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  • आयुध निर्माणी खमरिया ने जबलपुर पुलिस को दिए 2 बोलेरो और 8 एक्टिवा, CSR फंड से बढ़ेगा पेट्रोलिंग बेड़ा

    आयुध निर्माणी खमरिया ने जबलपुर पुलिस को दिए 2 बोलेरो और 8 एक्टिवा, CSR फंड से बढ़ेगा पेट्रोलिंग बेड़ा


    मध्य प्रदेश। जबलपुर में कानून-व्यवस्था और पुलिस पेट्रोलिंग को मजबूत करने के लिए आयुध निर्माणी खमरिया ने बड़ा सहयोग दिया है। संस्थान ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड के तहत पुलिस विभाग को दो बोलेरो और आठ एक्टिवा वाहन प्रदान किए हैं। ये वाहन जिले के अलग-अलग थानों में तैनात किए जाएंगे, जिससे पेट्रोलिंग और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

    आयुध निर्माणी खमरिया के मुख्य महाप्रबंधक शैलेश वगेरवाल ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय को इन वाहनों की चाबी औपचारिक रूप से सौंपी। इस मौके पर पुलिस और फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    मुख्य महाप्रबंधक शैलेश वगेरवाल ने कहा कि आयुध निर्माणी खमरिया केवल रक्षा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाजहित से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि सीएसआर फंड 2025-26 के तहत म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड, पुणे की इकाई द्वारा यह सहयोग दिया गया है।

    उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पुलिस विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाना और अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाना है। खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा और शहर में गश्त व्यवस्था को मजबूत करने में यह वाहन अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान समाज और जनसुरक्षा से जुड़े कार्यों में निरंतर सहयोग देता रहेगा।

    पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने इस सहयोग के लिए आयुध निर्माणी खमरिया का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन वाहनों का उपयोग मुख्य रूप से पेट्रोलिंग, महिला सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं में किया जाएगा। इससे पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा।

    पुलिस प्रशासन के अनुसार, इन वाहनों को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार तैनात किया जाएगा, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गश्त व्यवस्था और मजबूत हो सके।

    इस अवसर पर आयुध निर्माणी खमरिया के जनरल मैनेजर अशोक कुमार मीना, सीनियर मैनेजर अविनाश शंकर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। वहीं पुलिस विभाग की ओर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सूर्यकांत शर्मा, सीएसपी रांझी सतीश साहू, सीएसपी कैंट उदयभान बागरी, डीएसपी मुख्यालय बीएस गोठरिया, डीएसपी यातायात संतोष शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

  • जबलपुर में नाले से मिला बम का खोल, खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से जुड़ाव की आशंका, इलाके में सनसनी

    जबलपुर में नाले से मिला बम का खोल, खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से जुड़ाव की आशंका, इलाके में सनसनी


    जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब नाले की सफाई के दौरान एक घातक बम का खोल कवर बरामद हुआ। यह बम कवर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया में निर्मित होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस बम स्क्वॉड और संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय स्तर पर चल रहे सफाई अभियान के दौरान मजदूरों को नाले में संदिग्ध धातु वस्तु दिखाई दी। करीब से देखने पर वह बम का खोल निकला जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची टीम ने सतर्कता बरतते हुए बम के खोल को अपने कब्जे में ले लिया और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जांच प्रक्रिया शुरू की।

    इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया प्रबंधन को पत्र लिखकर बम के खोल के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। प्रारंभिक तौर पर यह माना जा रहा है कि यह खोल भारतीय सेना के उपयोग में आने वाले गोला-बारूद का हिस्सा हो सकता है हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    इस घटना ने दो साल पहले हुए एक भीषण हादसे की यादें भी ताजा कर दी हैं। इसी क्षेत्र में स्थित एक स्क्रैप गोदाम में विस्फोट हुआ था जिसमें भारी नुकसान हुआ था। उस मामले में अवैध रूप से गोला-बारूद से जुड़े सामान के भंडारण और कारोबार की आशंका सामने आई थी। अब ताजा बरामदगी के बाद उसी कड़ी को फिर से जोड़ा जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक इस बम के खोल का संबंध इलाके के हिस्ट्रीशीटर शमीम कबाड़ी से भी हो सकता है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन सभी संभावित एंगल से जांच की जा रही है।

    गौरतलब है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया में भारतीय सेना के लिए अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक गोला-बारूद तैयार किया जाता है। ऐसे में फैक्ट्री से जुड़े किसी भी सामग्री का बाहर मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    फिलहाल पुलिस और बम निरोधक दस्ता पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहा है। आसपास के क्षेत्रों में भी तलाशी अभियान चलाया जा सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और इस तरह की सामग्री तो नहीं फेंकी गई है।