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  • चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    मध्‍य प्रदेश। चित्रकूट में लगातार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। सोमवार को रामघाट पर नदी खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर बहती रही। सतना के पहाड़ी इलाकों और चित्रकूट में हुई बारिश का असर नदी के जलस्तर पर पड़ा। बाढ़ का पानी रामघाट के आसपास स्थित मठ-मंदिरों तक पहुंच गया। भरत मंदिर परिसर में भी पानी घुसने से फर्श पर मलबा जमा हो गया है।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रामघाट पर बैरिकेडिंग कर लोगों को नदी और घाट क्षेत्र की ओर जाने से रोक दिया है। कई मठ-मंदिरों के निचले हिस्से पानी में डूब गए हैं। पानी कम होने के बाद मंदिरों और घाट क्षेत्र में जमा मलबे की सफाई शुरू करा दी गई है।

    भरत मंदिर में घुसा पानी, मलबे की सफाई शुरू
    मंदाकिनी का पानी भरत मंदिर परिसर में भी पहुंच गया। पानी के साथ बहकर आया मलबा मंदिर के अंदर फर्श पर जमा हो गया। जलस्तर कम होने के बाद मंदिर परिसर में सफाई का काम शुरू कराया गया। आसपास के मठ-मंदिरों में भी पानी और मलबे के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से रामघाट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को नदी के बढ़े जलस्तर से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

    सड़क-रास्ते जलमग्न, प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक स्कूल बंद
    लगातार बारिश और बाढ़ के कारण जिले के कई इलाकों में सड़क और रास्ते जलमग्न हो गए हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए डीएम पुलकित गर्ग के आदेश पर 31 अगस्त और 1 सितंबर को जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया गया है।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रंजना शुक्ला ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। प्रशासन के अनुसार जलभराव और तेज बहाव के बीच छोटे बच्चों का स्कूल आना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए दो दिन के लिए अवकाश किया गया है।

    छात्रों की छुट्टी, शिक्षक पहुंचेंगे स्कूल
    बीएसए रंजना शुक्ला के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए है। स्कूलों में पदस्थ शिक्षक और शिक्षिकाएं निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचेंगे और विभागीय एवं अन्य आवश्यक सरकारी कार्य करेंगे। सभी विद्यालय प्रबंधनों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि बारिश और अवकाश के दौरान बच्चों को जलभराव वाले इलाकों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले पानी के पास न जाने दें।

    फिलहाल प्रशासन की नजर मंदाकिनी के जलस्तर और बारिश की स्थिति पर बनी हुई है। रामघाट पर बैरिकेडिंग के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। पानी उतरने के बाद घाट और मंदिर क्षेत्रों में जमा मलबे की सफाई कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख

    अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख


    भोपाल  भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने करीब 96 दिनों तक दंपती को वीडियो कॉल के जरिए अपने नियंत्रण में रखा और उन्हें करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। कभी खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया गया तो कभी चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर दंपती को डराया गया। आरोपियों ने गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति सीज होने का भय दिखाकर उनसे 22 लाख रुपए ऐंठ लिए। रकम देने के बाद भी जब ठगों ने उन्हें डिजिटल निगरानी से मुक्त नहीं किया तो दंपती को शक हुआ और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस के अनुसार कृष्णा कॉम्प्लेक्स गणपति एन्क्लेव निवासी सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले के रहने वाले हैं। परिवार के साथ फरवरी में शिवरात्रि मनाने के लिए वे आंध्र प्रदेश गए थे। इसी दौरान 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बताया और दावा किया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्हें बताया गया कि दिल्ली केनरा बैंक से जुड़े एक खाते के जरिए नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है और उसमें उनका नाम सामने आया है।

    इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ शुरू कर दी। दंपती को निर्देश दिया गया कि वे किसी दूसरे व्यक्ति से संपर्क नहीं करेंगे और घर से बाहर भी नहीं निकलेंगे। 21 मई को एक महिला ने खुद को चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताते हुए बैंक खातों और दूसरी वित्तीय जानकारी मांगी। अगले दिन दंपती की वीडियो कॉल पर एक कथित जज से बात कराई गई। इस फर्जी जज ने उनके आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी दिखाकर कार्रवाई का डर पैदा किया और उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे गंभीर कानूनी मामले में फंस चुके हैं।

    9 जून को कथित जज ने वीडियो कॉल पर दंपती को संपत्ति सीज करने की धमकी दी। इसके बाद निशा पटेल नाम की महिला ने उन्हें भोपाल लौटने के लिए कहा। ठगों ने मामले को खत्म करने के नाम पर एफडी और जेवर बेचने या गिरवी रखने का दबाव बनाया। डर के कारण दंपती 10 जून को आंध्र प्रदेश से भोपाल के लिए रवाना हुए और 11 जून को यहां पहुंचे। अगले ही दिन उन्होंने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए जुटाए।

    आरोपियों के निर्देश पर दंपती ने पांच अलग-अलग बार रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा की। ठगों ने संपर्क बनाए रखने के लिए सात अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया। इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी दंपती को राहत नहीं मिली। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और किसी से बात नहीं करने का दबाव बनाया जाता रहा। यह सिलसिला 23 अगस्त तक चलता रहा। यानी 19 मई से 23 अगस्त तक करीब 96 दिनों तक बुजुर्ग दंपती साइबर ठगों के डर और दबाव में रहे।

    बाद में दंपती को पूरे मामले पर संदेह हुआ और उन्होंने जब संबंधित जानकारी की जांच कराई तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिखाया गया आदेश भी फर्जी था। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल से संपर्क किया। 27 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज की गई और केस डायरी कोलार थाने भेजी गई। पुलिस अब सातों WhatsApp नंबरों पांच बैंक खातों में हुए ट्रांजैक्शन वीडियो कॉल और आरोपियों की पहचान से जुड़े डिजिटल सुरागों की जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर बताता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर डर पैदा कर पैसे मांगना साइबर ठगी का बड़ा तरीका बन चुका है। किसी भी जांच या गिरफ्तारी के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए पैसे मांगने वालों पर भरोसा करने के बजाय तत्काल संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना जरूरी है।

  • 10वीं-12वीं पास युवक रात में बन जाते थे 'फ्रैंक' और 'ब्रूस', अमेरिकन एक्सेंट में करते थे करोड़ों की ठगी

    10वीं-12वीं पास युवक रात में बन जाते थे 'फ्रैंक' और 'ब्रूस', अमेरिकन एक्सेंट में करते थे करोड़ों की ठगी


    ग्वालियर । ग्वालियर के मोहना स्थित होटल जैनपथ में संचालित एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि महज 10वीं और 12वीं तक पढ़े चार युवक रात होते ही अपनी पहचान बदल लेते थे। वे खुद को फ्रैंक, लुईस, ब्रूस और माइकल जैसे विदेशी नामों से परिचित कराते और अमेरिकन एक्सेंट में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलकर अमेरिकी नागरिकों को अपने जाल में फंसाते थे। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने महज पांच महीने में एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया।

    पुलिस के अनुसार, आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे स्थित होटल जैनपथ के एक कमरे से यह फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। यहां से चारों आरोपी अमेरिकी समय के अनुसार रात करीब 9 बजे काम शुरू करते थे और सुबह तक विदेशी नागरिकों को कॉल करते थे। दिन में वे आराम करते थे, जबकि रातभर ठगी का नेटवर्क सक्रिय रहता था।

    जांच में पता चला कि आरोपियों को कॉल करने के लिए पहले से तैयार स्क्रिप्ट दी जाती थी। लैपटॉप स्क्रीन पर मौजूद उसी स्क्रिप्ट को पढ़कर वे खुद को विदेशी कंपनी का प्रतिनिधि बताते और लोगों का भरोसा जीतते थे। कॉलिंग के लिए आवश्यक डेटा और स्क्रिप्ट कथित मास्टरमाइंड प्रबल प्रताप सिंह परिहार उपलब्ध कराता था। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि विदेशी नागरिकों का डेटा कथित तौर पर डार्क वेब से हासिल किया जाता था।

    पुलिस के मुताबिक, प्रत्येक कॉलर को 10 घंटे की शिफ्ट में करीब 150 कॉल करना अनिवार्य था। चारों आरोपी मिलकर प्रतिदिन 400 से 500 अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे। इनमें से औसतन 12 से 15 लोग उनके झांसे में आ जाते थे। इसके बाद उनसे गिफ्ट कार्ड, प्रोसेसिंग फीस और अन्य बहानों से पैसे वसूले जाते थे।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह रोजाना लगभग 50 से 70 हजार रुपये की ठगी करता था। इस हिसाब से हर महीने करीब 20 लाख रुपये की अवैध कमाई हो रही थी। पुलिस का अनुमान है कि पिछले पांच महीनों में गिरोह ने एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। हालांकि जांच अभी जारी है और यह रकम आगे बढ़ सकती है।

    पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकन एक्सेंट बोलना सीखा था। इसके बाद वे दी गई स्क्रिप्ट का अभ्यास करते थे और उसी के आधार पर विदेशी नागरिकों से बातचीत कर उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे। पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड, डिजिटल नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

  • इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक, इंजीनियर से ₹1.12 लाख और छात्रा से ₹40 हजार की ऑनलाइन ठगी

    इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक, इंजीनियर से ₹1.12 लाख और छात्रा से ₹40 हजार की ऑनलाइन ठगी


    इंदौर  इंदौर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर में ऑनलाइन ठगी के दो अलग-अलग मामलों में बदमाशों ने एक सिविल इंजीनियर और एक छात्रा को अपना शिकार बनाकर कुल 1.52 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी कर ली। दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है, जहां धनवंतरी नगर स्थित साईं विला अपार्टमेंट निवासी सिविल इंजीनियर आनंद बनवडीकर के क्रेडिट कार्ड से बिना उनकी अनुमति के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर दिए गए। आनंद के मुताबिक 8 जुलाई को दोपहर उनके मोबाइल पर लगातार ट्रांजेक्शन के मैसेज आए। जांच करने पर पता चला कि उनके आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से दो बार 51-51 हजार रुपए और दूसरे क्रेडिट कार्ड से 10 हजार रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह कुल 1 लाख 12 हजार रुपए उनके खाते से निकल गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैंक से संपर्क कर दोनों क्रेडिट कार्ड तत्काल ब्लॉक करवा दिए। शिकायत में बताया गया है कि ट्रांजेक्शन अमेजन सेलर सर्विस और कैशफ्री इनोवेटिव रिटेल आईडी के माध्यम से किए गए। पुलिस अब संबंधित बैंक खातों और ऑनलाइन भुगतान के स्रोत की जांच कर रही है।

    दूसरा मामला भंवरकुआ थाना क्षेत्र का है, जहां एक छात्रा इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान साइबर ठगी का शिकार हो गई। छात्रा मोना नागर ने पुलिस को बताया कि उसने इंस्टाग्राम पर ‘सुमन वूमन’ नाम के अकाउंट से 999 रुपए की ड्रेस ऑर्डर की थी। ऑर्डर के बाद एक युवक ने फोन कर वेरिफिकेशन के नाम पर पहले 500 रुपए जमा कराने को कहा।

    युवक ने बातचीत के दौरान अलग-अलग प्रक्रिया बताकर कई बार ऑनलाइन भुगतान कराया। छात्रा उसकी बातों में आ गई और कुछ ही देर में उसके बैंक खाते से करीब 40 हजार रुपए निकल गए। ठगी का एहसास होने पर उसने तत्काल साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई।

    दोनों मामलों में पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित ऑनलाइन अकाउंट की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वेरिफिकेशन लिंक या सोशल मीडिया शॉपिंग ऑफर पर बिना पुष्टि किए भुगतान न करें और संदिग्ध ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

  • इंदौर में साइबर ठगों का कहर, पेंशन कार्ड और सस्ती बाइक के झांसे में तीन लोगों से 4.57 लाख की ठगी

    इंदौर में साइबर ठगों का कहर, पेंशन कार्ड और सस्ती बाइक के झांसे में तीन लोगों से 4.57 लाख की ठगी


    इंदौर  इंदौर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में ठगों ने पेंशन कार्ड बनवाने, मोबाइल हैक करने और सस्ती बाइक दिलाने का झांसा देकर तीन लोगों से कुल 4.57 लाख रुपए से अधिक की ठगी कर ली। सभी मामलों में लसूडिया थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लोगों से किसी भी अनजान कॉल, लिंक या सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा नहीं करने की अपील कर रही है।

    पहले मामले में लसूडिया थाना क्षेत्र की सेटेलाइट टाउनशिप निवासी 75 वर्षीय अखिलेश गायकवाड़ को ठगों ने निशाना बनाया। 15 जून की शाम एक व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताते हुए उन्हें फोन किया और पेंशनधारकों के लिए नया पेंशन कार्ड जारी होने की जानकारी दी। चूंकि अखिलेश पहले इस कार्ड के लिए आवेदन कर चुके थे इसलिए उन्होंने कॉल करने वाले पर विश्वास कर लिया। आरोपी ने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी लेने के साथ ऑनलाइन फोटो भी प्राप्त कर लिया। इसके कुछ ही देर बाद उनका मोबाइल ठग के नियंत्रण में चला गया और खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.39 लाख रुपए निकाल लिए गए। घटना का पता चलते ही उन्होंने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।

    दूसरे मामले में स्लाइस-सी सेक्टर निवासी गोपाल वाकड़े साइबर ठगी का शिकार बने। 17 जून को उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। मोबाइल दोबारा चालू होने पर उन्हें खाते से 44 हजार रुपए निकलने का संदेश मिला। बैंक पहुंचने पर पता चला कि 98 हजार रुपए का एक और ट्रांजेक्शन भी हो चुका है। इस तरह उनके खाते से कुल करीब 1.42 लाख रुपए निकाल लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    तीसरा मामला एक छात्रा से जुड़ा है जिसे इंस्टाग्राम पर सस्ती बाइक खरीदने का विज्ञापन भारी पड़ गया। राजाबाग कॉलोनी में किराये से रहने वाली और मूल रूप से गंधवानी की निवासी पूजा झमेले ने 25 हजार रुपए में दोपहिया वाहन मिलने का विज्ञापन देखा। संपर्क करने पर आरोपी ने पहले दो हजार रुपए बुकिंग राशि के रूप में जमा कराए और बाद में ट्रांसपोर्ट चार्ज समेत अलग-अलग बहानों से कई किश्तों में पैसे मांगता रहा। गाड़ी की फोटो भेजकर भरोसा भी दिलाया गया। आखिरकार छात्रा से करीब 1.76 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। जब लंबे समय तक वाहन नहीं मिला तब उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस तीनों मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें, सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक ऑफरों की सत्यता जांचे बिना भुगतान न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत करें।

  • म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा

    म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा


    नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।

    डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे।

    अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

    गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

    साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।

  • वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    नई दिल्ली ।सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने वाले ट्रेंड और डिजिटल अभियानों का प्रभाव युवाओं के बीच लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन लोकप्रियता और उत्सुकता के इस दौर में साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के दिनों में एक वायरल डिजिटल ट्रेंड के नाम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी का नया मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसके बाद पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की चेतावनी जारी की है।

    जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कुछ संदिग्ध लिंक तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं। इन संदेशों में आकर्षक शब्दों और भावनात्मक अपील के जरिए लोगों को किसी डिजिटल अभियान या समूह से जुड़ने का निमंत्रण दिया जा रहा है। युवाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखकर ऐसे संदेश तैयार किए जा रहे हैं ताकि वे उत्सुकतावश लिंक पर क्लिक कर दें।

    पुलिस का कहना है कि यह केवल एक साधारण लिंक नहीं बल्कि साइबर ठगी का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये कथित लिंक फिशिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल या डिजिटल डिवाइस की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके जरिए निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण, पासवर्ड और अन्य महत्वपूर्ण डेटा साइबर अपराधियों तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

    साइबर विशेषज्ञों के अनुसार फिशिंग लिंक आज के समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी का सबसे आम तरीका बनते जा रहे हैं। ये लिंक दिखने में सामान्य या भरोसेमंद लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी हासिल करना होता है। कई मामलों में ऐसे हमलों के जरिए बैंक खातों से रकम निकालने और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ट्रेंड या वायरल अभियान पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। कई बार लोकप्रिय विषयों का इस्तेमाल करके साइबर ठग लोगों की भावनाओं और उत्सुकता का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि पुलिस और साइबर एजेंसियां लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए। यदि कोई संदेश अत्यधिक आकर्षक, भावनात्मक या असामान्य वादा करता दिखाई दे तो सतर्क रहना आवश्यक है। इसके अलावा संदिग्ध संदेशों को आगे साझा करने से भी बचना चाहिए।

    डिजिटल दुनिया ने लोगों को जोड़ने के नए अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ सतर्कता और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। एक छोटी सी लापरवाही कई बार आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा नियमों का पालन करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

  • बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक

    बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।

    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।

    कहां-कहां किया जा चुका है इस्तेमाल?
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है। इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।

  • नागरिकों को ऑनलाइन कंटेंट की पुष्टि के बाद ही उस पर भरोसा करने की सलाह..

    नागरिकों को ऑनलाइन कंटेंट की पुष्टि के बाद ही उस पर भरोसा करने की सलाह..


    नई दिल्ली:
    डिजिटल माध्यमों पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं के बीच एक वायरल वीडियो को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्टता दी गई है, जिसमें वित्त मंत्री को एक उच्च रिटर्न निवेश योजना का समर्थन करते हुए दिखाने का दावा किया गया था। जांच के बाद इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी और एआई तकनीक से निर्मित बताया गया है। इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली गलत सूचनाओं की चुनौती को उजागर किया है।

    जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि वीडियो में किए गए दावे पूरी तरह असत्य और भ्रामक हैं। इसमें दिखाए गए निवेश प्रस्ताव के तहत कम समय में असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा किया गया था, जो वास्तविक वित्तीय ढांचे और सरकारी नीतियों से मेल नहीं खाता। किसी भी सरकारी संस्था या जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा ऐसी किसी निवेश योजना का समर्थन नहीं किया गया है।

    नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने वाले ऐसे आकर्षक निवेश दावों पर बिना पुष्टि के भरोसा न करें। किसी भी वित्तीय योजना की वास्तविकता की जांच केवल अधिकृत और विश्वसनीय स्रोतों के माध्यम से ही की जानी चाहिए। गलत जानकारी पर आधारित निर्णय आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की सामग्री अक्सर लोगों को धोखा देने और उनकी व्यक्तिगत तथा बैंकिंग जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से तैयार की जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के कारण अब फर्जी वीडियो और भी अधिक वास्तविक प्रतीत होने लगे हैं, जिससे आम उपयोगकर्ताओं के लिए उनकी पहचान करना कठिन हो गया है।

    डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मामलों में यह भी देखा गया है कि पहले भी कई बार फर्जी संदेशों के माध्यम से लोगों को बैंकिंग अपडेट या अन्य सेवाओं के नाम पर भ्रमित करने की कोशिश की गई है। ऐसे मामलों में उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध लिंक या फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जो साइबर धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकता है।

    सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें और यदि कोई असामान्य या संदिग्ध सूचना मिले तो उसे संबंधित माध्यमों पर रिपोर्ट करें ताकि गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके।

    डिजिटल युग में सूचनाओं की तेजी से बढ़ती उपलब्धता के बीच सतर्कता और जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय माने जा रहे हैं, जिससे नागरिक स्वयं को और अपने वित्तीय हितों को सुरक्षित रख सकते हैं।

  • ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर छात्रा से एक लाख रुपये की साइबर ठगी..

    ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर छात्रा से एक लाख रुपये की साइबर ठगी..

    जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में ठगी के दो अलग-अलग मामलों ने एक बार फिर साइबर फ्रॉड और अंधविश्वास से जुड़ी धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर किया है। एक ओर जहां ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर एक कॉलेज छात्रा से एक लाख रुपये की ठगी की गई, वहीं दूसरी ओर साधु के भेष में आए दो ठगों ने 5 करोड़ रुपये दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 28 हजार रुपये ऐंठ लिए।

    पहले मामले में घमापुर क्षेत्र की एक कॉलेज छात्रा को टेलीग्राम पर संपर्क कर ऑनलाइन जॉब और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर फंसाया गया। उसे शुरुआत में छोटे-छोटे काम देकर भरोसा दिलाया गया और बाद में निवेश तथा प्रोसेसिंग के नाम पर अलग-अलग चरणों में पैसे जमा करने के लिए कहा गया।

    झांसे में आकर छात्रा ने धीरे-धीरे करीब एक लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब न तो उसे कोई नौकरी मिली और न ही कोई कमाई वापस मिली, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    दूसरे मामले में बरगी थाना क्षेत्र में दो लोगों ने साधु का भेष धारण कर एक युवक को अपने जाल में फंसा लिया। पहले तो उन्होंने मदद के नाम पर पैसे मांगे, फिर हाथ देखकर भविष्य में 5 करोड़ रुपये मिलने का लालच दिया। इसके बाद पूजा-पाठ और कथित चमत्कार के नाम पर युवक को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया।

    जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग तरीकों से युवक से कुल 28 हजार रुपये वसूल लिए। कुछ देर बाद जब युवक को शक हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को भ्रमित करने के लिए अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाते थे और लालच व अंधविश्वास का सहारा लेकर ठगी करते थे। दोनों मामलों में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।