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  • अखिलेश के बयान पर भड़के ओपी राजभर! जयंत चौधरी को लेकर कही बात पर पलटवार, अजय राय की मछली पार्टी पर भी उठाए सवाल

    अखिलेश के बयान पर भड़के ओपी राजभर! जयंत चौधरी को लेकर कही बात पर पलटवार, अजय राय की मछली पार्टी पर भी उठाए सवाल


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती दिखाई दे रही है। मंगलवार को कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर तीखे हमले किए। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजभर ने अखिलेश यादव के पुराने बयान को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें पढ़ने की जरूरत है। उन्होंने अखिलेश पर मानसिक संतुलन खोने तक का आरोप लगाया और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से जुड़े पुराने राजनीतिक रिश्तों का हवाला देते हुए जयंत चौधरी को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार किया।

    दरअसल अखिलेश यादव ने 17 अगस्त को गठबंधन की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी ने कुछ ऐसे गठबंधन भी किए जिनके लोग बाद में अलग हो गए। उन्होंने बिना नाम लिए कहा था कि जिनको चवन्नी से रुपया बनाया वे भी उन्हें छोड़कर चले गए। माना गया कि उनका इशारा राष्ट्रीय लोक दल और जयंत चौधरी की तरफ था। इसी बयान पर ओपी राजभर ने जवाब देते हुए कहा कि विरासत में सत्ता मिल सकती है लेकिन बुद्धि नहीं। उन्होंने कहा कि जिन चौधरी चरण सिंह को मुलायम सिंह यादव ने नेता बनाया था उनकी पार्टी को चवन्नी कहना उचित नहीं है।

    राजभर ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या में हुए एक कार्यक्रम में मछली परोसे जाने के मुद्दे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में सनातन परंपरा को मानने वाले कई लोग मछली नहीं खाते हैं। ऐसे में अयोध्या में मछली परोसे जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाया और इसे सनातन का अपमान बताया। अजय राय की ओर से मछली नहीं खाने की बात कहे जाने पर राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उन्होंने नहीं खाई तो भी कार्यक्रम में मछली बनाई गई थी।

    दिलचस्प बात यह रही कि जब राजभर से पूछा गया कि क्या वह खुद मछली खाते हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि अगर मिल जाती है तो खा लेते हैं और नहीं मिलती तो नहीं खाते। इसके बाद जब उनसे पश्चिम बंगाल में भाजपा का भगवा पटका पहनकर मछली खाने से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सावन के दौरान उन्होंने ऐसा नहीं किया।

    वहीं आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सीट बंटवारे के सवाल पर ओपी राजभर ने कहा कि भाजपा के साथ सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ लोग लगातार खड़े हो रहे हैं। राजभर के इस बयान को यूपी में आने वाले चुनाव से पहले गठबंधन की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसी बीच बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी चुनावी राजनीति को लेकर बड़ा फैसला किया है। मायावती ने पंजाब विधानसभा चुनाव में BSP के अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति से पार्टी को सीट और वोट प्रतिशत दोनों में नुकसान हुआ है। इसके अलावा गठबंधन के कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित होता है। पिछली बार BSP ने पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन किया था।

    लखनऊ स्थित BSP कार्यालय में पंजाब के पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद मायावती ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पंजाब के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी पार्टी की तैयारियां तेज की जाएंगी। उम्मीदवारों के चयन में मेहनती और ईमानदार नेताओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

    उधर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया एक एक पैसा सीधे मंदिर की तिजोरी तक पहुंचना चाहिए। मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच अदालत ने हाई पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट पर गौर किया। इससे मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर निगरानी और सख्त होने के संकेत मिले हैं।

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में ओपी राजभर का बड़ा बयान, कहा फिर चोला छोड़कर

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में ओपी राजभर का बड़ा बयान, कहा फिर चोला छोड़कर


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया है. एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अगर किसी को राजनीति करनी है और राजनीतिक नेताओं पर आरोप लगाने हैं तो फिर चोला छोड़कर कुर्ता-पायजामा पहनकर सीधे राजनीति के मैदान में आना चाहिए. मेरठ पहुंचे राजभर ने कहा कि बटुकों के साथ हुई मारपीट गलत थी लेकिन उस घटना के पीछे की सच्चाई भी समझनी चाहिए.

    सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का किया समर्थन

    इस बीच मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के सूखाखैरी ग्राम में आयोजित श्री रामचरितमानस एवं विष्णु यज्ञ कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने बिना नाम लिए अपने गुरुभाई अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि हमारे आचार्यों के प्रति ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे सनातन धर्म को ठेस पहुंचे. उन्होंने यह भी कहा कि देश के अनेक हिंदू मंदिर सरकार के अधीन हैं जबकि अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों पर ऐसा नियंत्रण नहीं है क्या यह अन्याय नहीं है.  गो रक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर होने वाले आंदोलनों को कुचलना या किसी प्रकार का षड्यंत्र करना उचित नहीं है. अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि कल्पना कभी सिद्ध नहीं होती सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है पराजित नहीं किया जा सकता.

    साध्वी ने आरोपों को बताया गलत

    इन सबके बीच शंकराचार्य के मठ में रहने वाली साध्वी श्री अम्बा ने शंकराचार्य पर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि जिन व्यक्ति ने आरोप लगाए हैं वही स्वयं दोषी हैं और सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. साध्वी ने कहा कि इन आरोपों से मठ से जुड़े सभी लोग बेहद दुखी और आहत हैं. मठ परिसर की ओर इशारा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां किसी भी प्रकार का स्विमिंग पूल नहीं है और झूठे तथ्यों के आधार पर भ्रम फैलाया जा रहा है.

  • यूपी पंचायत चुनाव टल सकते हैं? पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दिया अपडेट, क्या बोले

    यूपी पंचायत चुनाव टल सकते हैं? पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दिया अपडेट, क्या बोले


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी संशय के बाद अब कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने चुनाव टलने की सभी चर्चाओं को केवल एक भ्रम करार दिया है। राजभर ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जमीनी स्तर पर काम चल रहा है। चुनावों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी मतपत्रों की छपाई का काम पूरा हो चुका है। यही नहीं, ये मतपत्र अब विभिन्न जिलों में पहुंचाए भी जा रहे हैं।

    भारत समाचार चैनल से बातचीत में ओपी राजभर ने कहा कि मतदाता सूची का काम अपने अंतिम चरण में है और 28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी कर दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार दोनों ही चुनाव को समय पर संपन्न कराने के लिए कटिबद्ध हैं। चुनाव टलने जैसी कोई संभावना अभी नहीं दिखती है।

    भ्रम के पीछे का कारण

    चुनाव टलने की खबरों पर सफाई देते हुए राजभर ने कहा कि लोग अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार राग अलाप रहे हैं। भ्रम का मुख्य कारण यह है कि वर्तमान में कर्मचारी एसआईआर  के काम में व्यस्त हैं। इसके अलावा, आगामी जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी लोग कयास लगा रहे हैं कि चुनाव टल सकते हैं। राजभर ने जोर देकर कहा कि सरकार और निर्वाचन आयोग अपना काम कर रहे हैं।

    पिछड़ा वर्ग आरक्षण और पिछड़ा आयोग का गठन
    ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री ने जानकारी दी कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में पिछड़ा आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही इसका गठन होगा, वह पिछड़ों के आरक्षण को लेकर अपना काम शुरू कर देगा। भाजपा से गठबंधन और पिछड़ों-वंचितों को टिकट पर उन्होंने अपनी चिरपरिचित शैली में कहा, जिसकी जितनी हिस्सेदारी है, उसको उतना हिस्सा दिया जाएगा।

    कब होगी तारीखों की घोषणा?

    चुनाव की सटीक तारीख के सवाल पर पंचायती राज मंत्री ने कहा कि यह निर्णय निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच संयुक्त बैठक के बाद लिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि सही समय आने पर तारीखों का ऐलान हो जाएगा। लेकिन फिलहाल सभी का ध्यान तैयारियों को अंतिम रूप देने पर है। मंत्री के इस बयान के बाद उन भावी प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली है जो पिछले काफी समय से गांवों में चुनाव प्रचार और जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।