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  • स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल

    स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल


    इंदौर । इंदौर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह शहर केवल स्वच्छता के लिए ही नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवता के लिए भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। ब्रेन डेड डोनर गौरव दवे के परिवार ने कठिन समय में ऐसा निर्णय लिया जिसने कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। गौरव का हृदय ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद भेजा गया जहां जरूरतमंद मरीज को नया जीवन देने के लिए उसका प्रत्यारोपण किया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से 26वीं बार किसी ब्रेन डेड डोनर का हृदय दूसरे शहर भेजा गया है।

    अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने का दुख असहनीय होता है लेकिन उसी कठिन घड़ी में लिया गया अंगदान का निर्णय कई अन्य परिवारों की खुशियां वापस लौटा सकता है। यही कारण है कि अंगदान को महादान कहा जाता है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के हृदय लिवर किडनी कॉर्निया और अन्य अंग कई मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं।

    इंदौर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंगदान को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां ब्रेन डेथ और अंगदान को लेकर लोगों में संकोच और भ्रम रहता था वहीं अब जागरूकता लगातार बढ़ रही है। परिवार स्वयं आगे आकर अंगदान के लिए सहमति दे रहे हैं जिससे कई गंभीर मरीजों को जीवनदान मिल रहा है।

    अंगदान की इस पूरी प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जैसे ही अंगदान की स्वीकृति मिलती है प्रशासन पुलिस और चिकित्सा संस्थानों की टीम समय के खिलाफ दौड़ शुरू कर देती है। विशेष यातायात व्यवस्था बनाकर अंगों को कम से कम समय में दूसरे शहर के अस्पताल तक पहुंचाया जाता है ताकि प्रत्यारोपण सफल हो सके। हर बार सायरन की आवाज और खाली सड़कों के बीच दौड़ता एंबुलेंस केवल एक वाहन नहीं बल्कि किसी की नई जिंदगी की उम्मीद लेकर आगे बढ़ता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक मेडिकल ऑपरेशन नहीं बल्कि दो परिवारों की भावनाओं से जुड़ी कहानी होती है। एक ओर जहां एक परिवार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देता है वहीं दूसरी ओर वही धड़कन किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में जीवन की नई शुरुआत बन जाती है। यही अंगदान की सबसे बड़ी शक्ति है जो मृत्यु के बाद भी जीवन का संदेश देती है।

    अंगदान के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर ने वर्ष 2015 से अब तक 26 सफल हार्ट डोनेशन किए हैं। इन सभी मामलों में पुरुष और महिला दोनों प्रकार के डोनर शामिल रहे हैं। हर सफल अंगदान यह संदेश देता है कि समाज में जागरूकता बढ़ रही है और लोग मानवता के इस सबसे बड़े कार्य को समझने लगे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश में आज भी ऐसे हजारों मरीज हैं जो केवल अंग उपलब्ध नहीं होने के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक होंगे तो अनेक परिवारों को नई जिंदगी मिल सकेगी। इंदौर ने लगातार सफल अंगदान के माध्यम से पूरे देश को यह संदेश दिया है कि इंसान की सबसे बड़ी विरासत उसकी संपत्ति नहीं बल्कि वह जीवन है जो वह अपने जाने के बाद भी किसी दूसरे को दे सकता है। यही भावना इंदौर को स्वच्छता के साथ साथ संवेदनाओं और मानवता की राजधानी भी बना रही है।

  • 25 वर्षीय गौरव दवे का अंगदान बनेगा जीवन का वरदान इंदौर में 68वें ग्रीन कॉरिडोर की तैयारी लिवर और दोनों किडनी का होगा प्रत्यारोपण

    25 वर्षीय गौरव दवे का अंगदान बनेगा जीवन का वरदान इंदौर में 68वें ग्रीन कॉरिडोर की तैयारी लिवर और दोनों किडनी का होगा प्रत्यारोपण


    इंदौर । इंदौर एक बार फिर मानवता सेवा और अंगदान की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण बनने जा रहा है। शहर के खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय गौरव दवे के अंगदान से कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। यदि सभी चिकित्सकीय और कानूनी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं तो सोमवार को शहर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसके माध्यम से विभिन्न अस्पतालों तक अंगों को बेहद कम समय में सुरक्षित पहुंचाया जाएगा ताकि जरूरतमंद मरीजों का समय रहते प्रत्यारोपण किया जा सके।

    गौरव दवे को 13 जुलाई को अचानक गंभीर ब्रेन हेमरेज होने के बाद इलाज के लिए राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने लगातार कई दिनों तक उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। चिकित्सकीय परीक्षण और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। गौरव फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत थे और अपने परिवार के साथ इंदौर में रहते थे।

    परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था लेकिन इसी दुख की घड़ी में उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिसने कई परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगा दी। गौरव की बहन वैदही राठी बहनोई पल्केश राठी और भाई रितिक चावरे ने परिवार को अंगदान के लिए प्रेरित किया। इसके बाद पिता सतीश दवे और माता कविता दवे ने सहमति देकर मानवता की एक बड़ी मिसाल पेश की। उनके इस निर्णय की हर ओर सराहना हो रही है क्योंकि एक व्यक्ति के अंग कई लोगों को नया जीवन देने वाले हैं।

    अंगदान की पूरी प्रक्रिया में मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी संदीपन आर्य और लकी खत्री ने समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। ट्रस्ट की टीम ने चिकित्सकीय संस्थानों और परिवार के बीच आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कराने में सहयोग किया ताकि अंगदान की प्रक्रिया समय पर संपन्न हो सके।

    डॉक्टरों के अनुसार गौरव का लिवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती एक गंभीर मरीज को प्रत्यारोपित किया जाएगा जबकि उनकी दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल में उपचाराधीन दो अलग अलग मरीजों को नई जिंदगी देंगी। इसके अलावा हृदय फेफड़े हार्ट वाल्व पेनक्रियाज और छोटी आंत के आवंटन की प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर जारी है। इन अंगों का आवंटन तकनीकी अनुकूलता और मरीजों की चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर किया जाएगा।

    अंगों को सुरक्षित और समय पर संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन और पुलिस की मदद से 68वें ग्रीन कॉरिडोर की तैयारी की जा रही है। ग्रीन कॉरिडोर के जरिए ट्रैफिक को कुछ समय के लिए नियंत्रित कर एंबुलेंस को बिना किसी बाधा के अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है जिससे अंगों की गुणवत्ता बनी रहती है और प्रत्यारोपण सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।

    इंदौर लंबे समय से देश में अंगदान के क्षेत्र में अग्रणी शहरों में शामिल रहा है। यहां पहले भी कई ग्रीन कॉरिडोर बन चुके हैं और अनेक परिवार अपने प्रियजनों के अंगदान के जरिए जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे चुके हैं। गौरव दवे के परिवार का यह निर्णय भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है और यह संदेश देता है कि जीवन भले समाप्त हो जाए लेकिन अंगदान के माध्यम से कई जिंदगियां फिर से मुस्कुरा सकती हैं।