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  • नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली

    नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली


    इंदौर  इंदौर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर ठगों ने एक छात्र से अलग-अलग बहानों से करीब 44 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। नौकरी और रिफंड का भरोसा देते हुए आरोपियों ने कई किस्तों में रकम वसूली, लेकिन न तो नौकरी दी और न ही पैसा लौटाया। शिकायत के बाद एमआईजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैइंदौर 

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी छात्र राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक युवती का फोन आया। उसने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि नौकरी के लिए किया गया उसका आवेदन चयनित हो गया है। बातचीत के दौरान उसने व्यक्तिगत जानकारी और कार्य से जुड़ी कुछ जानकारियां लीं तथा बताया कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसका चयन किया गया है। साथ ही जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू कराने की बात कही गई।

    कुछ देर बाद युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 1800 रुपए जमा करने को कहा। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद 50 रुपए काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर इंटरव्यू की जानकारी दी और मोबाइल पर ही इंटरव्यू लेने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक इंटरव्यू के बाद आरोपियों ने चयन होने का दावा करते हुए फिर 1800 रुपए जमा कराए। इसके बाद सुरक्षा राशि, सर्विस चार्ज और जीएसटी समेत अलग-अलग मदों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। हर बार यह आश्वासन दिया गया कि पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

    आरोपियों ने राजेश से कुल आठ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराए और करीब 44 हजार रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम जमा कराने के बाद भी न तो नियुक्ति पत्र भेजा गया और न ही किसी प्रकार की नौकरी उपलब्ध कराई गई। जब लगातार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या जीएसटी जैसी कोई भी रकम मांगने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी या भर्ती एजेंसी की सत्यता की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान न करें और संदिग्ध मामलों की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

  • बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार

    बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार


    मुजफ्फरपुर।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (Medical Entrance Examination) NEET का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. पिछले महीने ही पेपर लीक (Paper leak) के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे. मामला इतना बढ़ा कि परीक्षा को लेकर बड़े स्तर पर जांच शुरू हुई, कई गिरफ्तारियां हुईं और कई राज्यों में छापेमारी तक हुई. अब जबकि 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित होने जा रही है, उससे पहले बिहार (Bihar) से सामने आई एक घटना ने फिर अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.

    मुजफ्फरपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो NEET परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और उनके परिजनों से ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) कर रहा था. गिरोह टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले गिरोह के मुख्य आरोपी को जेल भेजा जा चुका है. अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


    टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी पेपर

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया पर ऐसे ग्रुप और चैनल चला रहे थे, जहां NEET परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था. छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुंच जाएगा और इसके बदले मोटी रकम मांगी जाती थी. परीक्षा की तैयारी में जुटे हजारों छात्र और उनके परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में ऐसे झांसों का शिकार बन जाते थे. आरोपियों ने इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर ठगी का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।


    एक सूचना और खुल गई पूरी परत

    मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, 2 जून को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से संचालित एक गिरोह NEET परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर उसे टेलीग्राम के जरिए बेच रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बालूघाट स्थित एक किराये के मकान पर छापेमारी की. वहां से गिरोह के मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार किया गया. तलाशी के दौरान उसके कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ. शुरुआती जांच में ही कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई।


    बनाई गई विशेष जांच टीम

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया. पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण और एएसपी नगर-1 के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल के बाद पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में सफलता मिली. लगातार चलाए गए अभियान के दौरान नगर थाना क्षेत्र से हर्ष, अमन कुमार और कन्हैया कुमार उर्फ मानव को गिरफ्तार किया गया. वहीं सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से हर्ष कनोडिया को दबोच लिया गया।


    पूछताछ में खुला ठगी का तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे टेलीग्राम के माध्यम से छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क करते थे. उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा. आरोपी पहले कुछ नमूना सामग्री भेजते थे और फिर ऑनलाइन भुगतान की मांग करते थे. रकम मिलने के बाद या तो फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिया जाता था या फिर संपर्क तोड़ दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती थी, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।


    मोबाइल से मिले अहम सुराग

    गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. पुलिस अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है. माना जा रहा है कि इनके जरिए कई राज्यों के छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया था. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं. पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।


    21 जून की परीक्षा से पहले अलर्ट

    अब जबकि 21 जून को परीक्षा आयोजित होनी है, पुलिस और प्रशासन अभ्यर्थियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कोई भी संस्था, व्यक्ति या सोशल मीडिया चैनल परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता है तो उस पर भरोसा न करें. विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे गिरोह छात्रों की मानसिक स्थिति और भविष्य की चिंता का फायदा उठाते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक या ऑफर से बचना जरूरी है।


    पुलिस की चेतावनी

    पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. मामले में अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. फिलहाल मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि परीक्षा सीजन शुरू होते ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को किसी शॉर्टकट के बजाय अपनी मेहनत और तैयारी पर भरोसा करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

  • बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए

    बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए


    मध्यप्रदेश। इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। इस बार ठगों के जाल में जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त अधिकारी फंस गए। बिजली बिल अपडेट नहीं होने और कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर साइबर ठगों ने उनके मोबाइल में कथित रूप से एप डाउनलोड करवाए और बैंक खाते से बड़ी राशि निकाल ली। मामले की शिकायत मिलने के बाद कनाड़िया थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार संचार नगर निवासी रमेश कुंबारे, जो जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त हैं, इस साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। घटना 2 जून की रात की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक उनकी पत्नी ज्योति के मोबाइल नंबर पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को बिजली विभाग का कर्मचारी बताते हुए अपना नाम राकेश बताया।

    फोन पर उसने कहा कि मई माह का बिजली बिल विभाग के सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ है। साथ ही उसने व्हाट्सएप पर भी संदेश भेजा। इसके बाद रमेश कुंबारे ने उसी नंबर पर संपर्क कर बताया कि बिजली बिल का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और भुगतान संबंधी संदेश भी उनके पास मौजूद है।

    आरोप है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें विश्वास में लेते हुए कहा कि विभाग के रिकॉर्ड में भुगतान दिखाई नहीं दे रहा है। उसने यह भी कहा कि यदि तुरंत अपडेट नहीं कराया गया तो बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद कथित रूप से दो मोबाइल एप डाउनलोड करने और 12 रुपए का अपडेट शुल्क जमा करने की बात कही गई।

    ठग ने व्हाट्सएप पर एक फॉर्म भेजा और उसे खोलने के लिए कहा। शिकायत के अनुसार जैसे ही फॉर्म खोला गया, मोबाइल स्क्रीन कुछ समय के लिए बंद हो गई। शुरुआत में इसे तकनीकी समस्या समझा गया, लेकिन बाद में जब मोबाइल दोबारा चालू किया गया तो उसमें ‘Electricity Online Customer Support’ नाम के दो एप डाउनलोड मिले।

    कुछ ही देर बाद मोबाइल पर बैंक खाते से राशि कटने के संदेश आने लगे। पहले 24 हजार 500 रुपए की निकासी का संदेश मिला। जब खाते की जानकारी जांची गई तो पता चला कि खाते से कई अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। शिकायत के अनुसार 25-25 हजार रुपए के तीन ट्रांजेक्शन के अलावा 24 हजार और 68 हजार रुपए की राशि भी खाते से निकाल ली गई।

    घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। कनाड़िया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर ठगों की पहचान और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को सलाह देते हैं कि बिजली बिल, केवाईसी अपडेट, बैंक सत्यापन या किसी अन्य सेवा के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और लिंक से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में एप डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति दें। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • गुना में क्रिप्टो शेयर के नाम पर 49 लाख की ठगी, सस्ते निवेश का लालच देकर युवक को बनाया शिकार

    गुना में क्रिप्टो शेयर के नाम पर 49 लाख की ठगी, सस्ते निवेश का लालच देकर युवक को बनाया शिकार




    गुना। गुना शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित मठकरी कॉलोनी में एक बड़े साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जहां एक युवक से क्रिप्टो करेंसी के जरिए सस्ते शेयर में निवेश का झांसा देकर 49.47 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने 26 से 30 जून 2025 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में यह रकम ट्रांसफर करवाई।

    जानकारी के अनुसार पीड़ित आयुष के मोबाइल पर एक फर्जी क्रिप्टो कंपनी की ओर से संपर्क किया गया था, जहां उसे कम दाम में शेयर खरीदकर भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। शुरुआत में बातों में फंसाकर छोटी रकम डलवाई गई, जिसके बाद लगातार चार दिनों तक उसे अलग-अलग खातों में पैसे जमा कराने के लिए मजबूर किया गया।

    पीड़ित ने 30 जून तक कुल 49 लाख 47 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन जब 1 जुलाई को उसने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो ट्रांजेक्शन फेल हो गया और पैसे वापस नहीं मिले। इसके बाद जब उसने संपर्क किया तो ठगों ने रिफंड के लिए 50 हजार रुपये और जमा करने की शर्त रख दी, जिससे उसे शक हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने पूरी जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद पिता श्याम अग्रवाल की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब अज्ञात आरोपियों और बैंक खातों की जांच में जुटी हुई है

  • पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    नई दिल्ली: पुणे में एक सनसनीखेज ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें 75 वर्षीय एक वरिष्ठ डॉक्टर ने 12 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी जमा पूंजी गंवा दी। मामला जनवरी के आखिरी सप्ताह से शुरू हुआ, जब डॉक्टर को एक अननोन नंबर से मैसेज आया, जिसमें कई शेयरों की सूची और निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया गया। लिंक पर क्लिक करते ही डॉक्टर को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां धोखेबाजों ने खुद को एक ग्लोबल फाइनेंसियल मैनेजमेंट फर्म के सीनियर अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया।

    ग्रुप में आरोपी सदस्य निवेश के दौरान होने वाले मुनाफे की झूठी जानकारी साझा करते थे, जिससे डॉक्टर का भरोसा जीतना आसान हो गया। डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन पर भेजा गया, जिसका नाम एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के नाम से मिलता जुलता था। इसके माध्यम से जालसाजों ने डॉक्टर से बैंक अकाउंट और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें कई बैंक खातों में निवेश के नाम पर धन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।

    पीड़ित डॉक्टर ने 7 मार्च से 18 मार्च के बीच लगभग 12.3 करोड़ रुपये फर्जी प्लेटफॉर्म पर निवेश किए। इस दौरान निवेश पर मनगढ़ंत मुनाफे का प्रदर्शन कर डॉक्टर को और धन निवेश करने के लिए मजबूर किया गया। जब डॉक्टर ने और पैसा लगाने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उनके खिलाफ संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की सभी जमा पूंजी को जालसाजों ने अपने नियंत्रण में ले लिया।

    घोटाले का यह तरीका अत्यंत सुनियोजित था, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी एप्लिकेशन का प्रयोग कर पीड़ित को लगातार प्रभावित किया गया। आरोपियों ने निवेश पर झूठे लाभ दिखाकर डॉक्टर को विश्वास में लिया और अपनी संपत्ति गंवाने के लिए मजबूर किया। यह मामला ऑनलाइन निवेश में बढ़ती धोखाधड़ी और साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है।

    पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करना आवश्यक है। डॉक्टर की उम्र और अनुभव को देखते हुए यह घटना निवेशकों के लिए चेतावनी का विषय है।

  • मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।
    गुरुग्राम में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें एक महिला ने खुद को देश के प्रतिष्ठित मेदांता दी मेडिसिटी अस्पताल की डॉक्टर बताकर लोगों को किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का झांसा दिया। आरोपी महिला की पहचान प्रिया संतोष के रूप में हुई है जो सोशल मीडिया फर्जी वेबसाइटों और वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों से संपर्क कर रही थी। मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी की शिकायत पर सदर थाना पुलिस ने आरोपी महिला और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि आरोपी महिला ने अस्पताल के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। इस वेबसाइट पर दावा किया गया था कि मेदांता अस्पताल को किडनी की सख्त जरूरत है और जो व्यक्ति अपनी किडनी डोनेट करेगा उसे इसके बदले तीन करोड़ रुपये दिए जाएंगे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी खुद को मेदांता की डॉक्टर बताती थी और फर्जी स्टाफ आईडी भी दिखाती थी।पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए जरूरतमंद या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को टारगेट करता था। उन्हें बड़ी रकम का लालच देकर पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे और फिर अलग-अलग बहानों से और रकम मांगी जाती थी। इस ठगी का पर्दाफाश तब हुआ जब एक महिला प्रतीक्षा पुजारी इस जाल में फंस गई।

    पीड़िता प्रतीक्षा पुजारी ने बताया कि प्रिया संतोष ने खुद को मेदांता की डॉक्टर बताकर उससे संपर्क किया और किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का वादा किया। शुरुआत में उससे पंजीकरण शुल्क के तौर पर आठ हजार रुपये लिए गए। इसके बाद ठगों ने उससे बीस हजार रुपये और जमा करने को कहा। जब महिला को संदेह हुआ तो उसने सीधे मेदांता अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया। यहीं से पूरा मामला उजागर हो गया।अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्पष्ट किया कि प्रिया संतोष नाम की कोई भी डॉक्टर मेदांता में कार्यरत नहीं है और न ही अस्पताल किसी प्रकार के किडनी डोनेशन के बदले पैसे देने जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी द्वारा दिखाई गई स्टाफ आईडी पूरी तरह फर्जी थी और वेबसाइट भी नकली थी।

    मेदांता अस्पताल की ओर से कहा गया है कि यह गिरोह न केवल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है बल्कि अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और संदिग्ध कॉल वेबसाइट या मैसेज की तुरंत पुलिस को सूचना दें।फिलहाल गुरुग्राम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी महिला व उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं।