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  • शिवपुरी पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, पुनीत वाजपेयी बने सिटी कोतवाली प्रभारी, 19 अधिकारियों के तबादले

    शिवपुरी पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, पुनीत वाजपेयी बने सिटी कोतवाली प्रभारी, 19 अधिकारियों के तबादले


    शिवपुरी जिले में पुलिस विभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 19 निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने 21 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल में कई थानों के प्रभारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है।

    तबादला सूची में सबसे प्रमुख बदलाव शिवपुरी सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी पद पर हुआ है। निरीक्षक पुनीत वाजपेयी, जो इससे पहले कोलारस थाने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उन्हें अब कोतवाली का नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है। वहीं, कोतवाली के मौजूदा थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित दुबे को उनके पद से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इस बदलाव के बाद कोतवाली की जिम्मेदारी पुनीत वाजपेयी संभालेंगे।

    कोलारस थाने में भी नए प्रभारी की नियुक्ति की गई है। निरीक्षक जितेंद्र चंदेलिया को पुलिस लाइन से स्थानांतरित कर कोलारस थाना प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले वह पुलिस लाइन में पदस्थ थे। अब उन्हें थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नियुक्ति के साथ कोलारस में थाना प्रभारी का दायित्व बदल गया है।

    पोहरी थाने की कमान निरीक्षक मनीष कुमार धाकड़ को सौंपी गई है। वह भी पुलिस लाइन से स्थानांतरित होकर पोहरी पहुंचेंगे। वहीं, पोहरी के मौजूदा थाना प्रभारी निरीक्षक रवि चौहान को बैराड़ थाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह पोहरी और बैराड़ थानों में भी प्रभारियों की अदला-बदली की गई है।

    उप निरीक्षक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। अरविंद छारी को कोतवाली से स्थानांतरित कर दिनारा थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं, दिनारा में पदस्थ उप निरीक्षक रविंद्र कुशवाह को कोतवाली भेजा गया है। इन नियुक्तियों के जरिए दोनों अधिकारियों की नई पदस्थापना तय की गई है।

    तबादला आदेश में कुछ अधिकारियों को वर्तमान जिम्मेदारियों से हटाकर पुलिस लाइन भेजने के निर्देश भी शामिल हैं। इनमें कोतवाली से रोहित दुबे, बम्हारी से सुनील राजपूत, बैराड़ से सुरेशचंद्र शर्मा और मायापुर से अनिल भारद्वाज के नाम शामिल हैं। इसके अलावा भटनावर चौकी से सीमा धाकड़ और सीहोर से जूली तोमर को भी उनके वर्तमान प्रभार से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है।

    जारी जानकारी के अनुसार, इस पूरी तबादला सूची में 11 निरीक्षकों और 8 उप निरीक्षकों के नाम शामिल हैं। आदेश में सभी संबंधित अधिकारियों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर आमद दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल के तहत जिले के कई थानों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारियां बदली गई हैं। नई नियुक्तियों के बाद संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र का प्रभार संभालना होगा।

  • देहरादून पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 22 SI-ASI के तबादले, नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश

    देहरादून पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 22 SI-ASI के तबादले, नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश

    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के देहरादून में पुलिस विभाग में फेरबदल किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर 19 उपनिरीक्षक और दो अपर उपनिरीक्षक नागरिक समेत कुल 22 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। तबादला आदेश के तहत अधिकारियों को अलग-अलग थानों, चौकियों, शाखाओं और पुलिस लाइन से नई जगहों पर भेजा गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

    तबादला सूची के अनुसार उपनिरीक्षक दुर्गेश कोठियाल को वसंत विहार से कैंट भेजा गया है। उपनिरीक्षक ओमप्रकाश को कैंट से वसंत विहार में नई तैनाती मिली है। उपनिरीक्षक मनोहर सिंह रावत का डोईवाला से नेहरू कॉलोनी तबादला किया गया है। अपर उपनिरीक्षक देवेंद्र नेगी को पुलिस लाइन से पटेल नगर भेजा गया है, जबकि मनमोहन को पुलिस लाइन से क्लेमेंटाउन में तैनाती दी गई है।

    राजीव धारीवाल को सहसपुर से वसंत विहार भेजा गया है। मुकेश थलेड़ी का तबादला आईएसबीटी ऋषिकेश चौकी से पटेल नगर थाना किया गया है। प्रवीण पुंडीर को सहसपुर से पटेल नगर भेजा गया है। प्रमोद शाह को पटेल नगर से कोतवाली नगर में नई जिम्मेदारी दी गई है।

    दिनेश चमोली को पुलिस लाइन से आईएसबीटी ऋषिकेश चौकी भेजा गया है। रवि प्रसाद कवि का तबादला प्रेमनगर से एसआईएस शाखा किया गया है। अमन चड्ढा को कोतवाली नगर से एसआईएस शाखा भेजा गया है।

    सोमवीर को एसआईएस शाखा से रायपुर भेजा गया है। जसपाल गुसाईं को एसआईएस शाखा से सहसपुर में नई तैनाती मिली है। मुकेश नेगी को वसंत विहार से ऋषिकेश थाना भेजा गया है। विनेश कुमार को त्रिवेणीघाट चौकी से एम्स ऋषिकेश चौकी और देवेंद्र पंवार को एम्स ऋषिकेश चौकी से त्रिवेणीघाट चौकी भेजा गया है।

    इसके अलावा सचिन पुंडीर को पुलिस लाइन से डोईवाला भेजा गया है। मुकेश कुमार को प्रेमनगर से रायवाला और जगदंबा प्रसाद को रायवाला से प्रेमनगर में तैनाती दी गई है। चंद्रशेखर नौटियाल को विकासनगर से प्रेमनगर भेजा गया है। इस फेरबदल के तहत कई अधिकारियों के मौजूदा कार्यक्षेत्र बदलकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    तबादला आदेश में अजय प्रकाश भट्ट से संबंधित पूर्व स्थानांतरण आदेश को भी निरस्त किया गया है। अजय प्रकाश भट्ट का पहले विकासनगर से कैंट तबादला किया गया था, लेकिन अब उस आदेश को रद्द कर दिया गया है।

    सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी नई तैनाती वाले स्थान पर तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करें। इसके तहत अधिकारियों को संबंधित थानों, चौकियों और शाखाओं में पहुंचकर अपनी नई जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    पुलिस विभाग के इस फेरबदल में पुलिस लाइन से कई अधिकारियों को अलग-अलग थानों और चौकियों में भेजा गया है। वहीं कुछ अधिकारियों को एक थाना या शाखा से दूसरी जगह तैनात किया गया है। तबादला आदेश के साथ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के अनुसार काम संभालने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    इस फेरबदल में देहरादून शहर के साथ ऋषिकेश और आसपास के पुलिस क्षेत्रों से जुड़े अधिकारियों की तैनाती में भी बदलाव किया गया है। अधिकारियों को तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए जाने के बाद नई तैनाती प्रभावी हो गई है। साथ ही अजय प्रकाश भट्ट के पूर्व विकासनगर से कैंट स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

  • राष्ट्रपति का ADC बनने की राह कितनी कठिन? 14 दिन चलता है इंटरव्यू, ऐसे होता है अधिकारियों का चयन

    राष्ट्रपति का ADC बनने की राह कितनी कठिन? 14 दिन चलता है इंटरव्यू, ऐसे होता है अधिकारियों का चयन


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रपति भवन में महामहिम के साथ साए की तरह नजर आने वाले सैन्य अधिकारियों को देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ये अधिकारी कौन होते हैं और राष्ट्रपति के एडीसी यानी Aide-de-Camp तक कैसे पहुंचते हैं। यह पद भारतीय सेना के सबसे प्रतिष्ठित और जिम्मेदारी वाले पदों में शामिल है। ‘नेशनल क्रश’ के नाम से चर्चित रहे मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के एडीसी पद से अचानक इस्तीफे के बाद एक बार फिर लोगों की दिलचस्पी इस पद की चयन प्रक्रिया को लेकर बढ़ गई है।

    राज शमानी के साथ बातचीत में मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राष्ट्रपति के एडीसी से जुड़ी चयन प्रक्रिया और इस पद की जिम्मेदारियों के बारे में कई अहम बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि एक सामान्य सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने का सफर बेहद कठिन, अनुशासित और कड़े परीक्षणों से होकर गुजरता है।

    कौन बन सकता है राष्ट्रपति का ADC?

    राष्ट्रपति का एडीसी पद किसी सामान्य भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं भरा जाता। आम नागरिक इस पद के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकते। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के कमिशंड अधिकारी ही इसके लिए पात्र होते हैं।

    सेना में कमिशंड अधिकारी बनने के लिए युवाओं को यूपीएससी की NDA या CDS जैसी कठिन परीक्षाओं को पास करना पड़ता है। सैन्य अधिकारी के रूप में करीब 5 से 7 साल की सेवा पूरी करने के बाद उनके सेवा रिकॉर्ड, शारीरिक क्षमता और गोपनीय रिपोर्ट यानी ACR जैसे मानकों के आधार पर एडीसी पद के लिए अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट किए जाते हैं।

    तीनों सेनाओं से कुल मिलाकर करीब 20 से 30 बेहतरीन अधिकारियों को चयन प्रक्रिया के शुरुआती चरण के लिए चुना जाता है। यानी एडीसी बनने की दौड़ में शामिल होने से पहले ही अधिकारी का अपनी यूनिट में बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होता है।

    पहले सर्विस हेडक्वॉर्टर में इंटरव्यू, फिर राष्ट्रपति भवन की परीक्षा

    एडीसी के चयन की प्रक्रिया बेहद कठिन मानी जाती है। शुरुआती स्क्रीनिंग में चुने गए अधिकारियों को संबंधित सर्विस हेडक्वॉर्टर के इंटरव्यू से गुजरना होता है। इस दौरान करेंट अफेयर्स और सिचुएशनल अवेयरनेस समेत कई विषयों पर उनकी क्षमता परखी जाती है।

    इसके बाद केवल 5 अधिकारियों को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बुलाया जाता है। यहां चयन प्रक्रिया का सबसे कठिन चरण शुरू होता है, जिसमें लगातार 14 दिनों तक मैराथन इंटरव्यू चलता है।

    14 दिन तक उम्मीदवारों की कमजोरियां तलाशता है पैनल

    मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के मुताबिक राष्ट्रपति भवन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और राष्ट्रपति के सचिव उम्मीदवारों को काफी मानसिक दबाव में परखते हैं। मकसद यह पता लगाना होता है कि दबाव और आपात स्थिति में अधिकारी किस तरह प्रतिक्रिया देगा।

    उन्होंने बताया कि अगर किसी उम्मीदवार की जियोपॉलिटिक्स या किसी अन्य विषय में कमजोरी नजर आती है तो पैनल उसी विषय से जुड़े सवाल बार-बार पूछ सकता है। खास बात यह होती है कि 14 दिनों के दौरान उम्मीदवारों को उनकी कमियों के बारे में सीधे नहीं बताया जाता।

    इसके बजाय यह देखा जाता है कि उम्मीदवार रात में अपनी कमी को समझकर तैयारी करता है या नहीं और अगले दिन उसी विषय पर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है या नहीं। इस तरह केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि सीखने की क्षमता और दबाव में खुद को सुधारने की योग्यता भी जांची जाती है।

    ADC बनने के बाद निजी जिंदगी से भी करना पड़ता है समझौता

    मेजर ऋषभ के अनुसार राष्ट्रपति का एडीसी होना जितना प्रतिष्ठित है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। इस पद पर रहते हुए अधिकारी को अपने परिवार और निजी जीवन से काफी हद तक दूरी बनानी पड़ती है।

    राष्ट्रपति के साथ लगातार मौजूद रहने के कारण सामान्य दिनचर्या और निजी जीवन के लिए समय बेहद सीमित हो जाता है। अधिकारी को हर समय सतर्क रहना होता है और देश-दुनिया की घटनाओं से लगातार अपडेट रहना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होता है।

    शान के पीछे छिपा है कड़ा अनुशासन

    राष्ट्रपति का एडीसी होना सैन्य अधिकारी के लिए बेहद सम्मान और गौरव की बात मानी जाती है। हालांकि इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी तक पहुंचने के लिए कठोर चयन प्रक्रिया, मानसिक दबाव, निरंतर सतर्कता और निजी जीवन से समझौता करना पड़ता है।

    यही वजह है कि राष्ट्रपति के एडीसी का पद केवल प्रोटोकॉल निभाने या राष्ट्रपति के साथ चलने तक सीमित नहीं है। यह ऐसी जिम्मेदारी है, जिसमें अधिकारी को हर पल राष्ट्रपति की सुरक्षा, जरूरतों और परिस्थितियों के प्रति पूरी तरह सजग रहना होता है।

  • सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभिन्न विभागों में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकारी वाहनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत ‘वन ऑफिसर, वन कार’ यानी एक अधिकारी को केवल एक ही सरकारी वाहन आवंटित करने की नीति को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इस नए कदम से सरकारी तंत्र में अतिरिक्त गाड़ियों के अनधिकृत उपयोग पर पूरी तरह विराम लगने की उम्मीद है।

    नवीनतम सर्कुलर के अनुसार, सरकारी वाहन की पात्रता रखने वाले किसी भी अधिकारी को एक से अधिक कार आवंटित नहीं की जाएगी। यदि किसी अफसर को अपने मूल पद के साथ किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या स्वायत्त निकाय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा जाता है, तब भी वह केवल एक ही आधिकारिक वाहन का उपयोग करने का हकदार होगा। अतिरिक्त दायित्व के आधार पर दूसरी गाड़ी हासिल करने की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र के अधीन कार्यरत अधिकारी सार्वजनिक उपक्रमों या स्वायत्त संस्थाओं के बेड़े में शामिल वाहनों को अपने दैनिक या नियमित इस्तेमाल के लिए अपने पास नहीं रख सकेंगे। इस तरह की कार्यप्रणाली पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। हालांकि, अंतर-राज्यीय या विभागीय आधिकारिक दौरों के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों को इन संस्थाओं के वाहनों का उपयोग करने की विशेष छूट दी जाएगी, ताकि शासकीय कार्यों में कोई बाधा न आए।

    नए परिपत्र में सभी मंत्रालयों और विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस्तेमाल में न आ रहे या अधिशेष वाहनों को तुरंत सुरक्षित कस्टडी में लिया जाए। यह निर्देश पूर्व में जारी उन नियमों को और मजबूती प्रदान करता है, जिनमें अधिकारियों द्वारा तय शुल्क देकर सीमित दायरे में सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग की अनुमति दी गई थी। सरकार के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ वाहनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक वित्तीय बोझ में भी बड़ी कमी आएगी।

  • MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'

    MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'


    दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है. बसई इलाके के ठकुरपुरा गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में आयोजित एक नुक्कड़ सभा में पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.

    सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दिया और पुलिस व प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया. मंच से बोलते हुए उनके बोल काफी कड़े नजर आए.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, ”मुझे जीतू पटवारी कहते हैं, अगर चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ तो समझ लेना, चुनाव के बाद में देखूंगा.”

    उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. अगर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई की, तो चुनाव के बाद उनसे हिसाब लिया जाएगा.

    बढ़ते अपराधों और स्थानीय मुद्दों पर घेरा
    अधिकारियों पर निशाना साधने के साथ-साथ जीतू पटवारी ने दतिया क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिवराज या मोहन सरकार और स्थानीय सत्ता तंत्र पर जमकर हमला बोला.

    उन्होंने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपराध, हत्या, आत्महत्या और जमीन विवाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए जनता के प्रति संवेदना जताई.उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर सुख-दुख में दतिया की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है.

    फिलहाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस तीखे बयान पर जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद दतिया में चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.

  • डीजीपी ने भारतीय पुलिस सेवा में नियुक्त अधिकारियों को लगाई रैंक

    डीजीपी ने भारतीय पुलिस सेवा में नियुक्त अधिकारियों को लगाई रैंक


    भोपाल
    । भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा (चयन सूची-2025) के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य पुलिस सेवा के सात अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (मध्यप्रदेश कैडर) में नियुक्त किया गया है। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय, भोपाल में अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा की रैंक लगाई।

    इस दौरान डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने सभी अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि आपकी समर्पित एवं निष्ठापूर्ण सेवा का प्रतिफल है। प्रदेश में कानून एवं शांति व्यवस्था बरकरार रखने में आपने उत्कृष्ट कार्य किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी आप प्रदेश की प्रगति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देंगे। आप अपनी कार्यप्रणाली एवं व्यवहार को ऐसा रखें कि वह अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बने।

    उन्होंने कहा कि समय पर योग्य अधिकारियों को अवसर प्रदान किया जाना सदैव सरकार की प्राथमिकता रही है, जिसका परिपालन करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में नियुक्त किया गया है।

    डीजीपी  मकवाणा ने पुलिस मुख्यालय में  निमिषा पाण्डेय,  मलय जैन,  अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, श्रीमती सुमन गुर्जर,  सब्यसाची सराफ तथा समर वर्मा को भारतीय पुलिस सेवा की रैंक लगाई।

    उल्लेखनीय है कि भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा दिनांक 17 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा (चयन सूची-2025) के इन अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में परिवीक्षा पर नियुक्त करते हुए मध्यप्रदेश कैडर आवंटित किया गया है। भारतीय पुलिस सेवा (परिवीक्षा) नियम, 1954 के प्रावधानों के अनुसार सभी अधिकारी एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूर्ण करेंगे तथा निर्धारित इंडक्शन प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

  • मप्र के मुख्यमंत्री से मिले नेशनल डिफेंस कॉलेज का 5 देशों के ऑफिसर्स का प्रशिक्षण दल

    मप्र के मुख्यमंत्री से मिले नेशनल डिफेंस कॉलेज का 5 देशों के ऑफिसर्स का प्रशिक्षण दल


    भोपाल।
    भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ले रहे पांच देशों के ट्रेनी ऑफिसर्स ने मध्य प्रदेश के प्रवास के दौरान बुधवार देर शाम भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की।

    इस अवसर पर बताया गया कि रक्षा मंत्रालय के मेजर जनरल पवनपाल सिंह एवं समकक्ष कुनाल सत्यार्थी के नेतृत्व में फ्रांस, यूएई, भूटान, नेपाल एवं म्यांमार (बर्मा) का 16 सदस्यीय प्रशिक्षण दल 15 से 20 मार्च तक मध्य प्रदेश प्रवास पर आया हुआ है। गुरुवार, 19 मार्च को यह प्रशिक्षण दल भोपाल जिले के होम स्टे ग्राम खारी सहित उज्जैन एवं इंदौर जिले के प्रवास पर रहेगा।

    बताया गया कि बीते तीन दिनों में इस दल ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भेंट सहित भोजपुर मंदिर, वन विहार, भीमबैठका गुफाएं, राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय सहित अन्य स्थलों का अवलोकन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण दल का मध्य प्रदेश की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि आप सब देश के सबसे हरे-भरे एवं घने वन वाले प्रदेश और टाइगर स्टेट में हैं। भोपाल ऐसी जगह है, जहां प्राय: सड़कों पर बाघ घूमता दिखाई दे जाता है। यह मनुष्य और वन्य प्राणियों के साहचर्य जीवन का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भोपाल के बड़े तालाब का निर्माण करीब 1000 साल पहले और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर का निर्माण सैकड़ों साल पहले हुआ था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वन, जंगली वन्य जीवों से भरे पड़े हैं। हमारे यहां 100 से ज्यादा हाथी हैं और 25 मार्च को ही असम से लाए हुए जंगली भैंसे बालाघाट जिले के जंगल में छोड़ने जा रहे हैं। इससे हमारे वन और भी समृद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में 250 से अधिक नदियां बहती हैं। जल की कोई कमी नहीं है और यही कारण है कि मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर देश में सबसे कम (2 प्रतिशत से भी कम) है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले सिंहस्थ : 2028 के आयोजन के लिए हमारी तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। सिंहस्थ के दौरान एक दिन में पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालु शिप्रा में स्नान कर पुण्य लाभ ले सकें, हम ऐसे प्रबंधन करने जा रहे हैं। उज्जैन भ्रमण के दौरान प्रशिक्षण दल इन तैयारियों का भी मुआयना करे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशों के बीच इस तरह से मिलने-जुलने का सिलसिला जारी रहना चाहिए। इससे एक-दूसरे के पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण दल के साथ समूह चित्र भी क्लिक करवाये।

    इस अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के संचालक मुजीबुर्रहमान खान एवं प्रशिक्षण संचालक डॉ. अनुपमा रावत सहित ट्रेनी ऑफिसर्स उपस्थित थे।

  • राज्य प्रशासनिक सेवा के 25 अधिकारियों को नहीं मिली पदोन्नति79 को मिलेगा लाभ

    राज्य प्रशासनिक सेवा के 25 अधिकारियों को नहीं मिली पदोन्नति79 को मिलेगा लाभ


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति डीपीसी की बैठक शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कीजिसमें 79 अधिकारियों को पदोन्नति देने का निर्णय लिया गयाजबकि 25 अधिकारियों को विभागीय जांच और प्रतिकूल गोपनीय चरित्रावली के कारण पदोन्नति से रोक दिया गया। यह पदोन्नति 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।

    पदोन्नति प्रक्रिया

    बैठक में अधिकारियों के विभिन्न पदों पर पदोन्नति के लिए चर्चा की गई। डिप्टी कलेक्टर से संयुक्त कलेक्टर के पद के लिए 9 अधिकारियों पर विचार किया गयाजिनमें से 7 अधिकारियों को पदोन्नति दी गईजबकि दो के नाम रोके गए। इसी तरहसंयुक्त कलेक्टर से अतिरिक्त कलेक्टर के पद के लिए 72 अधिकारियों को पदोन्नति देने का निर्णय लिया गया। हालांकिइस श्रेणी में 13 अधिकारियों को विभिन्न कारणों से पदोन्नति के योग्य नहीं माना गया।इसके अतिरिक्तकुछ अधिकारियों को उच्च वेतनमान देने का भी निर्णय लिया गयाजबकि कुछ अधिकारियों की पदोन्नति रोकी गई।

    विभागीय जांच और प्रतिकूल गोपनीय चरित्रावली

    25 अधिकारियों के नाम पदोन्नति सूची से बाहर किए गएक्योंकि उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही थी या उनके गोपनीय चरित्रावली में प्रतिकूल प्रविष्टियां थीं। इन अधिकारियों के पदोन्नति का निर्णय फिलहाल रोक दिया गया है। यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया हैताकि पदोन्नति केवल उन्हीं अधिकारियों को मिलेजिनकी कार्यक्षमता और चरित्र साफ-सुथरा हो।

    आइपीएस अधिकारियों के लिए पदोन्नति

    आइपीएस अधिकारियों के लिए पदोन्नति समिति की बैठक 19 दिसंबर को प्रस्तावित की गई है। इसमें तीन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को विशेष महानिदेशकदो पुलिस महानिरीक्षक को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक16 पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को उप पुलिस महानिरीक्षक और आठ अधिकारियों को सलेक्शन ग्रेड में पदोन्नति देने का प्रस्ताव है।

    भविष्य की दिशा

    पदोन्नति प्रक्रिया से यह साफ हो जाता है कि प्रशासनिक सेवा में पारदर्शिता और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के चयन में उनकी कार्यक्षमता के साथ-साथ उनके चरित्र का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। हालांकिपदोन्नति से जुड़े विवाद और अड़चनों से बचने के लिए यह जरूरी होगा कि अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पूरी पारदर्शिता से पूरी की जाए। यह निर्णय निश्चित रूप से राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैजो उनके कार्यक्षेत्र में दक्षता और ईमानदारी को बढ़ावा देगा।