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  • तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

    तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

    नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा और तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। ‘बिग बॉस तमिल’ से राष्ट्रव्यापी लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री जूली, जिन्हें मारिया जूलियाना के नाम से भी जाना जाता है, ने तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति जोसेफ विजय पर बेहद संगीन और गंभीर आरोप लगाए हैं।

    चेन्नई में आयोजित एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिनेत्री ने फूट-फूटकर रोते हुए दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी के समर्थकों द्वारा किए गए अनवरत मानसिक उत्पीड़न और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के कारण अपने होने वाले पहले बच्चे को खो दिया है।

    अभिनेत्री का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया पर इस कदर निशाना बनाया गया और उनके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया कि वह अत्यधिक मानसिक तनाव का शिकार हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप उनका गर्भपात यानी मिसकैरेज हो गया। इस बयान के सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति और सिनेमाई हलकों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है।

    अभिनेत्री जूली ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने राजनीतिक रूप से थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मार्च महीने में उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे लगातार ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर चेन्नई पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कुल आठ लोगों को नामजद किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें पुलिस विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें इस मामले को आपराधिक श्रेणी में न रखकर दीवानी मानहानि के अंतर्गत दर्शाया गया था।

    जूली ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ता में हुए परिवर्तन के बाद इस मामले को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा आवाज उठाने के बाद उनके ऊपर पंद्रह लाख रुपए के एक फर्जी किडनी घोटाले में शामिल होने के मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिए गए। अभिनेत्री का सीधा आरोप है कि इस पूरी साजिश के पीछे मुख्यमंत्री की पार्टी के कुछ कट्टर समर्थक और एक कानूनी सलाहकार शामिल हैं, जिन्होंने उनके और उनके पति के खिलाफ बेहद भद्दी और अपमानजनक बातें सोशल मीडिया पर फैलाई हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उनसे यह सवाल पूछा कि वह इन गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से कैसे जोड़ सकती हैं, तो उन्होंने बेहद तीखा जवाब दिया। जूली ने स्पष्ट किया कि वह इस दर्दनाक घटना का इस्तेमाल किसी भी तरह की जन-सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं कर रही हैं, बल्कि वह उस कड़वे सच को सामने ला रही हैं जिससे कई महिलाएं गुजर रही हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता के दम पर सत्ता के शीर्ष तक पहुंच जाना काफी नहीं है, बल्कि एक मुख्यमंत्री के रूप में जनता के प्रति उनकी बड़ी जिम्मेदारी बनती है।

    जूली ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया हो, लेकिन जब उनकी पार्टी के लोग एक महिला का नाम बिना किसी संकोच के खराब कर रहे थे, तब उन्होंने अपने समर्थकों को पीछे हटने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। मुख्यमंत्री की इस चुप्पी को ही उन्होंने अपनी इस व्यक्तिगत क्षति का सबसे बड़ा कारण माना है। इस बेहद संवेदनशील और विवादित बयान के बाद जहां थलपति विजय के प्रशंसक और पार्टी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अभिनेत्री के दावों का कड़ा विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने तमिलनाडु की नई सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

  • नमिता थापर विवाद ने खड़े किए गंभीर सवाल, क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी का है भारी अभाव?

    नमिता थापर विवाद ने खड़े किए गंभीर सवाल, क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी का है भारी अभाव?


    नई दिल्ली। उद्यमिता और टेलीविजन जगत की जानी मानी हस्ती नमिता थापर हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो को लेकर विवादों में आ गई हैं। नमाज के स्वास्थ्य लाभों पर जानकारी साझा करने के बाद उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संवाद की मर्यादा और जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

    मार्च के अंतिम सप्ताह में साझा किए गए एक वीडियो में नमिता थापर ने नमाज को एक शारीरिक गतिविधि के रूप में समझाते हुए उसके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर चर्चा की थी। उन्होंने इसे एक नियमित व्यायाम की तरह बताया जो शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। उनका कहना था कि यह जानकारी पूरी तरह स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई थी और इसका किसी भी धार्मिक भावना से कोई नकारात्मक संबंध नहीं था।

    हालांकि इस वीडियो के बाद उन्हें लगातार कई हफ्तों तक आलोचना और अपमानजनक प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस दौरान न केवल उन्हें बल्कि उनकी मां को भी निशाना बनाया गया और सोशल मीडिया पर असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई और इस तरह के व्यवहार को गलत ठहराया।

    उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भी कई सांस्कृतिक और पारंपरिक विषयों पर स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करती रही हैं, जिनमें योग और सूर्य नमस्कार जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे विषयों पर कभी इस प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे उन्होंने यह सवाल उठाया कि अलग अलग परिस्थितियों में लोगों की प्रतिक्रिया इतनी भिन्न क्यों हो जाती है।

    नमिता थापर ने इस पूरे मामले को महिलाओं के प्रति ऑनलाइन व्यवहार से भी जोड़ा और कहा कि समाज में महिलाओं के सम्मान की बात तो की जाती है, लेकिन वास्तविकता में कई बार उन्हें अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे व्यक्त करने का तरीका सभ्य और मर्यादित होना चाहिए।

    अपने बयान में उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया और कहा कि वे अपने विश्वासों पर गर्व करती हैं। साथ ही उन्होंने यह दोहराया कि उनका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करना था, न कि किसी धर्म या समुदाय को लेकर कोई टिप्पणी करना।

    यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर बढ़ती असहिष्णुता और संवाद के स्तर को लेकर गंभीर चिंताओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ साथ जिम्मेदारी और सम्मान बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है, ताकि स्वस्थ और संतुलित संवाद संभव हो सके।