Tag: Oil supply disruption

  • पाकिस्तान में ऊर्जा संकट का अलर्ट, तेल आपूर्ति बाधित होने पर रिफाइनरी बंद की चेतावनी

    पाकिस्तान में ऊर्जा संकट का अलर्ट, तेल आपूर्ति बाधित होने पर रिफाइनरी बंद की चेतावनी

    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान में संभावित बड़े ऊर्जा संकट के संकेत सामने आए हैं। देश की प्रमुख तेल रिफाइनिंग कंपनी अटॉक रिफाइनरी लिमिटेड (ARL) ने पाकिस्तान सरकार और ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को पत्र लिखकर गंभीर स्थिति की चेतावनी दी है।

    कंपनी ने अपने पत्र में कहा है कि सड़क प्रतिबंधों और सुरक्षा कारणों से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो रिफाइनरी का संचालन बंद करना पड़ सकता है, जिससे देश में ईंधन आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    चिट्ठी के अनुसार, रावलपिंडी और आसपास के क्षेत्रों में लागू यातायात नियंत्रण और सड़क बंदी के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है। बड़ी संख्या में टैंकर शहर की सीमाओं में फंसे हुए हैं, जिससे रिफाइनरी तक कच्चे तेल की आपूर्ति में लगभग 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी ने सरकार से तेल टैंकरों को तत्काल यातायात प्रतिबंधों से छूट देने की मांग की है, ताकि कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो मुख्य कच्चा तेल प्रसंस्करण इकाई को बंद करना पड़ सकता है। इसका असर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति पर पड़ेगा, जिससे हवाई अड्डों, रक्षा प्रतिष्ठानों और बिजली उत्पादन इकाइयों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पत्र पिछले महीने लिखा गया था, लेकिन रावलपिंडी क्षेत्र में हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

    विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा निर्भरता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। उनका मानना है कि यदि रिफाइनिंग और ईंधन आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर परिवहन, बिजली उत्पादन और सैन्य लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है।

  • पश्चिम एशिया युद्ध का बड़ा असर! 40+ तेल-गैस ठिकाने तबाह, IEA अधिकारी का खुलासा

    पश्चिम एशिया युद्ध का बड़ा असर! 40+ तेल-गैस ठिकाने तबाह, IEA अधिकारी का खुलासा


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने अब पूरी दुनिया के ऊर्जा संतुलन को झकझोर कर रख दिया है। International Energy Agency के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Fatih Birol ने ऑस्ट्रेलिया के Canberra में बताया कि इस संघर्ष के चलते नौ देशों में फैले 40 से अधिक तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर या अत्यंत गंभीर नुकसान हुआ है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ा है और हालात ऐसे बन गए हैं कि कोई भी देश इस संकट से अछूता नहीं रह पाएगा। सप्लाई में आई इस बड़ी बाधा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है और कीमतों में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

    1970 के दशक से भी बड़ा खतरा, रिकॉर्ड सप्लाई प्रभावित

    आईईए प्रमुख ने इस संकट को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी तुलना 1970 के दशक के तेल संकट और Russia-Ukraine War के बाद आए गैस संकट को मिलाकर की जा सकती है। उन्होंने बताया कि 1970 के दशक में करीब 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन की सप्लाई प्रभावित हुई थी, जबकि मौजूदा हालात में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए खतरे की घंटी है। बढ़ती मांग और घटती सप्लाई के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है, जिससे आम लोगों के साथ साथ उद्योग जगत पर भी असर पड़ सकता है।

    तेल ही नहीं, कई जरूरी सेक्टर भी प्रभावित

    इस युद्ध का असर सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई अहम उद्योग भी संकट में आ गए हैं। पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक, सल्फर और हीलियम जैसे जरूरी उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। इन उत्पादों की कमी का असर कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षेत्रों पर पड़ेगा। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो खाद्य उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों में गिरावट आ सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़

    इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz का लगभग ठप हो जाना है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का निर्यात होता है। इसके बंद होने से एशिया और यूरोप के कई देशों में ईंधन आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। हालात को संभालने के लिए आईईए ने अपने सदस्य देशों के आपातकालीन भंडार से रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला लिया है और आगे भी जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल जारी करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है और स्थायी राहत तभी मिलेगी जब इस समुद्री मार्ग को फिर से सुचारू किया जाएगा।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र

    मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र


    नई दिल्ली:
    पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता को बढ़ा दिया है इस स्थिति को लेकर International Energy Agency के प्रमुख फतिह बिरोल ने कड़ी चेतावनी जारी की है उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं हैं बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है

    बिरोल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है और यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसके परिणाम बेहद व्यापक होंगे उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी

    उन्होंने खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत पर जोर दिया जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यहां से शिपिंग प्रभावित हो रही है जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है

    आईईए प्रमुख ने यह भी चेतावनी दी कि इस संकट का असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हर देश इसकी चपेट में आएगा उन्होंने कहा कि चाहे विकसित देश हों या विकासशील सभी को इस ऊर्जा संकट के प्रभाव का सामना करना पड़ेगा

    इसी बीच ईरान की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है और वहां से समुद्री यातायात जारी है हालांकि तनावपूर्ण हालात के चलते सुरक्षा उपायों को सख्त किया गया है जिससे शिपिंग की गति प्रभावित हुई है

    आईईए ने पहले भी सरकारों और नागरिकों को ऊर्जा खपत कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं इनमें घर से काम करना अनावश्यक यात्रा से बचना और ऊर्जा की बचत करने वाले आधुनिक उपाय अपनाना शामिल है इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा की मांग को कम करना और संकट के प्रभाव को सीमित करना है

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा यह स्थिति वैश्विक मंदी के खतरे को भी जन्म दे सकती है

    फतिह बिरोल ने अपने बयान में यह भी कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा कर रहा है और यदि समय रहते इसका समाधान नहीं हुआ तो इसके प्रभाव आने वाले समय में और अधिक गंभीर हो सकते हैं

    इस प्रकार पश्चिम एशिया का यह तनाव अब केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष न रहकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बन गया है जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है