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  • MP BJP का बड़ा संगठन महामंथन, ओरछा में 30-31 अगस्त को प्रदेश कार्यसमिति बैठक, 20 समितियों में 180 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी

    MP BJP का बड़ा संगठन महामंथन, ओरछा में 30-31 अगस्त को प्रदेश कार्यसमिति बैठक, 20 समितियों में 180 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी

    मध्य प्रदेश : भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक 30 और 31 अगस्त को धार्मिक नगरी ओरछा में आयोजित होने जा रही है। बैठक को लेकर पार्टी संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोजन को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए 20 विशेष समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों में 180 से अधिक कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी का जोर बैठक के दौरान व्यवस्थाओं के साथ-साथ संगठनात्मक अनुशासन और आगामी रणनीति पर भी रहेगा।

    ओरछा में होने वाली इस बैठक को भाजपा के लिए संगठन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के अनुसार, बैठक के माध्यम से बूथ स्तर से लेकर संगठन के विस्तार तक की आगामी रणनीति पर व्यापक मंथन किया जाएगा। इसके साथ ही पार्टी के संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

    बैठक में आने वाले वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश पदाधिकारियों और अन्य प्रमुख अतिथियों की व्यवस्थाओं को लेकर अलग-अलग समितियों को जिम्मेदारी दी गई है। ओरछा की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को देखते हुए मंदिर दर्शन व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए मंदिर दर्शन व्यवस्था समिति का गठन किया गया है, जिसमें नौ प्रमुख कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह समिति वरिष्ठ अतिथियों को भगवान रामराजा के दर्शन कराने से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालेगी।

    पार्टी ने बैठक के दौरान चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी व्यवस्था सुनिश्चित की है। चिकित्सा समिति में डॉक्टरों की टीम को जिम्मेदारी दी गई है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसी तरह मीडिया और प्रचार-प्रसार से संबंधित जिम्मेदारियों के लिए अलग टीम बनाई गई है। आयोजन स्थल की साज-सज्जा, पार्किंग, कार्यकर्ता व्यवस्था और साउंड सिस्टम के लिए भी समितियां गठित की गई हैं।

    मंच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पार्टी ने अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की हैं। मंच व्यवस्था समिति बैठक स्थल पर कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों को संभालेगी, जबकि सुरक्षा समिति आयोजन के दौरान सुरक्षा संबंधी समन्वय पर नजर रखेगी। इसके अलावा परिवहन व्यवस्था के लिए भी कार्यकर्ताओं की टीम बनाई गई है, जो नेताओं और पदाधिकारियों के आवागमन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने का काम करेगी।

    प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आगामी राजनीतिक अभियानों और महत्वपूर्ण संगठनात्मक प्रस्तावों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। जिला स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा भी बैठक के एजेंडे का हिस्सा रहेगी। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन और मितव्ययिता को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

    भाजपा संगठन का लक्ष्य बैठक के माध्यम से आगामी गतिविधियों के लिए स्पष्ट दिशा तय करना है। बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने, कार्यकर्ताओं की भूमिका मजबूत करने और विभिन्न अभियानों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। ओरछा में होने वाली बैठक के लिए जिम्मेदारियां पहले से तय किए जाने से पार्टी संगठन व्यवस्थाओं को लेकर किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहता। बैठक के दौरान लिए जाने वाले फैसलों का असर आने वाले समय में प्रदेश भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखाई दे सकता है।

  • जेन-जी वोटर्स से सीधा जुड़ाव बढ़ाएगी भाजपा, नितिन नवीन की नई टीम में स्मृति ईरानी समेत कई प्रमुख नेता शामिल

    जेन-जी वोटर्स से सीधा जुड़ाव बढ़ाएगी भाजपा, नितिन नवीन की नई टीम में स्मृति ईरानी समेत कई प्रमुख नेता शामिल

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने जेन-जी यानी युवा पीढ़ी के बीच अपनी पहुंच और संवाद को मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। शनिवार को भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक हुई। बैठक में संगठन को मजबूत करने के साथ युवा मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी चर्चा हुई।

    पार्टी ने जेन-जी से सीधे जुड़ने के लिए अपनी नई राष्ट्रीय टीम के प्रमुख नेताओं को जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। इस टीम में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े, गुजरात के मंत्री हर्ष सांघवी तथा छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चौधरी जैसे नेता शामिल हैं। इन नेताओं के माध्यम से युवाओं की सोच, उनकी प्राथमिकताओं और भविष्य से जुड़ी अपेक्षाओं को समझने पर जोर दिया जाएगा।

    भाजपा की योजना के तहत युवा संवाद अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से 14 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं को विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि संवाद आधारित कार्यक्रमों के जरिए युवा वर्ग के साथ सीधा संपर्क स्थापित किया जा सकता है और उनके मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

    प्रस्तावित कार्यक्रमों में युवाओं के साथ बातचीत, चर्चा और संवाद के अवसर तैयार किए जाएंगे। इनमें युवाओं को भाजपा नेताओं के साथ सीधे बातचीत करने तथा शिक्षा, रोजगार, तकनीक, सामाजिक विषयों और भविष्य से जुड़े सवाल रखने का अवसर मिलने की संभावना है। अभियान का विस्तृत कार्यक्रम, स्थान और प्रारूप आने वाले दिनों में सामने आने की उम्मीद है।

    शनिवार की बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और केंद्र तथा राज्य सरकारों की योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की रणनीति पर विचार किया गया। पार्टी की कोशिश संगठनात्मक गतिविधियों को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की है।

    बैठक में वंदे मातरम को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया गया। भाजपा ने कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो पद गाए जाने के फैसले की आलोचना की और कहा कि वंदे मातरम की विरासत और सम्मान से राजनीतिक सुविधा के लिए समझौता नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी ने इसके सम्मान और ऐतिहासिक विरासत को देशभर में पहुंचाने के लिए अभियान चलाने की बात कही।

    नितिन नवीन ने भाजपा अध्यक्ष बनने के 209 दिन बाद 17 अगस्त को 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की थी। इसमें 51 नए चेहरों को जगह दी गई है। टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ राष्ट्रीय महासचिव शामिल हैं। स्मृति ईरानी और राम माधव की संगठन में वापसी हुई है, जबकि वसुंधरा राजे, बैजयंत पांडा और तीरथ सिंह रावत जैसे अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

    नई टीम में पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और बीएल संतोष को संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। वहीं, भाजपा के आईटी सेल की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। अमित मालवीय की जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को यह जिम्मेदारी दी गई है। महासमुंद की लोकसभा सांसद रूपकुमारी चौधरी को भाजपा महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

    नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और टीम के सदस्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले हैं। भाजपा के लिए जेन-जी अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी युवा वर्ग के साथ लगातार प्रत्यक्ष संवाद बढ़ाने और उनकी बदलती प्राथमिकताओं को संगठनात्मक रणनीति में शामिल करने पर जोर दे रही है।

  • महाराष्ट्र से दिल्ली और बिहार के बाद यूपी तक पहुंचा विनोद तावड़े का सफर, संगठनात्मक अनुभव पर भाजपा ने जताया भरोसा

    महाराष्ट्र से दिल्ली और बिहार के बाद यूपी तक पहुंचा विनोद तावड़े का सफर, संगठनात्मक अनुभव पर भाजपा ने जताया भरोसा

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक फेरबदल के तहत राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर उन्हें बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपी है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और ऐसे में तावड़े की नियुक्ति को पार्टी की संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर महाराष्ट्र की छात्र राजनीति से शुरू होकर राष्ट्रीय संगठन तक पहुंचा है। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और लंबे समय तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संपर्क और संगठन के विस्तार का अनुभव उनके राजनीतिक सफर की प्रमुख विशेषता रहा है।

    मुंबई में जन्मे तावड़े ने छात्र जीवन के दौरान संगठन के साथ काम करना शुरू किया था। आगे चलकर उन्हें महाराष्ट्र भाजपा में विभिन्न जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने मुंबई भाजपा अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया और बाद में महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने के बाद उनका सक्रिय राजनीतिक प्रभाव और बढ़ा।

    2014 में तावड़े पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर महाराष्ट्र की राजनीति में सीधे निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में पहुंचे। भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उस समय उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं।

    इसके बाद तावड़े ने चुनावी राजनीति से दूरी के बावजूद संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रियता बनाए रखी। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी बड़े विवाद या असंतोष का रास्ता नहीं अपनाया और पार्टी संगठन में अपनी भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया। इसी अवधि में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिलने लगीं और उनका राजनीतिक दायरा महाराष्ट्र से बाहर फैलता गया।

    राष्ट्रीय संगठन में आने के बाद तावड़े को पहले राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली और बाद में उन्हें महासचिव बनाया गया। हरियाणा और फिर बिहार जैसे राज्यों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने चुनावी प्रबंधन और संगठन के बीच समन्वय में अपनी भूमिका मजबूत की। बिहार में गठबंधन की राजनीति के बीच सीट बंटवारे और संगठनात्मक तालमेल जैसे विषयों में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।

    तावड़े ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों के दौरान भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा के सदस्यता अभियान में उनकी भूमिका भी चर्चा में रही। पार्टी के भीतर उनकी पहचान ऐसे नेता के रूप में बनी, जिन्हें चुनावी परिस्थितियों के अनुसार संगठन को सक्रिय करने और अलग अलग समूहों के बीच समन्वय स्थापित करने का अनुभव है।

    अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी उनके सामने है। राज्य में भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ाने और सरकार तथा पार्टी संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती होगी। उत्तर प्रदेश में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संगठन की रणनीति को जमीन तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

    2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदर्शन ने पार्टी के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां रखी हैं। ऐसे माहौल में तावड़े के अनुभव का इस्तेमाल संगठन को दोबारा मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी को गति देने में किया जा सकता है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में मंत्री और संगठन के पदाधिकारी के रूप में काम करने से लेकर राष्ट्रीय महासचिव और विभिन्न राज्यों के प्रभारी तक पहुंचे तावड़े का सफर अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी के साथ एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। पार्टी ने उन्हें यह दायित्व ऐसे समय सौंपा है जब उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति दोनों उसके लिए प्राथमिकता हैं।

  • बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा

    बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा


    नई दिल्ली : 
    भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में तैयार की गई इस टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। बीएल संतोष संगठन महामंत्री के पद पर बने हुए हैं। नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महासचिव शामिल किए गए हैं।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे धीरे तेज हो रही हैं। संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ पदाधिकारियों को जगह मिली है। इसके अलावा दिल्ली से 10, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान और उत्तराखंड से चार चार तथा पंजाब और बिहार से दो दो चेहरों को स्थान मिला है। इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व और चुनावी प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

    बीजेपी की सबसे बड़ी संगठनात्मक विशेषता उसका बहुस्तरीय ढांचा है। पार्टी की संरचना राष्ट्रीय स्तर से शुरू होकर राज्य, जिला, मंडल और बूथ तक जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर तय रणनीति को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना और बूथ स्तर से मिलने वाले फीडबैक को ऊपर तक ले जाना है।

    संगठन के शीर्ष स्तर पर मार्गदर्शक मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय और राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्थान आता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन का सर्वोच्च पद होता है। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता तय है तथा कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पद शामिल होते हैं। राष्ट्रीय महासचिवों में संगठन महामंत्री का पद विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संगठन के नियमित संचालन और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी इससे जुड़ी होती है।

    राष्ट्रीय स्तर के बाद राज्य संगठन पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करता है। राज्य परिषद और राज्य कार्यकारिणी इसके प्रमुख अंग हैं। राज्य परिषद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि राज्य कार्यकारिणी संगठन की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाती है।

    प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्तियां करता है। राज्य स्तर पर संगठन महामंत्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और उसकी नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहमति आवश्यक होती है। इससे राष्ट्रीय और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है।

    राज्य के नीचे जिला और मंडल स्तर का संगठन आता है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण इकाई बूथ है। बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत रखना लंबे समय से प्राथमिकता रहा है। बूथ अध्यक्ष स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों का संचालन करता है, जबकि पन्ना प्रमुख मतदाता सूची के एक हिस्से की जिम्मेदारी संभालते हुए मतदाताओं से सीधे संपर्क करता है।

    संगठनात्मक चुनावों के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,036 जिलों में से 978 में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है। इसी तरह 17,743 मंडलों में से 16,469 मंडल अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जबकि 10,70,462 बूथों में से 7,88,197 बूथ अध्यक्षों का चुनाव पूरा हुआ है।

    बीजेपी में संगठन निर्माण की प्रक्रिया को संगठन पर्व कहा जाता है। इसमें बूथ से मंडल, जिला और प्रदेश स्तर होते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक क्रम आगे बढ़ता है। पार्टी के विभिन्न मोर्चे भी इसी ढांचे का हिस्सा हैं। युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के जरिए अलग अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। यही बहुस्तरीय व्यवस्था बीजेपी के चुनावी संगठन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है।

  • बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का किया ऐलान, स्मृति ईरानी महासचिव और 13 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया

    बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का किया ऐलान, स्मृति ईरानी महासचिव और 13 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में लंबे इंतजार के बाद नई टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में गठित नई टीम में युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है। संगठन में कई प्रमुख चेहरों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है।

    नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा पार्टी संगठन में करीब 33 प्रतिशत महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है। नई नियुक्तियों में सबसे अधिक चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की वापसी को लेकर है। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    स्मृति ईरानी बीजेपी की प्रमुख महिला नेताओं में रही हैं। केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका के अलावा पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक अभियानों में भी उनकी सक्रियता रही है। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद संगठन में उनकी भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है।

    नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। ओडिशा के प्रमुख नेता बैजयंत जय पांडा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

    इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी है। इससे संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए नेतृत्व की नई व्यवस्था तैयार करने का संकेत मिलता है।

    बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि अनुभव और ऊर्जा से समृद्ध यह टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों से कार्यकर्ता भावना के साथ संगठन को और मजबूत करने की अपेक्षा जताई।

    नितिन नवीन ने यह भी कहा कि नई टीम विकसित भारत के संकल्प और राष्ट्रसेवा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पार्टी अध्यक्ष के बयान से स्पष्ट है कि नई टीम से संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

    नितिन नवीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने के करीब सात महीने बाद राष्ट्रीय टीम का गठन किया गया है। अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद से ही नई टीम के ऐलान का इंतजार किया जा रहा था। अब संगठन में नई नियुक्तियों के साथ पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियों का पुनर्गठन पूरा कर लिया है।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब बीजेपी के सामने आने वाले चुनावों और संगठनात्मक विस्तार की बड़ी चुनौतियां हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय संगठन में किए गए बदलावों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक राजनीतिक महत्व वाला राज्य है और वहां चुनावी सफलता राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव डालती है।

    नई जिम्मेदारियों के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। महिलाओं को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने और अनुभवी नेताओं के साथ नई ऊर्जा को जोड़ने की रणनीति के जरिए बीजेपी ने राष्ट्रीय संगठन को नया स्वरूप देने का प्रयास किया है। अब नई टीम की वास्तविक भूमिका आगामी चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियों में दिखाई देगी।

  • नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस की मुलाकात, केंद्र-महाराष्ट्र समन्वय और प्रमुख विकास परियोजनाओं पर बनी सहमति

    नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस की मुलाकात, केंद्र-महाराष्ट्र समन्वय और प्रमुख विकास परियोजनाओं पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन में कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। नई टीम का गठन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब बीजेपी के सामने अगले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण चुनावी चुनौतियां हैं।

    पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव और अन्य प्रमुख संगठनात्मक पदों के लिए कई नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। इनमें हरीश द्विवेदी और विनोद तावड़े को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना बताई जा रही है। दोनों नेताओं के संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग राज्यों में उनकी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें नई टीम में जगह दिए जाने की अटकलें तेज हैं।

    सुनील बंसल के भी नई टीम में बने रहने की संभावना जताई जा रही है। संगठन के स्तर पर उनका अनुभव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में नई टीम में अनुभवी नेताओं और नई पीढ़ी के चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। पार्टी नेतृत्व संगठन को ऐसा स्वरूप देना चाहता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और आयु वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले।

    नई टीम में युवाओं को अधिक अवसर देने पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी फैसले किए जा सकते हैं। संगठन में 40 से 50 वर्ष की आयु वाले नेताओं को आगे लाने की चर्चा भी सामने आई है। इससे पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति का संकेत मिलता है।

    बीजेपी के लिए यह संगठनात्मक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव पार्टी की रणनीति के लिए अहम रहेंगे। इन चुनावों के बाद 2029 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन की नई टीम को चुनावी तैयारियों के साथ-साथ राज्यों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी समीकरण बीजेपी के लिए विशेष महत्व रखते हैं। वहीं उत्तराखंड और पंजाब में अलग राजनीतिक परिस्थितियां हैं। नई टीम का गठन करते समय अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक और सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की कोशिश की जा सकती है। क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व भी संगठनात्मक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण कारक रह सकता है।

    इस बीच नितिन नवीन और बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष सोमवार शाम विशाखापट्टनम पहुंचने वाले हैं। दोनों नेता वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक 19 से 21 अगस्त तक प्रस्तावित है, जिसमें संघ और उससे जुड़े संगठनों के बीच विभिन्न संगठनात्मक और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा होनी है।

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर अंतिम तस्वीर इसी बैठक के दौरान या उसके बाद स्पष्ट होने की संभावना है। हालांकि जब तक पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक संभावित नामों और जिम्मेदारियों को लेकर चल रही चर्चाओं को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

    नितिन नवीन के सामने नई टीम के गठन के साथ संगठन में अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। साथ ही आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए राज्यों में पार्टी की चुनावी तैयारियों को गति देना भी महत्वपूर्ण होगा। नई राष्ट्रीय टीम से बीजेपी की संगठनात्मक प्राथमिकताओं और आगामी चुनावों की रणनीति की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम जल्द होगी घोषित, नितिन नवीन के साथ विनोद तावड़े और हरीश द्विवेदी को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम जल्द होगी घोषित, नितिन नवीन के साथ विनोद तावड़े और हरीश द्विवेदी को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन में कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। नई टीम का गठन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब बीजेपी के सामने अगले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण चुनावी चुनौतियां हैं।

    पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव और अन्य प्रमुख संगठनात्मक पदों के लिए कई नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। इनमें हरीश द्विवेदी और विनोद तावड़े को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना बताई जा रही है। दोनों नेताओं के संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग राज्यों में उनकी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें नई टीम में जगह दिए जाने की अटकलें तेज हैं।

    सुनील बंसल के भी नई टीम में बने रहने की संभावना जताई जा रही है। संगठन के स्तर पर उनका अनुभव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में नई टीम में अनुभवी नेताओं और नई पीढ़ी के चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। पार्टी नेतृत्व संगठन को ऐसा स्वरूप देना चाहता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और आयु वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले।

    नई टीम में युवाओं को अधिक अवसर देने पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी फैसले किए जा सकते हैं। संगठन में 40 से 50 वर्ष की आयु वाले नेताओं को आगे लाने की चर्चा भी सामने आई है। इससे पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति का संकेत मिलता है।

    बीजेपी के लिए यह संगठनात्मक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव पार्टी की रणनीति के लिए अहम रहेंगे। इन चुनावों के बाद 2029 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन की नई टीम को चुनावी तैयारियों के साथ-साथ राज्यों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी समीकरण बीजेपी के लिए विशेष महत्व रखते हैं। वहीं उत्तराखंड और पंजाब में अलग राजनीतिक परिस्थितियां हैं। नई टीम का गठन करते समय अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक और सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की कोशिश की जा सकती है। क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व भी संगठनात्मक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण कारक रह सकता है।

    इस बीच नितिन नवीन और बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष सोमवार शाम विशाखापट्टनम पहुंचने वाले हैं। दोनों नेता वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक 19 से 21 अगस्त तक प्रस्तावित है, जिसमें संघ और उससे जुड़े संगठनों के बीच विभिन्न संगठनात्मक और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा होनी है।

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर अंतिम तस्वीर इसी बैठक के दौरान या उसके बाद स्पष्ट होने की संभावना है। हालांकि जब तक पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक संभावित नामों और जिम्मेदारियों को लेकर चल रही चर्चाओं को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

    नितिन नवीन के सामने नई टीम के गठन के साथ संगठन में अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। साथ ही आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए राज्यों में पार्टी की चुनावी तैयारियों को गति देना भी महत्वपूर्ण होगा। नई राष्ट्रीय टीम से बीजेपी की संगठनात्मक प्राथमिकताओं और आगामी चुनावों की रणनीति की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • उत्तर प्रदेश फतह के मिशन पर भाजपा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेताओं, एनडीए सहयोगियों, साहित्यकारों और कलाकारों से किया व्यापक मंथन

    उत्तर प्रदेश फतह के मिशन पर भाजपा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेताओं, एनडीए सहयोगियों, साहित्यकारों और कलाकारों से किया व्यापक मंथन


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लखनऊ में एक दिन के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में भाग लेकर संगठन, सहयोगी दलों तथा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा की। इस दौरे को आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    दौरे के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और एनडीए सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकों में संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी तैयारियों और जनसंपर्क अभियान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार के कार्यों के आधार पर पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में भी मजबूत जनसमर्थन हासिल करेगी।

    उन्होंने कहा कि भाजपा का संगठन लगातार बूथ स्तर तक सक्रिय रहकर जनता के बीच कार्य करता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उनके अनुसार विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार के कार्यों को लेकर जनता में सकारात्मक माहौल है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी आगामी चुनाव में पहले से बेहतर प्रदर्शन के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

    अपने कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन ने वरिष्ठ नेताओं के साथ भी अनौपचारिक मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय और संगठनात्मक एकजुटता पर भी चर्चा हुई। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को आगामी चुनावों से पहले नेतृत्व के बीच तालमेल को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साहित्य, संस्कृति और कला जगत से जुड़े प्रमुख लोगों से भी मुलाकात कर संवाद स्थापित किया। इस दौरान प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपरा, लोककला और स्थानीय खानपान जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सहभागिता जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। बैठक का माहौल पूरी तरह अनौपचारिक रहा और इसमें राजनीतिक विषयों पर चर्चा नहीं की गई।

    दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा की वरिष्ठ नेता अपर्णा यादव से भी मुलाकात की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके अलावा पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ आयोजित बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, राजनीतिक परिस्थितियों और सामाजिक समीकरणों पर विस्तृत मंथन किया गया। इन चर्चाओं के आधार पर भविष्य की रणनीति और संगठन विस्तार की दिशा में सुझावों पर भी विचार हुआ।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय बनाने, सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत करने तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। लखनऊ में आयोजित बैठकों और संवाद कार्यक्रमों को इसी व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

    आने वाले महीनों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रदेशभर में लगातार दौरे और संगठनात्मक कार्यक्रमों की संभावना है। इन गतिविधियों का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, जनसंपर्क बढ़ाना और चुनावी तैयारियों को समय रहते मजबूत आधार प्रदान करना माना जा रहा है।

  • गरौठा में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक संपन्न, मुन्ना यादव बने नगर अध्यक्ष; पत्रकारों की एकजुटता पर दिया जोर

    गरौठा में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक संपन्न, मुन्ना यादव बने नगर अध्यक्ष; पत्रकारों की एकजुटता पर दिया जोर

    झांसी। गरौठा स्थित बजरंग धर्मशाला में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें संगठनात्मक विस्तार और पत्रकारों की एकजुटता पर विशेष चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला महामंत्री मिलन सिंह परिहार ने की।

    बैठक के दौरान धर्मजीत मुन्ना यादव को सर्वसम्मति से नेशनल पत्रकार एसोसिएशन का गरौठा नगर अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं श्रीमती भारती अग्रवाल को संगठन की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर संरक्षक रामपाल सिंह यदुवंशी, राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष राजेश सिंह परिहार और जिला महासचिव विमल कुमार तिवारी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामपाल सिंह यदुवंशी ने सभी पत्रकारों से एकजुट रहने और आपसी सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील की। राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत तिवारी ने कहा कि पत्रकारों को अपनी पहचान मजबूत करने के लिए नियमित रूप से खबरों का प्रकाशन करते रहना चाहिए।

    मंडल उपाध्यक्ष राजेश सिंह परिहार ने कहा कि कोई भी पत्रकार कवरेज पर जाने से पहले संगठन को सूचित करे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मदद उपलब्ध कराई जा सके। अन्य पदाधिकारियों ने भी संगठन की मजबूती और अनुशासन पर अपने विचार रखे।

    बैठक का संचालन जिला महामंत्री मिलन सिंह परिहार ने किया। अंत में नवनियुक्त नगर अध्यक्ष धर्मजीत मुन्ना यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।