाला एक छोटा विमान तकनीकी खराबी के बाद समुद्र में गिर गया। हालांकि पायलट की सूझबूझ और अमेरिकी एयरफोर्स (US Air Force) की जाबांजी की वजह से 11 लोगों की जान बच गई है। रेस्क्यू टीम ने इसे चमत्कार से कम नहीं बताया है।

    इससे पहले 25 साल के अनुभव वाले पायलट इयान निक्सन के लिए यह 20 मिनट की एक रूटीन फ्लाइट थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ वह किसी बुरे सपने से कम नहीं। उड़ान के दौरान विमान का नेविगेशन सिस्टम फेल हो गया। फिर रेडियो ने भी काम करना बंद कर दिया और अंत में विमान के दोनों इंजन एक-एक करके ठप हो गए।


    विमान की करानी पड़ी ‘डिचिंग’

    जब पायलट के पास लैंडिंग का कोई रास्ता नहीं बचा, तो उन्होंने मियामी से करीब 175 मील दूर समंदर में विमान की ‘डिचिंग’ यानी पानी पर इमरजेंसी लैंडिंग करने का फैसला लिया। पायलट निक्सन ने एक बयान में बताया, “जैसे ही विमान पानी से टकराया, हमारी सांस अटक गई।” इसके बाद विमान पूरी तरह डूबने से पहले सभी 11 लोग लाइफ राफ्ट पर सवार होने में सफल रहे। हालांकि मदद के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।

    नाव पर फंसे यात्रियों को करीब 5 घंटे इंतजार करना पड़ा। इस बीच पायलट यात्रियों का हौसला बढ़ाता रहा। उम्मीद की किरण तब जगी जब उन्होंने अमेरिकी एयरफोर्स का रेस्क्यू विंग देखा। यह विमान एक एक ट्रेनिंग मिशन पर था। कोस्ट गार्ड से सिग्नल मिलते ही प्लेन को इस तरफ लाया गया और यात्रियों को बचा लिया गया।


    आज तक नहीं देखा ऐसा…

    रेस्क्यू टीम इस घटना से हैरान रह गई। कैप्टन रोरी व्हिपल ने एक बयान में कहा, “वे करीब 5 घंटे से राफ्ट पर थे। उन्हें देखकर ही पता चल रहा था कि वे शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके थे। वहीं एयरक्राफ्ट कमांडर एलिजाबेथ पियोवाटी ने कहा, “मैंने समंदर में विमान गिरने के बाद आज तक किसी को जिंदा बचते नहीं देखा। सभी का सुरक्षित होना सचमुच जादू की तरह है।”

    विमान में सवार यात्री ओलंपिया आउटेन ने अस्पताल पहुंचने के बाद कहा, “जब हमें बचाया गया, तो हर कोई खुशी से झूम उठा। हमें लग रहा था कि अब अंत करीब है, वह बिल्कुल किसी फिल्म के सीन जैसा था।” फिलहाल सभी 11 लोगों को फ्लोरिडा के अस्पताल ले जाया गया। इनमें से तीन को मामूली चोटें आई हैं।

  • समुद्र मंथन से प्रकट हुईं देवी अलक्ष्मी: क्यों जुड़ा है उनसे क्लेश और दरिद्रता का संबंध, जानिए विवाह की कथा

    समुद्र मंथन से प्रकट हुईं देवी अलक्ष्मी: क्यों जुड़ा है उनसे क्लेश और दरिद्रता का संबंध, जानिए विवाह की कथा


    नई दिल्‍ली । हिंदू पौराणिक मान्यताओं में जहां मां लक्ष्मी को धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है, वहीं उनकी बड़ी बहन देवी अलक्ष्मी को दरिद्रता, कलह और अशुभता का प्रतीक बताया गया है। मान्यता है कि दोनों देवियां समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, लेकिन स्वभाव और प्रभाव में एक-दूसरे के विपरीत हैं।

    अलक्ष्मी का प्राकट्य और स्वरूप

    पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले देवी अलक्ष्मी प्रकट हुईं, जिनके हाथ में मदिरा थी। उनका स्वरूप दुर्बल, लाल आंखों वाला और अस्वच्छ बताया गया है। कहा जाता है कि जहां गंदगी, झगड़ा, अधर्म और नकारात्मकता होती है, वहीं उनका वास होता है।

    लक्ष्मी-विवाह से जुड़ी शर्त

    इसके बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने की इच्छा जताई। विष्णु भी इस विवाह के लिए तैयार थे, लेकिन एक शर्त आ गई—लक्ष्मी ने कहा कि पहले उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का विवाह होगा, तभी वे स्वयं विवाह करेंगी।

    अलक्ष्मी का विवाह किससे हुआ?

    अलक्ष्मी के स्वरूप और स्वभाव के कारण कोई भी उनसे विवाह को तैयार नहीं था। तब विष्णु के आदेश पर उद्दालक ऋषि ने अलक्ष्मी से विवाह किया। विवाह के बाद जब ऋषि उन्हें अपने आश्रम ले गए, तो अलक्ष्मी ने वहां रहने से इनकार कर दिया, क्योंकि वहां अत्यधिक पवित्रता और यज्ञ की सुगंध थी।

    कहां करती हैं निवास?

    अलक्ष्मी ने स्वयं बताया कि उन्हें वही स्थान प्रिय है जहां गंदगी, कलह, अधर्म, झूठ और मांस-मदिरा का सेवन होता हो। इसके बाद उद्दालक ऋषि उन्हें अस्थायी रूप से पीपल के पेड़ के नीचे बैठाकर उचित स्थान खोजने चले गए, लेकिन लौटकर नहीं आए।

    कथा के अनुसार, तब भगवान विष्णु ने कहा कि पीपल वृक्ष उनका ही स्वरूप है, इसलिए अलक्ष्मी वहां निवास कर सकती हैं। तभी से माना जाता है कि अलक्ष्मी पीपल के पेड़ के नीचे रहती हैं।

    मान्यता और संदेश

    ऐसी मान्यता है कि जो लोग पीपल के वृक्ष की पूजा करते हैं, उन्हें अलक्ष्मी के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

    यह कथा प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश देती है कि जहां स्वच्छता, सत्य और सदाचार होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है, जबकि गंदगी और अधर्म अलक्ष्मी को आकर्षित करते हैं।