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  • ओडिशा तट से 43 किमी दूर समुद्र में मिली प्राकृतिक गैस, ‘समुद्र मंथन’ अभियान की पहली बड़ी खोज

    ओडिशा तट से 43 किमी दूर समुद्र में मिली प्राकृतिक गैस, ‘समुद्र मंथन’ अभियान की पहली बड़ी खोज


    नई दिल्ली। भारत के अपतटीय ऊर्जा अभियान को बड़ी सफलता मिली है। ओएनजीसी ने ओडिशा तट से करीब 43 किलोमीटर दूर समुद्र में गहरे कुएं से प्राकृतिक गैस की खोज की है। महानदी बेसिन में 18 सितंबर को करीब 1450 मीटर की गहराई पर हुई इस खोज को ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत पहली बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कंपनी के मुताबिक कुएं से पिछले तीन दिनों से लगातार अच्छे प्रवाह और दबाव के साथ गैस निकल रही है।

    इस खोज से भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए घरेलू स्रोत मजबूत होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुएं में कुल कितनी गैस उपलब्ध है और यहां से व्यावसायिक स्तर पर कितना उत्पादन संभव होगा। आगे की जांच और मूल्यांकन के बाद ही भंडार की वास्तविक क्षमता तथा व्यावसायिक उपयोगिता का पता चलेगा।

    चार कुओं में सबसे पहले एमडीडब्ल्यू-28 की खुदाई

    गैस की खोज जिस कुएं में हुई है, उसका नाम एमडीडब्ल्यू-28 है। इसकी खुदाई 25 जुलाई को शुरू हुई थी। यह कुआं समुद्र में करीब 770 मीटर गहरे पानी में स्थित है और ओएनजीसी के मौजूदा अभियान के तहत खोदे जाने वाले चार कुओं में पहला है।

    एमडीडब्ल्यू-28 महानदी बेसिन के उस क्षेत्र में आता है, जहां पहले भी गैस की खोज हो चुकी है। यह कुआं ओएनजीसी की 2024 में की गई उत्कल और कोणार्क गैस खोजों से करीब 23 नॉटिकल मील की दूरी पर है।

    आगे जांच के बाद सामने आएगी उत्पादन क्षमता

    ओएनजीसी के सामने अब अगली चुनौती इस खोज की वास्तविक क्षमता का आकलन करना है। इसके लिए आगे तकनीकी जांच की जाएगी, जिससे पता चलेगा कि कुएं से कितनी गैस निकाली जा सकती है और व्यावसायिक उत्पादन आर्थिक रूप से कितना फायदेमंद रहेगा।

    कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा है कि वह गहरे और अत्यंत गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज का अभियान जारी रखेगी। इससे संकेत मिलता है कि महानदी बेसिन में अपतटीय खोज गतिविधियां आगे भी जारी रहने वाली हैं।

    पेट्रोलियम मंत्री ने बताया बड़ी उपलब्धि

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज को भारत के अपतटीय खोज कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में पहले मिली अन्य खोजों के साथ इस नए संसाधन को जोड़कर साझा सुविधाओं के माध्यम से विकास की संभावनाएं बन सकती हैं। इससे परियोजनाओं में लागत और समय दोनों कम करने में मदद मिल सकती है।

    हालांकि, उत्कल और कोणार्क खोजों के कुल भंडार तथा उनकी व्यावसायिक उपयोगिता से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    महानदी बेसिन में बड़े संसाधन का अनुमान

    ‘समुद्र मंथन’ पहल का उद्देश्य महानदी बेसिन के उन गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की तलाश करना है, जिनकी अभी तक पर्याप्त खोज नहीं हुई है। सरकारी एजेंसी के अनुमान के अनुसार महानदी बेसिन में जमीन पर करीब 45 मिलियन टन और उथले पानी वाले क्षेत्र में करीब 100 मिलियन टन संसाधन मौजूद हो सकते हैं। वहीं, गहरे पानी वाले हिस्से के संसाधनों का अभी आकलन नहीं हुआ है।

    केंद्र सरकार ने जुलाई में ‘समुद्र मंथन’ अभियान को मंजूरी दी थी। इसके लिए 84,084 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है और यह कार्यक्रम 2030-31 तक चलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल के जरिए देश के हाइड्रोकार्बन संसाधनों में 600 मिलियन टन से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है।

    महानदी बेसिन में एमडीडब्ल्यू-28 से गैस की खोज ऐसे समय हुई है, जब भारत घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस खोज का वास्तविक आर्थिक और ऊर्जा प्रभाव गैस भंडार की मात्रा तथा व्यावसायिक उत्पादन की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • रॉयल्टी दरों में बड़ी कटौती का असर: ONGC और Oil India ने पकड़ी रफ्तार, निवेशकों में उत्साह

    रॉयल्टी दरों में बड़ी कटौती का असर: ONGC और Oil India ने पकड़ी रफ्तार, निवेशकों में उत्साह

    नई दिल्ली । सरकार द्वारा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर रॉयल्टी दरों में महत्वपूर्ण कटौती के फैसले ने देश के ऊर्जा क्षेत्र में नई हलचल पैदा कर दी है। इस निर्णय के बाद सरकारी स्वामित्व वाली प्रमुख कंपनियों ONGC और Oil India के शेयर बाजार में तेज़ी से उछल गए और निवेशकों में नया उत्साह देखने को मिला। बाजार में इस कदम को ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत और दीर्घकालिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

    सरकार ने ऑफशोर कच्चे तेल उत्पादन पर रॉयल्टी दर को घटाकर पहले से कम कर दिया है, जबकि प्राकृतिक गैस पर लागू रॉयल्टी संरचना को भी संशोधित किया गया है। नए बदलावों के तहत उत्पादन लागत में कमी आने की उम्मीद है, जिससे कंपनियों की लाभप्रदता में सुधार होगा। इस फैसले के बाद ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    शेयर बाजार में ONGC और Oil India दोनों के स्टॉक्स में मजबूती देखी गई। विशेष रूप से Oil India के शेयरों में अधिक तेजी रही, जहां यह इंट्राडे कारोबार के दौरान अपने उच्च स्तर तक पहुंच गया। वहीं ONGC के शेयरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और यह लगातार मजबूत रुझान के साथ ट्रेड करता रहा। इस तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशक सरकार के इस निर्णय को दीर्घकालिक रूप से लाभकारी मान रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार रॉयल्टी दरों में कमी से इन कंपनियों के नकदी प्रवाह पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उत्पादन लागत घटने के कारण उनका शुद्ध लाभ बढ़ने की संभावना है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम विशेष रूप से अपस्ट्रीम तेल और गैस कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकता है, जो पिछले कुछ वर्षों में कर बोझ और वैश्विक कीमतों की अनिश्चितता से प्रभावित रही हैं।

    इसके अलावा, इस फैसले को निवेश माहौल सुधारने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लंबे समय से ऊर्जा कंपनियों पर बढ़ते करों और नीतिगत अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं, जिसके कारण इस सेक्टर का प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर अपेक्षाकृत कमजोर रहा था। लेकिन रॉयल्टी दरों में यह कटौती निवेशकों की उन चिंताओं को कुछ हद तक कम करती दिख रही है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर या ऊंची बनी रहती हैं, तो ONGC जैसी कंपनियां आने वाले समय में मजबूत रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं। वहीं Oil India को भी उत्पादन लागत में राहत मिलने से अपने परिचालन प्रदर्शन को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।

    कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित हो सकता है। बाजार में आई यह तेजी केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि भविष्य की संभावनाओं का संकेत भी मानी जा रही है, जहां ऊर्जा कंपनियां अधिक स्थिर और लाभदायक विकास की ओर बढ़ सकती हैं।