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  • टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

    टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चतुर लेग स्पिनरों में शामिल युजवेंद्र चहल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। आज बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले चहल कभी शतरंज की बिसात पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखते थे। आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें खेल बदलने पर मजबूर किया, लेकिन क्रिकेट में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम भारतीय टीम के सफल स्पिनरों में शामिल हो गया।

    23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद जिले में जन्मे युजवेंद्र चहल बचपन से ही शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। उन्होंने अंडर-12 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की और जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    हालांकि शतरंज में आगे बढ़ने के लिए लगातार आर्थिक सहयोग की जरूरत थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें इस खेल को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में चहल खेतों में अभ्यास करते थे। उनकी इच्छा तेज गेंदबाज बनने की थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन गेंदबाजी अपनाई और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर चहल को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

    चहल ने 1 फरवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए टी20 मुकाबले में इतिहास रच दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 25 रन देकर छह विकेट झटके और टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। उनका यह प्रदर्शन आज भी भारतीय टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चहल ने भारत के लिए 72 वनडे मैचों में 121 विकेट और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 96 विकेट हासिल किए हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विविधता और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल करती है।

    शतरंज की बिसात से क्रिकेट के मैदान तक का युजवेंद्र चहल का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि

    'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज में न्यूजीलैंड के युवा स्पिनर जयडेन लेनोक्स ने अपनी शानदार गेंदबाजी से सभी का ध्यान खींच लिया। हालांकि सीरीज का अंतिम मुकाबला न्यूजीलैंड हार गया, लेकिन टीम ने 3-2 से सीरीज अपने नाम की। इस सफलता में लेनोक्स की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पूरी सीरीज में 14 विकेट लेकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार अपने नाम किया।

    लेनोक्स की फिरकी के सामने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज पूरी श्रृंखला में संघर्ष करते नजर आए। पांच मुकाबलों में 14 विकेट लेने के साथ उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। वह अब एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने वाले स्पिनरों की सूची में पूर्व दिग्गज गेंदबाज अनिल कुंबले, शेन वॉर्न और शाहिद अफरीदी से आगे निकल गए हैं। इन तीनों महान स्पिनरों ने अपने-अपने करियर में किसी एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में 13-13 विकेट लिए थे, जबकि लेनोक्स ने 14 विकेट लेकर यह आंकड़ा पार कर दिया।

    इस प्रदर्शन के साथ लेनोक्स ने श्रीलंका के स्पिनर अकिला धनंजय की भी बराबरी कर ली है। धनंजय ने वर्ष 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में 14 विकेट हासिल किए थे। अब दोनों संयुक्त रूप से इस सूची में बराबरी पर हैं।

    एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड भारत के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा के नाम दर्ज है, जिन्होंने एक श्रृंखला में 18 विकेट झटके थे। इस सूची में दूसरे स्थान पर भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव हैं, जिन्होंने एक वनडे सीरीज में 17 विकेट लेने का कारनामा किया था।

    सीरीज के पांचवें और अंतिम मुकाबले में भी लेनोक्स ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 9 ओवर में केवल 35 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए और न्यूजीलैंड को मुकाबले में बनाए रखा। हालांकि वेस्टइंडीज ने शिमरॉन हेटमायर की नाबाद 69 रन और शेरफेन रदरफोर्ड की 61 रन की बेहतरीन पारियों की बदौलत 269 रन का लक्ष्य 47.3 ओवर में हासिल कर लिया।

    लेनोक्स के लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि न्यूजीलैंड को सीमित ओवरों के क्रिकेट में एक भरोसेमंद स्पिनर मिल गया है। उनकी नियंत्रण भरी गेंदबाजी और विकेट निकालने की क्षमता भविष्य में टीम के लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है।

  • अफगानिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव वनडे कप्तानी से हटे हशमतुल्लाह शाहिदी नए कप्तान की तलाश हुई तेज

    अफगानिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव वनडे कप्तानी से हटे हशमतुल्लाह शाहिदी नए कप्तान की तलाश हुई तेज


    नई दिल्ली । अफगानिस्तान क्रिकेट टीम को वनडे प्रारूप में बड़ा झटका लगा है। टीम के अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने वनडे कप्तानी छोड़ने का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया है। वर्ष 2022 से टीम की कमान संभाल रहे शाहिदी ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला उन्होंने पूरी इच्छा और सम्मान के साथ लिया है। उनके इस निर्णय के बाद अब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सामने नए कप्तान के चयन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है खासकर ऐसे समय में जब टीम 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों में जुटी हुई है।

    हशमतुल्लाह शाहिदी का कप्तानी कार्यकाल अफगानिस्तान क्रिकेट के सबसे सफल दौरों में गिना जाता है। उनकी अगुवाई में टीम ने न केवल लगातार बेहतर प्रदर्शन किया बल्कि दुनिया की कई बड़ी टीमों को हराकर अपनी अलग पहचान भी बनाई। उन्होंने एशिया कप वनडे विश्व कप 2023 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जैसे बड़े टूर्नामेंटों में टीम का नेतृत्व किया और अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2023 में शाहिदी की कप्तानी में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका और नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीमों को हराकर क्रिकेट जगत को चौंका दिया था। टीम ने अंक तालिका में छठा स्थान हासिल किया और शानदार प्रदर्शन के दम पर चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भी क्वालीफाई किया। यह उपलब्धि अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है।

    शाहिदी ने अपने भावुक संदेश में टीम के खिलाड़ियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने लिखा कि कप्तान बनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा और टीम की हर उपलब्धि पूरी टीम की मेहनत एकता और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने खिलाड़ियों कोचिंग स्टाफ अधिकारियों और क्रिकेट बोर्ड का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग और विश्वास के बिना यह सफर संभव नहीं था।

    द्विपक्षीय सीरीज में भी शाहिदी का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। उनकी कप्तानी में अफगानिस्तान ने बांग्लादेश के खिलाफ तीन सीरीज जीती जबकि जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ भी महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। कप्तान के रूप में उन्होंने 27 वनडे मुकाबलों में टीम को जीत दिलाई और अपनी शांत नेतृत्व शैली से खिलाड़ियों का भरोसा जीता।

    बतौर बल्लेबाज भी शाहिदी का योगदान बेहद अहम रहा। उन्होंने कप्तानी के दौरान लगातार जिम्मेदारी निभाई और मध्यमक्रम को मजबूती दी। वनडे क्रिकेट में उनका एकमात्र शतक भारत के खिलाफ आया जब उन्होंने 131 गेंदों में शानदार 102 रन बनाकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। उनकी संयमित बल्लेबाजी और नेतृत्व कौशल ने अफगानिस्तान को कई यादगार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    अब अफगानिस्तान को आयरलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलनी है और इसके बाद टीम का पूरा ध्यान 2027 विश्व कप की तैयारियों पर रहेगा। ऐसे में नया कप्तान चुनना बोर्ड के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला होगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि शाहिदी का इस्तीफा टीम के लिए चुनौती जरूर है लेकिन उनके द्वारा तैयार की गई मजबूत टीम भविष्य में भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है।

  • केंसिंग्टन ओवल में कैरेबियाई तूफान हेटमायर और रदरफोर्ड ने पलटा मैच न्यूजीलैंड को अंतिम वनडे में मिली हार

    केंसिंग्टन ओवल में कैरेबियाई तूफान हेटमायर और रदरफोर्ड ने पलटा मैच न्यूजीलैंड को अंतिम वनडे में मिली हार


    नई दिल्ली । बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल मैदान पर खेले गए पांचवें और अंतिम वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को दो विकेट से हराकर सीरीज का समापन जीत के साथ किया। हालांकि इस हार के बावजूद न्यूजीलैंड ने पांच मैचों की वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम करने में सफलता हासिल की। मुकाबले में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने दबाव के क्षणों में संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 269 रन के लक्ष्य को 47.3 ओवर में आठ विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज को अकीम ऑगस्टे और जस्टिन ग्रीव्स ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 57 रन जोड़कर मजबूत आधार तैयार किया। ग्रीव्स ने 22 रन बनाए जबकि ऑगस्टे ने आक्रामक अंदाज में 34 रन की पारी खेली। इसके बाद कीसी कार्टि और कप्तान शाई होप ने अच्छी शुरुआत तो की लेकिन बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके। एक समय वेस्टइंडीज का स्कोर 123 रन पर चार विकेट था और टीम मुश्किल में दिखाई दे रही थी।

    ऐसे समय में शेरफेन रदरफोर्ड और शिमरॉन हेटमायर ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 95 रन की अहम साझेदारी कर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। रदरफोर्ड ने 64 गेंदों पर 61 रन बनाए जिसमें दो चौके और पांच शानदार छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर हेटमायर ने बेहद परिपक्व और आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 64 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाए। उनकी पारी में दो चौके और चार लंबे छक्के शामिल रहे। अंत तक क्रीज पर डटे रहकर उन्होंने टीम को यादगार जीत दिलाई।

    न्यूजीलैंड की ओर से जैकब डफी और जेडन लेनोक्स ने तीन तीन विकेट लेकर मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा लेकिन अंतिम क्षणों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने कोई गलती नहीं की।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और शुरुआती विकेट जल्दी गिर गया। इसके बाद विल यंग और निक केली ने पारी को संभालते हुए दूसरे विकेट के लिए 86 रन जोड़े। विल यंग ने 56 रन जबकि निक केली ने 64 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। मध्यक्रम में टॉम लाथम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 69 रन बनाए और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड ने निर्धारित 50 ओवर में नौ विकेट पर 268 रन बनाए।

    वेस्टइंडीज की ओर से 19 वर्षीय युवा गेंदबाज विटेल लॉव्स ने प्रभावित किया और दो विकेट अपने नाम किए। अनुभवी तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ ने भी दो सफलताएं हासिल कर न्यूजीलैंड की रन गति पर अंकुश लगाया।

    भले ही अंतिम मुकाबले में जीत वेस्टइंडीज के हिस्से आई लेकिन पूरी सीरीज में लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर न्यूजीलैंड ने 3-2 से ट्रॉफी अपने नाम की। अंतिम मैच ने दोनों टीमों के संघर्ष और रोमांचक क्रिकेट का शानदार उदाहरण पेश किया।

  • आखिरी मैच में शतक लगा दो यार…', रोहित शर्मा के संभावित संन्यास पर भावुक हुए आकाश चोपड़ा, लॉर्ड्स में यादगार विदाई की जताई उम्मीद

    आखिरी मैच में शतक लगा दो यार…', रोहित शर्मा के संभावित संन्यास पर भावुक हुए आकाश चोपड़ा, लॉर्ड्स में यादगार विदाई की जताई उम्मीद

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के संभावित वनडे संन्यास को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा वनडे श्रृंखला के बीच यह अटकलें सामने आई हैं कि तीसरे मुकाबले के बाद रोहित इस प्रारूप को भी अलविदा कह सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन क्रिकेट जगत में इस विषय पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने रोहित शर्मा को लेकर भावुक टिप्पणी की है।

    आकाश चोपड़ा ने कहा कि यदि इंग्लैंड के खिलाफ होने वाला मुकाबला वास्तव में रोहित शर्मा के वनडे करियर का अंतिम मैच साबित होता है, तो वह चाहेंगे कि भारतीय बल्लेबाज अपने करियर का समापन एक यादगार पारी के साथ करें। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि रोहित को अपने अंतिम मुकाबले में शतक बनाकर उसी अंदाज में विदाई लेनी चाहिए, जिस अंदाज में उन्होंने वर्षों तक वनडे क्रिकेट पर अपनी छाप छोड़ी है।

    पूर्व क्रिकेटर ने हाल के मैचों में रोहित शर्मा की बल्लेबाजी शैली में आए बदलाव की भी चर्चा की। उनके अनुसार पहले रोहित पावरप्ले के शुरुआती ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए तेजी से रन बनाते थे, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ हालिया मुकाबलों में उनका दृष्टिकोण अलग दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि दूसरे वनडे में रोहित ने अपेक्षाकृत धीमी बल्लेबाजी की और यह उनकी सामान्य शैली से अलग नजर आया।

    आकाश चोपड़ा का मानना है कि कप्तानी छोड़ने के बाद रोहित शर्मा के खेल में बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पहले रोहित शुरुआत से ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब वह अधिक संयमित बल्लेबाजी करते दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यह बदलाव चर्चा का विषय है और क्रिकेट प्रेमियों ने भी इसे महसूस किया है।

    उन्होंने चयन प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी। आकाश चोपड़ा का कहना था कि यदि टीम प्रबंधन भविष्य की योजना बना रहा है, तब भी अनुभवी खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार अगले बड़े वैश्विक टूर्नामेंट में अभी समय बाकी है और ऐसे में रोहित जैसे अनुभवी खिलाड़ी को कुछ और मौके दिए जाने पर भी विचार किया जा सकता था। उनका मानना है कि अनुभव और निरंतर प्रदर्शन किसी भी टीम के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

    रोहित शर्मा पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। ऐसे में यदि वह वनडे क्रिकेट से भी विदाई लेते हैं तो भारतीय क्रिकेट का एक सफल अध्याय समाप्त होगा। अपने लंबे करियर में रोहित ने कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अनेक रिकॉर्ड अपने नाम किए। उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों ने भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।

    फिलहाल सभी की निगाहें इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले अगले मुकाबले पर टिकी हैं। यदि संन्यास की चर्चाएं सही साबित होती हैं तो क्रिकेट प्रेमी रोहित शर्मा को एक यादगार पारी खेलते हुए देखना चाहेंगे। वहीं यदि ऐसा नहीं होता है, तो भी उनके भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार रहेगा। क्रिकेट जगत में आकाश चोपड़ा की भावुक प्रतिक्रिया ने इन चर्चाओं को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।

  • 968 दिन बाद वनडे में वापसी, बुमराह ने रचा इतिहास, इंग्लैंड की धरती पर बनाए दो बड़े रिकॉर्ड

    968 दिन बाद वनडे में वापसी, बुमराह ने रचा इतिहास, इंग्लैंड की धरती पर बनाए दो बड़े रिकॉर्ड


    बर्मिंघम। लंबे इंतजार के बाद वनडे क्रिकेट में वापसी करने वाले जसप्रीत बुमराह ने अपनी वापसी को यादगार बना दिया। 2023 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल के बाद पहली बार 50 ओवर के प्रारूप में उतरे बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में खेले गए मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।

    968 दिन बाद वनडे मैदान पर लौटे बुमराह ने न सिर्फ अपने 150 वनडे विकेट पूरे किए, बल्कि इंग्लैंड की धरती पर भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बन गए।

    150 वनडे विकेट पूरे, शमी और कुलदीप के खास क्लब में शामिल
    जसप्रीत बुमराह ने वनडे क्रिकेट में 150 विकेट का आंकड़ा महज 4605 गेंदों में पूरा किया। इसके साथ ही वह भारत के लिए सबसे कम गेंदों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले तीसरे गेंदबाज बन गए।

    भारत के लिए सबसे कम गेंदों में 150 वनडे विकेट लेने वाले गेंदबाज
    मोहम्मद शमी – 4070 गेंद
    कुलदीप यादव – 4513 गेंद
    जसप्रीत बुमराह – 4605 गेंद
    अजीत आगरकर – 5027 गेंद
    इरफान पठान – 5131 गेंद

    बुमराह ने मुकाबले के 13.1वें ओवर में अपनी पहली ही गेंद पर इंग्लैंड के बल्लेबाज हैरी ब्रूक को आउट कर दिया। उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर शॉर्ट ऑफ लेंथ गेंद फेंकी, जिसमें अतिरिक्त उछाल और बाहर की ओर मूवमेंट देखने को मिला। ब्रूक ने गेंद को थर्ड मैन की दिशा में खेलने की कोशिश की, लेकिन बल्ले का बाहरी किनारा लग गया। पहली स्लिप पर मौजूद रोहित शर्मा ने आसान कैच पकड़कर उन्हें पवेलियन भेज दिया।

    लंबे अंतराल के बाद वापसी के बावजूद बुमराह की गेंदबाजी में वही पुरानी धार नजर आई। उनकी रफ्तार, सटीक लाइन और खतरनाक मूवमेंट ने साबित कर दिया कि वह अब भी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के सबसे बड़े हथियारों में शामिल हैं।

    इंग्लैंड में बुमराह का जलवा, बने नंबर-1 भारतीय गेंदबाज
    इंग्लैंड की परिस्थितियों में बुमराह का प्रदर्शन हमेशा प्रभावशाली रहा है। इस मुकाबले के बाद वह इंग्लैंड की धरती पर वनडे क्रिकेट में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए।

    इंग्लैंड में भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे विकेट लेने वाले गेंदबाज
    जसप्रीत बुमराह – 31 विकेट
    रवींद्र जडेजा – 30 विकेट
    भुवनेश्वर कुमार – 28 विकेट
    मदन लाल – 27 विकेट
    मोहम्मद शमी – 26 विकेट

    वापसी के साथ मिला रिकॉर्ड का तोहफा
    बुमराह के लिए यह मुकाबला केवल टीम में वापसी का मौका नहीं था, बल्कि अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का भी अवसर था। चोट के कारण लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैदान पर उतरते ही उन्होंने दिखा दिया कि क्यों उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में गिना जाता है। करीब 968 दिन का इंतजार खत्म हुआ और बुमराह ने अपनी वापसी में वही पुराना अंदाज दिखाया—सटीक गेंदबाजी, घातक रफ्तार और रिकॉर्ड बनाने की क्षमता।

  • इंग्लैंड के खिलाफ विराट के बल्ले से बन सकते हैं इतिहास के नए रिकॉर्ड 15 हजार वनडे रन से सिर्फ 203 रन दूर

    इंग्लैंड के खिलाफ विराट के बल्ले से बन सकते हैं इतिहास के नए रिकॉर्ड 15 हजार वनडे रन से सिर्फ 203 रन दूर


    नई दिल्ली ।  भारत और इंग्लैंड के बीच मंगलवार से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद खास होने जा रही है। इस सीरीज के साथ टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली करीब छह महीने बाद एक बार फिर नीली जर्सी में मैदान पर उतरेंगे। उनकी वापसी सिर्फ भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती देने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इस सीरीज में उनके बल्ले से कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी टूट सकते हैं। क्रिकेट जगत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विराट इंग्लैंड के खिलाफ अपने शानदार रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए इतिहास के नए अध्याय लिख पाएंगे।

    विराट कोहली अब तक भारत के लिए 311 वनडे मुकाबले खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 299 पारियों में 58.71 की शानदार औसत से 14797 रन बनाए हैं। अब वह वनडे क्रिकेट में 15000 रन पूरे करने से केवल 203 रन दूर हैं। यदि वह इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की इस सीरीज में यह आंकड़ा हासिल कर लेते हैं तो वनडे क्रिकेट में 15000 रन बनाने वाले दुनिया के सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन जाएंगे। इस सूची में फिलहाल केवल महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का नाम शामिल है।

    इस उपलब्धि से भी बड़ी बात यह है कि विराट के पास सबसे तेज 15000 वनडे रन पूरे करने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने का सुनहरा मौका है। सचिन तेंदुलकर ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 359 पारियां खेली थीं जबकि विराट फिलहाल केवल 299 पारियां खेल चुके हैं। यदि वह इस सीरीज में 203 रन बना लेते हैं तो वह सचिन का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कम पारियों में 15000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। यह उपलब्धि उनके शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ देगी।

    वनडे क्रिकेट में विराट का रिकॉर्ड पहले से ही बेहद शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 54 शतक और 77 अर्धशतक लगाए हैं तथा दुनिया के सबसे सफल एकदिवसीय बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। रन बनाने की निरंतरता और बड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है।

    इंग्लैंड के खिलाफ भी विराट का प्रदर्शन हमेशा प्रभावशाली रहा है। उन्होंने इंग्लैंड के विरुद्ध 38 वनडे पारियों में लगभग 41 की औसत से 1397 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से तीन शतक और 10 अर्धशतक निकले हैं। खास बात यह है कि इंग्लैंड की सरजमीं पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद दमदार रहा है। वहां उन्होंने 33 पारियों में 51.88 की औसत से 1349 रन बनाए हैं जिनमें एक शतक और 12 अर्धशतक शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि इंग्लिश परिस्थितियां विराट के खेल के अनुकूल रही हैं और उन्होंने वहां हमेशा जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी की है।

    भारतीय टीम भी चाहेगी कि विराट अपनी वापसी को यादगार बनाएं और बल्लेबाजी क्रम की अगुवाई करते हुए टीम को सीरीज में मजबूत शुरुआत दिलाएं। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम के लिए विराट का अनुभव और बड़े मैचों का दबाव झेलने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच पहला वनडे 14 जुलाई को खेला जाएगा जबकि दूसरा मुकाबला 16 जुलाई और तीसरा एवं अंतिम वनडे 19 जुलाई को होगा। इन तीन मुकाबलों में सिर्फ सीरीज की जीत ही दांव पर नहीं होगी बल्कि करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की नजर विराट कोहली के बल्ले से बनने वाले उन रिकॉर्ड्स पर भी रहेगी जो उन्हें वनडे क्रिकेट के इतिहास में एक नई ऊंचाई पर पहुंचा सकते हैं।

  • सलमान आगा ने रन आउट विवाद पर खेल भावना का पाठ पढ़ाया

    सलमान आगा ने रन आउट विवाद पर खेल भावना का पाठ पढ़ाया



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज सलमान आगा ने बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे में अपने विवादित रन आउट के बाद खेल भावना (sportsman spirit) पर जोर देते हुए नया संदेश दिया। पारी के 39वें ओवर में बांग्लादेश के कप्तान मेहदी हसन मिराज गेंदबाजी कर रहे थे। चौथी गेंद पर मोहम्मद रिजवान का शॉट सीधे नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े सलमान आगा की ओर गया। मिराज ने गेंद उठाई और देखा कि सलमान अभी क्रीज के बाहर थे, इसके बाद उन्होंने तुरंत रन आउट के लिए अंपायर से अपील की। थर्ड अंपायर ने नियम के तहत उन्हें आउट करार दिया।

    घटना के बाद सलमान आगा ने कहा कि वे समझते हैं कि मिराज ने नियम के दायरे में ही सही काम किया। लेकिन अगर उन्हें मौका मिलता, तो वे नियम से ऊपर खेल भावना को चुनते। उन्होंने कहा, “यह बस उस पल की गरमा-गरमी थी। मैं हमेशा नियम का पालन करता हूं, लेकिन खेल में स्थिति चाहे जैसी भी हो, खेल भावना सबसे ऊपर होनी चाहिए।”

    सलमान ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, “जो मेहदी ने किया, वह नियम के दायरे में सही है। अगर उन्हें लगता है कि यह सही है, तो यह सही है। लेकिन मेरे नजरिए से, मैं चीजें अलग तरह से करता। मैं हमेशा खेल भावना को प्राथमिकता दूंगा।” उनके इस बयान ने साबित किया कि क्रिकेट में सिर्फ नियमों का पालन ही नहीं बल्कि खेल भावना की भी उतनी ही अहमियत है।

    सलमान आगा का यह दृष्टिकोण खिलाड़ियों और फैन्स के लिए सीखने योग्य है। उन्होंने यह संदेश दिया कि खेल में जीत और हार महत्वपूर्ण है, लेकिन खेल भावना और ईमानदारी सबसे ऊपर होनी चाहिए। फैन्स ने उनके इस बयान को सराहा और इसे क्रिकेट के लिए सकारात्मक संदेश माना। यह घटना याद दिलाती है कि नियम के भीतर खेलते हुए भी खिलाड़ी खेल की आत्मा को हमेशा कायम रख सकते हैं।

    इस तरह सलमान आगा ने अपने रन आउट विवाद को अवसर में बदलते हुए खेल भावना की मिसाल पेश की। उनके बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्रिकेट में सम्मान और ईमानदारी हमेशा जीत से ऊपर हैं।

  • न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर हुए वॉशिंगटन सुंदर, पसली की चोट बनी बाधा…

    न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर हुए वॉशिंगटन सुंदर, पसली की चोट बनी बाधा…


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी वनडे सीरीज में बड़ा झटका लगा है। ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर पसली की चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। यह चोट उन्हें वडोदरा में खेले गए पहले वनडे मुकाबले के दौरान लगी थी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि सुंदर को बाईं ओर निचली पसली में खिंचाव महसूस हुआ और मेडिकल टीम ने उन्हें आगे के मैचों से आराम देने का फैसला किया।

    मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल ने भी संकेत दिए थे कि सुंदर पूरी तरह फिट नहीं थे। गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वॉशिंगटन ने दर्द के बावजूद 5 ओवर गेंदबाजी की लेकिन इसके बाद उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। 26 वर्षीय सुंदर ने न्यूजीलैंड की पारी के दौरान 5 ओवर में 27 रन दिए और गेंदबाजी करते समय पसलियों में खिंचाव महसूस होने के कारण दोबारा फील्डिंग के लिए मैदान पर नहीं लौट सके।इसके बावजूद सुंदर ने भारतीय टीम की रन चेज में बल्लेबाजी करने का फैसला किया। उन्होंने नंबर-8 पर केएल राहुल के साथ मिलकर अहम साझेदारी निभाई। दोनों ने मिलकर 16 गेंदों में 27 रन जोड़े जिससे टीम की जीत आसान हुई। सुंदर ने नाबाद 7 रन बनाए जबकि राहुल 29 रन पर नाबाद लौटे। भारत ने 49 ओवर में 6 विकेट खोकर 306 रन बनाते हुए मुकाबला चार विकेट से अपने नाम किया।

    केएल राहुल ने मैच के बाद बताया कि उन्हें सुंदर की चोट की गंभीरता का अंदाजा नहीं था। राहुल के अनुसार मुझे बस इतना पता था कि पहली पारी में उन्हें थोड़ी परेशानी हुई थी। बल्लेबाजी के दौरान वह गेंद को अच्छे से टाइम कर रहे थे इसलिए चोट इतनी गंभीर नहीं लगी। रन रेट पहले से अच्छा था जिससे सुंदर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा।वॉशिंगटन सुंदर इस सीरीज में चोटिल होने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। इससे पहले विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत प्रैक्टिस सत्र के दौरान पसली में चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो चुके हैं। उनकी जगह ध्रुव जुरेल को टीम में शामिल किया गया था। वहीं सीरीज शुरू होने से पहले ही तिलक वर्मा भी चोट के चलते बाहर हो गए थे।

    लगातार चोटों के चलते टीम इंडिया के संयोजन पर असर पड़ सकता है। चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के सामने अब यह चुनौती है कि वे आगे के मैचों के लिए सही विकल्प चुनें और टीम की बैलेंसिंग को बनाए रखें।वॉशिंगटन सुंदर के बाहर होने से टीम की गेंदबाजी और मध्यक्रम में विकल्प सीमित हो जाएंगे। इससे भारतीय टीम को अगले मैचों में रणनीति और प्लेइंग इलेवन तय करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी।

  • यशस्वी जायसवाल फॉर्म और किस्मत का सही संयोजन जरूरी

    यशस्वी जायसवाल फॉर्म और किस्मत का सही संयोजन जरूरी

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे यशस्वी जायसवाल ने खुद को एक शानदार बल्लेबाज के रूप में साबित किया है जो तीनों फॉर्मेट में शतक लगा चुका है। उनकी क्षमता किसी भी क्रिकेट फॉर्मेट में खेलने और प्रदर्शन करने की है लेकिन फिर भी उन्हें अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 24 साल के यशस्वी जायसवाल का जन्म 28 दिसंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में हुआ था। मुंबई में अपने परिवार के साथ बसीं जायसवाल ने यहां क्रिकेट में अपना करियर बनाने का सपना देखा और बेहद कठिन आर्थिक हालातों के बावजूद उन्होंने संघर्ष करके खुद को एक अच्छे बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया।
    घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 14 जुलाई 2023 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने उसी साल टी20 डेब्यू किया और 2025 में वनडे डेब्यू किया। जायसवाल ने अब तक तीनों फॉर्मेट में खुद को एक विस्फोटक और भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज के रूप में साबित किया है। वह उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने तीनों फॉर्मेट में शतक लगाया है। हालांकि इसके बावजूद वनडे और टी20 में उनकी जगह अभी तक स्थिर नहीं हो पाई है।

    किस्मत का साथ जरूरी है

    क्रिकेट में फॉर्म के साथ-साथ किस्मत का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। यशस्वी जायसवाल के पास फॉर्म तो है लेकिन उनकी किस्मत उनके साथ उतनी मेहरबान नहीं है जितनी होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर 2024 में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए उनका चयन तो किया गया था लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। वहीं 2026 के टी20 विश्व कप के लिए उन्हें टीम में जगह नहीं मिली जो उनके लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।वनडे में भी जायसवाल को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गिल की चोट के कारण मौका मिला था और उन्होंने आखिरी वनडे मैच में शतक भी लगाया। हालांकि गिल की वापसी के बाद यह देखना होगा कि उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं।

    टेस्ट क्रिकेट में सफलता

    टेस्ट क्रिकेट में जायसवाल का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। डेब्यू के बाद से ही उन्हें लगातार मौके मिलते रहे हैं और उन्होंने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी चुनौतीपूर्ण पिचों पर भी रन बनाए हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनकी सफलता ने उन्हें भारतीय टीम में एक महत्वपूर्ण सदस्य बना दिया है।आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। वह राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं और वहां भी उन्होंने अपने आक्रामक खेल से अपनी पहचान बनाई है। आईपीएल में उनका रन-स्कोरिंग फॉर्म जबरदस्त रहा है जिससे उन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता है।

    जायसवाल के आंकड़े

    यशस्वी जायसवाल ने अब तक 28 टेस्ट मैचों में 7 शतकों के साथ 2511 रन बनाए हैं। वहीं 4 वनडे मैचों में 1 शतक के साथ 171 रन और 23 टी20 मैचों में 1 शतक और 5 अर्धशतकों के साथ 723 रन उनके नाम पर दर्ज हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि वह किसी भी फॉर्मेट में लगातार प्रदर्शन कर सकते हैं और भविष्य में भारतीय टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी साबित हो सकते हैं।

    भविष्य की उम्मीदें

    यद्यपि यशस्वी जायसवाल को फिलहाल लगातार खेलने का मौका नहीं मिल रहा है लेकिन उनका भविष्य बेहद उज्जवल दिखता है। क्रिकेट में फॉर्म और किस्मत दोनों का साथ होना जरूरी होता है और जायसवाल के मामले में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे आने वाले समय में उन्हें और अधिक मौके मिलते हैं या नहीं। यशस्वी जायसवाल का क्रिकेट करियर अब तक शानदार रहा है और उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि वह भविष्य में तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर मैदान में अपना जलवा दिखाते रहेंगे।