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  • मुख्यमंत्री भगवंत मान की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अभियान लगातार जारी, राज्य में सुरक्षा और निवारक संदेश मजबूत।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अभियान लगातार जारी, राज्य में सुरक्षा और निवारक संदेश मजबूत।


    नई दिल्ली। पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में गैंगस्टरों के खिलाफ जंग अभियान को और तेज कर दिया है। राज्य भर में चलाए जा रहे समन्वित ऑपरेशन का उद्देश्य संगठित अपराध, नार्को-सिंडिकेट और उनके सहयोगियों को पूरी तरह तोड़ना है। 20 जनवरी से 15 मार्च 2026 के बीच पंजाब पुलिस ने 44,787 छापे मारे, जिनके परिणामस्वरूप 14,894 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 14,561 वांछित अपराधी और गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े 333 सहयोगी शामिल हैं। साथ ही 714 ऐसे अपराधी भी पकड़े गए जो लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे थे।

    इस अभियान के तहत 7,494 लोगों को प्रिवेंटिव हिरासत में रखा गया, जिनमें 7,210 वांछित और 284 सहयोगी शामिल हैं। पुलिस ने बड़ी संख्या में हथियार जब्त किए हैं, जिनमें 301 बंदूकें, 125 धारदार हथियार, 921 राउंड गोला-बारूद, 81 मैगज़ीन, 2.5 किलोग्राम विस्फोटक और छह हैंड ग्रेनेड शामिल हैं। इसके अलावा, आपराधिक नेटवर्क की लॉजिस्टिक क्षमताओं को कमजोर करने के लिए 4,070 मोबाइल फोन, 548 वाहन और 10 ड्रोन जब्त किए गए। नकदी और आभूषण के रूप में 45.6 लाख रुपये और 262 ग्राम सोना भी बरामद हुआ।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई से आगे बढ़कर सक्रिय और व्यवस्थित निवारक रणनीति का हिस्सा है। इसका लक्ष्य केवल गैंगस्टरों की गिरफ्तारी नहीं बल्कि उनके वित्तीय चैनल, संचार नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी निशाना बनाना है। इसके जरिए पंजाब में अपराध की जड़ तक पहुंच कर नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कोई भी आपराधिक नेटवर्क बिना दंड के काम नहीं करेगा। इस अभियान की निरंतरता और तीव्रता गैंगस्टरों और ड्रग सिंडिकेट को प्रभावी रूप से कमजोर कर रही है। पंजाब पुलिस इस अभियान को तब तक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है जब तक कि राज्य से संगठित अपराध की जड़ पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।

    अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन ने राज्य में अपराधियों के खिलाफ एक मजबूत निवारक संदेश भेजा है और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इससे पंजाब में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

  • मध्य प्रदेश पुलिस का विशेष अभियान: अमन कॉलोनी से 1 करोड़ रुपये मूल्य का सोना और गांजा बरामद

    मध्य प्रदेश पुलिस का विशेष अभियान: अमन कॉलोनी से 1 करोड़ रुपये मूल्य का सोना और गांजा बरामद


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस ने मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात बड़े पैमाने पर छापा मारकर कथित ईरानी डेरे से करीब एक करोड़ रुपये मूल्य का सोना जब्त किया और 8 महिलाओं समेत 39 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई शहर में चलाए जा रहे विशेष कॉम्बिंग अभियान का हिस्सा थी, जिसमें कुल 408 फरार आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई गई थी।

    आधि रात करीब दो बजे अमन कॉलोनी स्थित डेरे को 400 पुलिसकर्मियों की संयुक्त टीम ने घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान 644.56 ग्राम सोने के आभूषण, लगभग 240 ग्राम चांदी, 39 मोबाइल फोन, 1 लाख 35 हजार रुपये नकद और करीब 1.7 किलो गांजा बरामद किया गया। इसके साथ ही 17 दोपहिया वाहन भी जब्त किए गए।

    पुलिस ने बताया कि पकड़े गए लोग चोरी, नकबजनी, चेन स्नेचिंग और वाहन चोरी जैसे मामलों में वांछित थे। अभियान के दौरान 283 स्थायी वारंट और 125 गिरफ्तारी वारंट तामील किए गए। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई शहर में बढ़ती संपत्ति संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने और संगठित गिरोहों की गतिविधियों को तोड़ने के उद्देश्य से की गई।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक यह गिरोह केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं था। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और अन्य तीन राज्यों में भी यह सक्रिय था। गिरोह का कथित सरगना राजू ईरानी पहले गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में वारदात को अंजाम देकर भोपाल लौट आते थे, जहां से बरामद माल का नेटवर्क संचालित होता था।

    पिछले वर्ष 31 दिसंबर को भी पुलिस ने अमन कॉलोनी में छापा मारकर गिरोह के कई सदस्यों को पकड़ा था और अवैध हथियार समेत लूट का सामान बरामद किया था। ताजा कार्रवाई उसी कड़ी का विस्तार मानी जा रही है। पुलिस अब जब्त मोबाइल और वाहनों के जरिए अन्य राज्यों में दर्ज मामलों से कनेक्शन खंगाल रही है।

    अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और बरामद सामग्री के स्रोत की जांच की जा रही है। पुलिस शहर में ऐसे अन्य ठिकानों की पहचान कर आगे भी कॉम्बिंग अभियान जारी रखने की तैयारी में है।इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि मध्य प्रदेश पुलिस संगठित अपराध और संपत्ति संबंधी अपराधों पर कड़ी नजर रख रही है। बड़े पैमाने पर तस्करी, चोरी और नकबजनी के मामलों में सक्रिय गिरोहों को सख्ती से दबाने का प्रयास जारी रहेगा।

  • भोपाल का ईरानी डेरा: संगठित अपराध का गढ़, सरदार राजू के नेतृत्व में फैली ठगी और लूट की साज़िश

    भोपाल का ईरानी डेरा: संगठित अपराध का गढ़, सरदार राजू के नेतृत्व में फैली ठगी और लूट की साज़िश


    भोपाल।  भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरा संगठित अपराध का केंद्र बन चुका है। पुलिस के अनुसार, यहां रहने वाले करीब 70 से अधिक परिवारों के लगभग हर घर का कोई न कोई सदस्य अपराध में शामिल रहा है। चोरी, लूट, ठगी और फर्जीवाड़े के मामलों में इनका नाम मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक समेत कई राज्यों की एफआईआर में दर्ज है।

    पुलिस ने हाल ही में ईरानी डेरे में बड़ी दबिश दी, जिसमें 32 लोग गिरफ्तार किए गए, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। इस कार्रवाई में 21 बिना नंबर की स्पोर्ट्स बाइक, नकली नोट और अवैध हथियार बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, गिरोह कबीलाई ढांचे में संचालित होता है, जिसमें अपराध से मिली रकम पहले सरदार को दी जाती है, और फिर कबीला तय करता है कि किसे कितना हिस्सा मिलेगा।

    डेरे का प्रमुख सरदार राजू ईरानी है, जिसकी उम्र करीब 47 साल है। वह भोपाल में रहता है, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों में संगीन वारदातों को अंजाम देता है। राजू कभी खुद को CBI अधिकारी, पुलिस अफसर या पत्रकार बताकर ठगी करता है। उसका भाई जाकिर ईरानी भी गिरोह का संचालन करता है और प्रॉपर्टी कब्जा, मारपीट, अडीबाजी और ठगी जैसे संगीन अपराधों में शामिल है।
    गिरोह की रणनीति में फर्जी पहचान और रिश्तों का नेटवर्क शामिल है। आरोपी अक्सर ‘सफर’ पर रहते हैं, जहां कुछ सीधे अपराध में शामिल होते हैं, कुछ चोरी का माल वापस लाते हैं और कुछ अपराध से मिली रकम कबीले तक पहुंचाते हैं।

    2014 में अमन कॉलोनी में हुई हिंसा और आगजनी की घटना के बाद ईरानी डेरा लगातार पुलिस निगरानी में रहा। इसी साल दिल्ली पुलिस ने डेरे से जुड़े मुर्तुजा अली और शिराज अली को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था।

    पुलिस ने अब तक सलमान खान उर्फ गाय, अली तन्नु, सकीना, नवबहार अली, अजीज सैयद, समेत कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि शेष की तलाश जारी है।

  • NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत

    NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत


    नई दिल्ली /राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में बढ़ते संगठित अपराध और अपराधियों की बदलती रणनीतियों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अहम सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दिल्ली नोएडा गुरुग्राम फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे NCR के अलग-अलग इलाकों में अपराध करने वाले गिरोह अक्सर राज्य सीमाओं का फायदा उठाकर पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे NCR में एक समान पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत की व्यवस्था पर विचार करने की सलाह दी है।यह टिप्पणी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ ने की जिसमें मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे। अदालत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों की पुलिस और अदालतों के अधिकार क्षेत्र के चलते संगठित अपराधियों को अनुचित लाभ मिल जाता है।

    अपराधियों की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCR में सक्रिय अपराधी गिरोह अक्सर दिल्ली में वारदात को अंजाम देने के बाद तुरंत उत्तर प्रदेश या हरियाणा के इलाकों-जैसे नोएडा गुरुग्राम या फरीदाबाद-में भाग जाते हैं। इस तरह वे गिरफ्तारी से बचने या जांच और ट्रायल में देरी करने में सफल हो जाते हैं। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि कोई गैंगस्टर या संगठित गिरोह कई राज्यों में अपराध करता है तो उसके खिलाफ एक ही एजेंसी द्वारा कार्रवाई और एक ही अदालत में मुकदमा चलाया जाना ज्यादा प्रभावी होगा।

    NIA जैसी एजेंसी को अधिकार देने का सुझाव

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी को पूरे NCR में जांच और ट्रायल का अधिकार दिया जा सकता है। इससे अपराधी यह तर्क नहीं दे पाएंगे कि अपराध अलग-अलग राज्यों में हुआ है और इसलिए अलग-अलग अदालतों में मुकदमा चले।अदालत ने माना कि एकीकृत व्यवस्था से जांच तेज होगी और न्यायिक प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी बनेगी।

    विशेष अदालत बनाने की वकालत

    मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ASG ऐश्वर्य भाटी से सवाल किया कि क्यों न NCR के लिए एक विशेष अदालत बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूएपीए पीएमएलए और एनडीपीएस जैसे केंद्रीय कानूनों के तहत विशेष अदालतें बनाई गई हैं उसी तर्ज पर NCR में संगठित अपराध के मामलों के लिए भी एक सक्षम और केंद्रीकृत अदालत हो सकती है।ऐसी अदालत में यह मायने नहीं रखेगा कि अपराध किस राज्य में हुआ है बल्कि पूरा मामला एक ही जगह सुना और निपटाया जा सकेगा।

    कानूनी खामियों से अपराधियों को फायदा

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्राधिकार जूरिस्डिक्शन की जटिलता संगठित अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। अलग-अलग राज्यों में एफआईआर जांच और ट्रायल होने से मामलों में देरी होती है। इसका नतीजा यह होता है कि कई कुख्यात अपराधी जमानत पाने में सफल हो जाते हैं जो समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
    समाज और जनहित के लिए जरूरी कदम
    पीठ ने जोर देकर कहा कि NCR जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए मजबूत और प्रभावी कानूनी ढांचे की जरूरत है। एक ही पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत से न केवल त्वरित कार्रवाई संभव होगी बल्कि पीड़ितों को भी जल्द न्याय मिल सकेगा।सुप्रीम कोर्ट ने इसे जनहित और समाज की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।फिलहाल यह एक सुझाव है लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो NCR में अपराध से निपटने की रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। आने वाले समय में केंद्र सरकार इस पर क्या फैसला लेती है इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।