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  • एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला

    एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला


    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एशियाई खेल 2026 में भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि बताया है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में छह स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य पदक सहित कुल 27 पदक अपने नाम किए। सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सीमित संख्या में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बावजूद खिलाड़ियों ने अनुशासन, मेहनत और सामूहिक प्रयास के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।

    सोमवार को राजनाथ सिंह ने एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले सैन्य खिलाड़ियों के दल से मुलाकात की और उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इन खेलों में भारत ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें सैन्य खिलाड़ियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल 92 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। इनमें से खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतकर देश और सशस्त्र बलों का गौरव बढ़ाया।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है। उन्होंने इस प्रदर्शन को भारतीय सशस्त्र बलों की खेल परंपरा, अनुशासन और मजबूत तैयारी का प्रमाण बताया। उन्होंने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ उन प्रतिभागियों का भी उत्साह बढ़ाया, जो प्रतियोगिता में पदक हासिल नहीं कर सके। उनके मुताबिक, खेलों में भाग लेना, पूरी मेहनत से मुकाबला करना और अनुभव प्राप्त करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि पदक नहीं जीत पाना हार का प्रतीक नहीं है। वास्तविक हार तब होती है, जब कोई प्रयास करना छोड़ देता है। खिलाड़ियों ने पूरी कोशिश की और देश का नाम रोशन किया।

    राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए इसी समर्पण के साथ तैयारी जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को अपनी तैयारियों में निरंतर सुधार करना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।

    रक्षा मंत्री ने मिशन ओलंपिक विंग की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें आगे बढ़ाने, वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने और उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने में इस विंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को समय पर अवसर, व्यवस्थित प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग मिलना चाहिए। मिशन ओलंपिक विंग सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में शारीरिक क्षमता के साथ अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व जैसे गुणों को भी महत्व दिया जाता है। कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना सैन्य खिलाड़ियों की विशेषता है। ये गुण खेल के मैदान में भी उनके काम आते हैं। सामूहिक प्रयास, दबाव में बेहतर प्रदर्शन और अनुशासित तैयारी उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में मदद करते हैं।

    उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों और खेल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को आगामी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विशेष रूप से लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 और उसके बाद के ओलंपिक चक्र के लिए तैयारियां अभी से मजबूत करने की जरूरत है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाओं के जरिए उनके प्रदर्शन को अगले स्तर तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा। एशियाई खेलों में मिली सफलता को आगे बढ़ाते हुए सैन्य खिलाड़ियों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना लक्ष्य होना चाहिए, ताकि वे भविष्य में देश के लिए और अधिक पदक जीत सकें।

  • गोल्ड मेडल की असली सच्चाई आई सामने, जानें किस धातु से बनता है स्वर्ण पदक और क्यों चढ़ाई जाती है सोने की परत

    गोल्ड मेडल की असली सच्चाई आई सामने, जानें किस धातु से बनता है स्वर्ण पदक और क्यों चढ़ाई जाती है सोने की परत

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में जब कोई एथलीट स्वर्ण पदक जीतता है, तो उसकी चमक पूरे देश को गौरवान्वित करती है। आम तौर पर लोगों की धारणा यही रहती है कि यह पदक पूरी तरह से ठोस सोने का बना होता है। हालांकि वास्तविक सच इससे काफी अलग है। आधुनिक ओलंपिक और बड़ी वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं में दिए जाने वाले गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने के नहीं होते, बल्कि इन्हें खास अंतरराष्ट्रीय मानकों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के तहत तैयार किया जाता है।

    खेल नियमों के अनुसार एक स्वर्ण पदक का मुख्य हिस्सा चांदी का बना होता है। किसी भी मानक गोल्ड मेडल में कम से कम 92.5 प्रतिशत शुद्ध चांदी का उपयोग किया जाता है। इसके ऊपरी हिस्से पर ही केवल असली सोने की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। यही परत पदक को उसकी खास सुनहरी चमक और पहचान प्रदान करती है, जिससे यह देखने में पूरी तरह सोने का प्रतीत होता है।

    अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के नियमों के तहत एक स्वर्ण पदक का कुल वजन सामान्यतः 500 ग्राम के आसपास रखा जाता है। इतने वजन वाले पदक में मात्र 6 ग्राम शुद्ध सोना होना अनिवार्य होता है, जो ऊपर से कोटेड होता है। बाकी का पूरा हिस्सा उच्च गुणवत्ता वाली चांदी से ही निर्मित होता है। यदि पूरा पदक शुद्ध सोने से तैयार किया जाए, तो इसकी लागत काफी अधिक बढ़ जाएगी और यह व्यावहारिक नहीं रहेगा।

    शुद्ध सोना एक बेहद मुलायम धातु मानी जाती है, जिससे यदि पूरा मेडल बनाया जाए तो उसके आसानी से मुड़ने या खराब होने का जोखिम बना रहता है। चांदी अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली धातु है। इसी कारण चांदी के आधार पर सोने की कोटिंग करना सबसे उपयुक्त और टिकाऊ विकल्प माना जाता है।

    अगर इतिहास की बात करें तो वर्ष 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक तक खिलाड़ियों को पूरी तरह सोने के बने मेडल ही दिए जाते थे। इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध के दौरान और बढ़ती लागत के चलते नियमों में बदलाव किया गया। वर्तमान व्यवस्था में केवल सोने की परत चढ़ाने का नियम लागू है, जिससे पदकों की गुणवत्ता और मजबूती दोनों बनी रहती है।

    किसी भी खिलाड़ी के लिए स्वर्ण पदक की असली कीमत उसकी धातु की बाजार दर से नहीं तय होती। यह पदक वर्षों की कड़ी मेहनत, त्याग, अनुशासन और अपने देश को शीर्ष पर पहुंचाने के गौरव का प्रतीक होता है। यही ऐतिहासिक और भावनात्मक सम्मान इस पदक को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित खेल पुरस्कार बनाता है।