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  • राजा मानधाता की कठोर तपस्या से जुड़ा ओंकारेश्वर धाम, जानें 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस पवित्र मंदिर की खास मान्यताएं

    राजा मानधाता की कठोर तपस्या से जुड़ा ओंकारेश्वर धाम, जानें 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस पवित्र मंदिर की खास मान्यताएं


    मध्य प्रदेश: में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर धाम भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस तीर्थस्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु महादेव के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां नर्मदा नदी के घाट, प्राचीन मंदिर और पूजा-अर्चना का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का संगम होने के कारण ओंकारेश्वर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में विशेष स्थान रखता है।

    ओंकारेश्वर की पहचान यहां स्थित मानधाता द्वीप से भी जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस द्वीप को ऊपर से देखने पर इसका आकार ओम जैसा दिखाई देता है। हिंदू धर्म में ओम को पवित्र ध्वनि और आध्यात्मिक प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के कारण इस स्थान का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा के साथ द्वीप की धार्मिक पहचान से भी परिचित होते हैं।

    ओंकारेश्वर धाम की सबसे प्रमुख पौराणिक मान्यताओं में राजा मानधाता की तपस्या का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि राजा मानधाता ने इसी पर्वत पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लंबे समय तक कठोर तप किया था। उनकी साधना से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए। इसी कथा को ओंकारेश्वर धाम की धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह प्रसंग भक्ति, साधना और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

    इस तीर्थस्थल का संबंध आदि शंकराचार्य से भी बताया जाता है। मान्यता है कि अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने यहां समय बिताया था। अद्वैत वेदांत की परंपरा में भी ओंकारेश्वर का विशेष महत्व माना जाता है। इस कारण यहां केवल भगवान शिव के भक्त ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान, दर्शन और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग भी पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और नर्मदा नदी के आसपास का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को ध्यान और साधना के लिए आकर्षित करता है।

    ओंकारेश्वर की यात्रा में ममलेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह मंदिर नर्मदा नदी के दूसरे तट पर स्थित है और इसे अमलेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ओंकारेश्वर आने वाले अनेक श्रद्धालु ममलेश्वर महादेव की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि दोनों मंदिरों के दर्शन करने से तीर्थयात्रा पूर्ण होती है। इसी वजह से भक्त नर्मदा के दोनों किनारों पर स्थित इन प्राचीन शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं।

    ओंकारेश्वर और ममलेश्वर धाम की विशेषता केवल उनकी धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। नर्मदा नदी के घाट, मंदिरों में होने वाली पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की मौजूदगी यहां के वातावरण को विशिष्ट बनाते हैं। नदी के किनारे स्थित मंदिरों का प्राकृतिक परिवेश इस तीर्थस्थल की पहचान को और आकर्षक बनाता है।

    भगवान शिव के दर्शन, धार्मिक आस्था और मानसिक शांति की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचते हैं। राजा मानधाता की तपस्या से जुड़ी पौराणिक कथा, मानधाता द्वीप का ओम जैसा आकार, आदि शंकराचार्य से संबंधित मान्यता और ममलेश्वर मंदिर के दर्शन इस धाम को विशेष धार्मिक पहचान देते हैं। यही कारण है कि ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के प्रमुख शिव तीर्थों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

  • MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे

    MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे


    खंडवा।
    ओंकारेश्वर (Omkareshwar) में सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) की तैयारियों के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स से प्रभावित हो रहे स्थानीय लोग अब लामबंद हो गए हैं. जिला प्रशासन से अपनी मांगों पर सहमति नहीं बनने के विरोध में नगरवासियों ने दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का फैसला किया है।

    19 अक्टूबर से बंद के पहले दिन ओंकारेश्वर में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहीं. यहां तक कि फुटपाथ पर फूल-माला, प्रसाद आदि बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी अपना कारोबार बंद (Business Closed) रखा. इधर, प्रशासन ने कहा है कि स्थानीय लोगों से बातचीत चल रही है और उनकी लगभग सभी मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. इस विस्तारीकरण योजना के तहत सड़कों और रास्तों के किनारे दुकानें, मकान एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने वालों को विस्थापित किया जा रहा है. इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाई गई है.


    प्रशासन के सामने 19 मांगे रखी

    स्थानीय लोगों की समिति ने पिछले महीने जिला प्रशासन के सामने अपनी 19 मांगें रखी थीं. उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, इसलिए दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का निर्णय लिया गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जिनकी दुकानें, मकान एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, उन्हें इसके बदले बेहतर पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।

    ओंकारेश्वर बंद को स्थानीय लोगों के साथ साधु-संतों का भी समर्थन मिला. उनका कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अब वे पक्का और भरोसेमंद आश्वासन चाहते हैं.


    छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद

    ओंकारेश्वर बंद के दौरान छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद रहीं. यहां तक कि होटल और स्थानीय परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं. इस कारण बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई. श्रद्धालुओं का भी कहना है कि स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का ध्यान रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

    इधर, जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय लोगों से लगातार बातचीत जारी है. उनकी ओर से रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया है और 19 में से 17 मांगें मानी जा चुकी हैं. पुनर्वास के लिए स्थान तय करने को लेकर थोड़ी दिक्कत आ रही है, जिसे भी जल्द सुलझा लिया जाएगा. जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय लोगों का बेहतर पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी आजीविका पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

  • मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश: सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रीन एनर्जी को राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का जोर सौर ऊर्जा समेत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर है। इसके साथ ही निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

    इसी क्रम में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विसेज उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि इन सलाहकारी सेवाओं के लिए एडीबी की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

    सरकार की योजना ऐसे व्यावसायिक मॉडल और लेनदेन ढांचे तैयार करने की है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करना आसान हो और उनका संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे। इससे निजी और संस्थागत निवेशकों के लिए परियोजनाओं में भागीदारी की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

    ओंकारेश्वर में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। जलाशय की सतह पर सौर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन करने वाली इस तकनीक के जरिए उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। ओंकारेश्वर में 278 मेगावाट क्षमता के एक चरण के लिए परियोजना संबंधी समझौता किया गया है।

    इसके अलावा ओंकारेश्वर में लगभग 300 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी जलाशय क्षेत्र और आधारभूत ढांचा उपलब्ध बताया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 600 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की दिशा में तैयारी की जा रही है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, प्री फिजिबिलिटी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से संबंधित अध्ययन भी किए जा चुके हैं।

    नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की प्रकृति को देखते हुए सरकार अब बिजली भंडारण को भी परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध रहती है, जबकि बिजली की मांग कई बार अलग-अलग समय पर बढ़ती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाने में उपयोगी हो सकती है।

    ओंकारेश्वर की प्रस्तावित परियोजना में दो घंटे की को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है। इससे सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने की योजना है। पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सौर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं है। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक निवेश, ग्रीन इन्वेस्टमेंट, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ना चाहती है। इसके लिए परियोजनाओं को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा की उपलब्ध संभावनाओं, जलाशयों और विकसित हो रहे ऊर्जा ढांचे को देखते हुए सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना तलाश रही है। एडीबी के साथ सहयोग और ओंकारेश्वर जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और निवेश को एक साथ आगे बढ़ाकर राज्य को ग्रीन और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश की जा रही है।

  • मप्रः सावन में उज्जैन, ओंकारेश्वर एवं महेश्वर स्थित होटलों में विशेष फलाहारी थाली की व्यवस्था

    मप्रः सावन में उज्जैन, ओंकारेश्वर एवं महेश्वर स्थित होटलों में विशेष फलाहारी थाली की व्यवस्था


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपी टूरिज्म) द्वारा पवित्र श्रावण (सावन) माह के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए उज्जैन, ओंकारेश्वर एवं महेश्वर स्थित अपने होटल एवं पर्यटन इकाइयों में विशेष फलाहारी भोजन की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु निर्धारित समय पर पौष्टिक एवं स्वादिष्ट फलाहारी व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे।

    मप्र टूरिज्म के मैनेजर श्याम तिवारी ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि उज्जैन शहर के तीन इकाई जिसमें सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज होटल, शिप्रा रेजिडेंसी, होटल उज्जैनी शामिल है। इसी प्रकार खरगोन में नर्मदा रिसोर्ट महेश्वर और खंडवा जिले के टेम्पल व्यू ओंकारेश्वर सहित कुल पांच स्थानों पर कावड़ यात्रियों (श्रद्धालु) के लिए फलाहारी की व्यवस्था उपलब्ध करायी जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि एमपी टूरिज्म की इन इकाइयों में फलाहारी नाश्ता प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक, फलाहारी दोपहर का भोजन (लंच) दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक तथा फलाहारी रात्रि भोजन (डिनर) शाम 7 बजे से रात्रि 10:30 बजे तक उपलब्ध रहेगा। फलाहारी लंच थाली में भगर उपमा, साबूदाना वड़ा, आलू जीरा, सिंघाड़े की पुड़ी, तली हुई मूंगफली, फलाहारी चिप्स, हरी एवं लाल चटनी, दो प्रकार के मौसमी फल तथा लौकी का हलवा परोसा जाएगा। वहीं फलाहारी डिनर थाली में पतली ग्रेवी वाली आलू की सब्जी, कुट्टू की पुड़ी, साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा, तली हुई मूंगफली, फलाहारी नमकीन, हरी एवं लाल चटनी, सांवा की खीर तथा दो प्रकार के मौसमी फल शामिल रहेंगे।

    एमपी टूरिज्म ने कावड़ यात्रियों (श्रद्धालु) से अपील की है कि वे सावन माह में धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर स्थित एमपी टूरिज्म की इकाइयों में उपलब्ध विशेष फलाहारी का लाभ प्राप्त करें।

  • ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

    ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

     मध्य प्रदेश:  के खंडवा जिले स्थित ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में उस समय प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई जब ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण झूला पुल के लोडिंग तार की एक कड़ी क्षतिग्रस्त पाई गई। तकनीकी खराबी सामने आने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए पुल पर सभी प्रकार की आवाजाही को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुल के दोनों ओर स्थित प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए हैं तथा किसी भी व्यक्ति को पुल पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

    यह झूला पुल नर्मदा नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क माध्यम माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और पर्यटक इस पुल का उपयोग करते हैं। ऐसे में पुल के तार में आई तकनीकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए तत्काल प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पुल की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना उसे दोबारा चालू नहीं किया जाएगा।

    घटना की जानकारी मिलते ही तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पुल का विस्तृत निरीक्षण शुरू कर दिया। प्रारंभिक जांच में लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने की पुष्टि हुई है। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मरम्मत कार्य और सुरक्षा परीक्षण में लगभग तीन दिन का समय लग सकता है। इस दौरान पुल पूरी तरह बंद रहेगा।

    प्रशासन ने पुल के दोनों छोर पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी कर दी है ताकि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्गों के उपयोग की सलाह दी गई है। नर्मदा नदी पार करने के लिए पुराने पुल तथा नाव सेवा का उपयोग किया जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना सभी के हित में है।

    ओंकारेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां आने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में झूला पुल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह दोनों धार्मिक स्थलों के बीच सुगम संपर्क उपलब्ध कराता है। पुल के अस्थायी रूप से बंद होने से यात्रियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

    गौरतलब है कि नर्मदा नदी पर निर्मित यह झूला पुल वर्ष 2004 में लगभग 7.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। पिछले दो दशकों में यह पुल ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के बीच आवागमन का प्रमुख साधन बन चुका है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी पुल के एक तार में खराबी सामने आई थी, जिसके बाद आवश्यक मरम्मत कर इसे पुनः चालू किया गया था।

    वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पुल की व्यापक तकनीकी जांच की जाएगी। सभी सुरक्षा मानकों पर संतोषजनक रिपोर्ट मिलने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए दोबारा खोला जाएगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता पुल की संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा कल से: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा कल से: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन


    मध्य प्रदेश । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 जून से मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आ रही हैं। 22 जून तक चलने वाले इस दौरे के दौरान वे इंदौर, ओंकारेश्वर, ग्वालियर और श्योपुर सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों का भ्रमण करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।

    राष्ट्रपति के दौरे की शुरुआत इंदौर से होगी। यहां पहुंचने के बाद वे सीधे ओंकारेश्वर जाएंगी, जहां भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगी। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस यात्रा को लेकर ओंकारेश्वर क्षेत्र में विशेष तैयारियां की गई हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग पार्किंग और परिवहन व्यवस्था भी बनाई है।

    19 जून को राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण और सिकल सेल बीमारी के उन्मूलन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। इसके बाद राष्ट्रपति का कार्यक्रम ग्वालियर और श्योपुर में भी निर्धारित है, जहां वे विभिन्न सरकारी और सामाजिक आयोजनों में भाग लेंगी।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए इंदौर एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन ने एयरपोर्ट क्षेत्र को अस्थायी रूप से ‘नो-फ्लाइंग जोन’ घोषित किया है। इस दौरान किसी भी प्रकार की अनधिकृत उड़ान गतिविधि पर प्रतिबंध रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए रखेंगी ताकि राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

    यातायात व्यवस्था के तहत 17 से 19 जून तक कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया है। इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले भारी मालवाहक वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। खंडवा, खरगोन, भीकनगांव, कसरावद, धामनोद और अन्य क्षेत्रों से होकर वाहनों को निकाला जाएगा ताकि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात प्रभावित न हो।

    ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है। इंदौर, खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों तक ही जाने की अनुमति होगी। वहां से श्रद्धालुओं को पैदल या प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए परिवहन साधनों के माध्यम से मंदिर क्षेत्र तक पहुंचना होगा। बसों के लिए भी अलग पार्किंग और शटल सेवा की व्यवस्था की गई है।

    राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने के दौरान कुछ प्रमुख मार्गों को अस्थायी रूप से नो-व्हीकल जोन घोषित किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से इन मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए रोकी जा सकती है। राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात को सामान्य रूप से बहाल कर दिया जाएगा।

    प्रशासन ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। साथ ही यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय लेकर निकलें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

  • ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व का भव्य शुभारंभ मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक विरासत पर सीएम का संदेश

    ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व का भव्य शुभारंभ मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक विरासत पर सीएम का संदेश


    खंडवा। ओंकारेश्वर में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव पर आयोजित भव्य एकात्म पर्व का शुभारंभ आज वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच किया गया। खंडवा जिले के पवित्र ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में पांच दिवसीय इस आयोजन का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के सान्निध्य में दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया और संतों तथा विद्वानों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश एक अद्भुत धरती है जहां हर युग में दिव्य सानिध्य की अनुभूति होती रही है। उन्होंने कहा कि वनवास काल में भगवान श्रीराम के आगमन से लेकर श्रीकृष्ण के शिक्षा ग्रहण तक इस भूमि का इतिहास दिव्यता से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर का एकात्म धाम जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की महान परंपरा का जीवंत प्रतीक है और यह स्थान अद्वैत वेदांत की शाश्वत शिक्षाओं को विश्व पटल पर स्थापित करने की क्षमता रखता है।

    कार्यक्रम के दौरान अद्वैत लोक और अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने यज्ञ में आहुतियां देकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। यह आयोजन आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वैशाख शुक्ल पंचमी के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े सहित कई संत और विद्वान उपस्थित रहे जिन्होंने अद्वैत दर्शन और आधुनिक युवा पीढ़ी के संबंधों पर विचार साझा किए।

    आयोजन के अंतर्गत द्वैत लोक संग्रहालय के निर्माण की भी योजना है जो दूसरे चरण में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने बड़ी राशि की स्वीकृति प्रदान की है। इस मंच पर अद्वैत वेदांत की प्रासंगिकता पर विशेष विमर्श भी शुरू हुआ जिसमें संतों ने आत्मा ब्रह्म और भगवान की एकता पर प्रकाश डाला। शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि यह तीनों तत्व वास्तव में एक ही सत्य के विभिन्न रूप हैं और इन्हीं के समागम से भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है।

    पांच दिवसीय एकात्म पर्व के दौरान ओंकारेश्वर में विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रहा है बल्कि यह अद्वैत दर्शन को आधुनिक समाज से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी माना जा रहा है। यहां आने वाले लोग भारतीय संस्कृति की गहराई और उसकी एकात्म दृष्टि का अनुभव कर रहे हैं।

    इस आयोजन के माध्यम से सरकार और संत परंपरा मिलकर भारतीय दर्शन की गहराई को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ओंकारेश्वर में बढ़ती श्रद्धालुओं की उपस्थिति से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है और पर्यटन को नई पहचान मिल रही है। यहां आने वाले युवा और विद्यार्थी अद्वैत वेदांत के मूल सिद्धांतों को समझकर जीवन में संतुलन और सकारात्मकता की प्रेरणा ले रहे हैं। यह आयोजन आने वाले समय में मध्यप्रदेश को आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • MP: ओंकारेश्वर में संत की हत्या की आशंका… मौत के 5 दिन बाद समाधि से निकलवाया शव

    MP: ओंकारेश्वर में संत की हत्या की आशंका… मौत के 5 दिन बाद समाधि से निकलवाया शव


    खंडवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ओंकारेश्वर (Omkareshwar) स्थित उदासीन अखाड़े (Udasin Akhara) से जुड़े संत ब्रजराज पुरी महाराज (Saint Brajraj Puri Maharaj) की हाल ही में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आश्रम से जुड़े लोगों ने उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताते हुए जल्दबाजी में उनके शव को समाधि दे दी थी, लेकिन बाद में संत समाज, हिंदू महासभा, परिजनों और अखाड़े के महंतों ने उनकी हत्या की आशंका जताते हुए शव को समाधि से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने की मांग कई। जिसके बाद प्रशासन ने गुरुवार को संत की समाधि खोदकर पार्थिव देह बाहर निकाली और पोस्टमार्टम कराया।


    हार्ट अटैक या फांसी? मौत की वजह पर विरोधाभास

    4 अप्रैल को संत ब्रजराज पुरी महाराज के निधन के बाद आश्रम के लोगों ने हार्ट अटैक से मौत की जानकारी दी थी। वहीं, खाचरौद से पहुंचे उदासीन अखाड़े के महंत ओंकारदास उदासीन ने दावा किया कि उन्हें संत द्वारा फांसी लगाने की सूचना दी गई थी। इस विरोधाभासी जानकारी ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। महंत ओंकारदास का कहना है कि उनके ओंकारेश्वर पहुंचने से पहले ही संत को दोपहर में जल्दबाजी में समाधि दे दी गई, जबकि परंपरा के अनुसार दूर-दराज से आने वाले संतों का इंतजार किया जाता है।


    अधिकारियों की मौजूदगी में निकाला गया शव, फिर हुआ पोस्टमार्टम

    मामले के तूल पकड़ने के बाद ओंकारेश्वर एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी की मौजूदगी में संत ब्रजराज पुरी महाराज की समाधि खोदी गई। प्रशासनिक निगरानी में पार्थिव देह को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद विधि-विधान के साथ संत की दोबारा समाधि दी गई। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय होगी।


    गायब आभूषण, मोबाइल और नकदी ने बढ़ाया शक

    महंत ओंकारदास उदासीन ने आरोप लगाया है कि संत के गले में पहनी सोने की चेन, रुद्राक्ष माला, मोबाइल फोन और नकदी मौके पर नहीं मिले। इसी वजह से हत्या या साजिश की आशंका और गहरा गई है। उन्होंने मांधाता थाने में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम की मांग की थी।


    73 एकड़ जमीन विवाद बना जांच का बड़ा एंगल

    पूरे मामले में 73 एकड़ जमीन का विवाद भी सामने आया है। हिंदू महासभा और संत समाज के अनुसार, संत ब्रजराज पुरी महाराज ने पहले इस जमीन को लेकर विवाद का जिक्र किया था। आरोप है कि निरंजनी अखाड़े से जुड़ी इस जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए दूसरे नाम पर दर्ज करा लिया गया था। संत समाज इस विवाद को भी मौत से जोड़कर देख रहा है।


    प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

    खंडवा डीआईजी मनोज कुमार राय पहले ही मामले की जांच के आदेश दे चुके हैं। वहीं हिंदू महासभा के आवेदन पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने भी पुलिस अधीक्षक को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि मांधाता थाना पुलिस अब तक नजदीकी परिजनों से औपचारिक शिकायत नहीं मिलने का हवाला देकर कार्रवाई से बचती रही है।


    पहले से खुदवाया था समाधि का गड्ढा

    स्थानीय संत समाज के अनुसार, बाबा ब्रजराज पुरी महाराज ने करीब एक साल पहले अपनी कुटिया के सामने समाधि के लिए गड्ढा खुदवा दिया था और चेलों को निर्देश दिया था कि निधन के बाद उन्हें वहीं समाधि दी जाए। इसी कारण पहली बार भी उसी स्थान पर समाधि दी गई थी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल संत मृत्यु प्रकरण की सबसे अहम कड़ी बन गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा कि यह स्वाभाविक मौत थी, आत्महत्या थी या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।

  • ओंकारेश्वर में मुफ्त माल के लिए दौड़-धूप, विधायक नारायण पटेल ने संभाला मोर्चा..

    ओंकारेश्वर में मुफ्त माल के लिए दौड़-धूप, विधायक नारायण पटेल ने संभाला मोर्चा..


    खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में तहसील कार्यालय के पास गुरुवार को बेतुकी लूटपाट का नजारा देखने को मिला। राजस्व विभाग द्वारा सड़क किनारे व्यापारियों से जब्त किए गए धनिया, मिर्ची, हल्दी और जीरे के पैकेटों को लेकर लोगों में हड़बड़ी और भटकाव मच गया।

    सूत्रों के अनुसार, व्यापारियों की नाराजगी तब चरम पर पहुंची जब उन्होंने देखा कि जप्त मसाले को कोटवार और मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने आपस में बाँटकर सड़क पर बिखेर दिया। स्थिति ऐसी बन गई कि ओंकारेश्वर विधायक नारायण पटेल को थाने पर फोन करके पुलिस बुलानी पड़ी।

    व्यापारी पहले तहसीलदार से शिकायत लेकर नगर परिषद कार्यालय जा रहे थे, तभी उन्होंने मसालों की लूट और बिखराव देखा। करीब तीन घंटे तक कार्यालय परिसर और मुख्य सड़क पर हंगामा चलता रहा। महिला व्यापारियों ने पुलिस और प्रशासन पर जमकर नाराजगी जताई और खरी-खोटी सुनाई।

    घटना की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी अनोख सिंह सिंधिया दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और 112 पुलिस वाहन भी घटनास्थल पर तैनात किया गया। विधायक ने दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।

    अब सवाल यह है कि जप्त माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और यदि लूटपाट हुई है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा। प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पर भी लोगों के सवाल बढ़ गए हैं।

  • नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज

    नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की पहली सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्साह के बीच शुरू हुई। 1 जनवरी की सुबह होते ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में तड़के चार बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह नौ बजे तक लगभग 80 हजार श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके थे। प्रशासन के अनुसार दिनभर यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।महाकाल मंदिर में नए साल के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन की सुविधा सुनिश्चित की गई। इस दौरान महिला क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम की सदस्य भी मंदिर पहुंचीं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

    उज्जैन के अलावा नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया और मंगला आरती के बाद दर्शन खोले गए। इसके साथ ही ओरछा के रामराजा मंदिर, मैहर के शारदा देवी मंदिर, नलखेड़ा के मां बगलामुखी धाम और देवास के प्रमुख मंदिरों में भी हजारों भक्त नए साल की पहली सुबह दर्शन के लिए पहुंचे।सीहोर जिले के प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में ठंड और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। दमोह जिले के बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। गुना के हनुमान टेकरी मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहां प्रशासन ने अनुमान लगाया कि एक लाख से अधिक भक्त पहुंचे।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ ही प्रदेश के शहरों और पर्यटन स्थलों पर नए साल का जश्न भी देर रात तक चलता रहा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में लोग सड़कों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे। मांडू और पचमढ़ी जैसे पर्यटन केंद्रों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और अलाव के माध्यम से नए साल का स्वागत किया गया।जबलपुर के भेड़ाघाट धुआंधार में साल के पहले सूर्योदय को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचे। उगते सूर्य के साथ लोगों ने नए साल की शुरुआत को यादगार बनाया। इस प्रकार, मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव दोनों के लिए विशेष रही।