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  • एक्सपायरी दवाओं के आरोपों के बीच हड़ताल: कटनी में मेडिकल स्टोर्स पर ताले

    एक्सपायरी दवाओं के आरोपों के बीच हड़ताल: कटनी में मेडिकल स्टोर्स पर ताले


    कटनी । कटनी में बुधवार को दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा, जब ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर पूरे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की दवा दुकानें बंद रहीं। इस एक दिवसीय बंद का नेतृत्व कटनी केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने किया, जिसने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

    सुबह से ही शहर के मेडिकल स्टोरों के शटर बंद रहे, जिससे दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। केवल आपातकालीन सेवाओं से जुड़े स्टोर और पीएम जन औषधि केंद्रों को इस बंद से छूट दी गई, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की उपलब्धता में कोई बाधा न आए।

    ऑनलाइन दवा कंपनियों पर गंभीर आरोप
    एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदू जादवानी ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी डिस्काउंट और ऑफर्स का लालच देकर व्यापार कर रही हैं, जिससे स्थानीय दवा कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एक्सपायरी दवाओं की बिक्री तक के मामले सामने आ रहे हैं, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

    व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव ने छोटे और मध्यम दवा विक्रेताओं के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। कई दुकानदारों का कारोबार लगातार घट रहा है और वे आर्थिक दबाव में आ रहे हैं।

    16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया
    दोपहर के समय एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इसमें मुख्य रूप से ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूर्ण नियंत्रण या प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही दवाओं पर दिए जा रहे अत्यधिक डिस्काउंट को रोकने और एक मजबूत नियामक व्यवस्था बनाने की बात भी रखी गई।

    संघ के सचिव सागर आहूजा ने कहा कि बिना सख्त नियमों के चल रही ऑनलाइन फार्मेसी व्यवस्था पारंपरिक दवा कारोबारियों के अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि अनियंत्रित ऑनलाइन व्यापार प्रणाली के खिलाफ है।

    आंदोलन तेज करने की चेतावनी
    एसोसिएशन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। व्यापारियों ने कहा कि वे अपने हितों और आम जनता की सुरक्षा दोनों के लिए एक मजबूत और पारदर्शी दवा बिक्री प्रणाली की मांग कर रहे हैं।

    कटनी का यह बंद केवल व्यापारिक विरोध नहीं बल्कि दवा वितरण प्रणाली में सुधार की मांग के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।

  • केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध

    केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर मेडिकल दुकानों का एक दिवसीय बंद देखने को मिला। जिलेभर के दवा व्यापारियों ने ई-फार्मेसी और बड़े कॉरपोरेट्स की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं। शहर की लगभग 180 और जिले की कुल 297 मेडिकल दुकानों ने इस बंद में भाग लिया, जिससे दिनभर बाजार में मेडिकल स्टोरों के शटर बंद नजर आए।

    दोपहर के समय बड़ी संख्या में केमिस्ट और दवा व्यापारी एकत्रित हुए और शहर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़ी अधिसूचनाएं वापस लेने और ई-फार्मेसी पर सख्त नियंत्रण लगाने की मांग की गई।

    एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि जिला संगठन मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन और राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स से संबद्ध है, जो देशभर के करीब 12.40 लाख केमिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और बड़े कॉरपोरेट्स भारी छूट और प्रिडेटोरी प्राइसिंग के जरिए छोटे और मध्यम मेडिकल संचालकों के व्यापार को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

    दवा व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर पर्चे के दवाइयों की बिक्री हो रही है। एंटीबायोटिक्स, नशीली और आदत बनाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। साथ ही नकली प्रिस्क्रिप्शन और दवाओं के गलत भंडारण जैसी समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ सकती है।

    ज्ञापन में विशेष रूप से केंद्र सरकार की 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और 26 मार्च 2020 की अधिसूचना GSR 220(E) को वापस लेने की मांग उठाई गई। व्यापारियों का कहना है कि कोविड काल में लागू की गई इन व्यवस्थाओं का अब गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक मेडिकल व्यापार प्रभावित हो रहा है।

    प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने कहा कि वे सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि जनस्वास्थ्य सुरक्षित रहे और छोटे व्यापारियों का अस्तित्व बचाया जा सके। पूरे दिन चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा और कई लोगों को मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।

    अशोकनगर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 297 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा और ई-फार्मेसी पर रोक लगाने की मांग की। व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर खतरे की बात कही।

  • बाइक रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे दवा व्यापारी, ई-फार्मेसी पर रोक की मांग

    बाइक रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे दवा व्यापारी, ई-फार्मेसी पर रोक की मांग


    मध्य प्रदेश । गुना में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर के दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इस दौरान जिले की करीब 700 मेडिकल दुकानें बंद रहीं, जिनमें शहर की लगभग 350 दुकानें शामिल थीं। मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों और आम लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्थाओं के चलते गंभीर मरीजों को राहत मिलती रही।

    दवा व्यापारियों ने शहर के सुगन चौराहे पर एकत्रित होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद सभी व्यापारी बाइक रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।

    जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन ने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के ऑनलाइन दवा बिक्री लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे छोटे मेडिकल व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना वैध चिकित्सकीय सलाह और बिना प्रमाणित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

    एसोसिएशन के सचिव राकेश शर्मा ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई कंपनियां लंबे समय से अवैध तरीके से कारोबार कर रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए।

    प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट और प्रीडेटरी प्राइसिंग नीति का भी विरोध किया। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बड़े डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। ज्ञापन में GSR 817(E) और GSR 220(E) अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग भी उठाई गई।

    मेडिकल स्टोर बंद रहने से कई मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए भटकना पड़ा, लेकिन जिला प्रशासन ने पहले से वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लागू कर दी थीं। प्रशासन के निर्देश पर जन औषधि केंद्र, निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोर और शासकीय अस्पतालों की दवा दुकानें खुली रहीं। सिविल अस्पताल, कैंट चौराहा और भगत सिंह चौक स्थित जन औषधि केंद्रों पर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा आशीर्वाद हॉस्पिटल, सहयोग नर्सिंग होम, बालाजी नर्सिंग होम, ममता नर्सिंग


    होम और एजेएस हॉस्पिटल की मेडिकल दुकानें भी संचालित रहीं।

    दवा व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

    ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी में बुधवार को ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में केमिस्टों की देशव्यापी हड़ताल का बड़ा असर देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर जिलेभर के करीब 350 मेडिकल स्टोर पूरे दिन बंद रहे। इनमें शहर के लगभग 150 मेडिकल प्रतिष्ठान भी शामिल थे। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने इस दौरान विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    केमिस्टों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। साथ ही भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित किया जा रहा है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से नियम GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. चन्द्र प्रकाश गोयल और सचिव गोपाल दास अग्रवाल ने कहा कि दवाएं कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, बल्कि सीधे जन स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। उनका कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद सरकार इस मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।

    केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान स्थानीय मेडिकल स्टोरों ने फ्रंटलाइन हेल्थ सपोर्ट की भूमिका निभाई थी और लोगों तक दवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बावजूद आज छोटे दवा व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    हालांकि जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने के बावजूद मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ने पहले से ही आवश्यक और आपातकालीन दवाओं की व्यवस्था कर दी थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अस्पताल परिसरों में संचालित मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहे, जहां जरूरतमंद मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका मानना है कि बिना निगरानी के ऑनलाइन दवा वितरण से न केवल छोटे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

  • आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन

    आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन


    मध्यप्रदेश। देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर बुधवार को कई जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में देखने को मिला, जहां सुबह से ही दवा दुकानों के शटर गिरे रहे और मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।

    झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन से छोटे दवा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    झाबुआ में शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

    वहीं प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोरों को चालू रखने का निर्णय लिया, ताकि जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बनी रहे। इनमें जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र सहित कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर शामिल रहे।

    इसी तरह आलीराजपुर जिले में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए परेशान नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पर्चे लेकर बंद दुकानों के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल सकी।

    ग्राम बड़ा गुड़ा निवासी राजू ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इसी तरह बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिजनों को भी सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था बिना पर्याप्त नियंत्रण के चल रही है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

    हालांकि, दिनभर की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों और ग्रामीण परिवारों को झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल पाती।

  • केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज

    केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज


    मध्य प्रदेश । खंडवा जिले में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में व्यापक असर देखने को मिला, जहां करीब 450 मेडिकल स्टोर एक दिन के लिए बंद रहे। जिलेभर के केमिस्टों ने एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्य मौजूद रहे और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे को ज्ञापन सौंपा।

    दोपहर के समय आयोजित इस प्रदर्शन में खंडवा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के साथ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया, जिससे आंदोलन और अधिक व्यापक रूप में दिखाई दिया। केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श और फर्जी या असत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की बिक्री की जा रही है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

    एसोसिएशन अध्यक्ष गोवर्धन गोलानी ने आरोप लगाया कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री, फ्री होम डिलीवरी और भारी छूट की नीति छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्ट व्यापारियों के अस्तित्व को संकट में डाल रही है। उनका कहना है कि यह स्थिति न केवल बाजार को असंतुलित कर रही है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

    केमिस्टों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और 1945 के नियमों में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं का वितरण कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और कोविड काल में जारी GSR 220(E) का हवाला देते हुए कहा कि इनका गलत उपयोग किया जा रहा है, जिससे अनियंत्रित दवा वितरण को बढ़ावा मिल रहा है।

    केमिस्ट संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवा वितरण पर तुरंत रोक लगाई जाए और अवैध ऑनलाइन बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही GSR 817(E) और GSR 220(E) को वापस लेने तथा ऑनलाइन कंपनियों की प्रीडेटरी प्राइसिंग और अत्यधिक छूट नीति पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन के दौरान केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान उन्होंने बिना रुके दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की अनियंत्रित गतिविधियों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

    एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और छोटे दवा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण प्रणाली दोनों संतुलित रह सकें।

  • ई-प्रिस्क्रिप्शन को लेकर विवाद: दवा बिक्री नियमों पर उठी सख्त मांग

    ई-प्रिस्क्रिप्शन को लेकर विवाद: दवा बिक्री नियमों पर उठी सख्त मांग


    मध्य प्रदेश । शाजापुर जिले में बुधवार को दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल की, जिससे पूरे जिले के मेडिकल स्टोर दिनभर बंद रहे। यह हड़ताल शाजापुर जिला केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर की गई, जिसमें बड़ी संख्या में केमिस्ट शामिल हुए। विरोध के दौरान दवा व्यापारियों ने कलेक्ट कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम मनीषा वास्कले को सौंपा।

    ज्ञापन में मुख्य रूप से इस बात पर चिंता जताई गई कि इंटरनेट के माध्यम से बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाइयों की बिक्री और होम डिलीवरी तेजी से बढ़ रही है। केमिस्टों का कहना है कि यह प्रवृत्ति जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, क्योंकि इससे दवाओं के गलत और अनियंत्रित उपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

    दवा व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भारी छूट देकर दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे स्थानीय और लाइसेंसधारी केमिस्टों का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि छोटे मेडिकल स्टोर इस प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

    एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं की बिक्री कर रही हैं। केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा जारी GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग भी की है।

    दवा व्यापारियों ने सरकार से यह भी अपील की कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के किसी भी प्रकार की दवा बिक्री और होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा अपनाई जा रही डीप डिस्काउंटिंग और प्रीडेटरी प्राइसिंग जैसी नीतियों पर भी सख्त रोक लगाने की मांग की गई है, ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

    जिला अध्यक्ष विकास सिंदल ने बताया कि यह हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

    पूरे जिले में मेडिकल स्टोर बंद रहने से सामान्य दवा खरीदने वाले लोगों को भी थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ा, हालांकि आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं।

  • दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी

    दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में बुधवार को दवा व्यापारियों की बड़ी हड़ताल देखने को मिली। प्रदेशभर में लगभग 41 हजार मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, जबकि अकेले भोपाल में ही 3 हजार से ज्यादा दुकानों ने कामकाज रोक दिया। यह बंद ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते प्रभाव और नियमों की कमी के विरोध में बुलाया गया था। इस दौरान केवल अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को ही छूट दी गई, ताकि इमरजेंसी मरीजों को दवा मिल सके।

    केमिस्टों का आरोप: ऑनलाइन दवाएं बन रही खतरा
    केमिस्ट संगठनों का कहना है कि बिना सख्त नियमों के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री बढ़ रही है, जिससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। उनका आरोप है कि:
    नकली या गलत दवाओं की संभावना बढ़ रही है
    पर्चियों की सत्यता की सही जांच नहीं हो रही
    छोटे स्थानीय मेडिकल स्टोर्स को भारी नुकसान हो रहा है
    भारी डिस्काउंट के कारण बाजार असंतुलित हो रहा है
    इस मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने पूरे देश में विरोध दर्ज कराया है।

    मरीजों की परेशानी, अस्पताल स्टोर्स पर बढ़ी भीड़
    दवा दुकानों के बंद रहने से आम मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर लोग जरूरी दवाइयों के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर दौड़ते नजर आए, जिससे वहां भीड़ बढ़ गई। इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है, जो जरूरतमंद मरीजों तक दवाएं पहुंचाने का काम कर रही है।

    भोपाल, छतरपुर और अन्य जिलों में प्रदर्शन
    भोपाल में थोक दवा बाजार में केमिस्टों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और कलेक्टोरेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी की। छतरपुर और अन्य जिलों में भी इसी तरह विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कई जगह केमिस्टों ने बाइक रैलियां निकालीं और प्रशासन को अपनी मांगें सौंपीं।

    केमिस्टों की प्रमुख मांगें
    हड़ताल कर रहे व्यापारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
    ई-फार्मेसी पर सख्त और स्पष्ट नियम लागू किए जाएं
    ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण लगाया जाए
    भारी डिस्काउंट वाली ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगे
    नकली और बिना निगरानी वाली दवाओं पर सख्त कार्रवाई हो

    कोविड के दौरान मिली थी छू
    कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन दवा बिक्री को सरकार ने आवश्यक सेवा के तहत अनुमति दी थी, ताकि लोगों को घर बैठे दवाएं मिल सकें। इसी छूट का उपयोग अब केमिस्ट संगठन नियमों की कमी के रूप में बता रहे हैं।

    यह विरोध सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। एक तरफ ऑनलाइन दवा बिक्री की सुविधा है, तो दूसरी तरफ केमिस्ट संगठन इसे जोखिम भरा बता रहे हैं। आने वाले समय में इस पर सरकार की नीति और नियमों की भूमिका बेहद अहम होगी।

  • दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल: कल बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर्स

    दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल: कल बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर्स


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे राज्य में मंगलवार, 20 मई को मेडिकल स्टोर्स बंद रहने वाले हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर यह राज्यव्यापी हड़ताल की जा रही है। इस बंद का सीधा असर भोपाल के करीब 3 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर पड़ेगा, जो एक दिन के लिए पूरी तरह से बंद रहेंगे।

    इस हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बिक्री का बढ़ता विस्तार है। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री पर पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, जिससे नकली, एक्सपायरी या गलत दवाओं के मरीजों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। संगठन का आरोप है कि इससे आम लोगों की सेहत सीधे तौर पर जोखिम में पड़ रही है।

    भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल व्यापार का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और एक मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किया जाए।

    हालांकि इस बंद से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना दवाओं पर निर्भर हैं। इसे देखते हुए एसोसिएशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे 19 मई तक ही अपनी आवश्यक दवाएं खरीद लें ताकि 20 मई को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    विशेष रूप से बुजुर्गों, हृदय रोगियों, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को पहले से दवाओं का स्टॉक रखने की सलाह दी गई है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स इस हड़ताल से बाहर रहेंगे, ताकि गंभीर मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहें।

    हड़ताल के दौरान कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट, बिना निगरानी दवा वितरण और ऑनलाइन बिक्री पर नियंत्रण की कमी को लेकर विरोध जताया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक सरकार ठोस नियम लागू नहीं करती, तब तक विरोध जारी रह सकता है।

    कुल मिलाकर, 20 मई का दिन मध्य प्रदेश में दवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। जहां एक ओर केमिस्ट संगठन अपने अधिकारों और नियमों की मांग को लेकर एकजुट है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।