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  • Report: भारत के लोग भले ही लंबी उम्र जी रहे …. पर बुढ़ापे में स्वस्थ जीवन और संतुष्टि का अभाव

    Report: भारत के लोग भले ही लंबी उम्र जी रहे …. पर बुढ़ापे में स्वस्थ जीवन और संतुष्टि का अभाव


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में लोग पहले से ज्यादा लंबी उम्र (Longer lifespan) जरूर जी रहे हैं, लेकिन जीवन के आखिरी वर्षों में स्वस्थ, सक्रिय, आर्थिक रूप से सुरक्षित और संतुष्ट रहने की तस्वीर उतनी अच्छी नहीं है। खासकर ग्रामीण बुजुर्ग महिलाओं (Elderly Rural Women) के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है। 60 वर्ष की उम्र में ग्रामीण महिलाओं के पास औसतन 18.5 वर्ष की शेष जीवन प्रत्याशा है, लेकिन इनमें सिर्फ 4.6 वर्ष अच्छे जीवन के रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले शहरी पुरुषों के लिए 19.1 वर्ष की शेष जिंदगी में 10.2 वर्ष अच्छे जीवन के हैं।

    मुंबई स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज, यूनिवर्सिटी ऑफ विएना और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह तस्वीर सामने आई है। अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल सोशल इंडीकेटर्स रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने भारत में बुजुर्गों की स्थिति समझने के लिए आंकड़ों का विश्लेषण किया है।


    पुरुषों में शरीर, महिलाओं में संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बड़ी चुनौती

    अध्ययन में अच्छे जीवन के वर्षों में राज्यों के बीच अंतर के कारण भी अलग-अलग दिखाई दिए। पुरुषों के मामले में करीब 45 फीसदी अंतर कार्यात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा था, जबकि संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का योगदान करीब 31 फीसदी रहा। महिलाओं में स्थिति उलट थी। उनके राज्यों के बीच अंतर में करीब 46 फीसदी हिस्सा संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और 31 फीसदी कार्यात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा था।ग्रामीण महिलाओं की स्थिति विशेष चिंता पैदा करती है। निर्धारित संज्ञानात्मक स्वास्थ्य कसौटी पर जहां 96 फीसदी शहरी पुरुष खरे उतरते हैं, वहीं ग्रामीण महिलाओं में यह हिस्सा करीब 69 फीसदी था।

    राज्यों में भी बड़ा फासला: 60 वर्ष की उम्र में पंजाब के पुरुषों के लिए अच्छे जीवन के वर्ष 12.9 रहे, जो उनकी शेष जीवन प्रत्याशा का करीब 63 फीसदी है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बुजुर्ग पुरुषों के अच्छे जीवन के वर्ष करीब 6.5 से 6.8 के बीच रहे।महिलाओं में केरल की ग्रामीण महिलाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। वहां 60 वर्ष की उम्र के बाद 10.1 वर्ष अच्छे जीवन के रहे, जो शेष जीवन का करीब 46 फीसदी है। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 3.8 वर्ष और महाराष्ट्र की ग्रामीण महिलाओं में महज 2.7 वर्ष रहा।


    नीति के लिए बड़ा संकेत:

    अध्ययन का संकेत साफ है बुजुर्गों के लिए नीति का लक्ष्य केवल जीवन प्रत्याशा बढ़ाना नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पुनर्वास, फिजियोथेरेपी, सहायक उपकरण, घरेलू देखभाल और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी जरूरी हैं। महिलाओं के लिए जीवनभर शिक्षा और सामाजिक भागीदारी जैसे कारक भी उम्र बढ़ने के साथ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

  • फिजूलखर्ची छोड़ सेवा का संदेश युवा समाजसेवी ने वृद्धजनों के साथ मनाया जन्मदिन

    फिजूलखर्ची छोड़ सेवा का संदेश युवा समाजसेवी ने वृद्धजनों के साथ मनाया जन्मदिन


    चित्रकूट। आज के दौर में जहां जन्मदिन के मौके पर भव्य पार्टियों और दिखावे का चलन तेजी से बढ़ रहा है वहीं चित्रकूट के युवा समाजसेवी बीपी पटेल ने समाज को प्रेरित करने वाली मिसाल पेश की। उन्होंने अपना जन्मदिन परिवार और दोस्तों के साथ किसी होटल या समारोह स्थल पर मनाने के बजाय गणेश बाग के समीप स्थित विनायकपुर वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच मनाया।

    इस अवसर पर बीपी पटेल ने वृद्धाश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों को मिठाई समोसा और फल वितरित किए तथा उनके साथ समय बिताकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बुजुर्गों ने भी स्नेहपूर्वक उन्हें और जानकी पटेल को स्वस्थ जीवन तथा दीर्घायु का आशीर्वाद देते हुए उनके इस सामाजिक कार्य की सराहना की।

    समाजसेवी बीपी पटेल ने कहा कि जन्मदिन केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं बल्कि समाज के जरूरतमंद और उपेक्षित लोगों के साथ खुशियां बांटने का भी दिन होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने विशेष अवसरों को सेवा और समाजहित के कार्यों से जोड़ें ताकि ऐसे आयोजन जरूरतमंद लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकें।

    इस मौके पर सभासद शंकर प्रसाद यादव धर्मेंद्र कुमार ओझा सुरेंद्र यादव हरिशरण जानकी पटेल जगपालक सिंह यादव आशीष श्रीवास्तव एडवोकेट प्रखर सिंह प्रदोष सिंह पटेल वृद्धाश्रम के प्रबंधक कामता प्रसाद समाजसेविका दिव्यांगना मिश्रा अनुराग सिंह पटेल अशोक पटेल और ओंकार सिंह चंदेल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

    जन्मदिन समारोह से पहले बीपी पटेल ने पंपापुर देवांगना हनुमानगढ़ी आश्रम पहुंचकर सिद्ध संत तपशाली प्रेमदास जी महाराज का आशीर्वाद लिया और गुफा में विराजमान हनुमान जी के दर्शन कर अपने सामाजिक जीवन में सेवा और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    बीपी पटेल की यह पहल न केवल बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश देती है बल्कि यह भी बताती है कि जीवन के खास अवसरों को समाज सेवा से जोड़कर उन्हें अधिक सार्थक और प्रेरणादायक बनाया जा सकता है।