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  • सरकार का बड़ा फैसला: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8% हिस्सेदारी OFS के जरिए बिक्री पर, निवेशकों की नजर

    सरकार का बड़ा फैसला: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8% हिस्सेदारी OFS के जरिए बिक्री पर, निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग सेक्टर में विनिवेश की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बिक्री के लिए पेश कर दी है। इस कदम के तहत सरकार कुल मिलाकर बैंक में अपनी 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है, जिससे निवेशकों के बीच बाजार में हलचल बढ़ गई है।

    विनिवेश विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार पहले चरण में बैंक में अपनी 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे कुल बिक्री 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह पूरी प्रक्रिया सरकार की उन नीतियों का हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर बाजार आधारित संरचना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

    ऑफर फॉर सेल की शुरुआत नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए 22 मई से कर दी गई है। इस दौरान संस्थागत निवेशकों को निर्धारित समय के भीतर अपनी बोलियां लगाने का अवसर दिया गया है। सरकार ने इस इश्यू के लिए न्यूनतम मूल्य 31 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो पिछले बंद भाव की तुलना में लगभग 9.4 प्रतिशत कम है। इस मूल्य निर्धारण को निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    रिटेल निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 25 मई से शुरू होगी। इस दिन आम निवेशक और पात्र कर्मचारी निर्धारित बाजार समय के दौरान अपनी बोलियां लगा सकेंगे। नियमों के अनुसार, कुल ऑफर किए गए शेयरों का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रहेगा, जिससे छोटे निवेशकों को भी इस विनिवेश प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिल सके।

    ऑफर डॉक्यूमेंट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बैंक के कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से 75 लाख इक्विटी शेयर आरक्षित किए गए हैं। यह कदम कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    सरकार की योजना के अनुसार, प्रारंभिक चरण में 36.21 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी, जो 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। यदि ग्रीन शू विकल्प का पूरा उपयोग किया जाता है, तो अतिरिक्त 36.21 करोड़ शेयर और बेचे जाएंगे, जिससे कुल बिक्री दोगुनी होकर लगभग 72.41 करोड़ शेयर तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में कुल इश्यू साइज लगभग 2,244 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के OFS से बैंक के शेयरों में निकट भविष्य में अस्थिरता देखने को मिल सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह प्रक्रिया निवेशकों के लिए अवसर भी पैदा कर सकती है। वहीं, सरकार के इस कदम को विनिवेश लक्ष्य पूरा करने और बैंकिंग सेक्टर में हिस्सेदारी संरचना को संतुलित करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

  • भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का आईपीओ अब 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में होगा सूचीबद्ध

    भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का आईपीओ अब 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में होगा सूचीबद्ध


    नई दिल्ली।  कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेडBCCL की शेयर बाजार में प्रस्तावित लिस्टिंग अब 16 जनवरी की बजाय 19 जनवरी 2026 को होगी। लिस्टिंग में यह बदलाव मुख्य रूप से बृहन्मुंबई नगर निगम BMC चुनावों के परिणामों के कारण किया गया है जिनकी घोषणा 16 जनवरी को होनी है। हालांकि तारीख बदली है लेकिन निवेशकों में आईपीओ को लेकर उत्साह और भरोसा जस का तस बना हुआ है।BCCL का आईपीओ हाल के वर्षों के सबसे चर्चित सरकारी आईपीओ में से एक रहा है। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS आधारित था जिसके तहत कोल इंडिया ने कंपनी में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है। लिस्टिंग के बाद भी कोल इंडिया की BCCL में हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत बनी रहेगी।

    आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। बोली बंद होने तक यह इश्यू कुल 146 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ। कुल पब्लिक इश्यू का आकार करीब 1071 करोड़ रुपये था लेकिन इसकी मांग हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गई। सब्सक्रिप्शन में संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा दिखाया जिनके लिए आरक्षित कोटा 300 गुना से अधिक भरा गया। इसके अलावा रिटेल कैटेगरी करीब 49 गुना शेयरहोल्डर कोटा लगभग 87 गुना और कर्मचारी वर्ग करीब 5 गुना सब्सक्राइब हुआ।ग्रे मार्केट की गतिविधियां भी इस आईपीओ के लिए सकारात्मक संकेत देती हैं। BCCL के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले ग्रे मार्केट में करीब 60 प्रतिशत प्रीमियम पर कारोबार करते दिखे। इसका अर्थ यह है कि 19 जनवरी को लिस्टिंग के दिन शेयर मजबूत शुरुआत कर सकते हैं।BCCL देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनियों में शामिल है। वित्त वर्ष 202425 में देश के कुल कोकिंग कोल उत्पादन में कंपनी का योगदान लगभग 58 प्रतिशत रहा। इसका प्रमुख संचालन झारखंड के झरिया और पश्चिम बंगाल के रानीगंज क्षेत्र में होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि BCCL आईपीओ की यह भारी सफलता PSU शेयरों पर निवेशकों के भरोसे की बहाली को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि सरकारी कंपनियों के शेयरों में फिर से निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। बाजार विश्लेषक यह भी मानते हैं कि लिस्टिंग के दिन शेयर में सकारात्मक माहौल देखने को मिल सकता है खासकर तब जब ग्रे मार्केट में पहले ही मजबूत प्रीमियम नजर आ रहा है।कुल मिलाकर BCCL का आईपीओ न सिर्फ निवेशकों के लिए आकर्षक साबित हुआ है बल्कि यह संकेत देता है कि PSU सेक्टर में नए अवसर और निवेश की संभावनाएं मजबूत हैं। 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में इसकी लिस्टिंग के बाद बाजार और निवेशकों के नजरिए पर इसके असर पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।