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  • मध्य प्रदेश में डीजल की कीमतें स्थिर, 18 जुलाई को भी नहीं बदले ईंधन के दाम; जिलों में टैक्स के अनुसार दिखा मूल्य अंतर

    मध्य प्रदेश में डीजल की कीमतें स्थिर, 18 जुलाई को भी नहीं बदले ईंधन के दाम; जिलों में टैक्स के अनुसार दिखा मूल्य अंतर


    मध्य प्रदेश:  में 18 जुलाई 2026 को डीजल की कीमतों में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। राज्य में डीजल का औसत खुदरा मूल्य लगभग 100.50 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। एक दिन पहले यानी 17 जुलाई को भी कीमतें इसी स्तर पर थीं। लगातार स्थिर बने हुए ईंधन दामों से वाहन चालकों, परिवहन क्षेत्र और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को फिलहाल राहत मिली हुई है। हालांकि राज्य के विभिन्न जिलों में स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण प्रति लीटर कीमतों में अंतर बना हुआ है।

    मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों और जिलों की बात करें तो राजधानी भोपाल में डीजल 99.33 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है, जबकि इंदौर में इसकी कीमत 100.09 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। जबलपुर में डीजल 99.69 रुपये, ग्वालियर में 99.59 रुपये और उज्जैन में 100.11 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है। वहीं रीवा, अनूपपुर, मंडला, धार, छतरपुर, शाहडोल, उमरिया और सतना जैसे कई जिलों में डीजल का मूल्य 101 रुपये प्रति लीटर से अधिक है। दूसरी ओर अशोकनगर, भोपाल, ग्वालियर और सीहोर जैसे कुछ जिलों में कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से नीचे बनी हुई हैं।

    राज्य में जिलावार कीमतों का यह अंतर मुख्य रूप से स्थानीय वैट, परिवहन व्यय और अन्य करों के कारण देखने को मिलता है। इसी वजह से एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग स्थानों पर उपभोक्ताओं को डीजल के लिए अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। ईंधन कंपनियां प्रत्येक जिले के कर ढांचे और वितरण लागत के आधार पर खुदरा मूल्य तय करती हैं।

    देश में ईंधन की कीमतें डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग प्रणाली के तहत निर्धारित की जाती हैं। इस व्यवस्था के अनुसार पेट्रोल और डीजल के दामों की समीक्षा प्रतिदिन की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर नई दरें रोज सुबह 6 बजे लागू होती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार, विनिमय दर या अन्य आर्थिक संकेतकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता तो कीमतें कई दिनों तक स्थिर भी रह सकती हैं।

    डीजल की कीमत तय करने में कई महत्वपूर्ण आर्थिक कारकों की भूमिका होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, शिपिंग लागत तथा कर संरचना जैसे तत्व अंतिम खुदरा मूल्य को प्रभावित करते हैं। इन सभी कारकों में बदलाव होने पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि या कमी देखने को मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल केवल निजी वाहनों के लिए ही नहीं बल्कि माल परिवहन, कृषि, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इसकी कीमतों में स्थिरता का सीधा असर परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ता है। लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत नियंत्रित रहती है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं बढ़ता।

    फिलहाल मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि जुलाई महीने में डीजल की कीमतों में कोई उल्लेखनीय बदलाव दर्ज नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार नई कीमतें तय होंगी, जिनकी घोषणा प्रतिदिन सुबह की जाएगी। वाहन चालकों और व्यवसायों के लिए सलाह है कि ईंधन भरवाने से पहले अपने जिले की ताजा कीमत की जानकारी अवश्य प्राप्त करें, क्योंकि स्थानीय करों के कारण अलग-अलग शहरों में दरों में अंतर बना रह सकता है।

  • LPG उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली राहत, जून में बढ़ी कीमतें बरकरार; सिलेंडर बुकिंग से पहले जानें ताजा रेट

    LPG उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली राहत, जून में बढ़ी कीमतें बरकरार; सिलेंडर बुकिंग से पहले जानें ताजा रेट

    नई दिल्ली । देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर का उपयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए 17 जून को राहत और चिंता दोनों तरह की स्थिति बनी हुई है। राहत इस बात की है कि आज घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि चिंता का कारण यह है कि जून महीने में लागू हुई बढ़ी हुई दरें अभी भी प्रभावी हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर बुक कराने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।

    देश में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा आमतौर पर प्रत्येक महीने की शुरुआत में की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत जून में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। इस फैसले के बाद विभिन्न महानगरों और प्रमुख शहरों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। वर्तमान में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पिछले संशोधन के अनुसार ही लागू हैं और आज इनमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है।

    राजधानी दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पहले की तुलना में अधिक स्तर पर बनी हुई हैं। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, चंडीगढ़, भुवनेश्वर और पटना जैसे शहरों में भी उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों का सामना करना पड़ रहा है। अलग-अलग राज्यों में करों और परिवहन लागत के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है, लेकिन कुल मिलाकर अधिकांश क्षेत्रों में गैस उपभोक्ताओं की मासिक रसोई लागत बढ़ी है।

    घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी लागत का दबाव बढ़ा है। होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाएं और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। जून में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसका सीधा प्रभाव व्यवसायिक संचालन लागत पर पड़ा है। कई क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों ने बढ़ती ऊर्जा लागत को लेकर चिंता भी व्यक्त की है।

    ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा मांग में बदलाव जैसी परिस्थितियां एलपीजी मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में गैस कीमतों में अस्थिरता देखने को मिली है।

    विशेषज्ञों के अनुसार एलपीजी केवल घरेलू ईंधन नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्पाद है। इसकी कीमतों में बदलाव का असर परिवारों के मासिक बजट से लेकर छोटे व्यवसायों की लागत संरचना तक दिखाई देता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एलपीजी की बढ़ती खपत को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य परिवर्तन पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।

    वर्तमान स्थिति में उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ रहा है, लेकिन जून में लागू संशोधित दरें अभी भी प्रभावी हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले अपने क्षेत्र की मौजूदा कीमतों की जानकारी प्राप्त करना उपयोगी माना जा रहा है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की दिशा और घरेलू मूल्य समीक्षा के आधार पर एलपीजी दरों में आगे बदलाव संभव हो सकता है।

    फिलहाल 17 जून को एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं हुआ है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी का असर अभी भी पूरी तरह बना हुआ है और इसका प्रभाव घरेलू बजट तथा व्यावसायिक खर्चों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।