Tag: Om Prakash Rajbhar

  • अखिलेश-योगी की सियासी चुनौती पर राजभर का वार, बोले- अखिलेश जी अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाइए, यूपी में बयानबाजी तेज

    अखिलेश-योगी की सियासी चुनौती पर राजभर का वार, बोले- अखिलेश जी अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाइए, यूपी में बयानबाजी तेज


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राजभर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ललकारने के बाद पीछे हटने वाले को भगोड़ा कहा जाता है। उन्होंने अखिलेश यादव से अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती से पीछे नहीं हटने की बात कही। राजभर का यह बयान योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर हुई बयानबाजी के बाद आया है।
    दरअसल अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। इसके जवाब में योगी ने पलटवार करते हुए कहा था कि अखिलेश चाहें तो दोनों चुनाव लड़कर देख सकते हैं। इसके बाद अखिलेश ने अपने बयान में कहा कि इसके लिए उनका सिपाही ही काफी है। इसी घटनाक्रम को लेकर राजभर ने अखिलेश पर तंज कसते हुए उन्हें चुनौती स्वीकार करने की नसीहत दी। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी आरोप-प्रत्यारोप चर्चा में आ गए हैं।
    दूसरी ओर लखनऊ में कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय पर हुए हंगामे का मामला भी लगातार सुर्खियों में है। रविवार को पार्टी कार्यालय में पदभार ग्रहण समारोह के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ था। इस घटना से जुड़े एक नए वीडियो में कांग्रेस की महिला नेता ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच तीखी बहस दिखाई देने की बात सामने आई है। वीडियो में ममता चौधरी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह अजय राय की शक्ल नहीं देखना चाहतीं। इसके जवाब में अजय राय नाराज होते हुए उन्हें औकात में रहने की बात कहते सुनाई देते हैं।
    इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी मतभेदों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ममता चौधरी ने आरोप लगाया है कि अजय राय ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। वहीं घटना के वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के भीतर अनुशासन और कार्यकर्ताओं के व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस कार्यालय में हुए हंगामे के दौरान धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की खबरें भी सामने आई थीं।
    इसी बीच अखिलेश यादव ने लखनऊ में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया को श्रद्धांजलि दी और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में डुप्लीकेट और ट्रिपल वोट मौजूद हैं। अखिलेश ने आजमगढ़ की सदर विधानसभा सीट का जिक्र करते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति के नाम पर दस वोट दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी।
    अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर भाजपा की कथित गड़बड़ियों को उजागर करेगी। दूसरी ओर राजभर ने दावा किया कि जनता ने इंडिया गठबंधन को नकार दिया है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनका इंडिया गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। इन बयानों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल आगामी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति और विरोधियों पर हमले तेज कर रहे हैं। अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती और कांग्रेस कार्यालय का विवाद फिलहाल प्रदेश की सियासत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
  • यूपी के चार हिस्सों में बंटने का ओपी राजभर का दावा, बोले- पूर्वांचल बना तो राजभर समाज का बेटा होगा पहला CM

    यूपी के चार हिस्सों में बंटने का ओपी राजभर का दावा, बोले- पूर्वांचल बना तो राजभर समाज का बेटा होगा पहला CM

    अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के विभाजन और अलग पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का भविष्य में चार हिस्सों में बंटना तय है और यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होगा। राजभर ने यह भी कहा कि जिस राजनीतिक दल के साथ उनका गठबंधन होगा, पूर्वांचल में मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी रहेगी।

    चार अलग क्षेत्रों की मांग का किया जिक्र
    अंबेडकरनगर में बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी विशाल आबादी को देखते हुए भविष्य में इसका पुनर्गठन होना तय है। उन्होंने बुंदेलखंड में अलग राज्य की मांग, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरित प्रदेश की मांग के साथ मध्यांचल और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग का भी उल्लेख किया।

    राजभर के मुताबिक, पूर्वांचल के छह मंडलों में राजभर समाज की बड़ी आबादी है। उनका कहना है कि यदि पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो वहां के राजनीतिक समीकरणों में राजभर समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और गठबंधन की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर समाज की दावेदारी मजबूत रहेगी।

    सपा पर माफिया संरक्षण का आरोप
    राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। सपा के खिलाफ सामने आए उन पोस्टरों का जिक्र करते हुए, जिनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें दिखाई गई हैं, उन्होंने पोस्टरों में लगाए गए आरोपों का समर्थन किया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे अपराधियों को संरक्षण मिला। राजभर ने इसी आधार पर सपा सरकार की पहचान को अपराध और माफियाराज से जोड़ने का दावा किया। साथ ही उन्होंने सपा के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के राजनीतिक नारे पर भी कटाक्ष किया।

    अखिलेश-ओवैसी गठबंधन पर भी टिप्पणी
    असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी राजभर ने अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुद को मुस्लिम समाज का राजनीतिक नेतृत्व करने वाला मानते हैं, जबकि ओवैसी चाहते हैं कि मुस्लिम समाज से कोई नेता मुख्यमंत्री बने।

    राजभर के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर दोनों पक्षों की सोच अलग है, इसलिए अखिलेश यादव और ओवैसी के बीच गठबंधन होना मुश्किल है। यह राजभर का राजनीतिक आकलन है; ओवैसी की ओर से गठबंधन को लेकर हालिया बयान में 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात सामने आई है।

    पहले भी उठा है यूपी के पुनर्गठन का मुद्दा
    उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। राजभर के ताजा बयान में चार हिस्सों के रूप में पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी क्षेत्र की मांग का संदर्भ सामने आया है। हालांकि, फिलहाल उत्तर प्रदेश के चार राज्यों में विभाजन को लेकर कोई प्रशासनिक फैसला नहीं हुआ है। राजभर का बयान राजनीतिक मांग और भविष्य की संभावित स्थिति को लेकर उनका दावा है।

  • सपा में जल्द हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव, ओपी राजभर के दावों ने अटकलों को दी हवा

    सपा में जल्द हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव, ओपी राजभर के दावों ने अटकलों को दी हवा

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर संभावित टूट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख और एनडीए सहयोगी ओमप्रकाश राजभर के लगातार दावों ने इस चर्चा को और हवा दे दी है कि सपा में जल्द बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

    राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर जल्द सामने आएगा। उनके अनुसार, सपा के ‘बागी सांसदों’ के समूह का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के उस क्षेत्र का एक नेता करेगा, जिसे वह ‘बागी भूमि’ कहते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में सपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर कुछ वर्गों में नाराजगी बढ़ी है, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष और गहरा गया है।

    राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अब “सांसद बचाओ अभियान” शुरू करना चाहिए और नाराज सांसदों से मिलकर स्थिति संभालनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर कई सांसद असंतुष्ट हैं और समय के साथ बड़ा बदलाव सामने आ सकता है।

    अखिलेश यादव का पलटवार
    राजभर के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भविष्य की भविष्यवाणी करने वालों को पहले अपनी पार्टी की स्थिति देखनी चाहिए। अखिलेश ने एनडीए सहयोगियों पर सीट बंटवारे को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा गठबंधन के भीतर असंतोष की वास्तविकता को छिपाने की कोशिश की जा रही है।

    राजभर का जवाब और तीखी बयानबाजी
    अखिलेश की प्रतिक्रिया के बाद ओमप्रकाश राजभर ने एक और पोस्ट में अपने हमले और तेज कर दिए। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि अखिलेश यादव राजनीतिक रूप से अधिक समझदार हैं, लेकिन अब उनकी यह धारणा बदल गई है। राजभर ने दावा किया कि सपा के अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले समय में कई चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे भविष्य में कुछ और राजनीतिक खुलासे कर सकते हैं।

    पुराने मुद्दों का भी जिक्र
    अपने बयान में राजभर ने 2008 के चर्चित ‘वोट के बदले नोट’ प्रकरण का भी उल्लेख किया और उस दौर की राजनीति पर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई नया प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

  • यूपी के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की तैयारी, ओपी राजभर के बयान से सियासत गरमाई

    यूपी के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की तैयारी, ओपी राजभर के बयान से सियासत गरमाई



    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने संकेत दिए हैं कि यूपी के मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करने की दिशा में तैयारी की जा रही है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।

    राजभर ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि जिस तरह अन्य शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान कराया जाता है, उसी तरह मदरसों में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि विभाग उनके पास है और इस तरह की व्यवस्था लागू करने में कोई बुराई नहीं है।

    शिक्षा और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने की बात
    मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मदरसा संस्थानों के छात्रों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर देना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अमन, चैन और भाईचारे के साथ आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।उनके अनुसार, “राष्ट्रगीत का सम्मान किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति सम्मान का प्रतीक है।”

    विपक्ष पर तीखा हमला
    ओपी राजभर ने अपने बयान में विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे केवल राजनीति के लिए समाज में नफरत फैलाने की बात करते हैं।

    उन्होंने कहा कि मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया है और उन्हें शिक्षा एवं विकास से दूर रखा गया है। राजभर ने दावा किया कि उनकी सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है।

    विवाद की पृष्ठभूमि
    यह मुद्दा ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में भी कुछ मदरसों में ‘वंदे मातरम’ को लेकर बहस चल रही है। वहां कई मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया है, जबकि कुछ राजनीतिक दलों ने इसे समर्थन दिया है।अब उत्तर प्रदेश में भी इस तरह का प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

    सियासी माहौल गर्म
    उत्तर प्रदेश में पहले से ही 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हैं। ऐसे में ओपी राजभर का यह बयान राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। इसे सरकार की शिक्षा नीति और सामाजिक संतुलन की दिशा में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    मदरसा शिक्षा प्रणाली में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की चर्चा ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां सरकार इसे राष्ट्रभक्ति और एकता से जोड़कर देख रही है, वहीं विरोधी इसे संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।

  • बयानबाजी तेज: राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा, राजनीतिक टकराव बढ़ा

    बयानबाजी तेज: राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा, राजनीतिक टकराव बढ़ा


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में सुभासपा प्रमुख Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि अगर वह इतने “ज्ञानी-महाज्ञानी” हैं, तो उन्हें बताना चाहिए कि महाराजा सुहेलदेव के इतिहास को किस साजिश के तहत दबाया गया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।

    महाराजा सुहेलदेव के इतिहास पर छिड़ा नया विवाद
    राजभर ने अपने पोस्ट में महाराजा सुहेलदेव को पिछड़े समाज और वंचित वर्गों के सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने दावा किया कि बहराइच की धरती पर महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर इतिहास रचा था, लेकिन उनके योगदान को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों ने पिछड़े वर्ग के नायकों को इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया और उनकी गौरवगाथा को दबाने का प्रयास किया गया।

    सपा पर 13 साल की सत्ता का सवाल
    राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी यूपी में लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन इस दौरान महाराजा सुहेलदेव के सम्मान और इतिहास को स्थापित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सपा की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए इसे “मुगलिया और अंग्रेज मानसिकता” से जोड़ दिया। उनका कहना है कि पिछड़े समाज के नायकों के योगदान को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा कमजोर हुई।

    2027 चुनाव से पहले बढ़ेगा राजनीतिक घमासान
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, यूपी में जातीय और ऐतिहासिक मुद्दों पर राजनीति और तेज होगी। राजभर के इस बयान ने एक बार फिर पिछड़ा वर्ग की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

  • सीएम योगी से झगड़ लूंगा, पर आपको मंत्री बनवा दूंगा,अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का तीखा पलटवार

    सीएम योगी से झगड़ लूंगा, पर आपको मंत्री बनवा दूंगा,अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का तीखा पलटवार



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर बेहद सख्त और व्यंग्यात्मक अंदाज में हमला बोला है। यह पूरा विवाद अखिलेश यादव के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे पर सवाल उठाए थे।

    अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि यूपी में नए मंत्रियों के नाम तय होने के बाद भी उनके विभागों का बंटवारा नहीं किया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि सरकार में मंत्रालयों और विभागों के बंटवारे में देरी की वजह अंदरूनी खींचतान और कमीशन का विवाद है। अखिलेश ने यह भी कहा था कि नए मंत्री सिर्फ “दर्शक दीर्घा” में बैठे नजर आ रहे हैं और फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

    इसके जवाब में ओमप्रकाश राजभर ने पहले अवधी भाषा में एक तीखा पोस्ट किया और फिर उसे हिंदी में भी साझा किया। उन्होंने अखिलेश यादव पर निजी और राजनीतिक दोनों तरह के तंज कसे। राजभर ने कहा कि अखिलेश के भाई के निधन के बाद उन्हें कुछ समय तक राजनीति से दूर रहकर शोक मनाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय वे लगातार राजनीतिक बयान दे रहे हैं।

    राजभर ने अपने पोस्ट में लिखा कि अखिलेश “परिवार में गमी” के बावजूद राजनीति कर रहे हैं और दूसरों के घर की चिंता कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश को कम से कम तेरहवीं तक राजनीति से दूरी बनाए रखनी चाहिए थी।

    बात यहीं नहीं रुकी। ओमप्रकाश राजभर ने आगे व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव को मंत्री पद की इतनी इच्छा है, तो वे सुभासपा जॉइन कर लें। उन्होंने दावा किया कि वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी झगड़ लेंगे, लेकिन अखिलेश को किसी न किसी विभाग का मंत्री जरूर बनवा देंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि बेगाने मंत्रिमंडल में अखिलेश “दीवाने” बन रहे हैं और बिना वजह सरकार के फैसलों पर टिप्पणी कर रहे हैं।

    इस पूरे विवाद ने यूपी की सियासत में एक बार फिर गरमाहट बढ़ा दी है। जहां अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साध रहे हैं, वहीं ओमप्रकाश राजभर उनके बयानों का कड़ा और चुटीला जवाब दे रहे हैं।

  • यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की नई राजनीति, ओमप्रकाश राजभर की बड़ी रैली

    यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की नई राजनीति, ओमप्रकाश राजभर की बड़ी रैली

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की राजनीति तेज हो गई है। मायावती के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले से प्रेरित अब ओमप्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में 10 हजार ब्राह्मणों की रैली कर अपनी रणनीति का ऐलान कर दिया। राजभर ने रैली में ब्राह्मणों के सम्मान में कसीदे पढ़े और नारे लगाए जय सुहेलदेव जय परशुराम साथ ही साफ कर दिया कि उनका निशाना समाजवादी पार्टी है।

    बीते 20 सालों में मायावती और बीएसपी ने ब्राह्मण-दलित गठजोड़ और दलित मुस्लिम फॉर्मूले के कई प्रयोग किए लेकिन 2022 में बीएसपी केवल एक सीट पर सिमट गई। ऐसे में ओमप्रकाश राजभर ने ओबीसी-ब्राह्मण गठजोड़ की नींव आजमगढ़ से रखी है जहां समाजवादी पार्टी का दबदबा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी रैली से आजमगढ़ की सभी 10 विधानसभा सीटें एनडीए के पक्ष में जा सकती हैं।

    रैली में राजभर ने मुख्य रूप से तीन बातें कही: ब्राह्मण वर्ग की प्रबुद्धता और समाज में भूमिका यूजीसी गाइडलाइंस पर विश्वास और सुप्रीम कोर्ट की सहायता और ब्राह्मणों के प्रति सम्मानजनक संदेश। उनके प्रयास में बीजेपी और ब्राह्मण वर्ग को साधने की राजनीतिक रणनीति साफ झलक रही है। यूपी में ब्राह्मण आबादी लगभग 12 फीसदी है और सवर्ण आबादी 18-20 फीसदी इसलिए इसे साधना किसी भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है।

    ब्राह्मणों की राजनीति पर नज़र डालें तो ओमप्रकाश राजभर के मंच पर अलग मंच लखनऊ में ब्रजेश पाठक द्वारा तिलक और पूजा और प्रयागराज में हुए अपमान का विरोध सभी संकेत देते हैं कि जातिगत सियासत सक्रिय है। समाजवादी पार्टी बीएसपी और बीजेपी की कोशिशें इस वोट बैंक को आकर्षित करने में लगी हैं। मायावती ने हाल ही में घोसखोर पंडत विवाद में हस्तक्षेप कर ब्राह्मणों का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस ने फिलहाल खामोशी अख्तियार कर रखी है हालांकि अतीत में इसका जनाधार मजबूत था।

    यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक अब नए दौर में सोशल इंजीनियरिंग 2.0 का केंद्र बन गया है। ओमप्रकाश राजभर के प्रयास समाजवादी पार्टी के गढ़ आजमगढ़ पर चुनौती और बीजेपी-बीएसपी के फॉर्मूले इसे और दिलचस्प बना रहे हैं। आने वाले चुनाव में ब्राह्मण वर्ग की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।