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  • Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा

    Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा


    नई दिल्ली । 
    यमन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। यमनी सरकारी सेना ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे के दौरान हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में 181 सैन्य ऑपरेशन किए। इन कार्रवाइयों में ड्रोन, तोप और रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    यमनी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल माजिद अल-नुजैली के अनुसार, सैन्य अभियान के दौरान हूती ठिकानों, हथियारों के भंडार, सैन्य वाहनों और उन सुविधाओं को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल हमलों के लिए किया जा रहा था। सेना ने दावा किया कि इन कार्रवाइयों में हूती समूह के कई सदस्य मारे गए या घायल हुए हैं।

    सरकारी सेना के मुताबिक सात प्रांतों में हूती विद्रोहियों के सैन्य उपकरणों को भी नष्ट किया गया। हालांकि, सेना ने कार्रवाई में मारे गए या घायल हुए लोगों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में अभियान के मानवीय प्रभाव को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    यमनी सेना ने अपनी कार्रवाई को हाल के हूती हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। सेना के अनुसार सरकारी सैनिकों के साथ-साथ नागरिक ढांचे, आर्थिक प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों को भी हाल के दिनों में निशाना बनाया गया है। इन हमलों के कारण सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

    इस बीच हूती विद्रोहियों ने शनिवार शाम तेल संपदा वाले मारिब प्रांत की राजधानी मारिब शहर को निशाना बनाने का दावा किया। सरकार समर्थक मीडिया के अनुसार शहर के रिहायशी इलाकों की दिशा में तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। शुरुआती जानकारी में किसी व्यक्ति के हताहत होने या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक मिसाइल हमलों के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। मारिब लंबे समय से यमन के संघर्ष में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां ऊर्जा संसाधनों और भौगोलिक स्थिति के कारण सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष का असर विशेष रूप से देखा जाता रहा है।

    यमन के अलावा हूती गतिविधियों का असर पड़ोसी सऊदी अरब तक भी पहुंचा है। हाल के हफ्तों में हूती समूह ने यमन के सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों के साथ-साथ सऊदी अरब में मौजूद ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ाने का दावा किया है। सऊदी अरब यमनी सरकार का प्रमुख समर्थक है और लंबे समय से इस संघर्ष में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी जहाजों के लिए समुद्री प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद संगठन की ओर से लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों और सऊदी अरब के भीतर ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के दावे भी सामने आए। इन घटनाओं से क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

    यमन में मौजूदा संघर्ष की जड़ें 2014 में हुए हूती कब्जे से जुड़ी हैं। विद्रोहियों ने उस दौरान उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जिसमें राजधानी सना भी शामिल थी। इसके बाद 2015 में यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया।

    करीब एक दशक से जारी संघर्ष ने यमन को गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट में धकेला है। हालिया सैन्य कार्रवाइयों और मिसाइल हमलों के बीच तनाव फिर बढ़ने से नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की शांति प्रक्रिया को लेकर नई चुनौतियां पैदा होने की आशंका है।

  • भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

    भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित निशातपुरा रेलवे स्टेशन निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह स्टेशन पिछले लगभग तीन वर्षों से ट्रेनों के ठहराव का इंतजार कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उपयोग शुरू न होने के कारण रेलवे की योजना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

    करीब छह करोड़ रुपये की लागत से जून 2023 में तैयार किए गए इस रेलवे स्टेशन को यात्रियों की सुविधा और भोपाल जंक्शन पर बढ़ते परिचालन दबाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। स्टेशन पर प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह तैयार हैं। इसके बावजूद यहां न तो किसी यात्री ट्रेन का नियमित ठहराव शुरू हुआ है और न ही स्टेशन पर सामान्य रेल गतिविधियां दिखाई देती हैं।

    दिनभर स्टेशन परिसर लगभग सुनसान रहता है। विभिन्न दिशाओं से आने-जाने वाली ट्रेनें स्टेशन के सामने से गुजरती जरूर हैं, लेकिन उनका यहां ठहराव नहीं होता। परिणामस्वरूप स्टेशन का उपयोग नहीं हो पा रहा है और तैयार बुनियादी ढांचा निष्क्रिय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्टेशन का संचालन शुरू हो जाए तो आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी बड़ी सुविधा मिल सकती है।

    रेलवे की मूल योजना के अनुसार निशातपुरा स्टेशन को विकसित कर भोपाल जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करना था। इसके साथ ही लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने, प्लेटफॉर्म उपलब्धता में सुधार करने और इंजन बदलने अथवा परिचालन संबंधी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करने का लक्ष्य रखा गया था। इससे ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार की संभावना जताई गई थी।

    वर्तमान में पश्चिमी दिशा से आने वाली कई ट्रेनों को भोपाल जंक्शन पर प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निशातपुरा स्टेशन पूरी तरह चालू हो जाए तो कुछ परिचालन गतिविधियों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे मुख्य स्टेशन पर दबाव कम होगा और रेल संचालन अधिक सुचारु बनाया जा सकेगा।

    हालांकि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन का निर्माण पूरा होने के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण औपचारिकताएं शेष हैं। इनमें सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां, अंतिम निरीक्षण, आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके अलावा स्टेशन परिसर से जुड़े ड्रेनेज सिस्टम और पहुंच मार्ग के कुछ कार्य भी अभी पूरे किए जाने बाकी हैं।

    अधिकारियों के अनुसार इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद स्टेशन से ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा। रेलवे का दावा है कि शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है ताकि यात्रियों को इस नए स्टेशन का लाभ मिल सके। हालांकि संचालन शुरू होने की कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

    फिलहाल निशातपुरा रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद यात्रियों की आवाजाही से दूर है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों की उम्मीद है कि लंबित औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और यह स्टेशन अपने निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप रेल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बनकर भोपाल जंक्शन का भार कम करने के साथ क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा।