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  • इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए

    इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए


    इंदौर । इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है जहां ठगों ने वॉट्सएप अकाउंट हैक कर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने इंग्लैंड में रहने वाले महिला के परिचित की पहचान का दुरुपयोग करते हुए मदद के नाम पर पैसे मांगे और महिला ने भरोसा कर दो किश्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में फोन पर सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से शिकायत की।

    यह मामला संयोगितागंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार उषागंज छावनी निवासी राबिया खान पत्नी नासिर खान ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 20 जून को उनके परिचित याकूब खान के मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुआ। याकूब खान वर्तमान में इंग्लैंड में रहते हैं इसलिए उन्हें संदेश पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    मैसेज में लिखा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तत्काल पैसों की जरूरत है। इसके साथ एक पंजाब नेशनल बैंक का खाता नंबर भेजकर जल्द से जल्द आर्थिक मदद करने का अनुरोध किया गया। परिचित की परेशानी समझकर राबिया खान ने बिना किसी पुष्टि के ऑनलाइन माध्यम से दो अलग अलग ट्रांजेक्शन में 50 50 हजार रुपये भेज दिए।

    रकम भेजने के कुछ समय बाद जब उन्होंने याकूब खान से फोन पर बात की तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। याकूब खान ने बताया कि उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया है और उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं मांगे हैं। यह सुनते ही महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई ताकि रकम को रोका जा सके और आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    संयोगितागंज थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खाते की जानकारी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई वह किसके नाम पर संचालित है और उसके जरिए पहले भी इस तरह की वारदातें हुई हैं या नहीं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम से वॉट्सएप या सोशल मीडिया पर पैसे मांगने का संदेश मिलने पर तुरंत फोन करके उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल मैसेज के आधार पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान

    सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये के गबन को गंभीर अपराध करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने में बैंकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि आरबीआई, बैंक और दूरसंचार विभाग जैसे सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर मानक संचालन प्रक्रिया  तैयार की जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की चिंता

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे असामान्य और बड़े पैमाने के लेनदेन पर ग्राहकों को तुरंत सतर्क करें। उदाहरण के लिए, यदि कोई आमतौर पर 10-20 हजार रुपये निकालने वाला पेंशनभोगी अचानक लाखों रुपये निकालता है, तो बैंक को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए। पीठ ने जोर देकर कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी से गबन की गई राशि कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है। यह बैंक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण हो सकता है।

    CBI को जांच में शामिल किया गया

    सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान और जांच का निर्देश दिया। गुजरात और दिल्ली की सरकारों को कहा गया कि वे इस जांच के लिए आवश्यक स्वीकृति दें। अदालत ने डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों को मुआवजा देने में उदार दृष्टिकोण अपनाने की भी सिफारिश की।

    SOP और AI का इस्तेमाल

    अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बताया कि आरबीआई ने बैंकों के लिए SOP का मसौदा तैयार किया है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी रोकने के उपाय जैसे अस्थायी डेबिट होल्ड शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों के लिए AI टूल्स के उपयोग की सिफारिश भी की ताकि संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल अलर्ट जारी किया जा सके।

    बैंकों पर कड़ी टिप्पणी
    पीठ ने कहा कि बैंकों का ध्यान ज्यादातर व्यवसायिक मोड पर है, जिससे वे अपराधियों के लिए मंच बन सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने बताया कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 के बीच साइबर धोखाधड़ी के जरिए 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “ये बैंक अब एक बोझ बनते जा रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे धन के रखवाले हैं और भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए। कई बार बैंक धोखेबाजों को ऋण देते हैं और फिर एनसीएलटी/एनसीएलएटी जैसी संस्थाएं सामने आती हैं।”

    डिजिटल अरेस्ट क्या है
    ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक साइबर अपराध का बढ़ता स्वरूप है, जिसमें ठग पीड़ित को सरकारी अधिकारी या अदालत के रूप में पेश कर ऑडियो/वीडियो कॉल के माध्यम से डराते-धमकाते हैं। इसका उद्देश्य पीड़ितों को पैसे देने के लिए मजबूर करना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सीबीआई को देशव्यापी जांच करने और आरबीआई से साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज़ करने में AI का उपयोग करने का निर्देश दे रखा है।