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  • इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए

    इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए


    इंदौर इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक ही दिन में दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर दो लोगों से कुल 1.72 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में इंडियामार्ट पर एसी गैस बेचने के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 82 हजार रुपए हड़प लिए गए, जबकि दूसरे मामले में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को उसके बेटे की रेप केस में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और जमानत के नाम पर 90 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र का है। रानी बाग निवासी ऑटो पार्ट्स व्यापारी पवनदीप सिंह खनूजा ने एसी गैस खरीदने के लिए इंडियामार्ट पर सप्लायर का नंबर तलाशा। वहां उन्हें श्रुति इंटरप्राइजेज के नाम से कुलदीप अग्रवाल का मोबाइल नंबर मिला। बातचीत के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर एसी गैस के 220 टिन का इनवॉइस और फोटो भेजकर 82 हजार रुपए ऑनलाइन जमा कराने को कहा।

    व्यापारी ने भरोसा कर मुंबई स्थित बैंक खाते में भुगतान कर दिया। इसके बाद आरोपी ने गति इंटरप्राइजेज के नाम से एक बिल्टी भी भेजी, लेकिन काफी समय तक सामान नहीं पहुंचा। जांच करने पर पता चला कि भेजी गई बिल्टी एआई तकनीक से तैयार की गई फर्जी दस्तावेज थी। जब आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब व्यापारी को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने बैंक में भुगतान रोकने का प्रयास किया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

    दूसरी घटना कनाड़िया थाना क्षेत्र की है। राज वर्मा के पास व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके बेटे को रेप के आरोप में तीन अन्य युवकों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने बेटे को जेल से बचाने के लिए तत्काल तीन लाख रुपए की मांग की और डर का माहौल बनाकर पैसे भेजने का दबाव बनाया।

    घबराए राज वर्मा ने अपने पास केवल 90 हजार रुपए होने की बात कही। इसके बाद ठगों ने बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली। कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

    दोनों मामलों में साइबर हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान में जुटी है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान केवल सत्यापित विक्रेताओं से ही लेनदेन करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अग्रिम भुगतान न करें और यदि कोई पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारी बनकर फोन पर गिरफ्तारी या जमानत के नाम पर पैसे मांगे तो पहले संबंधित व्यक्ति या स्थानीय पुलिस से पुष्टि जरूर करें। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।

  • शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा

    शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा


    मध्य प्रदेश। आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला का भरोसा जीता और बीमारी का बहाना बनाकर उससे करीब 28 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से फरार था और गिरफ्तारी से पहले यूरोप भागने की तैयारी कर रहा था।

    क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र राकेश छोनकर के रूप में हुई है। वह नोएडा क्षेत्र का रहने वाला है और रूस के मॉस्को में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के रूप में काम करता है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और उसने अपनी शैक्षणिक एवं पेशेवर जानकारी का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया।

    जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट जीवनसाथी डॉट कॉम पर फर्जी प्रोफाइल बनाई थी। उसने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला से संपर्क किया। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और शादी की चर्चा शुरू हो गई। विश्वास कायम होने के बाद आरोपी ने महिला को अपनी गंभीर बीमारी की झूठी कहानी सुनाई और इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगी।
    पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 के दौरान आरोपी ने अलग अलग किस्तों में महिला से करीब 28 लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जब पूरी रकम मिल गई तो उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और महिला से संपर्क भी कम कर दिया। खुद को ठगा हुआ महसूस करने पर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

    क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकतर समय विदेश में रह रहा था जिससे उसकी गिरफ्तारी आसान नहीं थी। हाल ही में वह अपने परिवार से मिलने दिल्ली आया था। पुलिस को जैसे ही उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी दिल्ली से यूरोप जाने वाली फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले ही उसे हिरासत में ले लिया गया।

    पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि उसने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। जांच एजेंसियां उसके ऑनलाइन नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की ठगी के और कितने मामले उससे जुड़े हुए हैं।

    क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट या सोशल मीडिया के जरिए बनने वाले रिश्तों में आर्थिक लेनदेन करने से पहले पूरी तरह जांच पड़ताल करें। किसी भी व्यक्ति की पहचान और दावों की पुष्टि किए बिना बड़ी रकम भेजना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी होने की जानकारी दी है।
  • सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार

    सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी को ही साइबर ठगों ने अपना शिकार बना लिया। टेकनपुर स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ एक इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन हैक कर शातिर बदमाशों ने उनके बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से 3 लाख 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली। घटना के बाद पुलिस और साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार बिहार के समस्तीपुर निवासी 34 वर्षीय अविनाश कुमार वर्तमान में एसटीसी बीएसएफ टेकनपुर में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और यस बैंक के क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग सुविधाएं थीं। 17 जून की रात अज्ञात साइबर अपराधियों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन का ऑनलाइन एक्सेस हासिल कर लिया।

    मोबाइल पर नियंत्रण मिलते ही ठगों ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर डाले। अलग-अलग किस्तों में किए गए इन लेनदेन के जरिए कुल 3 लाख 10 हजार रुपये खाते और क्रेडिट कार्ड से निकाल लिए गए। पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे शुरुआती दौर में पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब इंस्पेक्टर अविनाश कुमार के मोबाइल पर लगातार ट्रांजैक्शन संबंधी संदेश आने लगे। बैंक खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में बिलौआ थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर सेल की टीम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही लेनदेन में उपयोग किए गए आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब रिमोट एक्सेस ऐप, फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग और मालवेयर जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना बेहद जरूरी है।

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी किसी को भी निशाना बना सकते हैं। आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के अधिकारी भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।