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  • MP BJP का बड़ा संगठन महामंथन, ओरछा में 30-31 अगस्त को प्रदेश कार्यसमिति बैठक, 20 समितियों में 180 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी

    MP BJP का बड़ा संगठन महामंथन, ओरछा में 30-31 अगस्त को प्रदेश कार्यसमिति बैठक, 20 समितियों में 180 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी

    मध्य प्रदेश : भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक 30 और 31 अगस्त को धार्मिक नगरी ओरछा में आयोजित होने जा रही है। बैठक को लेकर पार्टी संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोजन को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए 20 विशेष समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों में 180 से अधिक कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी का जोर बैठक के दौरान व्यवस्थाओं के साथ-साथ संगठनात्मक अनुशासन और आगामी रणनीति पर भी रहेगा।

    ओरछा में होने वाली इस बैठक को भाजपा के लिए संगठन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के अनुसार, बैठक के माध्यम से बूथ स्तर से लेकर संगठन के विस्तार तक की आगामी रणनीति पर व्यापक मंथन किया जाएगा। इसके साथ ही पार्टी के संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

    बैठक में आने वाले वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश पदाधिकारियों और अन्य प्रमुख अतिथियों की व्यवस्थाओं को लेकर अलग-अलग समितियों को जिम्मेदारी दी गई है। ओरछा की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को देखते हुए मंदिर दर्शन व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए मंदिर दर्शन व्यवस्था समिति का गठन किया गया है, जिसमें नौ प्रमुख कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह समिति वरिष्ठ अतिथियों को भगवान रामराजा के दर्शन कराने से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालेगी।

    पार्टी ने बैठक के दौरान चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी व्यवस्था सुनिश्चित की है। चिकित्सा समिति में डॉक्टरों की टीम को जिम्मेदारी दी गई है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसी तरह मीडिया और प्रचार-प्रसार से संबंधित जिम्मेदारियों के लिए अलग टीम बनाई गई है। आयोजन स्थल की साज-सज्जा, पार्किंग, कार्यकर्ता व्यवस्था और साउंड सिस्टम के लिए भी समितियां गठित की गई हैं।

    मंच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पार्टी ने अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की हैं। मंच व्यवस्था समिति बैठक स्थल पर कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों को संभालेगी, जबकि सुरक्षा समिति आयोजन के दौरान सुरक्षा संबंधी समन्वय पर नजर रखेगी। इसके अलावा परिवहन व्यवस्था के लिए भी कार्यकर्ताओं की टीम बनाई गई है, जो नेताओं और पदाधिकारियों के आवागमन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने का काम करेगी।

    प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आगामी राजनीतिक अभियानों और महत्वपूर्ण संगठनात्मक प्रस्तावों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। जिला स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा भी बैठक के एजेंडे का हिस्सा रहेगी। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन और मितव्ययिता को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

    भाजपा संगठन का लक्ष्य बैठक के माध्यम से आगामी गतिविधियों के लिए स्पष्ट दिशा तय करना है। बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने, कार्यकर्ताओं की भूमिका मजबूत करने और विभिन्न अभियानों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। ओरछा में होने वाली बैठक के लिए जिम्मेदारियां पहले से तय किए जाने से पार्टी संगठन व्यवस्थाओं को लेकर किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहता। बैठक के दौरान लिए जाने वाले फैसलों का असर आने वाले समय में प्रदेश भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखाई दे सकता है।

  • भगवान नहीं ओरछा के असली राजा हैं श्रीराम जानिए क्यों इस अनोखे मंदिर में हर दिन पुलिस देती है गार्ड ऑफ ऑनर

    भगवान नहीं ओरछा के असली राजा हैं श्रीराम जानिए क्यों इस अनोखे मंदिर में हर दिन पुलिस देती है गार्ड ऑफ ऑनर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी ओरछा अपनी भव्य विरासत और धार्मिक आस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां स्थित राम राजा सरकार मंदिर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्रीराम को केवल ईश्वर नहीं बल्कि ओरछा के वास्तविक राजा के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि यहां आज भी मध्य प्रदेश पुलिस प्रतिदिन भगवान श्रीराम को गार्ड ऑफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान प्रदान करती है। यह अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है और देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    राम राजा सरकार का मंदिर किसी पारंपरिक मंदिर की तरह नहीं बल्कि एक राजमहल जैसा दिखाई देता है। यहां भगवान श्रीराम राजा की तरह सिंहासन पर विराजमान रहते हैं। सुबह की मंगला आरती से लेकर रात्रि के शयन तक सभी धार्मिक अनुष्ठान राजशाही परंपरा के अनुसार संपन्न होते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी भगवान के दर्शन किसी देवालय में नहीं बल्कि अपने राजा के दरबार में उपस्थित होने की भावना से करते हैं।

    इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा रोजाना होने वाला गार्ड ऑफ ऑनर है। मध्य प्रदेश पुलिस के जवान निर्धारित समय पर मंदिर परिसर में पहुंचकर शस्त्रों के साथ भगवान श्रीराम को सलामी देते हैं। यह सम्मान उसी प्रकार दिया जाता है जैसा किसी राष्ट्राध्यक्ष या राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति को दिया जाता है। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर पहुंचते हैं।

    राम राजा सरकार मंदिर की स्थापना के पीछे एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार ओरछा की महारानी कुंवरि गणेश भगवान श्रीराम की परम भक्त थीं। उन्होंने अयोध्या जाकर सरयू नदी के तट पर कठोर तपस्या की और भगवान श्रीराम से ओरछा चलने की प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम बाल स्वरूप में उनके साथ ओरछा आने के लिए तैयार हो गए।

    कहा जाता है कि ओरछा आने से पहले भगवान श्रीराम ने महारानी के सामने दो शर्तें रखीं। पहली यह कि ओरछा में वे राजा के रूप में ही विराजमान रहेंगे और दूसरी यह कि जहां पहली बार उन्हें स्थापित किया जाएगा वहां से वे कभी दूसरी जगह नहीं जाएंगे। महारानी ने दोनों शर्तें स्वीकार कर लीं।

    ओरछा पहुंचने पर महारानी ने भगवान श्रीराम को सबसे पहले अपने राजमहल के रसोईघर में विराजमान कराया। भगवान श्रीराम वहीं स्थायी रूप से स्थापित हो गए और समय के साथ वही स्थान विश्व प्रसिद्ध राम राजा सरकार मंदिर बन गया। तभी से ओरछा में भगवान श्रीराम को राजा का दर्जा प्राप्त है और आज भी पूरा नगर उन्हें अपना वास्तविक शासक मानता है।

    राम राजा सरकार मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी अद्भुत प्रतीक है। यहां निभाई जाने वाली राजशाही परंपराएं और भगवान श्रीराम को दिया जाने वाला राजकीय सम्मान इस मंदिर को देश के अन्य सभी राम मंदिरों से अलग पहचान दिलाता है।

  • पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व

    पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नाम चर्चा के केंद्र में है, जो अब तक राष्ट्रीय राजनीति से दूर था, लेकिन जल्द ही संसद के उच्च सदन में पहुंच सकता है। निवाड़ी जिले के ऐतिहासिक नगर ओरछा के निवासी महेश केवट का राज्यसभा सांसद बनना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की राह काफी आसान हो गई है। यदि कांग्रेस को अदालत से राहत नहीं मिलती, तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, मल्लाह, माझी, भोई और रैकवार समाज के पहले राज्यसभा सांसद बनेंगे।

    ओरछा के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मोहल्ले में रहने वाले महेश केवट का राजनीतिक सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। वे वर्ष 2000 से 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने वाले महेश के परिवार का धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से भी गहरा जुड़ाव है। उनके परिवार के सदस्य ओरछा के प्रसिद्ध फूलबाग स्थित लाला हरदौल बैठका की वर्षों से सेवा करते आ रहे हैं। उनके छोटे भाई आज भी नियमित रूप से यहां सेवा कार्य करते हैं। महेश स्वयं सीमेंट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

    महेश केवट का राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा। वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव के दौरान स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए निष्कासन की कार्रवाई की थी। हालांकि बाद में जब मामले की जांच हुई तो प्रदेश स्तर पर उनके निष्कासन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद भाजपा संगठन ने वर्ष 2023 में औपचारिक रूप से निष्कासन समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने महेश के राजनीतिक कद को और अधिक चर्चा में ला दिया।

    भाजपा संगठन में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई, जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हों लेकिन अब तक बड़े पदों पर न पहुंचे हों। इसी रणनीति के तहत सामाजिक रूप से प्रभावशाली लेकिन राजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले केवट और निषाद समाज पर फोकस किया गया। महेश केवट को पहले मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया और अब उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश केवट का चयन केवल मध्य प्रदेश तक सीमित रणनीति नहीं है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां निषाद, केवट और मल्लाह समाज की बड़ी राजनीतिक भूमिका है। ओरछा की भौगोलिक स्थिति झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण महेश केवट भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में भी प्रभावी प्रचारक साबित हो सकते हैं।

    मध्य प्रदेश में भी ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और नर्मदा क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर केवट, मल्लाह, कहार, धीमर और निषाद समाज का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भाजपा का यह दांव आगामी चुनावों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक छोटे नगर के जनप्रतिनिधि से लेकर राज्यसभा सांसद बनने की दहलीज तक पहुंचे महेश केवट की कहानी अब प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व के उभार का बड़ा उदाहरण बनती नजर आ रही है।