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  • जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया। श्रीनगर स्थित लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। इस फेरबदल में सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है।

    मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में सदस्यों की संख्या नौ हो गई है। जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मंत्रिमंडल में अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं। इस तरह उमर अब्दुल्ला सरकार ने मंत्रिपरिषद की निर्धारित संख्या पूरी कर ली है। अब नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने और मौजूदा विभागों में बदलाव को लेकर नजर रहेगी।

    इस विस्तार में राजनीतिक अनुभव, महिला प्रतिनिधित्व और विभिन्न क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में जगह देने पर जोर दिखाई देता है। अली मोहम्मद सागर और मीर सैफुल्लाह पहले भी मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं, जबकि शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। शमीमा फिरदौस के शामिल होने से सरकार में महिला प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा।

    अली मोहम्मद सागर नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह श्रीनगर जिले की खानयार विधानसभा सीट से सात बार विधायक चुने जा चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और वह महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इससे पहले वह उमर अब्दुल्ला सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

    मीर सैफुल्लाह उत्तरी कश्मीर के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। वह चार बार विधायक चुने गए हैं। उनके पिछले तीन कार्यकाल कुपवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रहे, जबकि 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने त्रेहगाम सीट से जीत हासिल की। पेशे से वकील रहे सैफुल्लाह पहले भी मंत्री पद संभाल चुके हैं। उनके मंत्रिमंडल में लौटने से उत्तरी कश्मीर का प्रतिनिधित्व सरकार में मजबूत होगा।

    शमीमा फिरदौस नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हैं। वह श्रीनगर की हब्बाकदल विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुनी गई हैं। पहली बार मंत्री बनने के साथ ही वह सकीना इट्टू के बाद मंत्रिमंडल में दूसरी महिला मंत्री होंगी। उनके शामिल होने से सरकार में महिला नेतृत्व की भागीदारी बढ़ेगी।

    अल्ताफ अहमद कल्लू, जिन्हें अल्ताफ कल्लू के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह दूसरी बार विधायक बने हैं और विधान परिषद के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं। विधानसभा और विधान परिषद का अनुभव रखने वाले कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिली है।

    इस बीच, कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होने तक सरकार में शामिल नहीं होने का अपना रुख बरकरार रखा है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार के भीतर ही हुआ है। अब विभागों के बंटवारे से यह स्पष्ट होगा कि नए मंत्रियों को कौन-कौन सी जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में कितना बदलाव होता है।

  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर हंगामा, नारेबाजी और धक्कामुक्की के बाद कार्यवाही स्थगित

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर हंगामा, नारेबाजी और धक्कामुक्की के बाद कार्यवाही स्थगित


    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश को तत्काल और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग वाला प्रस्ताव सदन में पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया। नारेबाजी, तीखी बहस, धक्कामुक्की और दस्तावेजों को फाड़ने की घटनाओं के बीच विधानसभा की कार्यवाही पहले कुछ समय और बाद में सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव के जरिए जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया और इसे आगे भारत सरकार के पास भेजने की बात भी शामिल थी। हालांकि, प्रस्ताव की प्रस्तावना में वर्ष 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्ताव के संदर्भ ने विवाद खड़ा कर दिया।

    भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव में स्वायत्तता के पुराने संदर्भ को शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सदन में स्वायत्तता से संबंधित विषय पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते कई विधायक अपनी सीटों से उठकर सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे।

    हंगामे के दौरान प्रस्ताव की प्रतियां फाड़कर सदन के बीच में फेंके जाने की भी घटना सामने आई। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने सदन के बीच से एक कुर्सी उठाने का प्रयास किया। मार्शलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और बाद में उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया।

    विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। लेकिन लगातार जारी नारेबाजी और हंगामे के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद अध्यक्ष ने पहले करीब 30 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा, जिसके बाद सदन की बैठक सोमवार तक स्थगित कर दी गई।

    इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग को लेकर भी सदन में विरोध जताया था। इस दौरान नारेबाजी हुई और सदन का माहौल पहले से ही गरम रहा।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य के दर्जे के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने सार्वजनिक बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में, जहां नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे, उन्होंने राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया था। उनके अनुसार, उस समय प्रधानमंत्री ने इसे सामान्य वादा नहीं बल्कि ‘मोदी की गारंटी’ बताया था। उमर ने सवाल उठाया कि यदि यह गारंटी थी, तो अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया गया।

    जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। विधानसभा में शुक्रवार की कार्यवाही ने इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच मतभेद को एक बार फिर सामने ला दिया। फिलहाल प्रस्ताव पर आगे की चर्चा और सदन की अगली कार्रवाई सोमवार को होने की संभावना है।

  • J&K: फायरिंग में बाल-बाल बचे फारूक अब्दुल्ला… उमर बोले- 'अल्लाह रहमदिल है…

    J&K: फायरिंग में बाल-बाल बचे फारूक अब्दुल्ला… उमर बोले- 'अल्लाह रहमदिल है…


    जम्मू।
    नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) पर बुधवार देर रात फायरिंग की गई. इस घटना में वह बाल-बाल बच गए. उनके बेटे उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है.

    जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि अल्लाह रहमदिल है. मेरे पिता बहुत बड़े खतरे से बाल-बाल बचे हैं. फिलहाल पूरी जानकारी साफ नहीं है लेकिन इतना पता चला है कि एक शख्स भरी हुई पिस्तौल के साथ बेहद करीब पहुंच गया था और उसने नजदीक से गोली चला दी. क्लोज प्रोटेक्शन टीम की सतर्कता की वजह से गोली का रुख मोड़ दिया गया और हत्या की कोशिश नाकाम हो गई।

    उन्होंने कहा कि इस समय सवाल-जवाबों से ज्यादा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेड प्लस और एनएसजी सुरक्षा में रहने वाले एक पूर्व मुख्यमंत्री के इतने करीब कोई व्यक्ति आखिर कैसे पहुंच गया।

    बता दें कि फारूक अब्दुल्ला बुधवार रात को जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित होटल रॉयल पार्क में एक शादी समारोह में शामिल होने गए था. इस समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी समेत कई नेता मौजूद थे. इसी दौरान एक व्यक्ति ने चुपचाप फारूक अब्दुल्ला के बेहद करीब जाकर गोली चला दी. लेकिन गनीमत रही कि वह इस हमले में बाल-बाल बच गए।

    फायरिंग में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को छर्रे लगने से मामूली चोटें जरूरी आई हैं. इस घटना से हर तरफ हड़कंप मच गया. मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को तुरंत पकड़ लिया. इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    पुलिस अब इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है. घटना से जुड़े तथ्यों को समझने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंघाली जा रही है. बताया जा रहा है कि आरोपी कमल सिंह जम्वाल खनन के कारोबार से जुड़ा हुआ है. हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में खनन गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है, जिससे वह नाराज बताया जा रहा है।