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  • Israel: बदू महिलाओं ने पलटा नेतन्याहू का चुनावी पासा…! विपक्ष ला सकता है PM चुनने का विधेयक

    Israel: बदू महिलाओं ने पलटा नेतन्याहू का चुनावी पासा…! विपक्ष ला सकता है PM चुनने का विधेयक


    यरूशलम।
    उम्म खालिद फतून (Umm Khalid Fatoun) पिछले साल युद्ध पीड़ितों के लिए बने एक यहूदी-अरब सहायता केंद्र (Jewish-Arab Aid Center) में स्वयंसेवा करके लौटीं तो उन्होंने देखा कि बुलडोजर अजारनुग गांव (Ajarnug Village) में उनके बेटे के घर को ढहा रहे थे। पुलिस की निगरानी में आई टीम ने घर पर बुलडोजर चलाने से पहले फर्नीचर या सोलर पैनल तक हटाने का मौका नहीं दिया।

    अब, इस हफ्ते जब फतून को मौका मिला तो उन्होंने अपनी नाराजगी का जवाब इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) के सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ मतदान करके दिया। उनका सीधा निशाना राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन-ग्विर थे जिन्होंने फलस्तीनी और अरब समुदाय के लोगों के घरों को व्यापक स्तर पर ढहाने का आदेश दिया था। फतून कहती हैं, बेन-ग्विर को सत्ता से बाहर करना ही मेरा एकमात्र मकसद था। बदू समुदाय में ऐसा एक भी परिवार नहीं है जो हमारे खिलाफ उसके अभियानों से पीड़ित न हुआ हो। चुनाव से कुछ हफ्ते पहले फतून ने बदू महिलाओं को उनके अधिकारों और राजनीतिक ताकत के प्रति जागरूक करने के लिए जमीनी स्तर पर बाकायादा अभियान शुरू किया। इसके शानदार नतीजे भी दिखे, और चुनाव में दक्षिणी नेगेव इलाके के कुछ बदू गांवों में मतदान प्रतिशत तीन गुना तक बढ़ गया।


    हमें अपने हर वोट की ताकत झोंकनी होगी

    अल-नश्मियात अभियान का नेतृत्व करने वाली वकील हनान अलसनाह ने कहा, वर्षों के हिंसक शासन ने इस रूढ़िवादी समुदाय में बदलाव का दरवाजा खोल दिया है। हमने महिलाओं से कहा कि भले सभी पुरुष वोट दें फिर भी समुदाय का आधा हिस्सा ही होंगे। आपको अपने हर वोट की ताकत चाहिए, क्योंकि बेन-ग्विर के पास बहुत ताकत है।


    62% से 93% तक दर्ज की गई वोटिंग

    बदू समुदाय इस्राइली संसद नेसेट में अरब पार्टियों को 19 सीटें दिलाकर किंगमेकर की भूमिका में ला दिया। बदू समुदाय में सबसे कम मतदान 62% रहा, जबकि सबसे ज्यादा मतदान 93% दर्ज किया गया। उनके उत्साह से ही रआम पार्टी को चुनावी अनुमानों से काफी अधिक सफलता मिली।


    विपक्षी दल सीधे पीएम चुनने का ला सकता है विधेयक

    इस्राइल में सरकार गठन में राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने के लिए विपक्षी गुट अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहे बिना अल्पमत सरकार बनाने के लिए सीधे प्रधानमंत्री चुनने से संबंधित विधेयक लाने पर विचार कर रहा है। टाइम्स ऑफ इस्राइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव लागू होने पर मतदाता सरकार से अलग सीधे पीएम पद के लिए वोट डाल सकेंगे।

  • पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ करार दिया। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने नेता को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने की कोशिश करती है, लेकिन इसके लिए देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटती। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। प्रधानमंत्री ने विपक्ष की भूमिका, संसद की कार्यवाही और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा कि जब दुनिया नई वैश्विक व्यवस्था की तलाश कर रही है, उस समय कुछ लोग भारत में अव्यवस्था की स्थिति पैदा करने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सामने एक मजबूत और स्थिर भारत की तस्वीर प्रस्तुत की जानी चाहिए, लेकिन विपक्ष के कुछ नेता विदेशों में जाकर देश की आलोचना करते हैं और बाहरी हस्तक्षेप की मांग करते हैं।

    राहुल गांधी पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक साल में श्रीहरिकोटा से जितने रॉकेट प्रक्षेपित नहीं होते, उससे अधिक बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने की नाकाम कोशिश करती है। उनके इस बयान को राहुल गांधी को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने के प्रयासों पर कटाक्ष के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी आखिर कब तक अपने नेता को आगे बढ़ाने के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी।

    प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी को आशंका है कि यदि संसद में दूसरे नेताओं को पर्याप्त अवसर मिला, तो वे भी अपनी पहचान बना सकते हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस अपने राजनीतिक मंच पर केवल एक नेता को प्रमुखता देना चाहती है। उन्होंने इसे विपक्ष के युवा सांसदों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि ऐसे रवैये से पार्टी के भीतर अन्य नेताओं को अपनी क्षमता दिखाने के अवसर सीमित हो सकते हैं।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को ‘परजीवी’ भी कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने के लिए लगातार अपने नेतृत्व को केंद्र में रखती है। हालांकि, ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थीं और इनके जरिए उन्होंने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री के बयान के बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की तुलना ऐसी मछली से की, जो सत्ता से बाहर रहने पर पानी के बिना तड़पती है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस का रवैया लूट-खसोट और समाज में विभाजन को बढ़ावा देने वाला रहा है। उन्होंने पार्टी पर भारतीय धर्म और संस्कृति के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखने का आरोप भी लगाया।

    त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक रिकॉर्ड उपलब्धियों से जुड़ा है, जबकि राहुल गांधी का रिकॉर्ड कांग्रेस के लिए समस्याएं पैदा करने वाला रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ देश के संवैधानिक ढांचे को भी जोखिम में डाल दिया है। उन्होंने राहुल गांधी को देश और उनकी अपनी पार्टी, दोनों के लिए पहेली बताया।

    प्रधानमंत्री मोदी और सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणियों से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री का ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ वाला तंज और विदेशों में भारत की छवि को लेकर लगाए गए आरोप इस राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। हालांकि, इन बयानों के जवाब में कांग्रेस की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

  • होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने का विरोध….एकजुट हुए 60 देश

    होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने का विरोध….एकजुट हुए 60 देश


    नई दिल्ली।
    दुनिया के अहम समुद्री रास्तों (Sea routes) से जहाजों (Ships) की आवाजाही पर शुल्क लगाने के खिलाफ 60 देश एक साथ आए हैं. यूरोपीय संघ (European Union) के पहल के बाद इन देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर गैरकानूनी टोल (Illegal Toll) लगाने और उनकी आवाजाही रोकने वाली पाबंदियों का विरोध किया गया है. 12 अक्टूबर को सामने आई इस घोषणा में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान और ब्रिटेन समेत कई देशों ने समर्थन दिया है।

    इन देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही बनाए रखने के लिए मिलकर काम किया जाना चाहिए. घोषणा में साफ कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से कानूनी रूप से गुजरने वाले जहाजों पर ऐसे शुल्क नहीं लगाए जाने चाहिए, जो उनकी आवाजाही में बाधा डालें।

    देशों ने गैरकानूनी फीस, भेदभावपूर्ण पाबंदियों और पहले से अनुमति लेने जैसी शर्तों का विरोध किया है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने इस पहल की घोषणा की. इसका मकसद समुद्री रास्तों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत खुला रखना और किसी देश की एकतरफा कार्रवाई से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से रोकना है।


    होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है दुनिया की नजर?

    होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक अहम समुद्री रास्ता है. यहां से खाड़ी क्षेत्र का तेल और प्राकृतिक गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब पांचवीं हिस्सेदारी वाला तेल और लिक्विफाइज नैचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से गुजरते थे।

    ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से नेविगेशन, सुरक्षा और अन्य सेवाओं के नाम पर शुल्क लेने की योजना आगे बढ़ाई थी. इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ाई है।


    असर सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं

    समुद्री रास्तों पर पाबंदियां या अतिरिक्त शुल्क लगने से माल ढुलाई महंगी हो सकती है. इसका असर तेल और गैस की आपूर्ति, कारोबार और सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है. इसी वजह से 60 देशों ने समुद्री रास्तों को खुला रखने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने पर जोर दिया है. अब देखना यह होगा कि समुद्री रास्तों पर आवाजाही बनाए रखने के लिए देश इस साझा घोषणा को किस तरह अमल में लाते हैं।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन पर नितिन नवीन का हमला, बोले- अर्बन नक्सल सोच वाले देश की शांति और स्थिरता बिगाड़ना चाहते हैं

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन पर नितिन नवीन का हमला, बोले- अर्बन नक्सल सोच वाले देश की शांति और स्थिरता बिगाड़ना चाहते हैं

    नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेता देश में अशांति और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नितिन नवीन ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और विपक्षी गठबंधन को निशाने पर लेते हुए कहा कि ‘अर्बन नक्सल’ सोच रखने वाले लोगों के इरादे सफल नहीं होंगे। उन्होंने इस पूरे मामले को देश की शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए विपक्ष की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए।

    नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश को भय के माहौल से बाहर निकालने और आतंकवाद तथा नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के प्रयास किए गए हैं। उनके मुताबिक, इन प्रयासों के बावजूद कुछ लोग देश में अशांति और अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं के बयानों और उनकी भाषा पर भी सवाल उठाए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी नेताओं की भाषा पर देश के युवा नजर रख रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा जताई।

    भाजपा अध्यक्ष ने देश के 140 करोड़ नागरिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग शांति और स्थिरता चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के युवा अपनी संस्कृति, लोकतंत्र और संविधान से जुड़े हुए हैं। नितिन नवीन के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के प्रति जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर इन संस्थाओं और पदों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    नितिन नवीन ने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि देश की शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में दिए गए विवरण का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष विरोध कर रहा है। इस राजनीतिक विवाद में भाजपा अध्यक्ष ने विपक्ष के प्रदर्शन और उसके रुख को देश की स्थिरता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

    विपक्ष की ओर से चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। वहीं, भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। नितिन नवीन ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और विपक्षी गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं की भाषा और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनके रवैये पर सवाल उठाए। इस तरह मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद ने भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।

  • CEC विवाद पर NDA नेताओं का विपक्ष पर हमला, बोले आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अराजकता फैलाने की अनुमति किसी को नहीं

    CEC विवाद पर NDA नेताओं का विपक्ष पर हमला, बोले आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अराजकता फैलाने की अनुमति किसी को नहीं

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़े विवाद और विपक्षी गठबंधन इंडिया तथा CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना सभी का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता फैलाना उचित नहीं है। नेताओं ने चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। इस मुद्दे पर भाजपा, जनता दल यूनाइटेड और बिहार सरकार के नेताओं ने अलग-अलग बयान देते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए।

    भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि भारतीय संविधान सभी को आंदोलन करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी को भी अराजक स्थिति पैदा करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का अर्थ अराजकता नहीं हो सकता। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी के दबाव में न आएं और न ही किसी के बहकावे में आकर कदम उठाएं। तिवारी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद दो से तीन महीने के भीतर उसने नया राजनीतिक एजेंडा सामने रख दिया और अब चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। उनके अनुसार, इस तरह के आरोप लोकतंत्र और संविधान को बदनाम करने का प्रयास हैं।

    मृत्युंजय तिवारी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर यह आरोप भी लगाया कि कुछ राजनीतिक समूह विदेशी शक्तियों के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष की गतिविधियों और उसके राजनीतिक उद्देश्यों पर सवाल उठाए। उनके बयान में आंदोलन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। NDA नेताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए और उसके जरिए अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

    जनता दल यूनाइटेड के नेता श्याम रजक ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना गलत नहीं है। यदि किसी व्यक्ति या संगठन को विरोध दर्ज कराना है, तो वह लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आंदोलन के अधिकार का समर्थन करती है, लेकिन प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। रजक के मुताबिक, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को कई तरह के फैसले लेने पड़ते हैं और दिल्ली में उठाए गए कदमों को इसी प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति के समक्ष इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बारे में रजक ने कहा कि राष्ट्रपति ने साक्ष्य मांगे हैं और सुप्रीम कोर्ट भी प्रमाणों की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और वह बिना प्रमाण के बातें कर रहा है। रजक ने कहा कि केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें साबित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर जनता को भ्रमित करके सत्ता हासिल करने और परिवारवाद तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उनके अनुसार, जनता ऐसे राजनीतिक प्रयासों को पहले ही खारिज कर चुकी है।

    बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने वोट चोरी से जुड़े सबूत जमा करने की बात कही थी। श्रवण कुमार ने कहा कि राहुल गांधी कोई कागज जमा नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव से पहले बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक अभियान चलाते हैं। मंत्री ने कहा कि जहां विपक्ष की सरकार बनती है, वहां वह वोट चोरी का आरोप नहीं लगाता, जबकि बिहार में NDA की सरकार बनने पर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने विपक्ष के इस रुख पर सवाल उठाते हुए चुनाव संबंधी दावों के समर्थन में प्रमाण पेश करने की जरूरत दोहराई। इस तरह CEC विवाद को लेकर NDA और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

  • चुनाव आयोग से मुलाकात पर EC का बयान, बोला- किसी दल से मिलने में आपत्ति नहीं, तय प्रक्रिया के तहत मांगा जाए समय

    चुनाव आयोग से मुलाकात पर EC का बयान, बोला- किसी दल से मिलने में आपत्ति नहीं, तय प्रक्रिया के तहत मांगा जाए समय

    नई दिल्ली । चुनाव आयोग और विपक्षी नेताओं के बीच मुलाकात को लेकर मंगलवार को गतिरोध की स्थिति बनी रही। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी बात रखने की मांग कर रहे थे। इसी बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसे किसी भी राजनीतिक दल के सदस्यों से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है। आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए वर्ष 2025 में एक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल बनाया गया है, जिसके तहत बैठक के लिए पहले समय मांगा जाना और उसका उद्देश्य बताना जरूरी है।

    आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम चार बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था। आयोग के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान उसे जानकारी मिली थी कि कुछ सांसद चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं। इसके बाद करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के माध्यम से सूचना मिली कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने इस अनुरोध पर विचार किया।

    चुनाव आयोग के मुताबिक, वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक के लिए प्रक्रिया तय की गई थी। इसके अनुसार किसी राजनीतिक दल या कई दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को आयोग से मिलने के लिए उसके अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए समय लेना होता है। बैठक का समय दोनों पक्षों की सहमति से तय किया जाता है। आयोग ने कहा कि यह नियमित प्रक्रिया है और सभी राजनीतिक दलों को इसके बारे में जानकारी दी गई है।

    आयोग ने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के संबंध में बाद में दिल्ली पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि करीब 240 सांसद बैठक करना चाहते हैं। आयोग के अनुसार, प्रस्तावित बैठक का स्थान संसद भवन एनेक्सी बताया गया। यह व्यवस्था तय प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थी, क्योंकि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। आयोग ने इस अनुरोध को असामान्य मानते हुए स्वीकार नहीं किया।

    इसके साथ ही चुनाव आयोग ने सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई। आयोग की ओर से कहा गया कि उसका सबसे वरिष्ठ अधिकारी बैठक स्थल पर जाकर सांसदों से ज्ञापन प्राप्त कर सकता है। हालांकि, प्रदर्शनकारी सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि वह राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बैठक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए।

    विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे चुनाव आयोग से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं और जब तक मुलाकात के लिए बुलावा नहीं आता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी ओर आयोग ने बैठक के लिए औपचारिक प्रक्रिया और तय प्रोटोकॉल का हवाला दिया। इस घटनाक्रम में मुख्य विवाद बैठक की इच्छा को लेकर नहीं, बल्कि समय मांगने की प्रक्रिया और प्रस्तावित बैठक स्थल को लेकर सामने आया। आयोग ने दोहराया कि किसी भी राजनीतिक दल से मुलाकात पर उसे कोई आपत्ति नहीं है और तय नियमों के तहत बैठक का अनुरोध किया जा सकता है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का लंबा आंदोलन, मतदाता सूची विवाद पर देशभर में अभियान की तैयारी

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का लंबा आंदोलन, मतदाता सूची विवाद पर देशभर में अभियान की तैयारी


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष का कहना है कि यह अभियान केवल एक-दो दिन का नहीं होगा, बल्कि लंबे समय तक जारी रहेगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस के महासचिवों और प्रदेश अध्यक्षों से इस मुद्दे को लगातार उठाने और आंदोलन को व्यापक स्तर तक ले जाने को कहा है। मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च और आकाशवाणी भवन में धरने के बाद विपक्ष ने अपने आंदोलन को और तेज करने का संकेत दिया।

    इंडिया गठबंधन के कई दल करीब एक सप्ताह पहले हुई बैठक में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर कई महीने तक अभियान चलाने का ऐलान कर चुके हैं। इसके बाद कांग्रेस ने सोमवार को एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को फिर से जुड़वाने के लिए एक महीने का अभियान शुरू करने की घोषणा की। विपक्षी दलों की ओर से इसे घर-घर तक पहुंचाने की तैयारी है। मंगलवार के मार्च में इंडिया गठबंधन के कई दलों की मौजूदगी के साथ बीजू जनता दल की भागीदारी भी दिखाई दी। विपक्ष इसे अपने अभियान के लिए व्यापक समर्थन के तौर पर देख रहा है।

    इस मुद्दे को राहुल गांधी पिछले एक साल से उठाते रहे हैं। विपक्ष ने पहली बार 7 अगस्त 2025 को इसे प्रमुखता से सामने रखा था। उस समय राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक का उदाहरण देते हुए मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए थे। इसके बाद विपक्षी दल लगातार इस विषय को अलग-अलग मंचों पर उठाते रहे। बाद में पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की खबरों और चुनाव परिणामों के बाद विपक्ष ने इस मुद्दे पर और ज्यादा जोर दिया।

    विपक्षी रणनीतिकारों के मुताबिक, इस पूरे अभियान में एकजुटता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी दलों ने एक साथ कई मुद्दे उठाए थे। अब मतदाता सूची के मुद्दे पर भी अलग-अलग दलों के एक मंच पर आने से आंदोलन को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का रुख है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो शीतकालीन सत्र के दौरान भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा और संसद के भीतर विरोध और अधिक तीखा हो सकता है।

    विपक्षी दलों ने केवल संसद और चुनाव आयोग तक सीमित रहने के बजाय आंदोलन को देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाने की योजना बनाई है। इंडिया गठबंधन की ओर से पांच बड़ी रैलियों का भी ऐलान किया गया है। इसके साथ ही कांग्रेस का एक महीने का अभियान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर लोगों तक पहुंचने पर केंद्रित रहेगा। विपक्षी नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे को स्थानीय स्तर तक ले जाने से मतदाताओं की शिकायतों और आपत्तियों को सामने लाने में मदद मिलेगी।

    विपक्ष एसआईआर को लेकर आम मतदाताओं में पैदा हुई कथित असहजता को भी अपने अभियान का आधार बना रहा है। विपक्षी रणनीतिकारों का दावा है कि मतदाता सूची में नाम हटने और जुड़ने से जुड़े सवालों के कारण चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच चिंता बनी हुई है। इसी वजह से आंदोलन को लंबे समय तक चलाने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल विपक्ष का अभियान संसद, चुनाव आयोग, देशव्यापी कार्यक्रमों और घर-घर संपर्क के जरिए आगे बढ़ाने की योजना पर केंद्रित है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंगलवार को INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं हुए। ओवैसी ने इसकी वजह साफ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। हालांकि, उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव और SIR को लेकर अपनी अलग मांगें सामने रखीं।

    ‘मैं INDIA का हिस्सा नहीं, तो मेरा क्या काम’
    ओवैसी से जब पूछा गया कि वह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन में क्यों शामिल नहीं हुए, तो उन्होंने कहा कि AIMIM INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैं उसका हिस्सा नहीं हूं, तो किस्सा ही खत्म। मैं उसका हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम।”

    हालांकि, प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के बावजूद ओवैसी ने चुनाव आयोग की व्यवस्था और SIR को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया है।

    CEC के चयन में CJI को शामिल करने की मांग
    ओवैसी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की मौजूदा प्रक्रिया कार्यपालिका के पक्ष में है और इसमें बदलाव होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि CEC की नियुक्ति करने वाले पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल किया जाए।

    मौजूदा कानून के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। ओवैसी लंबे समय से इस व्यवस्था में CJI को शामिल किए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव जरूरी है।

    SIR को लेकर भी विरोध
    ओवैसी ने दूसरी बड़ी आपत्ति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जताई। उन्होंने कहा कि बिहार में SIR शुरू होने के समय AIMIM ने भी इसका विरोध किया था और पार्टी की ओर से मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज जमा किए गए थे।

    ओवैसी ने SIR की तुलना NRC से करते हुए इसे लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करती और इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।

    यह भी ध्यान देने वाली बात है कि SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं। विपक्षी दल प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के तौर पर इसका बचाव करता रहा है।

    AAP और DMK भी मंगलवार के प्रदर्शन से दूर
    मंगलवार को दिल्ली में हुए INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AAP और DMK भी शामिल नहीं हुए। हालांकि, AAP ने चुनाव आयोग के खिलाफ आगे होने वाले विरोध प्रदर्शन से दूरी नहीं बनाई है। पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर होने वाले प्रदर्शन में AAP शामिल होगी।

    उन्होंने कहा कि जब भी सड़क पर विरोध प्रदर्शन होगा, AAP के कार्यकर्ता उसमें शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कांग्रेस और वाम दलों के साथ AAP भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेगी।

    राहुल-प्रियंका ने आकाशवाणी भवन परिसर में दिया धरना
    मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग की ओर मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रोकना और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करना शामिल था।

    मार्च को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में धरना शुरू कर दिया। करीब आठ-नौ घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

    चुनाव आयोग बोला- शाम 4 बजे तक नहीं मांगा था समय
    विपक्ष के प्रदर्शन के बाद चुनाव आयोग ने मंगलवार रात अपने पक्ष में स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए बैठक के लिए औपचारिक समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने उसे बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों से बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया पहले से लागू है और सभी दल इससे अवगत हैं।

    आयोग के अनुसार, जब बैठक की जगह को लेकर जानकारी मिली तो संसद भवन परिसर में बैठक का प्रस्ताव सामने आया। आयोग ने कहा कि उसके प्रोटोकॉल के मुताबिक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल से बैठक निर्वाचन आयोग परिसर में ही होती है। उसने ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजने का प्रस्ताव भी दिया था।

    इस तरह एक तरफ INDIA गठबंधन CEC के इस्तीफे और SIR को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, वहीं ओवैसी ने गठबंधन के प्रदर्शन से अलग रहते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को शामिल करने और SIR को खत्म करने की अपनी मांग दोहराई है।

  • CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली ।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग तक विरोध मार्च निकाला। मार्च के दौरान विपक्षी सांसदों ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी नेताओं ने कई आरोप लगाए। मार्च शुरू होने से पहले विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार पर एकत्र हुए थे।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मार्च के दौरान कहा कि विपक्ष का यह प्रदर्शन अन्याय के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने सरकार, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आजादी के बाद मिले वयस्क मताधिकार को खत्म करने की कोशिश कर रही है। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सरकार की कठपुतली बताया और आरोप लगाया कि वह वही करते हैं जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

    मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले और INDIA ब्लॉक के कई अन्य सांसद भी मौजूद रहे। विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते थे। हालांकि पुलिस ने मार्च को रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सड़क पर एक पेड़ के नीचे ही धरना शुरू कर दिया।

    प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2017, 2019, 2022 और 2024 में बेईमानी की गई और पश्चिम बंगाल में “पूरा का पूरा खुला खेल” हुआ। उन्होंने चंडीगढ़ की घटना का भी जिक्र करते हुए कहा कि उसे कौन भूल सकता है। उनके इस बयान में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को दोहराया गया।

    इस बीच पुलिस ने अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन के दौरान भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 150 सांसदों को निलंबित किया जाता है और कई कानून पारित किए जाते हैं, तो भाजपा संविधान की बात कैसे कर सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग का बचाव करने को लेकर भी सवाल उठाया।

    कांग्रेस सांसद राजीव राय ने कहा कि भाजपा के खिलाफ लोगों में सड़कों पर आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र का गला घोंटा गया है तथा लोकतंत्र को बचाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भरोसे के लायक नहीं बताया।

    कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लिया जाना तय है और चुनाव आयोग से लोगों का भरोसा खत्म हो गया है। कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।

    कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यदि लोगों का मताधिकार छीना जाएगा तो विपक्ष मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा। इस तरह चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों और विरोध के बीच चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की गई, जिसे पुलिस ने रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।

  • राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अन्य मांगों को लेकर संसद भवन परिसर से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय, निर्वाचन सदन की तरफ बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें पार्लियामेंट स्ट्रीट पर रोक दिया। इसके बाद सांसद वहीं सड़क पर बैठ गए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। सांसदों को नीति आयोग कार्यालय के सामने रोका गया, जो नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित है।

    प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के आरएसएस यूनिफॉर्म वाले कटआउट लिए और नारे लगाए। इनमें ‘बीजेपी है सीईसी है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘डेमोक्रेसी बिकाऊ नहीं है’ जैसे नारे शामिल थे। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए लिखा, ‘ज्ञानेश, यह हो गया भाई। इस्तीफा देने का समय आ गया है।’ मार्च में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास समेत कई सांसद शामिल हुए। सांसदों के पहुंचने से काफी पहले संसद और चुनाव आयोग मुख्यालय के अंदर तथा आसपास भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई थी और बैरिकेडिंग की गई थी।

    मार्च से पहले विपक्षी सांसदों ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज की। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के प्रति लोगों का भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस संस्था पर पूरा देश भरोसा करता है और गर्व महसूस करता है, उसकी निष्पक्षता पर पहले कभी सवाल नहीं उठाए गए, लेकिन एक व्यक्ति ने उस भरोसे को तोड़ दिया है। उन्होंने एक पूरे नेक्सस के साथ काम करने का भी आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार से सवाल करेगा और बीजेपी के मुख्यमंत्री जवाब देना शुरू करेंगे।

    सीपीआई सांसद पी संदोष कुमार ने कहा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के दौरान फॉर्म 6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर विपक्ष की आपत्तियां मजबूत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि फॉर्म 6 से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है, जबकि उनके मुताबिक यह बयान गुमराह करने वाला साबित हुआ है। सीपीआई नेता ने सीईसी को ‘धोखेबाज चुनाव कमिश्नर’ कहा और दावा किया कि विपक्षी पार्टियां 2025 से इन नियमों के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं तथा अपना आंदोलन और तेज करेंगी।

    शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी मार्च से पहले बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सांसद शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहते थे और वे देश के नागरिक होने के साथ संसद के सदस्य भी हैं। राउत ने सवाल किया कि उन्हें रोकने के लिए इतनी बड़ी फोर्स की क्या जरूरत है और कहा कि उनके पास हथियार नहीं हैं। उन्होंने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और सीआईएसएफ के जवानों की तैनाती तथा मंत्रियों के घरों के बाहर सुरक्षा बढ़ाए जाने का दावा किया। राउत ने फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की स्थिति को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सीईसी को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी बदले हुए वर्जन को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने यह पता लगाने के लिए चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करने की बात कही कि क्या बदलाव किए गए थे और उन्हें किसने मंजूरी दी थी। यह टिप्पणी ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई। 26 सितंबर के बयान में आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। यह विरोध एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और तीन सदस्यों वाले आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर विपक्ष के अभियान के बीच हुआ। चुनाव आयोग ने आयोग में बंटवारे के सुझावों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसले एकमत से लिए गए थे।