Tag: Odisha Politics

  • इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा

    इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा


    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार विस्तार से अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओडिशा के संबलपुर से भाजपा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे के फैसले और युवा पीढ़ी को लेकर अपनी सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि जेन जी उनके लिए अपने बच्चों की तरह हैं और कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के बच्चों का भविष्य और उनकी सुरक्षा है।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे देश में पैदा हुए हैं और इन बच्चों की अपनी आकांक्षाएं हैं। उनके मुताबिक यही युवा आने वाले समय में भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा। नीट विवाद के बीच उन्होंने देश और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया।

    प्रधान ने इससे पहले भी अपने इस्तीफे को लेकर यही तर्क दिया था। उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई की घटना को देखते हुए और बच्चों तथा देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उनका आरोप रहा कि जेन जी के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई। अब भुवनेश्वर में छात्रों और शिक्षकों के बीच दिए गए संबोधन में उन्होंने एक बार फिर अपने इसी रुख को दोहराया।

    हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर विवाद के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान को अपने गृह राज्य ओडिशा में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीजू जनता दल के कार्यकर्ता उनके कई कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रायराखोल में एक कार्यक्रम के दौरान भी प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। विरोध के बीच प्रधान ने कहा कि वह इस तरह की नारेबाजी से परेशान नहीं हैं। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा तब भी वह वापस नहीं जाएंगे बल्कि लौटकर आएंगे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक युवाओं को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि नवीन बाबू उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा व्यक्ति बताते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है जिससे राज्य के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी हो।

    प्रधान ने कहा कि संभव है कि वह राज्य के लिए सम्मान न ला पा रहे हों लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी भी ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। इस दौरान सभा में मौजूद लोगों ने उनके सवाल के जवाब में समर्थन जताया। कार्यक्रम में बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा के उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे।

    धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्र नीट से जुड़े विवादों को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर प्रधान अपने फैसले को युवाओं और देश की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि पद छोड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और ओडिशा की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके बयान से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में नीट विवाद के साथ ओडिशा की राजनीतिक लड़ाई में भी उनका मुद्दा प्रमुख बना रह सकता है।

  • BJD से BJP तक का सफर, कौन हैं देबाशीष सामंतराय जिन्हें मिला राज्यसभा टिकट

    BJD से BJP तक का सफर, कौन हैं देबाशीष सामंतराय जिन्हें मिला राज्यसभा टिकट


    नई दिल्ली। ओडिशा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। बीजू जनता दल (BJD) से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद देबाशीष सामंतराय को पार्टी ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि उन्होंने BJP की सदस्यता महज 10 दिन पहले ही ली थी और अब उन्हें सीधे उच्च सदन की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। सामंतराय पहले भी तीन बार विधायक रह चुके हैं और फरवरी 2024 में उन्हें BJD की ओर से राज्यसभा भेजा गया था। उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक तय था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 25 मई को पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

    इस्तीफे के पीछे क्या रही वजह?
    देबाशीष सामंतराय ने BJD छोड़ने की वजह पार्टी के भीतर बढ़ती उपेक्षा को बताया है। उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से दूर रखा जा रहा था और वे अपने राजनीतिक गुरु तथा BJD प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पार्टी के भीतर नौकरशाह से नेता बने वी. के. पांडियन की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संगठन में उनके प्रभाव के कारण कई पुराने नेताओं को किनारे किया जा रहा है। BJD छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा “विकसित भारत” के विजन से प्रेरित होकर नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही।

    BJP की रणनीति या सियासी संदेश? 
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP का यह कदम केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इससे पहले भी पार्टी ने BJD के कई नेताओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सामंतराय को उम्मीदवार बनाना इस बात का संकेत है कि BJP ओडिशा में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, खासकर राज्यसभा जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर।

    उपचुनाव में जीत लगभग तय?
    चुनाव आयोग ने ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। 147 सदस्यों वाली विधानसभा में BJP के पास स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में देबाशीष सामंतराय की जीत लगभग तय मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य विपक्षी दल BJD और कांग्रेस इस उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने से भी बच सकती हैं, जिससे मुकाबला और आसान हो जाएगा।

    ओडिशा की राजनीति में नया मोड़
    इस घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ इसे BJP की मजबूत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

  • ओडिशा की सियासत में बड़ा उलटफेर, नवीन पटनायक के भरोसेमंद चेहरे ने छोड़ी पार्टी, नए समीकरणों की अटकलें तेज

    ओडिशा की सियासत में बड़ा उलटफेर, नवीन पटनायक के भरोसेमंद चेहरे ने छोड़ी पार्टी, नए समीकरणों की अटकलें तेज

    नई दिल्ली । ओडिशा की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राज्य के राजनीतिक माहौल को अचानक गर्म कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा जब उनके करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज कर दिया है।

    देबाशीष सामंतराय लंबे समय से पार्टी के महत्वपूर्ण चेहरों में गिने जाते रहे हैं। संगठन और राजनीतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल माना जाता था। ऐसे में उनका अचानक लिया गया यह फैसला राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है। खासकर ऐसे समय में जब हालिया चुनावों के बाद पार्टी पहले से ही कई चुनौतियों का सामना करती दिखाई दे रही है।

    अपने इस्तीफे के साथ जारी संदेश में देबाशीष सामंतराय ने पार्टी के भीतर उपेक्षा और असहज माहौल का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ उन्हें ऐसा महसूस होने लगा था कि संगठन में उनकी भूमिका लगातार सीमित होती जा रही है और उनकी सेवाओं को वह महत्व नहीं मिल रहा जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने इसे जरूरी समझा।

    हालांकि पार्टी से अलग होने के बावजूद उन्होंने नेतृत्व के प्रति सम्मान और आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में मिले अवसरों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जनता की सेवा करने का मौका मिला और उन्होंने हमेशा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके इस बयान को राजनीतिक शिष्टाचार और संतुलन के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इस घटनाक्रम का असर राज्यसभा में पार्टी की स्थिति पर भी पड़ा है। एक सांसद के कम होने के बाद उच्च सदन में पार्टी की ताकत पहले की तुलना में और कमजोर हुई है। ऐसे समय में जब राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दल अपनी उपस्थिति मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, यह बदलाव पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।

    वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आने वाले समय में देबाशीष सामंतराय किसी नए राजनीतिक मंच के साथ नजर आ सकते हैं। हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन चर्चाओं ने राज्य की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है।

    फिलहाल यह राजनीतिक घटनाक्रम केवल एक इस्तीफा नहीं बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों की एक बड़ी तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह फैसला ओडिशा की राजनीति पर कितना असर डालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।