Tag: Oil Price Surge

  • ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी

    ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सामने रखी गई नई मांग के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ 87 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.50 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल के साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। इस अचानक बढ़ी कीमत ने दुनियाभर के बाजारों में एक बार फिर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत और तनाव दोनों का दौर जारी है। युद्ध भले ही फिलहाल थमा हुआ माना जा रहा हो लेकिन दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। इसी बीच ट्रंप ने ईरान के सामने एक नई मांग रख दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है जिन्होंने ईरान से जुड़े संघर्षों में अपनी जान गंवाई है या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में इस मुद्दे को भी शामिल किया जाएगा।

    ट्रंप की इस मांग ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों पर इसका तत्काल असर देखने को मिला। तेल बाजार में सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

    ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर पेट्रोल डीजल परिवहन और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। तेल महंगा होने पर विमानन से लेकर माल ढुलाई तक कई क्षेत्रों का खर्च बढ़ सकता है और इसका दबाव आम उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव के बीच निवेशक लगातार अमेरिका और ईरान से आने वाले बयानों और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुलता है और तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर टकराव दोबारा बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर कोई गंभीर समस्या सामने आती है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    फिलहाल ट्रंप की नई मांग ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और होर्मुज क्षेत्र की स्थिति कैसी रहती है इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यही घटनाक्रम तय करेगा कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी आगे जारी रहती है या बाजार को राहत मिलती है।

  • कच्चे तेल की तेजी और वैश्विक अनिश्चितता से शेयर बाजार में बिकवाली तेज, निफ्टी दबाव में

    कच्चे तेल की तेजी और वैश्विक अनिश्चितता से शेयर बाजार में बिकवाली तेज, निफ्टी दबाव में


    नई दिल्ली ।सोमवार का सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ, जहां शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला और दिनभर बाजार कमजोर दायरे में कारोबार करता रहा। सुबह के समय जैसे ही कारोबार की शुरुआत हुई, बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया। निफ्टी ने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 24000 को टूटते हुए नीचे की ओर रुख किया, जो बाजार की धारणा के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    दिन की शुरुआत में ही भारी गैपडाउन ओपनिंग ने बाजार की दिशा तय कर दी थी। वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, विशेष रूप से मध्य पूर्व में बढ़ती अनिश्चितता और बड़े देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित किया है। इसी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई और लागत बढ़ने की आशंका को मजबूत किया, जिससे निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई।

    कारोबार के दौरान निफ्टी लगातार दबाव में रहा और 23900 के स्तर से भी नीचे चला गया। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल खरीदारी की ताकत कमजोर है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। तकनीकी रूप से 24000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट माना जा रहा था, लेकिन भारी बिकवाली के कारण यह स्तर टूट गया और अब बाजार की दिशा और अधिक संवेदनशील हो गई है।

    सेक्टोरल मोर्चे पर भी स्थिति कमजोर रही। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। इन क्षेत्रों में निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की, जिससे पूरे बाजार पर दबाव बढ़ गया। बड़े और मिडकैप शेयरों में भी समान रूप से कमजोरी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापक स्तर पर फैली हुई है।

    कुछ चुनिंदा कंपनियों में हल्की तेजी जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार की बड़ी गिरावट को संतुलित नहीं कर सकी। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तिमाही परिणामों के बाद दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों की धारणा और अधिक सतर्क हो गई है। बाजार में अस्थिरता के बीच ट्रेडर्स ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।

    कुल मिलाकर, वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि जब तक वैश्विक तनाव में राहत नहीं मिलती और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निफ्टी के लिए अब 23800 का स्तर अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24000 अब एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में काम कर सकता है। बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर में है और निवेशकों को आगे के रुझान पर नजर बनाए रखने की आवश्यकता है।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े

    मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े


    नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। इस संघर्ष ने खासतौर पर तेल बाजार को हिला दिया है, जिससे अमेरिका और खाड़ी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30 से 72 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    अमेरिका में गैसोलीन और डीजल महंगे

    अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन (लगभग 380 रुपए) के पार चली गई हैं। यह बीते तीन वर्षों में पहला मौका है जब अमेरिकी उपभोक्ताओं को इतने महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, देश में औसत गैसोलीन की कीमत 4.018 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।

    डीजल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। डीजल अब 5 डॉलर प्रति गैलन (करीब 475 रुपए) के पार बिक रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर संभावित हमलों और मध्य पूर्व में तनाव के कारण गैसोलीन और डीजल की कीमतों में क्रमशः 30 और 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

    खाड़ी देश यूएई में रिकार्ड बढ़ोतरी

    यूएई की फ्यूल प्राइस कमेटी ने 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई कीमतों का ऐलान किया है। नए दामों के अनुसार:

    सुपर 98 पेट्रोल की कीमत 30% बढ़कर 3.39 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 87 रुपए) हो गई है, जो पहले 2.59 दिरहम थी।
    स्पेशल 95 पेट्रोल का दाम 32% बढ़कर 3.28 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 84 रुपए) हो गया है, जो पहले 2.48 दिरहम था।
    डीजल की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई, जो 72% बढ़कर 4.69 दिरहम प्रति लीटर (करीब 120 रुपए) पहुंच गई है, जबकि पहले यह 2.72 दिरहम थी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई में डीजल की यह सबसे तेज और रिकॉर्ड बढ़ोतरी है, जो घरेलू और वाणिज्यिक वाहनों के लिए महंगी होगी।

    कच्चे तेल की कीमत में उछाल

    मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत में जबरदस्त तेजी देखी गई है। पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड के दाम 48 प्रतिशत बढ़कर 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गए हैं। इस उछाल का सीधा असर ग्लोबल फ्यूल प्राइस पर पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ा है।

    वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

    विश्लेषकों का कहना है कि इस बढ़ोतरी का असर केवल अमेरिका और यूएई तक सीमित नहीं है। यूरोप, एशिया और भारत सहित कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उभरते देशों में तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।

  • जंग के डर से शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 1862 अंक टूटा, निफ्टी 582 अंक लुढ़का

    जंग के डर से शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 1862 अंक टूटा, निफ्टी 582 अंक लुढ़का


    नई दिल्‍ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की आशंका ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला कर रख दिया है। इसी का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिला जहां सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। निवेशकों में घबराहट के माहौल के बीच बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1, 862 अंकों की तेज गिरावट के साथ 77, 056 के स्तर पर खुला जबकि एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 582 अंक टूटकर 23, 868 के स्तर पर पहुंच गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम की भावना को बढ़ा दिया है। युद्ध की आशंका के चलते निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ रहा है जहां व्यापक स्तर पर बिकवाली देखने को मिल रही है।

    घरेलू बाजार में भी निवेशकों की चिंता साफ नजर आई। निफ्टी फ्यूचर्स पिछले बंद स्तर की तुलना में करीब 722 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे जो इस बात का संकेत है कि बाजार में दबाव अभी और बढ़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

    केवल भारत ही नहीं बल्कि एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्की 225 सूचकांक करीब 6.22 प्रतिशत गिरकर 53, 000 के स्तर से नीचे आ गया जबकि टॉपिक्स इंडेक्स में 5.27 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी बुरी तरह लुढ़क गया। पिछले सप्ताह 11 प्रतिशत गिरने के बाद सोमवार को इसमें 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई जिसके कारण सर्किट ब्रेकर सक्रिय हो गया और लगभग 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। वहीं हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी वायदा कारोबार में भारी गिरावट के साथ खुला।

    अमेरिकी शेयर बाजारों के फ्यूचर्स में भी भारी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में डॉउ जोन्स फ्यूचर्स करीब 950 अंक तक गिर गए जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंकों से अधिक नीचे कारोबार करते दिखे। टेक्नोलॉजी शेयरों पर भी दबाव रहा और नैस्डैक फ्यूचर्स करीब 400 अंक तक गिर गए।

    इस गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज उछाल भी है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने और हुर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका के कारण वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है। इसके अलावा कुवैत ईरान और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती की खबरों ने भी बाजार को प्रभावित किया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 18.03 प्रतिशत बढ़कर 109.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 20.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 109.29 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं और तेल उत्पादन प्रभावित होता है तो कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशक हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।