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  • 1973 में आई द एक्सॉर्सिस्ट ने हॉरर सिनेमा को बदल दिया, नौ ऑस्कर नामांकन में दो जीत और आज भी 8.1 IMDb रेटिंग

    1973 में आई द एक्सॉर्सिस्ट ने हॉरर सिनेमा को बदल दिया, नौ ऑस्कर नामांकन में दो जीत और आज भी 8.1 IMDb रेटिंग

    नई दिल्ली । हॉलीवुड की हॉरर फिल्मों की दुनिया में कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिनका प्रभाव रिलीज के कई दशक बाद भी कायम है। द एक्सॉर्सिस्ट ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। विलियम फ्राइडकिन के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1973 में रिलीज हुई थी और उस दौर में दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बनी। फिल्म की कहानी, डरावने दृश्य और धार्मिक पृष्ठभूमि ने इसे सामान्य हॉरर फिल्मों से अलग पहचान दिलाई।

    द एक्सॉर्सिस्ट की कहानी 12 साल की लड़की रेगन के इर्द-गिर्द घूमती है। रेगन अपनी मां के साथ रहती है और एक बोर्ड के जरिए कथित तौर पर आत्माओं से संपर्क करने की कोशिश करती है। इसके बाद उसके व्यवहार और व्यक्तित्व में खतरनाक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। मां अपनी बेटी की हालत को समझने और उसका इलाज कराने की कोशिश करती है, लेकिन परिस्थितियां लगातार भयावह होती जाती हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ फिल्म में धार्मिक विश्वास, डर और अलौकिक शक्तियों के बीच संघर्ष देखने को मिलता है।

    फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में उसका ऑस्कर प्रदर्शन शामिल है। द एक्सॉर्सिस्ट को अकादमी पुरस्कारों की नौ श्रेणियों में नामांकन मिला था। हॉरर शैली की किसी फिल्म के लिए इतने बड़े स्तर पर ऑस्कर मान्यता मिलना उस समय बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई। फिल्म ने दो पुरस्कार अपने नाम किए। उसे सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा और सर्वश्रेष्ठ ध्वनि के लिए ऑस्कर मिला था। इस उपलब्धि ने हॉरर फिल्मों को केवल मनोरंजन तक सीमित मानने वाली धारणा को भी चुनौती दी।

    फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा आज भी उसकी IMDb रेटिंग से लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार द एक्सॉर्सिस्ट को 8.1 की IMDb रेटिंग मिली हुई है। पांच दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी इतनी मजबूत रेटिंग फिल्म की स्थायी लोकप्रियता को दर्शाती है। फिल्म को हॉरर सिनेमा के इतिहास में एक प्रभावशाली कृति के तौर पर देखा जाता है।

    फिल्म से जुड़ी एक दिलचस्प बात अभिनेत्री लिंडा ब्लेयर से भी संबंधित है। उन्होंने रेगन का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके किरदार के भयावह बदलाव और अभिनय ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। रिलीज के बाद उन्हें धमकियों का सामना भी करना पड़ा था। धार्मिक आधार पर फिल्म की विषयवस्तु को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इसमें शैतान से जुड़े तत्वों को अनुचित तरीके से प्रस्तुत किया गया है। स्थिति को देखते हुए फिल्म के वितरण से जुड़े लोगों ने उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की थी।

    द एक्सॉर्सिस्ट की खासियत केवल उसके डरावने दृश्यों में नहीं थी, बल्कि इसकी कहानी और वातावरण ने दर्शकों के मन में लंबे समय तक असर छोड़ा। फिल्म ने यह साबित किया कि हॉरर सिनेमा भी गंभीर विषयों, मजबूत पटकथा और प्रभावशाली अभिनय के जरिए बड़े पुरस्कारों तक पहुंच सकता है।

    आज के दौर में हॉरर फिल्मों में आधुनिक तकनीक, विशेष प्रभाव और बड़े बजट का इस्तेमाल आम हो चुका है, लेकिन द एक्सॉर्सिस्ट की चर्चा अब भी बनी हुई है। फिल्म की विरासत को उसके पुरस्कारों, आलोचनात्मक सम्मान और दर्शकों की प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है। पांच दशक बाद भी यह फिल्म उन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जो हॉरर सिनेमा के इतिहास की चर्चित फिल्मों को देखना चाहते हैं। भारतीय दर्शक भी इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता के अनुसार रेंट पर देख सकते हैं।

  • वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है। मशहूर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान को ऑस्कर पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ ने साल 2026 की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया है। इस विशेष आमंत्रण को स्वीकार करने के बाद फराह खान अब ऑस्कर अवॉर्ड्स की आधिकारिक वोटिंग प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकेंगी, जो भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच और प्रभाव को रेखांकित करता है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि और अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी और गर्व साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस बेहद सम्मानित और वैश्विक समूह का हिस्सा बनना उनके लिए एक अत्यंत सुखद और गर्व से भरा अनुभव है। वर्तमान में एक रियलिटी शो की मेजबानी कर रहीं फराह खान के लिए यह आमंत्रण उनके दशकों लंबे फिल्मी करियर और कलात्मक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

    एकेडमी हर साल सिनेमाई जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दुनिया भर के चुनिंदा कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी सदस्यता सूची में शामिल करती है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष वैश्विक स्तर पर कुल 529 फिल्म पेशेवरों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें भारत से फराह खान के अलावा मनोरंजन जगत के कई अन्य प्रतिष्ठित नाम भी शामिल हैं। इस सूची में मशहूर फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज का नाम भी प्रमुखता से दर्ज है, जिन्होंने ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ जैसी फिल्मों के माध्यम से भारतीय सिनेमा को एक नई वैचारिक और कलात्मक दिशा दी है।

    इस बार एकेडमी की सूची में भारतीय सिनेमा के परदे के पीछे काम करने वाले तकनीकी दिग्गजों को भी व्यापक प्रतिनिधित्व मिला है। दिग्गजों की इस फेहरिस्त में अनुभवी फिल्म एडिटर ए. श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया का नाम शामिल है। दीपा भाटिया ने अपने साढ़े चार दशक से अधिक लंबे शानदार करियर में ‘आरआरआर’, ‘दिल चाहता है’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘माय नेम इज़ खान’ और ‘काय पो छे’ जैसी कालजयी और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल फिल्मों में संपादन का बेहतरीन कार्य किया है। उनके इस अनुभव को अब वैश्विक स्तर पर सराहा गया है।

    इनके अतिरिक्त, भारतीय सिनेमा में अपनी वेशभूषा और कास्टिंग कला का लोहा मनवाने वाली हस्तियों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। इनमें कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी, विख्यात कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह चयन दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा के तकनीकी और रचनात्मक दोनों ही पक्षों को समान रूप से सम्मान मिल रहा है।

    सिनेमा की आधुनिक विधाओं में भी भारतीयों की प्रतिभा को इस आमंत्रण के जरिए स्वीकार किया गया है। एनीमेशन श्रेणी में भारत की अवनीत कौर को आमंत्रित किया गया है, जबकि प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राजेश रामचंद्रन को सदस्यता का प्रस्ताव मिला है। वहीं, विजुअल इफेक्ट्स जैसी जटिल तकनीकी श्रेणी में बेकी ग्राहम और जय मेहता को इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनाया गया है। इन पेशेवरों के शामिल होने से ऑस्कर के मंच पर भारतीय दृष्टिकोण और अधिक मजबूत होगा।

    इस आमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के बाद, ये सभी भारतीय दिग्गज दुनिया भर के लगभग 11,000 से अधिक विशिष्ट एकेडमी सदस्यों के विशेष समूह में शामिल हो जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सदस्यता के बाद इन सभी भारतीय सिनेमाई दिग्गजों को ऑस्कर अवॉर्ड्स के मुख्य नॉमिनेशन तय करने और विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को चुनने के लिए सीधे वोट देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा, जिससे वैश्विक सिनेमा के निर्णयों में भारत की भागीदारी बढ़ेगी।