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  • कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार: OPEC+ के 7 देशों ने नवंबर में उत्पादन न बढ़ाने का फैसला किया

    कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार: OPEC+ के 7 देशों ने नवंबर में उत्पादन न बढ़ाने का फैसला किया


    नई दिल्ली। ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों और सप्लाई पर दबाव के बावजूद OPEC+ के सात प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने नवंबर में उत्पादन मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने का फैसला किया है।

    रविवार को हुई बैठक में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने उत्पादन में न तो बढ़ोतरी करने और न ही कटौती करने पर सहमति जताई। यानी नवंबर में इन देशों से बाजार में तेल की सप्लाई फिलहाल मौजूदा स्तर के आसपास ही रहेगी। अब समूह की अगली बैठक 1 नवंबर को होगी, जिसमें बाजार की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

    100 डॉलर के पार क्यों पहुंचा कच्चा तेल?

    कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी को ईरान से जुड़े संघर्ष और उससे पैदा हुए सप्लाई जोखिम से जोड़ा जा रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष ने तेल की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    ब्रेंट क्रूड को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों का प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है। ऐसे में इसका 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सप्लाई में संभावित रुकावट की आशंका बढ़ने पर बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    OPEC+ के 7 देशों का फैसला क्या है?

    रविवार की बैठक में OPEC+ के इस उपसमूह ने नवंबर के लिए उत्पादन नीति में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया। इसका मतलब है कि फिलहाल इन सात देशों की ओर से बाजार में अतिरिक्त कच्चा तेल लाने की योजना नहीं है।

    सऊदी अरब और रूस जैसे प्रमुख उत्पादकों के साथ इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान भी इस समूह में शामिल हैं। अगली बैठक 1 नवंबर को होगी। तब तेल की कीमतों, वैश्विक मांग और सप्लाई की स्थिति को देखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा।

    G7 बाजार में उतारेगा 100 मिलियन बैरल तेल-ईंधन

    दूसरी ओर, बढ़ती कीमतों के बीच G7 देशों ने बाजार में अतिरिक्त तेल और ईंधन उपलब्ध कराने की तैयारी की है। शुक्रवार को G7 ने आने वाले हफ्तों में करीब 100 मिलियन बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने की योजना की घोषणा की।

    इसकी शुरुआत बड़ी मात्रा में डीजल की सप्लाई से होगी। योजना के मुताबिक अगले 20 दिनों के भीतर डीजल की शुरुआती बड़ी खेप बाजार में उतारी जाएगी। इसके बाद शेष मात्रा को करीब चार महीनों में बाजार में लाने की तैयारी है।

    अमेरिका में डीजल की कीमतें भी बढ़ीं

    कच्चे तेल की तेजी का असर पेट्रोलियम उत्पादों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका में डीजल की कीमतें हाल में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर किसानों, ट्रक ऑपरेटरों और उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जो परिवहन और दूसरे कामों के लिए डीजल पर निर्भर हैं।

    डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र की लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिसका असर आगे चलकर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

    अब 1 नवंबर की बैठक पर नजर

    फिलहाल वैश्विक तेल बाजार में दो अलग-अलग कदम दिखाई दे रहे हैं। एक ओर OPEC+ के सात प्रमुख देश नवंबर में उत्पादन बढ़ाकर अतिरिक्त सप्लाई देने के पक्ष में नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर G7 बाजार में 100 मिलियन बैरल तेल और ईंधन उत्पाद लाने की तैयारी कर रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान से जुड़े संघर्ष, वैश्विक सप्लाई और तेल की मांग के साथ-साथ 1 नवंबर की OPEC+ बैठक पर बाजार की नजर रहेगी। इस बैठक में उत्पादन नीति में किसी बदलाव को लेकर फैसला हो सकता है।

  • तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार

    तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट की तेल राजनीति में तनाव खुलकर सामने आ गया है। Iran ने United Arab Emirates (UAE) के OPEC से बाहर निकलने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे “नकारात्मक और बदले की भावना से लिया गया कदम” बताया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ कहा कि इस तरह का फैसला संगठन की एकजुटता को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान OPEC के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को निभाता रहेगा और वैश्विक तेल संतुलन बनाए रखने में सक्रिय भूमिका जारी रखेगा।

    तनाव यहीं नहीं रुका। ईरान ने UAE पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान उसने अमेरिका और इजराइल का साथ देकर “गलत रवैया” अपनाया, जिससे भरोसे पर असर पड़ा है।

    वहीं दूसरी तरफ UAE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। Sultan Al Jaber ने कहा कि OPEC और OPEC+ से अलग होने का फैसला किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया कदम है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव सिर्फ OPEC तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मिडिल ईस्ट की बदलती राजनीतिक समीकरण और वैश्विक ऊर्जा बाजार की प्रतिस्पर्धा भी अहम वजह हैं।

    कुल मिलाकर, UAE के इस कदम और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में तेल बाजार के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी: गलती की तो फिर सैन्य कार्रवाई, 14-पॉइंट प्रस्ताव पर संशय बरकरार

    ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी: गलती की तो फिर सैन्य कार्रवाई, 14-पॉइंट प्रस्ताव पर संशय बरकरार



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान किसी तरह की “गलती” करता है तो उस पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।ट्रम्प ने कहा कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका मजबूत स्थिति में है, जबकि ईरान दबाव में दिख रहा है और बातचीत की ओर झुकाव बढ़ा है।

    पाकिस्तान की मध्यस्थता और 14-पॉइंट प्रस्ताव
    ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए ईरान की ओर से एक 14-पॉइंट प्रस्ताव अमेरिका को मिला है।उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव का विस्तृत ड्राफ्ट अभी समीक्षा में है, लेकिन शुरुआती संकेतों के आधार पर उन्हें नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा।ट्रम्प के मुताबिक,ईरान ने पिछले कई दशकों में जो रवैया अपनाया है, उसकी अभी तक पूरी कीमत नहीं चुकाई गई है।

    क्या है ईरान का प्रस्ताव?
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का यह 14-पॉइंट प्रस्ताव अमेरिका के 9-पॉइंट प्लान के जवाब में तैयार किया गया है। इसमें कई प्रमुख शर्तें शामिल हैं
    30 दिनों के भीतर सभी विवादों का समाधान
    भविष्य में हमले न होने की गारंटी
    ईरान से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी
    फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई
    ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना
    युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा
    होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया मैकेनिज्म
    समुद्री नाकेबंदी खत्म करने की मांग
    परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत

    मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ा
    ईरान और अमेरिका के बीच तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हालात भी तेजी से बदल रहे हैं।
    ईरान ने अमेरिका के साथ फिर से युद्ध की आशंका जताई है और अपनी सेना को तैयार बताया है
    अमेरिका का दावा है कि पिछले कुछ हफ्तों में कई जहाजों ने ईरानी जलक्षेत्र से दूरी बनाई है
    ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी में है
    क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा है

    तेल और वैश्विक बाजार पर असर
    तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ की बैठक में उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्पादन में प्रतिदिन लगभग 1.88 लाख बैरल की बढ़ोतरी संभव है।वहीं UAE के OPEC से अलग होने के फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    समुद्री रास्तों और सुरक्षा पर दबाव
    अमेरिका ने मिडिल ईस्ट देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दी है
    इजराइल, कुवैत, कतर और UAE को एडवांस डिफेंस सिस्टम मिलेंगे
    ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में विदेशी जहाजों पर नियंत्रण बढ़ाने का संकेत दिया है
    एक ईरानी टैंकर के अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देने का दावा भी सामने आया है

    बढ़ता तनाव और अनिश्चित भविष्य
    ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस खींचतान में कूटनीति और टकराव दोनों समानांतर चलते दिखाई दे रहे हैं। जहां एक ओर बातचीत के प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य तैयारियां और सख्त बयानबाजी भी तेज हो गई है।डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी और ईरान के प्रस्ताव ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मामला बातचीत की ओर बढ़ता है या टकराव और गहराता है।
    ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि गलती होने पर सैन्य कार्रवाई हो सकती है और 14-पॉइंट प्रस्ताव पर भी उन्होंने संदेह जताया है।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है