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  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैला, WHO ने वैश्विक सतर्कता और तत्काल कार्रवाई की अपील

    डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैला, WHO ने वैश्विक सतर्कता और तत्काल कार्रवाई की अपील

    नई दिल्ली । डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का मौजूदा प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि संक्रमण की रफ्तार पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह और अधिक व्यापक तबाही का कारण बन सकता है। मई 2026 में घोषित इस प्रकोप ने अब तक हजारों लोगों को संक्रमित किया है और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गई हैं। बढ़ते मामलों के कारण यह दुनिया के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी बन चुकी है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह प्रकोप बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए संक्रमित व्यक्ति की शीघ्र पहचान, संपर्क में आए लोगों की निगरानी, संक्रमण नियंत्रण और समुदाय स्तर पर जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण उपाय माने जा रहे हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आकलन के अनुसार जुलाई के अंत तक इबोला संक्रमण के मामलों की संख्या 3,600 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि लगभग 1,600 लोगों की मौत हो चुकी है। मृत्यु दर भी काफी अधिक बनी हुई है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है। संगठन का कहना है कि कई क्षेत्रों में संक्रमण की नई कड़ियां लगातार सामने आ रही हैं, जिससे प्रकोप पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    कांगो का उत्तर-पूर्वी इतुरी प्रांत इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यह इलाका लंबे समय से संघर्ष, विस्थापन और मानवीय संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छ पानी और पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों की कमी संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयासों को और कठिन बना रही है। पड़ोसी देशों की सीमाओं से लोगों की आवाजाही भी स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान प्रकोप ने वर्ष 2018 से 2020 के बीच कांगो में फैली पिछली बड़ी इबोला महामारी के मामलों का आंकड़ा भी पीछे छोड़ दिया है। अब यह पश्चिम अफ्रीका में वर्ष 2014 से 2016 के बीच फैली ऐतिहासिक महामारी के बाद दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी के रूप में दर्ज हो चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो संक्रमण का दायरा और बढ़ सकता है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाएं प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच, उपचार सुविधाओं के विस्तार और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता भी बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, संक्रमित मरीजों का पृथक्करण और स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन ही इस महामारी के प्रभाव को सीमित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय की नजर अब कांगो की स्थिति पर बनी हुई है, क्योंकि यह प्रकोप केवल एक देश ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन चुका है।

  • Maldives में खसरे का प्रकोप….. मुसीबत में फिर संकटमोचक बना भारत…. वैक्सीन-दवाएं भेजी

    Maldives में खसरे का प्रकोप….. मुसीबत में फिर संकटमोचक बना भारत…. वैक्सीन-दवाएं भेजी


    माले।
    भारत (India) ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति (‘Neighbourhood First’ policy) को दोहराते हुए, मालदीव (Maldives) में फैले खसरे (Measles) के प्रकोप से निपटने के लिए उसे बड़ी मात्रा में चिकित्सा सहायता (Medical Assistance) भेजी है। भारत ने मालदीव में खसरे के बढ़ते मामलों से निपटने और वहां टीकाकरण को मजबूत करने में मदद के लिए खसरे के टीके की 20,000 खुराक और लगभग तीन टन मेडिकल आपूर्ति भेजी है।

    विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बात की पुष्टि की है कि भारत सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और टीकाकरण को मजबूत करने के लिए मालदीव की मदद कर रही है। भेजी गई सहायता में शामिल हैं:

    – 20,000 एमआर (Measles-Rubella) वैक्सीन की खुराकें: ताकि बीमारी के प्रसार को तुरंत रोका जा सके।
    – 3 टन का मेडिकल कंसाइनमेंट: इसमें आवश्यक दवाइयां, सिरिंज, डायग्नोस्टिक किट और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सामग्री शामिल हैं।
    – विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह समय पर दी गई सहायता मालदीव सरकार को खसरे के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने और उनकी प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने में काफी मदद करेगी।


    कूटनीतिक संबंध और ‘विजन महासागर’

    मालदीव का भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘विजन महासागर’ में एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है। दोनों देशों के लोगों के आपसी लाभ और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत, मालदीव सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए हमेशा तत्पर रहा है। संकट के समय में सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाना भारत की इसी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है।


    मालदीव में खसरे की वापसी: एक चिंता का विषय

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2021 में इस बात की पुष्टि की थी कि मालदीव ने खसरे का पूरी तरह से उन्मूलन कर दिया है। एक बार बीमारी को खत्म करने के बाद, देश में इस नए प्रकोप का सामने आना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है, जिससे निपटने के लिए अब तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।


    खसरा क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?

    खसरा एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों को अपना शिकार बनाती है। यह संक्रमित व्यक्ति की नाक, मुंह या गले से निकलने वाली बूंदों के जरिए हवा में फैलता है। संक्रमण के 10-12 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें तेज बुखार, नाक बहना, आंखें लाल होना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे पड़ना शामिल हैं। कुछ दिनों के बाद शरीर पर लाल दाने उभरने लगते हैं, जो चेहरे और ऊपरी गर्दन से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे शरीर में नीचे की ओर फैल जाते हैं।


    खसरा उन्मूलन का वैश्विक महत्व

    WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खसरे के उन्मूलन से व्यापक स्तर पर जीवन रक्षक प्रभाव पड़ते हैं। इस क्षेत्र में उन्मूलन रणनीतियों से हर साल खसरे के कम से कम 11 लाख मामलों को रोका जा सकता है। रोके गए हर एक मामले से व्यक्ति के लगभग 2 सप्ताह के ‘विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष’ (DALYs) को बचाया जा सकता है।


    मृत्यु दर में कमी

    2020-2023 के दौरान विभिन्न रणनीतियों के संयोजन से खसरे के कारण होने वाली लगभग 11 लाख मौतों को टाला गया है। प्रति मृत्यु को टालने के लिए औसत खर्च मात्र 1,373 अमेरिकी डॉलर आंका गया है, जो इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण को सबसे प्रभावी और जरूरी स्वास्थ्य निवेश बनाता है।