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  • MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल

    MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल


    ग्वालियर।
    ग्वालियर (Gwalior) के बिलौआ में अवैध खनन (Illegal mining) को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर बेंच में सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने अफसरों पर तीखे प्रहार किए. करीब ढाई घंटे तक कलेक्टर रुचिका चौहान (Collector Ruchika Chauhan) कोर्ट में रहीं, वहीं प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की सैलरी और उनके बेटे के स्कूल की फीस को लेकर कोर्ट ने सीधा हिसाब मांगा गया।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में बिलौआ खदानों का ड्रोन वीडियो चलाया गया. जस्टिस ने वीडियो पॉज करवाकर कलेक्टर रुचिका चौहान से सीधे सवाल पूछे कि ”यह कौन सी जगह है? किसकी जमीन है? सर्वे नंबर क्या है? कितना क्षेत्र स्वीकृत है और कितनी खुदाई हो चुकी है?”


    जवाब न मिलने पर तल्खी

    जब तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं मिली तो कोर्ट ने 30 सितंबर तक का समय देते हुए कहा कि जितना समय चाहें ले लीजिए, लेकिन अगली सुनवाई पर एक-एक सवाल का स्पष्ट और सटीक जवाब देना होगा।


    10 साल का माल 1 साल में निकालने पर सवाल

    कोर्ट ने खनन की गति पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”अगर 10 साल की लीज का माल 1 साल में ही निकाल लिया, तो बाकी 9 साल क्या करोगे?”


    51 हजार सैलरी, 9 लाख स्कूल फीस

    इसके बाद कोर्ट का रुख प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की तरफ मुड़ा. कोर्ट ने माइनिंग अधिकारी से पूछा कि उनके बेटे की सिंधिया स्कूल में फीस कितनी है? जवाब मिला- ‘करीब 9 लाख रुपये साल.’ जब कोर्ट ने पूछा कि आपकी महीने की तनख्वाह कितनी है? तो उन्होंने बताया- ‘करीब 51 हजार रुपये महीना.’

    कोर्ट ने 51 हजार मासिक वेतन और 9 लाख सालाना फीस के अंतर पर सवाल उठाए, जिस पर माइनिंग अफसर ने सफाई दी कि बेटे की पढ़ाई का खर्च उनकी पत्नी के मामा उठाते हैं. इसको लेकर अदालत ने टिप्पणी की।

    वहीं, माइनिंग अफसर की ओर से लोकायुक्त के आदेश को ‘क्लीन चिट’ बताकर पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन जज ने खुद आदेश पढ़ा और साफ किया कि FIR दर्ज होने के कारण लोकायुक्त ने केस बंद किया था, जिसे ‘दोषमुक्ति’ या ‘क्लीन चिट’ नहीं कहा जा सकता।

    दरअसल, इससे पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने ग्वालियर के खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को जिले में काम करने से रोक दिया था और उनके आचरण पर गंभीर टिप्पणी की थी. राज्य सरकार को निर्देश दिए कि ग्वालियर में तत्काल ईमानदार और सक्षम खनिज अधिकारी की पोस्टिंग की जाए, तब तक पूरे खनिज विभाग की जिम्मेदारी कलेक्टर संभालेंगे।

    इसके बाद सरकार ने भिंड में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा को ग्वालियर भेजा तो उनकी नियुक्ति और पहले की पोस्टिंग को लेकर सवाल किए गए थे।


    AAG विवेक खेड़कर की खिंचाई

    सुनवाई के दौरान जब अपर महाधिवक्ता (AAG) विवेक खेड़कर ने माइनिंग अफसर का पक्ष रखने का प्रयास किया, तो अदालत ने उन पर भी कड़ा एतराज जताया. कोर्ट ने सख्त लहजे में टिप्पणी की कि अगर आप शासन का पक्ष छोड़कर अधिकारी का व्यक्तिगत बचाव करना चाहते हैं, तो फिर शासन का पक्ष छोड़ दीजिए। इस दौरान AAG कोर्ट में कई बार माफी मांगते और ‘सॉरी’ बोलते नजर आए. हाईकोर्ट ने मामले में विस्तृत अध्ययन और पूरी जानकारी के साथ 30 सितंबर को अगली रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

  • एनटीए में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 47 अधिकारी-कर्मचारी हटाए गए; चार नए जनरल मैनेजर की होगी नियुक्ति

    एनटीए में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 47 अधिकारी-कर्मचारी हटाए गए; चार नए जनरल मैनेजर की होगी नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) सहित विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में व्यापक प्रशासनिक बदलाव किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने एजेंसी से 47 अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। इनमें से कुछ के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी प्रस्तावित है।

    यह कार्रवाई उच्च शिक्षा विभाग में हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद की गई है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। इसके लिए एनटीए के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    चार नए जनरल मैनेजर की होगी नियुक्ति

    एनटीए में अब चार नए जनरल मैनेजर की सीधी नियुक्ति की जाएगी। ये अधिकारी एजेंसी के विभिन्न प्रमुख विभागों का संचालन संभालेंगे। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग आधारित व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति पर जोर दिया जा रहा है।

    16 यंग प्रोफेशनल्स भी होंगे शामिल

    एजेंसी की कार्यप्रणाली को आधुनिक और पेशेवर बनाने के उद्देश्य से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से 16 यंग प्रोफेशनल्स की नियुक्ति की जाएगी। इनकी तैनाती प्रारंभिक तौर पर अकादमिक, विधिक (लीगल) और वित्त (फाइनेंस) से जुड़े विभागों में की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि युवा पेशेवर परीक्षा प्रबंधन में नई तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं को लागू करने में योगदान देंगे।

    समिति की सिफारिशों पर अमल

    सरकार यह पुनर्गठन प्रो. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर कर रही है। समिति ने परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे।

    राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराता है एनटीए

    एनटीए देश में नीट, जेईई, सीयूईटी सहित 15 से 20 प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करता है। हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

    सरकार ने संकेत दिए हैं कि परीक्षा संबंधी अपराधों पर रोक लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों को भी लागू किया जा रहा है। इसके तहत परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

  • US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज

    US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज


    न्यूयॉर्क ।
    अमेरिका (America) में मैक्सिको (Mexico) के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों पर ड्रग तस्करी (Drug smuggling) के गंभीर आरोप लगे हैं। न्यूयॉर्क की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र में इन अधिकारियों पर अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेजने और हथियारों से जुड़े अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मैक्सिको के सीनालोआ राज्य (Sinaloa State.) के गवर्नर रुबेन रोचा मोया (Governor Ruben Rocha Moya) और नौ अन्य मौजूदा व पूर्व सरकारी अधिकारी इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं। इन सभी पर ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराधों का केस दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक इनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

    ड्रग कार्टेल से गहरे संबंध का आरोप
    आरोपपत्र में कहा गया है कि ये अधिकारी कुख्यात सिनालोआ कार्टेल के साथ मिलकर काम कर रहे थे। यह कार्टेल लंबे समय से अमेरिका में फेंटेनिल, हेरोइन, कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी करता रहा है। बताया गया है कि कुछ आरोपी इस कार्टेल की हिंसक गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं।

    ‘एल चापो’ के बेटों से जुड़ा नेटवर्क
    जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी उस गुट से जुड़े थे, जिसे कुख्यात ड्रग माफिया जोकिन ‘एल चापो’ गुजमैन के बेटे चलाते हैं। ‘एल चापो’ पहले ही अमेरिका की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

    अमेरिका का बड़ा बयान
    अमेरिका के अटॉर्नी जे क्लेटन ने सीनालोआ कार्टेल को ‘बेहद खतरनाक आपराधिक संगठन’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्टेल दशकों से अमेरिका में ड्रग्स फैलाता रहा है और भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों की मदद के बिना यह संभव नहीं होता। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनमें से कुछ मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की पार्टी ‘मोरेना’ से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि अन्य कई आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं।

    मैक्सिको की सरकार ने आरोपों को नकारा
    मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इन आरोपों को लेकर कहा कि उनकी सरकार को अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में किसी मैक्सिकन नागरिक के खिलाफ जांच होती है, तो उसके सबूत मैक्सिको की अटॉर्नी जनरल ऑफिस के साथ साझा किए जाने चाहिए।

    भ्रष्टाचार के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई
    इस मामले से पहले अमेरिका के मैक्सिको में राजदूत रॉन जॉनसन ने संकेत दिया था कि अमेरिका मैक्सिको के उन अधिकारियों के खिलाफ अभियान चलाएगा, जिनके संबंध संगठित अपराध से हैं।

  • Maharashtra: दागी MPs-MLAs के सामने खड़े नहीं होंगे अधिकारी… प्रोटोकॉल नियम में बदलाव

    Maharashtra: दागी MPs-MLAs के सामने खड़े नहीं होंगे अधिकारी… प्रोटोकॉल नियम में बदलाव


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की देवेंद्र फडणवीस सरकार (Devendra Fadnavis government) ने एक नया सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी करते हुए प्रोटोकॉल नियमों (Protocol Rules) में अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के मुताबिक, राज्य के अधिकारियों को अब से वैसे माननीय विधायकों या सांसदों के लिए खड़े होकर उनका अभिवादन करने की जरूरत नहीं है, जिन्हें दोषी ठहराया गया है, या जिन्हें किसी जांच/सुनवाई के लिए बुलाया गया है, या जो चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए किसी सरकारी दफ्तर में मौजूद हैं।

    राज्य सरकार ने इस संबंध में मंगलवार (28 अप्रैल) को एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया, जिसमें 20 नवंबर, 2025 के पिछले निर्देशों में संशोधन किया गया है। पहले के निर्देशों में अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य था कि जब चुने हुए प्रतिनिधि किसी बैठक के लिए आएं और बैठक खत्म होने के बाद जाएं, तो वे खड़े होकर उनका अभिवादन करें।


    नए नियमों के मुख्य बिंदु:

    मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा 28 अप्रैल, 2026 को हस्ताक्षरित इस आदेश के अनुसार, अधिकारियों को उन स्थितियों में माननीयों को विशेष प्रोटोकॉल (जैसे खड़ा होना या विशेष अभिवादन) देने की जरूरत नहीं है, जब उनके सामने कोई ऐसे जनप्रतिनिधि आते हों जो किसी आपराधिक या अन्य मामले में दोषी ठहराए गए हों, या अगर उन्हें किसी जांच/सुनवाई के लिए अपीलकर्ता या पक्षकार के तौर पर बुलाया गया है, या अगर वे चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं (जैसे नामांकन पत्र दाखिल करना, जांच-पड़ताल या सुनवाई) के लिए किसी सरकारी दफ़्तर में मौजूद हैं।

    आम नागरिकों जैसा ही व्यवहार करें
    GR में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि ऐसे मामलों में, संबंधित अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे कानून, नियमों और मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार, बिना किसी विशेष प्रोटोकॉल के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ आम नागरिकों जैसा ही व्यवहार करें। इससे पहले नवंबर 2025 में, तत्कालीन मुख्य सचिव राजेश कुमार ने सरकारी अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे कि वे विधायकों या सांसदों के साथ सम्मानपूर्वक और सौहार्दपूर्ण ढंग से व्यवहार करें। संशोधित खंड में कहा गया था, “अधिकारियों को विधानसभा/संसद के सदस्यों के बैठक के लिए आने पर और बैठक खत्म होने के बाद उनके जाने पर खड़े होकर उनका अभिवादन करना चाहिए।”


    मूल दिशानिर्देशों में संशोधन क्यों?

    सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बदलाव केवल दोषी ठहराए गए व्यक्तियों और उन लोगों के संबंध में किया गया है जो जांच का सामना कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “यह जरूरी है कि सरकारी अधिकारी निष्पक्ष तरीके से व्यवहार करें। जांच के लिए बुलाए गए लोगों के लिए खड़े होने का स्वाभाविक मतलब यह होगा कि अधिकारी दूसरे पक्ष के प्रति जरूरत से ज्यादा विनम्रता दिखा रहा है, जिसका असर सुनवाई के नतीजे पर पड़ सकता है। नतीजतन, हमने मूल दिशानिर्देशों में संशोधन करने का फैसला किया है।”


    एक सावधानी भी

    हालांकि, नए प्रोटोकॉल में यह बात स्पष्ट तौर पर कही गई है कि जो विधायक या सांसद किसी अपराध में दोषी नहीं हैं या किसी सामान्य काम से आए हैं, उनके लिए पुराना प्रोटोकॉल लागू रहेगा। यानी अधिकारियों को उन्हें सम्मानपूर्वक खड़े होकर अभिवादन करना होगा। उनके पत्रों का जवाब भी दो महीने के भीतर देना अनिवार्य होगा।

  • उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से प्रारंभ होगी। इसी के मद्देनजर शनिवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    सर्वप्रथम संभागायुक्त आशीष सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने पटनी बाजार स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर पूजन अर्चन किया और मंदिर परिसर में पानी की टंकी की सफाई, परिसर की साफ-सफाई , सीसीटीवी कैमरे, लाइट तथा एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

    इसके बाद अधिकारियों द्वारा बस से यात्रा कर उंडासा, पिंगलेश्वर, शनि मंदिर त्रिवेणी, करोहन, नलवा, अंबोदिया, पड़ाव व उप पड़ाव स्थलों का निरीक्षण किया गया। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि पड़ाव स्थलों के बीच भी कुछ-कुछ स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की जाए तथा जो भी बड़े खुले कुएं रास्ते में आ रहे हैं अथवा जहां नवीन पुल-पुलियाओं का निर्माण चल रहा है वहां सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग की जाए। साथ ही रात में अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की जाए।

    पिंगलेश्वर में रेलवे ओवरब्रिज के नीचे सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। अस्थाई शौचालयों, लाइट , पेयजल के लिए टैंकर की व्यवस्था पर्याप्त संख्या में की जाए। त्रिवेणी में श्रद्धालुओं के स्नान के लिए शावर्स लगाए जाएं।

    अंबोदिया में व्यवस्थाओं के संबंध में ली गई बैठक में कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि वर्तमान में सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान नये कार्य प्रारंभ न किये जाएं, वर्तमान में चल रहे कार्यों के तेज गति से पूर्ण करें। पंचक्रोशी यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। यात्रा मार्ग में कुछ स्थानों पर मुरम डाल कर समतलीकरण किया जाए। इसके अलावा जिन विभागों को यात्रा के संबंध में जो दायित्व सौंपे गए हैं, वे आगामी 05 अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर लें।

    पुलिस अधीक्षक शर्मा ने निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। ड्यूटीरत अधिकारी व कर्मचारी अपनी शिफ्ट समाप्त होने पर रिलिवर के आने के पश्चात ही कर्तव्य स्थल छोड़ें, निर्धारित समय पर अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए यात्रा के सुखद अनुभव के लिए सभी मिलकर प्रयास करें।