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  • ओमान तट पर भारतीय नाविकों की मौत की अफवाह निकली झूठी, विदेश मंत्रालय ने बताया सुरक्षित है पूरा क्रू

    ओमान तट पर भारतीय नाविकों की मौत की अफवाह निकली झूठी, विदेश मंत्रालय ने बताया सुरक्षित है पूरा क्रू


    नई दिल्ली ।
    ओमान के तट के निकट संचालित एक व्यापारी जहाज पर कथित हमले और भारतीय नाविकों के हताहत होने की खबरों को लेकर फैली आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चल रही अफवाहों पर विराम लग गया है।

    हाल के दिनों में समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक जहाज को लेकर कई तरह के दावे सामने आए थे। कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि ओमान के तट के पास जहाज पर हमला हुआ है और उसमें सवार भारतीय नाविकों को नुकसान पहुंचा है। इन खबरों के प्रसारित होने के बाद नाविकों के परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया था।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने तत्काल तथ्यों की पुष्टि की प्रक्रिया शुरू की। जांच और प्रत्यक्ष संपर्क के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जहाज पर किसी प्रकार का हमला नहीं हुआ है और चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने बताया कि जहाज के संचालन और क्रू की स्थिति सामान्य है तथा किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

    जानकारी के अनुसार, भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब जहाज से संपर्क स्थापित करने में अस्थायी तकनीकी कठिनाई सामने आई। संचार व्यवस्था में आई रुकावट के कारण कुछ समय तक जहाज से नियमित संपर्क नहीं हो सका। इसी दौरान विभिन्न माध्यमों पर कई अपुष्ट दावे सामने आने लगे, जिन्हें बाद में तथ्यों के आधार पर गलत पाया गया।

    समुद्री क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी तक संचालित होने वाले जहाजों में संचार संबंधी तकनीकी समस्याएं असामान्य नहीं हैं। कई बार रेडियो या अन्य संचार उपकरणों में अस्थायी बाधा आने से संपर्क प्रभावित हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ किसी दुर्घटना या सुरक्षा संकट से नहीं होता। ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना आवश्यक माना जाता है।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहाज की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और उपलब्ध सभी माध्यमों से उसकी गतिविधियों की निगरानी की गई। संबंधित अधिकारियों ने जहाज के जिम्मेदार कर्मियों से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि जहाज और उस पर मौजूद सभी लोग सुरक्षित हैं।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और सुरक्षा संबंधी मामलों में अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार कितनी तेजी से भ्रम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है, विशेषकर तब जब मामला मानव जीवन और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हो।

    सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और भारतीय नागरिकों से संबंधित किसी भी संवेदनशील सूचना पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करें। साथ ही भ्रामक और अप्रमाणित खबरों को आगे बढ़ाने से बचें ताकि अनावश्यक डर और भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

  • होर्मुज संकट के बीच ‘डार्क फ्लीट’ रणनीति चर्चा में, तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए चला विशेष अभियान

    होर्मुज संकट के बीच ‘डार्क फ्लीट’ रणनीति चर्चा में, तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए चला विशेष अभियान

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने दावा किया है कि क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद बड़ी मात्रा में कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में सफलता हासिल की गई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा व्यापार की रणनीतियों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी मार्ग से विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों, तेल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है। हाल के महीनों में इसी मार्ग को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच अमेरिका ने वैकल्पिक संचालन व्यवस्था अपनाकर तेल परिवहन जारी रखने का प्रयास किया।

    जानकारी के अनुसार तेल परिवहन की प्रक्रिया को कई चरणों में अंजाम दिया गया। शुरुआती चरण में खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक देशों से कच्चे तेल को टैंकरों के माध्यम से निर्धारित समुद्री क्षेत्रों तक पहुंचाया गया। इसके बाद समुद्र में ही एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित करने की व्यवस्था अपनाई गई। इस प्रक्रिया का उद्देश्य संवेदनशील समुद्री मार्गों पर जोखिम को कम करना और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित होने से बचाना बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रणनीति केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। समुद्र में जहाज-से-जहाज तेल हस्तांतरण लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा उद्योग का हिस्सा रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसका उपयोग अधिक व्यापक स्तर पर देखने को मिला है। इससे तेल परिवहन करने वाली कंपनियों को वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध हुए और संभावित अवरोधों के बावजूद आपूर्ति जारी रखी जा सकी।

    समुद्री गतिविधियों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ जहाजों ने अपनी लोकेशन संबंधी सार्वजनिक सूचनाओं को सीमित रखा, जिसके कारण उनकी गतिविधियों पर सामान्य निगरानी प्रणालियों की पकड़ कम रही। ऐसी गतिविधियों को अक्सर ‘डार्क ट्रांजिट’ की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और सुरक्षा मानकों के संदर्भ में लगातार बहस का विषय बनी रहती है।

    ऊर्जा बाजार के जानकारों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बनाए रखना था। यदि तेल आपूर्ति बाधित होती तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता था, जिसका असर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैकल्पिक लॉजिस्टिक नेटवर्क तैयार करना ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।

    विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक शक्तियां केवल सैन्य क्षमता ही नहीं बल्कि ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को भी अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रखेंगी। होर्मुज क्षेत्र से जुड़ी ताजा गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक हित अब पहले से कहीं अधिक गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में होने वाला प्रत्येक घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • ओमान के समुद्री क्षेत्र में भारतीय जहाज पर कथित हमले से बढ़ी चिंता, कुछ दिनों में तीसरी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

    ओमान के समुद्री क्षेत्र में भारतीय जहाज पर कथित हमले से बढ़ी चिंता, कुछ दिनों में तीसरी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । ओमान के तटीय क्षेत्र के निकट भारतीय चालक दल वाले एक व्यापारी जहाज पर कथित हमले की सूचना सामने आने के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शिनास बंदरगाह के आसपास संचालित एक जहाज को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। जहाज पर दो दर्जन के करीब भारतीय नाविक सवार बताए जा रहे हैं। हालांकि घटना की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

    घटना के सामने आते ही भारतीय अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है। संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है और जहाज से जुड़ी सभी सूचनाओं का सत्यापन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और चालक दल की स्थिति को प्राथमिकता देते हुए हर पहलू की निगरानी की जा रही है।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में इसी समुद्री क्षेत्र में यह तीसरी बड़ी घटना बताई जा रही है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि का असर व्यापक स्तर पर महसूस किया जाता है।

    कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में एक अन्य जहाज पर आग लगने की घटना सामने आई थी। प्रारंभिक आकलनों में इसे संदिग्ध परिस्थितियों से जोड़कर देखा गया था। उस मामले में जहाज पर मौजूद भारतीय चालक दल सुरक्षित बताया गया था, लेकिन घटना ने समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया था।

    इसके बाद एक और टैंकर से जुड़ी गंभीर घटना ने हालात को और संवेदनशील बना दिया। उस मामले में चालक दल के कई सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन कुछ लोगों की मौत की पुष्टि होने से मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद विभिन्न देशों की ओर से सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए गए थे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं केवल जहाजों और उनके चालक दल के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकती हैं। खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का तनाव माल परिवहन, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर डाल सकता है।

    समुद्री सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में क्षेत्रीय गतिविधियों की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। कई देशों की नौसैनिक एजेंसियां पहले से ही महत्वपूर्ण जलमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में लगी हुई हैं। इसके बावजूद हालिया घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि समुद्री क्षेत्र में जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

    फिलहाल संबंधित जहाज से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है और विभिन्न एजेंसियां घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह तकनीकी दुर्घटना थी, सुरक्षा चूक थी या फिर किसी सुनियोजित कार्रवाई का हिस्सा। तब तक समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर सतर्कता बनी रहने की संभावना है।

  • प्रयागराज के दशहरी-लंगड़ा आम अब यूएई और ओमान को 50 हजार टन आम निर्यात की तैयारी, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

    प्रयागराज के दशहरी-लंगड़ा आम अब यूएई और ओमान को 50 हजार टन आम निर्यात की तैयारी, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार



    प्रयागराज। प्रयागराज मंडल के मशहूर दशहरी, लंगड़ा और फजली आम की मिठास अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह अब विदेशों तक अपनी पहचान बनाएगी। इस बार प्रयागराज मंडल से करीब 50 हजार टन आम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान भेजने की तैयारी की जा रही है, जिससे किसानों और निर्यात कारोबार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

    प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, प्रतापगढ़ और कौशांबी जिलों में लगभग 2400 से 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की बागवानी की जाती है। यहां से हर साल करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा निर्यात के लिए तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि प्रयागराज जिले में अकेले ही 600 से 650 हेक्टेयर में आम की खेती होती है और यहां से लगभग 10 हजार टन से अधिक उत्पादन होता है।

    विदेशी बाजारों में यहां के आमों की मांग लगातार बढ़ रही है। दशहरी, लंगड़ा और फजली किस्मों को उनकी मिठास, सुगंध और गुणवत्ता के कारण खाड़ी देशों में काफी पसंद किया जा रहा है। इसी कारण हर साल लगभग 50 हजार टन आम यूएई और ओमान जैसे देशों में निर्यात किया जाता है।

    इसके साथ ही किसानों का रुझान अब नई प्रजातियों की ओर भी बढ़ रहा है। उद्यान विभाग के अनुसार अंबिका, अरुणिका, मल्लिका और बॉम्बे ग्रीन जैसी नई किस्में कम समय में तैयार होने और बेहतर उत्पादन के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन किस्मों की मांग न सिर्फ घरेलू बाजार में बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पैकिंग, ग्रेडिंग और कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। किसानों को बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने और सुरक्षित पैकिंग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जो खुसरो बाग सहित विभिन्न केंद्रों पर आयोजित किया जाता है।

    कुल मिलाकर, प्रयागराज मंडल के आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल अमेरिका के हालिया संघर्ष के चलते तनावपूर्ण स्थिति बढ़ने के बीच भारतीय दूतावासों ने छात्रों और अभिभावकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इस अपडेट में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को बहरीन ईरान कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रद्द करने की घोषणा की है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा और शिक्षण गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    ओमान में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह एडवाइजरी पहले जारी 01.03.2026 03.03.2026 05.03.2026 07.03.2026 और 09.03.2026 के सर्कुलरों का अपडेशन है। इन सर्कुलरों के माध्यम से प्रभावित देशों में स्कूलों और संबंधित अधिकारियों से मिले इनपुट और अपील के आधार पर बोर्ड ने 12वीं क्लास की परीक्षाओं की समीक्षा की। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि 16 मार्च से लेकर 10 मार्च तक निर्धारित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इसके साथ ही पहले स्थगित की गई परीक्षाओं की तारीखें भी पूरी तरह रद्द होंगी।

    इस निर्णय का उद्देश्य न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उनके परिणाम सही समय पर घोषित किए जाएं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि परीक्षा स्थगित होने के बाद रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया और तरीका बाद में अलग से बताया जाएगा। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि सीबीएसई 10 मार्च को स्थिति की पुनः समीक्षा करेगा और 12 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के लिए सही निर्णय लेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ओमान में भारतीय दूतावास ने पहले भी 9 10 और 11 मार्च को होने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल टालने की जानकारी साझा की थी। यह कदम ईरान इजरायल युद्ध और वहां की सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर छात्रों और उनके परिवारों के हित में उठाया गया। दूतावास ने यह भी बताया कि सभी संबंधित स्कूलों और अधिकारियों को बोर्ड ने सीधे निर्देश दिए हैं कि परीक्षा स्थगित होने की जानकारी तुरंत छात्रों तक पहुँचाई जाए।

    इस स्थिति से प्रभावित छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि बोर्ड ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षाओं के परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इस बीच छात्रों को आवश्यकतानुसार ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि उनका अकादमिक नुकसान कम से कम हो।

    इस निर्णय से यह भी साफ हो जाता है कि वैश्विक तनाव और सुरक्षा स्थिति सीधे तौर पर शिक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। सीबीएसई का यह कदम छात्रों की सुरक्षा मानसिक शांति और शिक्षण गतिविधियों की निरंतरता को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

     
     
     
    नई दिल्ली। ओमान के दक्षिणी शहर सलालाह के पोर्ट पर तेल स्टोरेज टैंकों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले की सूचना मिली है। ओमानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद पोर्ट के फ्यूल स्टोरेज टैंकों में आग भड़क गई, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने पुष्टि की कि पोर्ट पर मौजूद किसी व्यापारी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा।
    घटना के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को फोन कर इस हमले पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। सुल्तान ने कहा कि ओमान मौजूदा संघर्ष में तटस्थ है और अपनी सुरक्षा व क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
    तुर्किये के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोआन ने मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि ईरान में जारी युद्ध को तुरंत रोकना होगा, वरना पूरा क्षेत्र आग की चपेट में आ सकता है। एर्दोआन ने कहा कि कूटनीति के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है और तुर्किये अभी भी दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
    इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बताया कि अमेरिका के सहयोग से चल रहा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, और इस ऑपरेशन की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।
    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति पर असर को देखते हुए घोषणा की कि उसके 32 सदस्य देश आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में उतारेंगे। IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बताया कि यह एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ा तेल रिलीज होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम युद्ध के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधा को दूर करने के लिए उठाया गया है।
    28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से केवल 10% तक ही पहुंच पाया है। IEA ने कहा कि आपातकालीन भंडार से तेल सदस्य देशों की परिस्थितियों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा।
    1974 में स्थापित IEA के इतिहास में यह छठी बार है जब सदस्य देश मिलकर रणनीतिक भंडार से तेल जारी कर रहे हैं। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के हरिकेन कैटरीना, 2011 के लीबिया युद्ध और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऐसा कदम उठाया गया था। IEA के 32 सदस्य देशों में अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। भारत इस एजेंसी का सदस्य नहीं है, लेकिन 2017 से यह IEA का एसोसिएट देश है।
    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला, सुल्तान की नाराजगी, मध्यस्थता के प्रयास और 32 देशों द्वारा 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने की योजना के बीच, मिडिल-ईस्ट में तनाव और ऊर्जा संकट गहराता दिखाई दे रहा है।

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  • ओमान में ईरान का हमला: भारतीय शिप पर भीषण हमला-तेल बाजार में भारी उछाल

    ओमान में ईरान का हमला: भारतीय शिप पर भीषण हमला-तेल बाजार में भारी उछाल


    नई दिल्ली।
     ओमान के समुद्री क्षेत्र में ईरानी हमलों के बीच भारतीय शिप एमकेडी वीओएम पर भयंकर हादसा हुआ, जिसमें कम से कम तीन भारतीयों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए। हादसा मार्शैल आइलैंड्स के झंडे वाले जहाज पर मस्कट से 52 नॉटिकल माइलेज दूर हुआ। चालक दल के अन्य सदस्यों को पनामा झंडे वाले वाणिज्यिक पोत एमवी सैंड की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया।

    इस हमले के पीछे ईरान का ओमान की समुद्री सीमा पर हमला करना और अमेरिका–इजरायल के हालिया हमलों के जवाब में उठाया गया कदम माना जा रहा है। ओमान की रॉयल नेवी ने प्रभावित टैंकर की निगरानी शुरू कर दी है और समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क किया गया है।

    इस हमले से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया। अमेरिकी क्रूड की कीमत 7.6 प्रतिशत बढ़कर 72.12 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 8.6 प्रतिशत बढ़कर 79.11 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यूरोप में प्राकृतिक गैस वायदा कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई।

    ओमान में भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और सभी लापता चालक दल के सदस्यों को खोजने के प्रयास जारी हैं। इस हमले ने न केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को चुनौती दी है बल्कि मध्यपूर्व और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डाला है।