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  • मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर संबोधन दिया। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से जुड़े इस कार्यक्रम में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता, स्वदेशी, नई पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने नागरिकों से एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने तथा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।

    भागवत ने स्वदेशी अपनाने और अपने देश की पहचान को समझने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संविधान में निहित ‘हम भारत के लोग’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि विविधताओं के बावजूद भारतीय समाज भावनात्मक रूप से एकजुट है। इस संबंध को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, देश की सांस्कृतिक चेतना और नागरिकों के बीच परस्पर जुड़ाव राष्ट्रीय जीवन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने संत रविदास की 650वीं जयंती, स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के कार्यों का भी स्मरण किया। उन्होंने इन महापुरुषों के जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने की बात कही। इसके साथ ही बंगाल के राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष का उल्लेख करते हुए स्वदेशी मेलों के माध्यम से आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के प्रयासों की चर्चा की।

    नेपाल में आई त्रासदी पर चिंता जताते हुए भागवत ने हिमालयी क्षेत्र में विकास के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। उन्होंने भारत, तिब्बत, भूटान और चीन में हुए एकांगी विकास को क्षेत्रीय संकट के संदर्भ में रेखांकित किया। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि अपनाने की जरूरत है।

    भारत की विविधता और सांस्कृतिक परंपरा पर बात करते हुए उन्होंने सनातन संस्कृति को राष्ट्रीय एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टि विभिन्न पंथों, जातियों और समुदायों के प्रति सम्मान का भाव रखती है। सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक अनुशासन को महत्वपूर्ण बताया।

    नई पीढ़ी पर डिजिटल माध्यमों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए भागवत ने उचित और अनुचित के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से ओटीटी मंचों पर नियंत्रण और अनुशासन की जरूरत का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि परिवार, विद्यालय और सामाजिक वातावरण से मिलने वाले संस्कारों की भूमिका कम होने के कारण बच्चों और युवाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताई और इसके समाधान के लिए शासन-प्रशासन तथा समाज को मिलकर देशव्यापी प्रयास करने की जरूरत बताई।

    भागवत ने हिंदू भाव को किसी एक पूजा पद्धति, भाषा, खानपान या रहन-सहन तक सीमित मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व से जुड़ी व्यापक दृष्टि के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने भारत और हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश करने वाली विभाजनकारी ताकतों के प्रति सतर्क रहने की बात कही। उनके भाषण में विदेशी शक्तियों और उनके कथित सहयोगियों द्वारा भारत में आंतरिक मतभेद बढ़ाने की आशंका भी शामिल रही।

    आंदोलनों के संबंध में भागवत ने कहा कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कमियों के कारण विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों, शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से संविधान, कानून और शालीन व्यवहार की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, राजनीतिक लाभ, वोट और लोकप्रियता की इच्छा सामाजिक सद्भाव को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

    अंत में उन्होंने नागरिकों से व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक के प्रयास, जिम्मेदारी और कर्तव्यपालन से ही हासिल किया जा सकता है।

  • यश की फिल्म टॉक्सिक की ओटीटी डील पर संकट, 150 करोड़ के पुराने ऑफर के मुकाबले अब 30 करोड़ की चर्चा

    यश की फिल्म टॉक्सिक की ओटीटी डील पर संकट, 150 करोड़ के पुराने ऑफर के मुकाबले अब 30 करोड़ की चर्चा

    नई दिल्ली: अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की ओटीटी रिलीज और डिजिटल अधिकारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सिनेमाघरों में इसका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहने की खबरों के बाद अब इसके डिजिटल सौदे पर सबकी नजर है। यश ने इस फिल्म के जरिए लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी की थी। फिल्म में उनका नया अंदाज और कई बोल्ड दृश्य भी चर्चा का विषय बने थे। इसके बावजूद बॉक्स ऑफिस पर फिल्म वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई, जैसी उम्मीद की जा रही थी। अब दर्शक इसकी ओटीटी रिलीज की तारीख और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के बारे में जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

    फिल्म के डिजिटल अधिकारों को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, सिनेमाघरों में रिलीज से पहले कई बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने ‘टॉक्सिक’ के ओटीटी राइट्स के लिए करीब 150 करोड़ रुपये तक की पेशकश की थी। बताया जा रहा है कि यश ने इससे अधिक रकम मिलने की उम्मीद में इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद फिल्म को किसी पक्के ओटीटी समझौते के बिना सिनेमाघरों में रिलीज किए जाने की चर्चा सामने आई। ऐसे में डिजिटल अधिकारों का सौदा फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से जुड़ी परिस्थितियों के आधार पर तय होने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, निर्माताओं या संबंधित स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की ओर से इन पुराने प्रस्तावों के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    अब ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ZEE5 ने फिल्म के डिजिटल स्ट्रीमिंग अधिकार हासिल करने के लिए करीब 30 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया है। यह रकम रिलीज से पहले चर्चा में रहे 150 करोड़ रुपये के कथित प्रस्ताव से काफी कम है। इस अंतर के कारण फिल्म की ओटीटी डील को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, 30 करोड़ रुपये के प्रस्ताव और पहले बताए गए 150 करोड़ रुपये के ऑफर की शर्तों की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि फिल्म के डिजिटल अधिकारों की कीमत में वास्तव में इतनी गिरावट आई है या दोनों प्रस्ताव अलग-अलग शर्तों पर आधारित थे।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ZEE5 के कथित प्रस्ताव में भुगतान से जुड़ी एक खास शर्त शामिल हो सकती है। इसके तहत प्लेटफॉर्म आधी रकम पहले देने और बाकी भुगतान को पे-पर-व्यू मॉडल से जोड़ने का विकल्प रख सकता है। इस व्यवस्था में दर्शकों को फिल्म देखने के लिए सामान्य सदस्यता के अलावा अलग से भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, इस भुगतान व्यवस्था को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। न तो ZEE5 और न ही फिल्म की टीम ने प्रस्ताव की रकम या भुगतान की शर्तों की पुष्टि की है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत किसी समझौते तक पहुंची है या डिजिटल अधिकारों को लेकर चर्चा अभी जारी है।

    गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी ‘टॉक्सिक’ में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया भी नजर आएंगी। फिल्म को लेकर शुरुआती चर्चाओं में कलाकारों की मौजूदगी और यश के नए अंदाज को लेकर उत्सुकता रही थी। अब इसके डिजिटल अधिकारों से जुड़ी खबरों ने ओटीटी रिलीज को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। फिलहाल फिल्म की स्ट्रीमिंग तारीख, अंतिम प्लेटफॉर्म और डिजिटल सौदे की रकम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए 30 करोड़ रुपये के प्रस्ताव और पे-पर-व्यू भुगतान की जानकारी को अपुष्ट रिपोर्ट के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • फोनपे और डीपीसीजीसी की साझेदारी से ओटीटी मंचों पर नियामकीय नियमों के पालन और शिकायत निवारण को मिलेगा बढ़ावा

    फोनपे और डीपीसीजीसी की साझेदारी से ओटीटी मंचों पर नियामकीय नियमों के पालन और शिकायत निवारण को मिलेगा बढ़ावा

    नई दिल्ली । डिजिटल भुगतान कंपनी फोनपे और डिजिटल पब्लिशर कंटेंट ग्रीवेंस काउंसिल (डीपीसीजीसी) ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य फोनपे के भुगतान गेटवे से जुड़ने वाले व्यापारियों के लिए स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) का प्रमाणन आसान बनाना, नियामकीय नियमों के पालन को प्रोत्साहित करना और इस संबंध में जागरूकता बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मंचों और ऑनलाइन कंटेंट के प्रकाशकों को लागू नियमों तथा शिकायत निवारण से संबंधित आवश्यकताओं की जानकारी देने पर जोर दिया जाएगा।

    भारत में लागू नियमों के अनुसार, ओटीटी मंचों और ऑनलाइन चुने गए कंटेंट के प्रकाशकों (ओसीसीपी) के लिए शिकायतों के निवारण के उद्देश्य से किसी मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठन का सदस्य होना अनिवार्य है। फोनपे अपने व्यापारी पंजीकरण की प्रक्रिया में इस आवश्यकता को जरूरी शर्त के रूप में लागू करता है। ऐसे में एसआरओ की सदस्यता और प्रमाणन से जुड़ी जानकारी व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। दोनों संस्थाओं के बीच हुए समझौते का उद्देश्य इस प्रक्रिया को समझने और पूरा करने में व्यापारियों की मदद करना है।

    डीपीसीजीसी सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत गठित दूसरे स्तर की स्व-नियामक संस्था है। यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत है। समझौते के जरिए फोनपे और डीपीसीजीसी ओटीटी मंचों तथा ऑनलाइन कंटेंट के प्रकाशकों के बीच नियामकीय नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से काम करेंगे। दोनों संस्थाओं ने माना है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले कई व्यापारियों को एसआरओ की सदस्यता और उससे संबंधित प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए मौजूदा और नए व्यापारियों तक नियमों से जुड़ी जानकारी पहुंचाने की योजना है।

    इस संयुक्त पहल के तहत व्यापारियों को लागू नियामकीय आवश्यकताओं को समझने में सहायता मिलेगी। साथ ही, डीपीसीजीसी के माध्यम से उनके एसआरओ प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे व्यापारियों को पंजीकरण के दौरान जरूरी शर्तों की जानकारी प्राप्त करने और उनका पालन करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य तेजी से विस्तार कर रहे ओटीटी क्षेत्र में शिकायत निवारण व्यवस्था और स्व-नियमन से जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में समझ बढ़ाना भी है। इस सहयोग से फोनपे की ऐसे भुगतान भागीदार के रूप में स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है, जो नियामकीय नियमों के पालन पर ध्यान देता है।

    इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सुभो रे ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत स्थापित डीपीसीजीसी स्व-नियमन के माध्यम से ओटीटी मंचों से संबंधित शिकायतों और समस्याओं का प्रभावी समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, डीपीसीजीसी और फोनपे के बीच सहयोग से आचार संहिता के बेहतर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्व-नियमन का दायरा बढ़ाने और इसके लाभ उद्योग के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।

    फोनपे के पेमेंट हेड दीप अग्रवाल ने कहा कि कंपनी की सभी सेवाओं में नियमों का पालन और ग्राहकों का भरोसा महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ओटीटी क्षेत्र का विस्तार हुआ है और इसकी पहुंच तेजी से बढ़ी है। डीपीसीजीसी के साथ समझौते से ओटीटी मंचों के बीच जागरूकता बढ़ाने और ग्राहकों की शिकायतों के निवारण से संबंधित नियमों की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते ओटीटी क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन, जागरूकता और भरोसे को मजबूत करने में योगदान देना है।

  • काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं

    काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं


    नई दिल्ली । परिणीति चोपड़ा बॉलीवुड में अपने 15 साल के सफर के अहम पड़ाव पर पहुंचने वाली हैं। फिल्म ‘लेडीज वर्सेस रिकी बहल’ से अभिनय की शुरुआत करने वाली परिणीति ने इन वर्षों में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। उनके करियर में सफलता के साथ ऐसे दौर भी आए, जब उन्हें काम नहीं मिला और काफी समय घर पर बैठकर गुजारना पड़ा। अपने इस मुश्किल दौर को याद करते हुए अभिनेत्री ने माना कि करियर में उनसे कई गलतियां हुईं और उन्होंने उन गलतियों से काफी कुछ सीखा।

    परिणीति ने बताया कि वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आती थीं, इसलिए करियर की शुरुआत में लिए गए फैसलों का असर भी उन्हें खुद ही झेलना पड़ा। उनके मुताबिक, कभी गलत फिल्मों का चुनाव हुआ, कभी फैशन को लेकर गलतियां हुईं और कभी पब्लिक रिलेशन से जुड़े फैसले भी सही नहीं रहे। उन्होंने कहा कि उनके करियर की ये सभी गलतियां लोगों के सामने हुईं और उन्हें इन्हीं अनुभवों से आगे बढ़ना सीखना पड़ा।

    अभिनेत्री के करियर में एक ऐसा समय भी आया, जब उनके पास कोई काम नहीं था। दूसरी ओर, उन्होंने ऐसा दौर भी देखा जब लगातार काम के कारण परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया। उनके अनुसार, करियर में आए इन दोनों तरह के अनुभवों ने उन्हें काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन को समझने में मदद की।

    इन दिनों परिणीति वेब सीरीज ‘शक – ट्रस्ट नो वन’ के जरिए ओटीटी पर भी नजर आ रही हैं। इसमें वह एक ऐसी मां की भूमिका निभा रही हैं, जो आठ साल से अपनी लापता बेटी की तलाश कर रही है और उसे अपने ही परिवार के लोगों पर शक है। अभिनेत्री ने बताया कि सस्पेंस और थ्रिलर से जुड़े किरदार निभाना उन्हें काफी पसंद है। कहानी का रहस्य अंत तक बनाए रखना इस प्रोजेक्ट की खास चुनौती थी, क्योंकि शूटिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी।

    परिणीति ने मदरहुड और कामकाजी महिलाओं को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि किसी नई मां को यह बताने का अधिकार दूसरों को नहीं है कि उसे कब काम पर लौटना चाहिए। अगर कोई महिला बच्चे के जन्म के बाद अपनी इच्छा से काम जारी रखना चाहती है, तो उसके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

    अभिनेत्री ने मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों और उन पर की जाने वाली टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बच्चे को जन्म देना बेहद कठिन अनुभव है और इसके बाद शरीर पर आने वाले बदलावों को लेकर महिलाओं को शर्मिंदा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने शरीर पर आए स्ट्रेच मार्क्स को भी मां बनने के अनुभव का हिस्सा बताया।

    काम और परिवार के संतुलन पर परिणीति ने कहा कि अगर शुरुआत में ही काम की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट बातचीत हो, तो दोनों चीजों को साथ संभाला जा सकता है। उनका मानना है कि आज की युवा महिलाएं करियर और परिवार दोनों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहती हैं। उनके अनुसार, इसके लिए कामकाजी महिलाओं और मेकर्स के बीच समझदारी और सहयोग जरूरी है।

  • संजय दत्त स्टारर पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म 'आखिरी सवाल' सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है।

    संजय दत्त स्टारर पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म 'आखिरी सवाल' सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है।

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त की हालिया रिलीज पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म आखिरी सवाल अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हो गई है। सिनेमाघरों में मई महीने के दौरान प्रदर्शित होने के बाद इस फिल्म ने आखिरकार ओटीटी का रुख किया है। जो दर्शक सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने से चूक गए थे, वे अब इसे घर बैठे डिजिटल माध्यम पर देख सकते हैं।

    यह बहुप्रतीक्षित फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म लायनगेट्स प्ले पर 13 अगस्त से स्ट्रीम की जा रही है। प्लेटफॉर्म ने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर फिल्म का आधिकारिक प्रोमो शेयर करते हुए इसकी डिजिटल स्ट्रीमिंग की घोषणा की है। फिल्म की विषय-वस्तु तीखे सामाजिक और राजनीतिक सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसको लेकर दर्शकों में उत्सुकता देखी जा रही है।

    फिल्म की कहानी मुख्य रूप से एक प्रोफेसर और उनके एक बागी छात्र के बीच के वैचारिक मतभेदों और संवाद पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास और प्रासंगिकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर तार्किक चर्चा दिखाई गई है। कहानी में छात्र द्वारा उठाए गए पांच मुख्य सवालों और प्रोफेसर द्वारा दिए जाने वाले जवाबों को बेहद नाटकीय अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।

    मुख्य स्टारकास्ट की बात करें तो संजय दत्त ने फिल्म में प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी की मुख्य भूमिका निभाई है, जबकि युवा अभिनेता नमाशी चक्रवर्ती ने छात्र की भूमिका में उनका सामना किया है। इनके अलावा नीतू चंद्रा, आयूषी चतुर्वेदी, त्रिधा चौधरी और अर्चना आर्या जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म का निर्देशन अभिजीत वारंग ने किया है।

    इस फिल्म का संगीत मॉन्टी शर्मा द्वारा तैयार किया गया है, जबकि इसके गीत प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। सिनेमाघरों में अपनी रिलीज के दौरान बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म व्यावसायिक रूप से खास कमाल नहीं दिखा सकी थी और इसका कुल घरेलू बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग तीन करोड़ रुपये के आसपास ही सीमित रहा था।

    व्यावसायिक असफलताओं के बावजूद, फिल्म को समीक्षकों और डिजिटल दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। संजय दत्त के अभिनय और फिल्म के गंभीर विषय की सराहना की जा रही है। ऑनलाइन रेटिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी दर्शकों ने इसे विचारोत्तेजक और संजय दत्त के दमदार अभिनय से सजी फिल्म करार दिया है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों में डिजिटल कंटेंट और ओटीटी फिल्मों को लेकर युवाओं के बीच खासा क्रेज देखा जाता है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों को राज्य के दर्शक हमेशा से गंभीरता से देखते आए हैं, ऐसे में मध्य प्रदेश के सिनेमा प्रेमियों के बीच भी इस फिल्म की ओटीटी रिलीज को लेकर चर्चा बनी हुई है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म को बड़ा दर्शक वर्ग मिलेगा। संजय दत्त के फैंस के लिए यह फिल्म उनके अभिनय का एक अलग रूप देखने का शानदार मौका है, जहां वे एक गंभीर और बौद्धिक भूमिका में नजर आ रहे हैं।

  • 31 जुलाई को ओटीटी पर सिनेमाई महासंग्राम: एक्शन, थ्रिल और खौफ के तड़के संग रिलीज होंगी 6 नई फिल्में और सीरीज

    31 जुलाई को ओटीटी पर सिनेमाई महासंग्राम: एक्शन, थ्रिल और खौफ के तड़के संग रिलीज होंगी 6 नई फिल्में और सीरीज

    नई दिल्ली । समेत देशभर के ओटीटी प्रेमियों के लिए जुलाई महीने का अंतिम दिन मनोरंजन का बड़ा सौगात लेकर आ रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सस्पेंस, थ्रिलर, एक्शन और ड्रामा से भरपूर छह नई फिल्में और वेब सीरीज एक साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुत की जा रही हैं। सिनेमाघरों में किसी बड़े बजट की फिल्म की अनुपस्थिति के बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने वीकेंड को खास बनाने की पूरी योजना तैयार कर ली है। नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, सोनी लिव, जी5 और लायन्सगेट जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर विविध शैलियों का यह समन्वय दर्शकों को बेहतरीन अनुभव प्रदान करने वाला है।

    एनिमेटेड सीरीज के शौकीनों के लिए गोथम शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित एक चर्चित शो का दूसरा सीजन वापसी कर रहा है। इसमें मुख्य किरदार एक बार फिर अंधेरे के बीच खतरनाक अपराधियों से मुकाबला करता और शहर की रक्षा में नए रहस्यों को सुलझाता नजर आएगा। वहीं, भावनात्मक और शांत जीवन की तलाश पर केंद्रित एक जापानी-कोरियन ड्रामा नेटफ्लिक्स पर दस्तक देने जा रहा है। इसमें नौकरी छूटने के बाद अपनी दादी के तटीय घर पहुंची मुख्य पात्र की जीवन यात्रा और उसके केयरटेकर के साथ बनते रिश्तों की सहज कहानी देखने को मिलेगी।

    क्षेत्रीय सिनेमा के शौकीनों के लिए जी5 पर एक मलयालम साइकोलॉजिकल सर्वाइवल ड्रामा पेश किया जा रहा है। यह कहानी एक मां और उसके छोटे बेटे की है, जो अपनी पहचान छिपाकर कानून से बचते फिर रहे हैं। गहरे मानसिक आघात और अकेलेपन के बीच संघर्ष करते इस परिवार का अनिश्चित भविष्य दर्शकों को बांधे रखेगा। इसके अतिरिक्त, लायन्सगेट पर एक उत्तरजीविता थ्रिलर रिलीज हो रही है, जिसमें माल्टा में छुट्टियां मना रहे एक जोड़े पर पहले एक विशाल शार्क और फिर एक कातिल मछुआरे का खतरा मंडराता है।

    भारतीय पौराणिक कथाओं में रुचि रखने वालों के लिए सोनी लिव पर महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन पर केंद्रित एक एनिमेटेड सीरीज आ रही है। इसमें कर्ण के एक साधारण परिवार में पालन-पोषण से लेकर महान योद्धा बनने और जीवनभर के सामाजिक भेदभाव तथा नियति से उसके संघर्ष को दिखाया गया है। इसके साथ ही, नेटफ्लिक्स पर सत्यदेव अभिनीत एक साइकोलॉजिकल पीरियड ड्रामा भी प्रस्तुत किया जा रहा है। यह कहानी एक बुजुर्ग राजा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने मृत पुत्र की वास्तविक पहचान की तलाश में अतीत के कई दफन राज उजागर करता है। इन सभी नए रिलीज के साथ इस वीकेंड दर्शकों के पास विविध प्रकार का कंटेंट चुनने का शानदार अवसर रहेगा।

  • दुबई की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ अभिनय में आजमाई किस्मत, ट्रांसजेंडर 'कुकू' बनकर रातोंरात मिली अलग पहचान

    दुबई की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ अभिनय में आजमाई किस्मत, ट्रांसजेंडर 'कुकू' बनकर रातोंरात मिली अलग पहचान

    नई दिल्ली । अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री कुब्रा सैत आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। फिल्मों, वेब सीरीज और टेलीविजन प्रस्तुति के जरिए दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुईं कुब्रा का सफर संघर्ष, मेहनत और लगातार सीखने की मिसाल माना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मनोरंजन जगत में कदम रखने से पहले वह दुबई में एक निजी कंपनी में अकाउंट मैनेजर के तौर पर काम करती थीं। बाद में उन्होंने स्थिर नौकरी छोड़कर अभिनय की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया।

    कुब्रा सैत ने कम उम्र से ही मंच संचालन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वित्त और मार्केटिंग की शिक्षा हासिल की और वर्ष 2005 में दुबई जाकर अकाउंट मैनेजर के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। उन्होंने करीब तीन वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम किया, लेकिन अभिनय और प्रस्तुति के प्रति उनका लगाव लगातार बना रहा। इसी जुनून ने उन्हें मनोरंजन उद्योग की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

    अभिनय की शुरुआत उन्होंने एक अमीराती फीचर फिल्म में छोटे से किरदार से की। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने मॉडलिंग, एंकरिंग और अभिनय के क्षेत्र में लगातार काम किया। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री वर्ष 2009 में हुई, जब उन्हें फिल्म रेडी में एक सहायक भूमिका निभाने का अवसर मिला। इसके बाद वह जोड़ी ब्रेकर्स, आई लव न्यू ईयर, सुल्तान, गली बॉय, देवा और सन ऑफ सरदार 2 जैसी फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाओं में दिखाई दीं।

    हालांकि फिल्मों में लगातार काम करने के बावजूद कुब्रा सैत को वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ OTT प्लेटफॉर्म पर आई वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स साबित हुई। इस सीरीज में उन्होंने ट्रांसजेंडर ‘कुकू’ का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद उनके अभिनय की व्यापक सराहना हुई और यह भूमिका उनके करियर की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हो गई।

    ‘कुकू’ के किरदार में कुब्रा सैत ने भावनात्मक गहराई, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता का ऐसा संतुलन दिखाया, जिसने इस चरित्र को लंबे समय तक यादगार बना दिया। इस भूमिका ने उन्हें केवल लोकप्रियता ही नहीं दिलाई, बल्कि एक सक्षम और बहुमुखी अभिनेत्री के रूप में भी स्थापित किया। इसके बाद उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म और फिल्मों में लगातार नए और चुनौतीपूर्ण किरदार मिलने लगे।

    कुब्रा सैत ने अपने अभिनय करियर के दौरान यह साबित किया कि सफलता केवल बड़े किरदारों से नहीं, बल्कि प्रभावशाली प्रस्तुति से मिलती है। उन्होंने हर भूमिका में अलग पहचान बनाने की कोशिश की और अपनी अभिनय शैली से दर्शकों का भरोसा जीता। मनोरंजन जगत में उनकी पहचान एक ऐसी कलाकार के रूप में बनी, जो पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने का साहस रखती हैं।

    आज कुब्रा सैत का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा माना जाता है, जो अपने सुरक्षित करियर को छोड़कर अपने सपनों को पूरा करने का साहस दिखाते हैं। दुबई की कॉर्पोरेट नौकरी से लेकर भारतीय मनोरंजन जगत में मजबूत पहचान बनाने तक का उनका सफर यह साबित करता है कि प्रतिभा, मेहनत और सही अवसर मिलकर किसी भी कलाकार के जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

  • ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

    ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार सनी देओल जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना कदम रखने जा रहे हैं। अपनी आने वाली नई फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के विशेष अवसर पर अभिनेता ने अपने फिल्मी सफर और अतीत की कुछ बेहद खास यादों को साझा किया। इस दौरान उन्होंने साल 1993 में आई अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दामिनी’ में निभाए गए वकील के यादगार किरदार पर खुलकर बात की। अभिनेता ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने इस फिल्म में काम करने का फैसला लिया था, तब उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका यह छोटा सा रोल दर्शकों के दिलों में इस कदर बस जाएगा और इतिहास रच देगा।

    अपनी आगामी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म में भी सनी देओल एक बार फिर से वकील की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जिसका सीधा जुड़ाव दर्शकों को उनकी पुरानी फिल्म से महसूस हो रहा है। ट्रेलर लॉन्च के कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस समानता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वह उस समय हर हाल में उस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने बताया कि मूल कहानी में शुरुआत में उनका कोई बड़ा रोल नहीं था, लेकिन निर्देशक और उनके निर्माता दोस्तों के साथ बातचीत के बाद उन्हें इस छोटे से कैरेक्टर के बारे में बताया गया। उन्होंने इसके लिए तुरंत हामी भर दी क्योंकि वे इस खूबसूरत कहानी से जुड़ना चाहते थे।

    अभिनेता ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी भी कलाकार के लिए उसकी फिल्मों की यात्रा बेहद खूबसूरत होती है। उन्होंने सिनेमा प्रेमियों से फिल्मों का भरपूर आनंद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि कोई भी यह पहले से तय नहीं कर सकता कि कौन सा किरदार दर्शकों को कितना प्रभावित करेगा। ‘दामिनी’ के उस छोटे से रोल ने देश के कोने-कोने में लोगों को अपना मुरीद बना लिया था। अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उस फिल्म के बाद उन्हें काफी लंबे समय तक उस तरह का दमदार और प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा किरदार निभाने का दोबारा मौका नहीं मिल सका था, जो अब जाकर उन्हें मिला है।

    इसी भव्य आयोजन के दौरान सनी देओल अपने परिवार और पिता को याद कर काफी भावुक भी नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में जब उनसे उनके पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बारे में सवाल किया गया कि उन्हें उनके नाम से कितना गर्व महसूस होता है, तो सनी देओल खुद पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने बेहद संजीदगी और भरे गले से कहा कि वे हमेशा केवल अपने पापा के बेटे रहेंगे और उनके लिए इससे बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।

    डिजिटल माध्यम पर रिलीज होने जा रही यह नई फिल्म एक बार फिर से सनी देओल को उसी पुरानी दहाड़ और कानूनी दांव-पेंच वाले अवतार में वापस लेकर आ रही है, जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और इसमें उनके साथ कई अन्य दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस नए प्रोजेक्ट से अभिनेता को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि यह उनके करियर की नई पारी की शुरुआत माना जा रहा है।

  • बिग बॉस हाउस के अंदर के चौंकाने वाले सच ,सामने आए दिव्या अग्रवाल ने खोले कई राज

    बिग बॉस हाउस के अंदर के चौंकाने वाले सच ,सामने आए दिव्या अग्रवाल ने खोले कई राज


    नई दिल्ली । बिग बॉस रियलिटी शो हमेशा से दर्शकों के बीच उत्सुकता और विवाद का केंद्र रहा है जहां कैमरों की निगरानी में रहने वाले कंटेस्टेंट्स की निजी जिंदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं अब बिग बॉस ओटीटी के पहले सीजन की विनर दिव्या अग्रवाल ने शो को लेकर कई ऐसे खुलासे किए हैं जिन्होंने एक बार फिर इस शो की सच्चाइयों पर बहस छेड़ दी है

    दिव्या अग्रवाल हाल ही में एक पॉडकास्ट में शामिल हुईं जहां उन्होंने बिग बॉस हाउस के अंदर के नियमों अनुभवों और आमतौर पर फैलने वाली अफवाहों पर खुलकर बात की उन्होंने बताया कि घर के अंदर कई चीजें बाहर से दिखने से बिल्कुल अलग होती हैं और कई बार दर्शकों की कल्पनाएं वास्तविकता से काफी दूर होती हैं

    उन्होंने खाने पीने और राशन से जुड़े नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि घर के अंदर सामान्य चीजें भी लग्जरी बन जाती हैं जैसे कॉफी और केचअप जैसी साधारण चीजें भी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं कंटेस्टेंट्स को सीमित राशन में ही अपना गुजारा करना पड़ता है और कई बार उन्हें जुगाड़ के सहारे काम चलाना पड़ता है

    इसी बातचीत में दिव्या ने सिगरेट को लेकर भी एक अहम बात साझा की उनके अनुसार सिगरेट को बिग बॉस हाउस में अलग तरह से देखा जाता है और यह कंटेस्टेंट्स को नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती है उन्होंने यह भी कहा कि कंटेस्टेंट्स से उनकी पसंद के ब्रांड तक पूछे जाते हैं ताकि उन्हें वही दिया जा सके

    शराब को लेकर सबसे ज्यादा फैली अफवाहों पर दिव्या ने साफ कहा कि बिग बॉस हाउस के अंदर किसी भी तरह की शराब या अल्कोहल की अनुमति नहीं होती उन्होंने इन सभी दावों को गलत बताया और कहा कि यह सिर्फ बाहर की कल्पनाएं हैं जबकि वास्तविकता इससे अलग है

    शो के अंदर रिश्तों और निजी व्यवहार को लेकर पूछे जाने वाले सवालों पर भी दिव्या ने बेबाकी से जवाब दिया उन्होंने इशारों में कहा कि कैमरों के बावजूद घर के अंदर कई तरह की निजी स्थितियां बनती हैं लेकिन हर चीज को दिखाया या प्रसारित नहीं किया जाता इस पर शो के फॉर्मेट और नियमों की सीमाएं लागू होती हैं

    इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि दर्शक और लोग उनसे कई अजीब सवाल पूछते हैं जैसे घर के अंदर क्या क्या चीजें संभव हैं और क्या वहां ऐसी सुविधाएं होती हैं जिनकी लोग कल्पना करते हैं उन्होंने इन सवालों को मनोरंजक लेकिन अक्सर गलतफहमी पर आधारित बताया

    कुल मिलाकर दिव्या अग्रवाल के इन खुलासों ने एक बार फिर बिग बॉस हाउस के अंदर की जिंदगी को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है और यह चर्चा तेज कर दी है कि असलियत और टीवी पर दिखने वाली कहानी के बीच कितना बड़ा अंतर होता है

  • नेटफ्लिक्स पर इस हफ्ते मनोरंजन का डबल डोज, क्राइम थ्रिलर से लेकर शॉकिंग डॉक्यूमेंट्री तक होगी रिलीज

    नेटफ्लिक्स पर इस हफ्ते मनोरंजन का डबल डोज, क्राइम थ्रिलर से लेकर शॉकिंग डॉक्यूमेंट्री तक होगी रिलीज

    मुंबई। ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix पर इस सप्ताह दर्शकों के लिए कई नई फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और वेब सीरीज रिलीज होने जा रही हैं। क्राइम, थ्रिलर, रियलिटी शो और फैमिली ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों को इस बार कंटेंट की भरपूर वैरायटी देखने को मिलेगी।

    1. Colors Of Evil: Black

    10 जून को रिलीज होने वाली यह क्राइम थ्रिलर एक शांत शहर में बच्चे के रहस्यमय ढंग से गायब होने की घटना पर आधारित है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई पुराने और चौंकाने वाले रहस्य सामने आते हैं, जो कहानी को रोमांचक बना देते हैं।

    2. Outlast: The Jungle

    रियलिटी शो के शौकीनों के लिए यह सीरीज 10 जून को स्ट्रीम होगी। इस बार प्रतियोगियों को पनामा के घने और खतरनाक जंगलों में चुनौती का सामना करना होगा। विजेता को 10 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि मिलेगी।

    3. Rosario Tijeras

    लोकप्रिय क्राइम ड्रामा का पांचवां सीजन भी 10 जून को आएगा। कहानी में रोजारियो नई शुरुआत की कोशिश करती है, लेकिन पुराने दुश्मन और नए खतरे उसकी राह में बड़ी चुनौतियां खड़ी कर देते हैं।

    4. The Evil Lawyer

    11 जून को रिलीज होने वाली यह कोर्टरूम ड्रामा सीरीज एक युवा वकील की कहानी है, जो एक गंभीर अपराध में फंस जाता है। अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए उसे एक अनुभवी लेकिन सख्त वकील का सहारा लेना पड़ता है।

    5. Maternal Instinct

    12 जून को आने वाली यह डॉक्यूमेंट्री एक चर्चित वास्तविक घटना से प्रेरित बताई जा रही है। कहानी में सोशल मीडिया, झूठी पहचान और एक चौंकाने वाले रहस्य का खुलासा दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।

    6. My Family

    पारिवारिक रिश्तों, संघर्षों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव पर आधारित इस शो का दूसरा सीजन भी इसी सप्ताह दर्शकों के बीच आएगा। पहले सीजन को मिली लोकप्रियता के बाद इसके नए एपिसोड को लेकर काफी उत्सुकता है।