Tag: Organisation

  • बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    मध्य प्रदेश : में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए नए प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी की नियुक्ति की है। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश का नया प्रभारी बनाया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश की नेता और सांसद रेखा वर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के साथ प्रदेश में प्रभारी पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विराम लग गया है।

    बिप्लब कुमार देव का राजनीतिक सफर संगठनात्मक गतिविधियों से शुरू हुआ। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे और बाद में दिल्ली में संगठन के वरिष्ठ नेता के.एन. गोविंदाचार्य के सहायक के तौर पर काम करते हुए राजनीतिक संगठन का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2016 में उन्हें त्रिपुरा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

    उनके नेतृत्व में बीजेपी ने वर्ष 2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस चुनाव के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी और लंबे समय से सत्ता में रहे वाम दल के शासन का अंत हुआ। 9 मार्च 2018 को बिप्लब कुमार देव ने त्रिपुरा के 10वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वह वर्ष 2018 से 2022 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

    वर्ष 2022 में बिप्लब देव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गईं। वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे और हरियाणा बीजेपी के प्रभारी के तौर पर काम किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने त्रिपुरा पश्चिम सीट से जीत दर्ज की और लोकसभा पहुंचे।

    इसके बाद पार्टी संगठन में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। बिप्लब कुमार देव को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। अब उन्हें मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और केंद्रीय नेतृत्व तथा राज्य इकाई के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी उनके पास होगी।

    मध्य प्रदेश में बिप्लब देव के साथ रेखा वर्मा को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। रेखा वर्मा उत्तर प्रदेश की नेता हैं और धौरहरा लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं। पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। अब वह मध्य प्रदेश में प्रभारी के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

    इससे पहले मध्य प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी डॉ. महेंद्र सिंह के पास थी। अब उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां संगठन से जुड़े कामों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मध्य प्रदेश में उनके स्थान पर बिप्लब कुमार देव को जिम्मेदारी दी गई है।

    सह प्रभारी के स्तर पर भी बदलाव हुआ है। इससे पहले यह जिम्मेदारी सतीश कुमार उपाध्याय संभाल रहे थे। अब उनकी जगह रेखा वर्मा को मध्य प्रदेश का सह प्रभारी बनाया गया है। इस बदलाव के बाद प्रदेश संगठन में प्रभारी और सह प्रभारी की नई टीम काम करेगी।

    प्रदेश प्रभारी का मुख्य काम पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य संगठन के बीच तालमेल बनाए रखना होता है। वह प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों, पार्टी कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों से जुड़े मामलों पर काम करते हैं। राज्य संगठन से मिलने वाली जानकारी और फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने में भी प्रभारी की भूमिका होती है। सह प्रभारी संगठनात्मक कार्यों में प्रभारी का सहयोग करते हैं।

  • राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी के भीतर संगठन को पुराने तौर-तरीकों से बाहर निकालकर युवा, सक्रिय और जमीन से जुड़े नेतृत्व को आगे लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में अब केवल राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय नेताओं के संगठनात्मक काम, जमीनी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को अधिक महत्व देने की तैयारी है।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने 30 नेताओं के इंटरव्यू लिए। इस प्रक्रिया में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। चयन प्रक्रिया के तहत नेताओं को 10-10 के समूह में इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है।

    इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी उम्मीदवारों से उनके पिछले संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव और भविष्य की रणनीति से जुड़े सवाल कर रहे हैं। चयन प्रक्रिया में नेताओं के कामकाज और उनकी संगठनात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं का विस्तृत कामकाजी रिपोर्ट कार्ड पहले से ही पार्टी नेतृत्व के पास मौजूद है।

    कांग्रेस राष्ट्रीय सचिवों की मौजूदा टीम में भी बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी की योजना मौजूदा 60 फीसदी से अधिक सचिवों को बदलकर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की है। कुल 120 नेताओं के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। इससे राष्ट्रीय संगठन में बड़ी संख्या में नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों के आने की संभावना है।

    चयन प्रक्रिया में ‘संगठन सृजन’ अभियान के दौरान ऑब्जर्वर के तौर पर काम कर चुके नेताओं को विशेष प्राथमिकता मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहता है, जिन्होंने संगठन के साथ सीधे जमीन पर काम किया है और अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को करीब से समझा है।

    राहुल गांधी लंबे समय से कांग्रेस में युवा नेतृत्व और प्रतिभा आधारित चयन की पैरवी करते रहे हैं। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में इंटरव्यू आधारित चयन की प्रक्रिया इसी सोच का हिस्सा रही है। अब प्रदेश और जिला स्तर पर युवा चेहरों को जिम्मेदारी देने के बाद राष्ट्रीय संगठन में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

    कांग्रेस का लक्ष्य अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों से आने वाले ऐसे नेताओं की टीम तैयार करना है, जो सक्रिय हों, संगठन को मजबूत करने की क्षमता रखते हों और जमीनी स्तर पर काम का अनुभव रखते हों। राष्ट्रीय संगठन में प्रस्तावित बदलाव को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    करीब दो दशक से राहुल गांधी कांग्रेस में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम के चयन की मौजूदा प्रक्रिया को उनके इसी ‘जनरेशन चेंज’ अभियान को संगठनात्मक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने और कामकाज के तरीके में बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।